डोर धड़कन से बंधी | भाग 53 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 53 | Hindi Romantic Story

यह सफर अब सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सब का था जो साथ चलने को तैयार थे।

और उस ने मानो कह दिया हो…

अब न कोई दूरी रहेगी,

न कोई दर्द… 

बस एक नया सवेरा,

जो हमेशा प्यार और साथ से जगमगाता रहेगा।

श्लोका तुम किचन में क्या कर रही हो? ममता जी अपने रूम से किसी काम से बाहर आती हैं और श्लोका को किचन में काम करते देख कर हैरान रह जाती हैं।

खाना बना रही थी। श्लोका मुस्कुरा कर कहती है। 

तुम क्यों खाना बना रही हो? रोज़ी है ना? वह हैरान पर हैरान होती हैं।

बनाने दें मौम… मुझे श्लोका के हाथ का खाना खाना है। शिवाय रुम से आकर कहते हैं। ममता जी की आवाज़ उसके कानों में गई तो वह रूम से बाहर आ गया।

अगर ऐसा है तो फिर तुम खीर भी बना लो। ताकि तुम्हारी रसोई का शगुन भी हो जाए। ममता जी तुरंत रास्ता निकालती हैं। क्योंकि वह शिवाय को खुश देखना चाहती थी। उन्हें अब हमेशा शिवाय की फिक्र रहती थी।

ठीक है। वह किचन से काम करते हुए कहती है।

यह हमारी रस्में भी बड़ी प्यारी होती हैं। अब तुम पगफेरे के लिए अपने मायके जा रही हो। 

शिवाय गाड़ी चलाते हुए कहते हैं। 

यह रस्में हमें एक-दूसरे से जोड़े रखती हैं। श्लोका प्यार से शिवाय को देख कर कहती है।

शिवाय हाथ बढ़ाकर उसके बालों से क्लैचर निकाल कर सामने डैशबोर्ड पर रख देते हैं। और उसके बालों को बिखेर देते हैं।

आप को लम्बे बाल पसंद थे? श्लोका उदासी से कहती है।

मुझे पसंद थे, लेकिन फिर भी तुम कटवाने जा रही थी। समझो तुम ने कटवा दिए। शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं।

लेकिन…श्लोका कुछ कहते-कहते चुप हो जाती है।

वैसे मुझे लगता है यह छोटे बाल ही सही हैं। वरना तुम हर वक्त अपने बालों में लगी रहती। मुझ को वक्त ही ना दे पाती।

शिवाय एक आंख पिंच कर के उसको देखते हुए कहते हैं।

और फिर दोनों ही मुस्कुरा देते हैं।

शिवाय आप हर बात कितनी आसानी से संभाल लेते हैं। श्लोका शिवाय को देखकर मन ही मन सोचती है।

नज़र लगाने का इरादा है क्या? खुद को बहुत ध्यान से देखता पाकर शिवाय एक बार फिर शरारत करते हैं।

और श्लोका खामोशी से शिवाय की तरह झुक कर उसके कंधे पर सिर टिका कर आंख बन्द कर लेती है।

गाड़ी रोड पर दौड़ती रही। और दो धड़कते दिल एक-दूसरे की मुहब्बत को महसूस करते रहे।

♥️

शिवाय श्लोका की तरफ कॉफी का मग बढ़ाते हैं। जो बालकनी पर रेलिंग के पास खड़ी बाहर के नज़ारों में खोई हुई थी।

हमें इंडिया आये एक महीना ही हुआ है। लेकिन ऐसा लगता है जैसे हम बरसों से यहीं है। श्लोका कॉफी का मग  दोबारा शिवाय की तरफ बढ़ाती है। क्योंकि वह एक ही मग में कॉफी लेकर आये थे। जिसे वह दोनों बारी-बारी पी रहे थे।

तुम ने आगे क्या सोचा है? कालेज ज्वाइन करोगी? या कुछ और? 

नहीं अभी कालेज ज्वाइन नहीं करूंगी। आनलाइन क्लास लेने का सोच रही हूं। ताकि मैं घर पर रह सकूं। आप जब आफिस से आयें तो मैं आपके सामने रहूं।

श्लोका…शिवाय आगे बढ़ कर उस को गले लगा लेते हैं।

तुम ने मेरे लिए इतना सोचा… मेरे लिए यही काफी है। तुम जो चाहे करो। मुझे कोई प्राब्लम नहीं है।

नहीं शिवाय अभी मैं घर पर रहना चाहती हूं अपनों के बीच। मेरी यह सोच नहीं है कि मैंने पढ़ाई की है तो पैसा भी कमाऊं। 

शिक्षा हमें जीने के ढंग सिखाती है। अपनो को प्यार और रिश्तों को जोड़ने का सबक देती है। समाज, देश और दुनिया को समझने की रौशनी है शिक्षा। 

लेकिन हम ने उसे सिर्फ पैसा कमाने का जरिया समझ लिया है।

हम को पैसे की कोई दिक्कत नहीं, इस लिए मैंने यह फैसला लिया है। हां अगर कभी ऐसा लगा कि नहीं मुझे भी पैसा कमाना चाहिए तो मैं पीछे नहीं हटूंगी। हमेशा आप के साथ कदम से कदम मिलाकर चलूंगी। क्योंकि मेरे पास शिक्षा जैसी पूंजी है। जो हमेशा मेरे साथ रहेगा।

तुम्हारी यही बातें तो मुझे पसंद हैं।

चलो अंदर चलते हैं। शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर आगे बढ़ते हैं। और श्लोका के रुम की तरफ बढ़ते हैं। जिस में वह पहले रहती थी। श्लोका हैरानी से शिवाय को देखती है।

यह तुम्हारा मायका है। जब तुम मुझ से नाराज़ होना तो यहीं आ जाना। फिर मैं तुम को मनाने तुम्हारे मायके आऊंगा।

शिवाय श्लोका को वहीं सोफे पर बैठाकर उसके कदमों में ज़मीन पर बैठ जाते हैं। और उसे देखते हुए कहते हैं।

इसका मतलब आप मुझे नाराज़ होने का मौका देंगे? श्लोका मुस्कुराई।

हां, क्योंकि यह भी ज़िन्दगी का हिस्सा है।

और अगर आपकी गलती ना हुई तब? श्लोका शरारत से पूछती है।

तब भी मैं तुम को मनाऊंगा। एक लड़की अपना घर-परिवार माता-पिता सब कुछ छोड़ कर हमारे पास आ सकती है। तो हम उसे मना कर उसे छोटी सी खुशी भी नहीं दे सकते।

काश! ऐसी सोच हर किसी की हो जाए तो परिवार ना टूटे।

प्यार में अगर इगो हो तो प्यार की कोई मायने नहीं रह जाती।

लेकिन रूठ कर मायके जाने वाली लड़कियों को लोग पसंद नहीं करते हैं।

श्लोका हंसते हुए कहती है।

अच्छा ऐसी बात है… तब तुम रूठ कर मायके मत आना। तुम खुशी-खुशी मायके आना। और मैं तुम को लेने आऊंगा।

तुम रूठ कर हमारे रुम में ही रहना। और तुम मुझे मनाना भी मत।

क्योंकि तुम्हें तो हर बार मैं ही मनाऊंगा… यह मेरा वादा है।

शिवाय उसके हाथ पर अपना हाथ रखते है जिस पर श्लोका अपना दूसरा हाथ रख कर अपनी मुहब्बत की डोर से उसे बांध देती है।

जारी है…

डोर धड़कन से बंधी भाग 52

डोर धड़कन से बंधी भाग 54




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