डोर धड़कन से बंधी | भाग 48 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 48 | Hindi Romantic Story

कुछ रिश्ते वक्त के इंतेज़ार में होते हैं... और जब वह लौटते हैं, तो मुकम्मल हो जाते हैं।

उसने मन ही मन कहा।

....

आदर्श तैयारी हो गई? शिवाय फोन पर मैसेज टाइप करते-करते पूछते हैं।

हां, हो गई। आदर्श ने अंगूठा दिखाया।

गुड, अभी रवि, हेमंत और अशोक भी आ रहे हैं। फिर हम निकलते हैं। शिवाय के मन में बहुत कुछ चल रहा था।

उसी वक्त उस के दोस्त आ जाते हैं। और आते ही तीनों एक साथ शिवाय के गले लग जाते हैं।

आदर्श दूर खड़े यह मंज़र देख कर मुस्कुरा देते हैं। सच में सच्चे दोस्त बहुत बड़ी दौलत हैं।

अचानक शिवाय की नज़र आदर्श पर पड़ती है। जो दूर खड़ा उन को देख रहा था।

आदर्श....

आदर्श भी मुस्कुरा कर उन सब के साथ गले लग गए।

तभी....

कुछ प्यार मेरे लिए भी बचा है?

पीछे से आवाज़ आती है।

सब पलट कर देखते हैं। सुधीर जी बाहें फैलाए खड़े थे।

डैड.... शिवाय तेज़ी से उनके पास जाकर उन की बाहों में लिपट जाते हैं।

दोनों की आंखें नम थीं, लेकिन दोनों ही मुस्कुरा भी रहे थे।

डैड आप यहीं रूकें। हम आते हैं। शिवाय घड़ी देख कर कहते हैं।

हां ठीक है, तुम लोग जाओ। मैं यहीं हूं। श्लोका के पास।तुम्हारी मौम, अराध्या और अमोल घर पर हैं।

सुधीर जी शिवाय को बताते हैं। 

हां, मैं उन से बाद में मिलूंगा। 

तुम लोग भी निकलो, मैं भी निकल रहा हूं।

सबसे कहते ही शिवाय बाहर की तरफ बढ़ गए।

....

शिवाय इतना कहां बिज़ी थे कि मुझसे बात करने की भी फुर्सत नहीं थी आपको।

श्लोका नाराज़गी से शिवाय को देखते हुए कहती है। जो खामोशी से गाड़ी चला रहे थे।

अब आ गया ना? तुम्हारी सारी शिकायत दूर कर दूंगा।

शिवाय सामने देखते हुए कहते हैं। वह उसकी तरफ देखना भी नहीं चाहते थे।

हम कहां चल रहे हैं? हम को तो शापिंग के लिए जाना था। श्लोका ने जब देखा कि शिवाय कुछ अंजान रास्ते पर जा रहे हैं, तो वह पूछ लेती है।

एक ज़रूरी काम है उसको निपाटा लूं। फिर शापिंग भी कर लेना।

शिवाय की नज़र अभी भी सामने ही थी।

शिवाय आप मुझ से नाराज़ हैं? श्लोका शिवाय का रवैया देख कर पूछ लेती है। क्योंकि उस ने जो पूछा शिवाय ने उसी बात का जवाब दिया। और शिवाय ने उस की तरफ देखा भी नहीं।

लेकिन शिवाय कोई जवाब देने के बजाए गाड़ी एक पार्किंग एरिया में रोक देते हैं। और गाड़ी से उतर जाते हैं।

श्लोका भी खामोशी से उतर जाती है। और शिवाय के साथ आगे बढ़ जाती है।

लिफ्ट से दोनों ऊपर जाकर एक आफिस में चले जाते हैं।

आफिस में जाते ही शिवाय चेयर की तरफ इशारा करता है। 

श्लोका खामोश से बैठ जाती है।

अब बताओ क्या कह रही थी? शिवाय भी उसके सामने चेयर रख कर बैठ जाते हैं। और उसे देखने लगते हैं।

शिवाय मैं आपको मिस कर रही थी। शिवाय के इस तरह अपने सामने बैठने पर श्लोका गड़बड़ा जाती है।

इन दिनों मैंनें भी तुम को मिस किया। मेरी आंखों के सामने तुम्हारा प्यार था। मैं उन लम्हों को याद करता रहा। जब हम साथ थे।

मैं याद करता रहा, वह ऐहसास जो मेरे अंदर सांस की तरह बसा था।

हर बात थी मेरे साथ....

शिवाय कहता जा रहा था। और वह हैरानी से सुन रही थी। उससे मिलने के बाद आज पहली बार शिवाय इतना बोले थे। वरना वह तो खामोश ही रहे थे।

शिवाय के इतना बोलने पर श्लोका को डर लगने लगा था। कहीं ऐसा ना हो कि शिवाय कुछ ऐसा कह दें। जो उसे मुश्किल में डाल दे।

तुम्हें याद है जब हम यहां पर फैशन शो में आये थे। उस रात मैं तुम्हारे कमरे में था.... और हमारे बीच...

मुझे सब याद है शिवाय...आप उस रात की बात ना करें। हमारे बीच....

हमारे बीच कुछ वादे हुए थे।

पहले श्लोका उस की बात काट अपनी बात कहती है। फिर शिवाय तुरंत उसकी बात काट कर अपनी बात कहते हैं।

मुझे सब याद है... लेकिन अगर आप वही बात दोहराना चाहते हैं तो बता दें। मैं दोबारा सुनने के लिए तैयार हूं।

श्लोका जल्दी से कहती है। पता नहीं कौन सी बात है। 

वह मन ही मन सोचती है।

उस दिन तुम ने कहा था कि अगर तुम को मेरे लिए अपनी जान भी देनी पड़ी तो तुम पीछे नहीं हटोगी। 

शिवाय अपनी चेयर उसके और पास करते हैं। दोनों आमने-सामने बहुत पास हो जाते हैं।

मैं आज भी अपनी उस बात पर कायम हूं शिवाय... श्लोका जल्दी से कहती है।

तो फिर मरने के लिए तैयार हो जाओ। शिवाय एक झटके से खड़े होकर कोट से पिस्तौल निकाल कर उस पर तान देते हैं।

जारी है...

डोर धड़कन से बंधी भाग 47

डोर धड़कन से बंधी भाग 49





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