डोर धड़कन से बंधी | भाग 54 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 54 | Hindi Romantic Story

 शिवाय उसके हाथ पर अपना हाथ रखते है जिस पर श्लोका अपना दूसरा हाथ रख कर अपनी मुहब्बत की डोर से उसे बांध देती है।

♥️

आफिस के लिए तैयार हुए कि नहीं? हमारी बात हुई थी कि हम एक महीना काम नहीं करेंगे। वह एक महीने पूरे हो हो चुके हैं।


शिवाय आदर्श को फोन करते हैं।


मुझे याद है बॉस, और मैं रेडी भी हूं। पांच मिनट में आफिस के लिए निकल जाऊंगा।


आदर्श खुशी से कहते हैं।


तुम निकलना मत, मैं आ रहा हूं। तुम को पिक कर लूंगा। शिवाय घड़ी देखते हुए कहते हैं।


ओके बॉस…


शिवाय फोन रख देते हैं। उन के होंठों पर मुस्कान थी। एक प्यारी मुस्कान।


आप इतना मुस्कुरा क्यों रहे हैं? श्लोका हैरानी से पूछती है।


आदर्श की बातें ऐसी होती हैं कि होंठों पे मुस्कान आ ही जाती है। आदर्श ने मुझे बहुत सारी खुशियां दी है। तुम्हारे बाद वही था जो मुझे ज़िंदगी की तरफ लाया था। अब वक्त आ गया है कि मैं भी उस के लिए कुछ करूं। शिवाय कुछ सोचते हुए कहते हैं।


आप क्या करेंगे? श्लोका हैरान होती है।


आता हूं तो बताता हूं। अभी देर हो रही है। आदर्श वेट कर रहा होगा। कहते ही शिवाय उसे हग करते हैं। और प्यार करते हुए बाहर निकल जाते हैं।


♥️


यह हम कहां आये है। कोई ओपनिंग है क्या? 


गाड़ी से उतरते ही आदर्श हैरानी से शिवाय से पूछते हैं।


हां, ओपनिंग है। कहते ही शिवाय वहां पर खड़ी एक लड़की से बात करने लगते हैं।


उसे वक्त एक लड़की एक खूबसूरत प्लेट आदर्श के सामने करती है।


यह क्या है? आदर्श की हैरानी बढ़ती जा रही थी।


फीता काटो…शिवाय कैंची उठा कर आदर्श को देते हैं।


मैं?


हां, तुम…


आदर्श जैसे ही फीता काटते हैं।


आदर्श इंडस्ट्री…का बोर्ड चमकने लगा। और हर तरफ से तालियां बजने लगी।


यह क्या है? आदर्श शिवाय से पूछते हैं।


लेकिन शिवाय जवाब देने के बजाए आदर्श का हाथ थाम कर अंदर की तरफ बढ़ जाते हैं।


एक आफिस में जाकर शिवाय आदर्श को सामने बॉस वाली चेयर पर बैठने का इशारा करते हैं।


यह सब क्या है?


तुम्हारा आफिस…आज से तुम इस के मालिक हो। आदर्श इंडस्ट्री…


यह मेहरबानी क्यों? आदर्श सीरियस हो गए।


यह मेहरबानी नहीं…बिज़नेस है जिसमें 40% का मैं और 60% के तुम हिस्सेदार हो। आज से यह तुम्हारी ज़िम्मेदारी है। तुम्हें इसे देखना है और आगे ले जाना है।


कहते ही शिवाय आदर्श को गले लगा लेते हैं।


शिवाय…आदर्श की आंख नम हो जाती है।


मैं तुम्हारे साथ के लिए इंडिया आया था। और तुम ने खुद से ही दूर कर दिया। आदर्श शिकवा करते हैं।


दूर नहीं किया है। हम हर रोज़ मिलेंगे। बिल्कुल वैसे ही जैसे सिंगापुर में मिलते थे। मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। मुझे तुम्हारी आदत हो गई है। तुम ही तो हो जिस की वजह से मेरे होंठों पर मुस्कान आई थी।


लेकिन यह तुम ने अच्छा नहीं किया। आदर्श नाराज़ हुए।


यह करना ज़रूरी था दोस्त…शिवाय आदर्श का हाथ पकड़ कर चेयर के पास ले जाते हैं। और उन्हें चेयर पर बैठा कर खुद आकर सामने वाली चेयर पर बैठ जाते हैं।


सब कुछ देख समझ लो। कल शाम को इसी खुशी में पार्टी है। लंच के लिए घर जाना और फैमली को लाकर अपना आफिस दिखा देना।


शिवाय…आदर्श सिर्फ इतना ही कह सके।


और तुम्हारा बेटा कैसा है? शिवाय ने बात बदल दी।


ठीक है, बहुत शरारती हो गया है। आदर्श के होंठों पर मुस्कान आ गई।


खुश हो ना?


हां, लेकिन मुझे बिटिया चाहिए थी प्यारी सी। सुना है बेटीयां बाप को बहुत प्यार करती हैं। आदर्श दिल की बात कहते हैं।


यह क्या बात हुई भला। लड़का-लड़की दोनों ही बाप से प्यार करते हैं। शिवाय हैरान हुए।


नहीं शिवाय बेटीयां पिता का मान होती है। 


कोई बात नहीं एक बेटा हो गया। बेटी भी हो जायेगी। शिवाय ने मुस्कुरा कर कहा।


हूं, आदर्श खोए हुए से बोले।


कॉफी तो पिलाओ यार… पहली बार तुम्हारी आफिस में आया हूं।


आदर्श फोन की तरफ हाथ बढ़ाते हैं उसी वक्त एक लड़का हाथ में ट्रे लिए अंदर आता है। और सारी चीजें टेबल पर रख कर चला जाता है।


मुंह मीठा करते हैं। शिवाय आदर्श के मुंह में लड्डू डालते हैं। और फिर आदर्श शिवाय के मुंह में।


अब कुछ काम की बात हो जाए। कॉफी पीते हुए शिवाय वहीं पर रखी फाइल में से एक फाइल उठा कर आदर्श को बताने लगते हैं।


इन दोनों की यही आदत थी जब काम कर रहे हों तो सिर्फ काम की बात ही होगी। और कोई बात नहीं।


दस साल बाद…


शिवाय लॉन में बैठे श्लोका के साथ चाय पी रहे थे। उनके दोनों बच्चे प्रेम और पूजा वहीं लॉन में खेल रहे थे।


ज़िन्दगी बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रही है। आज हमारे बच्चे स्कूल जाने लगे। तुम ने घर-परिवार बच्चों की ज़िम्मेदारी सब संभाल ली। 


हमारी ज़िन्दगी आज भी वैसी ही है मुहब्बत भरी…


शिवाय चाय का कप रखते हुए कहते हैं।


ज़िन्दगी का असली सुकून यही है श्लोका…तुम बच्चे और यह सुकून।


और आदर्श?


शिवाय गहरी सांस लेते हैं…


आदर्श ने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा। उसकी मेहनत ने आदर्श इंडस्ट्री को 

ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। जब भी उसे देखता हूं दिल गर्व से भर जाता है।


तभी बाहर गाड़ी का हार्न बजता है।


जारी है…

डोर धड़कन से बंधी भाग 53

डोर धड़कन से बंधी भाग 55




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