डोर धड़कन से बंधी | भाग 55 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 55 | Hindi Romantic Story
आदर्श ने मेरा साथ कभी नहीं छोड़ा। उसकी मेहनत ने आदर्श इंडस्ट्री को ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। जब भी उसे देखता हूं दिल गर्व से भर जाता है।
तभी बाहर गाड़ी का हॉरन बजता है।
उनकी नज़र गेट पर उठती है।
वाह… चाय का मज़ा तो अब आयेगा। शिवाय आदर्श को देख कर खुशी से कहते हैं। जो अंदर की तरफ आ रहे थे। साथ में मुग्धा और तीनों बेटे आरव, आरुष और आर्यन भी थे।
बच्चे एक-दूसरे से मिलने के लिए दौड़ पड़ते हैं। शोर और खिलखिलाहट से पूरा लॉन गूंज उठता है।
शिवाय और आदर्श एक दूसरे को देखते हैं। उस नज़र में दोस्ती से बढ़कर एक अपनापन था। वो रिश्ता जो खून का नहीं था लेकिन खून से भी गहरा था।
शिवाय ने चाय का कप आदर्श की ओर बढ़ाया।
आज भी वही नियम है…जब काम की बात होगी तो सिर्फ काम, लेकिन जब परिवार साथ हो तो सिर्फ प्यार।
दोस्ती और मुहब्बत… यही असली इंडस्ट्री है शिवाय। यही हमें आगे ले जायेगी।
आदर्श कप थाम कर मुस्कुरा कर शिवाय से कहते हैं। बच्चों की खिलखिलाहट, औरतों की मीठी बातें, और दो दोस्तों की गहरी नज़र…
यही थी उनकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी दौलत।
वक्त का पहिया घूमता रहा। खट्टी-मीठी यादें बनाती ज़िन्दगी आगे बढ़ती रही।
मुहब्बत से लिपटी ज़िन्दगी मुस्कुराते हुए जाने वाले वक्त को विदा दे रही थी। हर आने वाला पल उम्मीद का दीपक रौशन किए आने वाली खुशियों के इंतेज़ार में था। बेहतर परवरिश और अच्छी शिक्षा खूबसूरत ज़िन्दगी के साथ बच्चे बड़े हो रहे थे।
आज शिवाय सिंह ओबेरॉय और श्लोका सिंह ओबेरॉय का बेटा लंदन से अपना मास्टर्स कम्पलीट करके इंडिया आ रहा था।
ओबेरॉय हाउस को दुल्हन की तरह सजाया गया था। मेहमान आना शुरू हो गए थे। शिवाय और श्लोका हर किसी से मिल रहे थे।
सुधीर जी और ममता जी के चेहरे पर गुरूर झलक रहा था। गुरुर हो भी क्यों ना…आज उन का पोता कामयाब होकर जो आ रहा था।
अमोल और उनकी पत्नी कावेरी सारे इंतेज़ाम देख रहे थे। अमोल के दोनों बच्चे भी लंदन में पढ़ रहे थे। वह भी आज आ रहे थे। प्रेम के लिए रखी गई इस ग्रैंड पार्टी में।
अराध्या अपने पति अशोक और बेटी जिया के साथ सुबह ही आ गई थी। और अब वह मेहमानों को देख रही थी।
आदर्श,रवि, हेमंत और अशोक भी बीवी बच्चों समेत आ चुके थे।
तभी बाहर गाड़ियां रूकनी शुरू हो जाती हैं।
प्रेम का काफिला आ चुका था।
एक शान से चलता हुआ प्रेम अंदर आता है। दरवाज़े पर पूरा परिवार खड़ा था। उनके स्वागत के लिए।
अंदर आते ही प्रेम शिवाय और श्लोका को साथ लगा कर गले लग जाता है।
आंखें नम हो गई शिवाय और श्लोका की। उनकी मुहब्बत देखकर हर कोई मुस्कुरा उठा।
इस से मिलिए यह है काजल....मेरी दोस्त मेरी ज़िन्दगी मेरी सब कुछ…प्रेम अपने पीछे खड़ी लड़की को आगे करते हुए कहता है।
काजल हाथ जोड़ कर मुस्कुराते हुए सब को नमस्ते करती है।
हर मुस्कुराता चेहरा हैरानी में बदल जाता है।
तुम ने कभी बताया नहीं काजल के बारे में। श्लोका हैरानी से पूछती है।
मैं आप लोगों को सरप्राइज़ देना चाहता था। तो बताएं कैसा लगा मेरा सरप्राइज़? प्रेम खुशी से पूछता है।
बिल्कुल सरप्राइज़ जैसा। अब अंदर चलो। मेहमान इंतेज़ार कर रहे हैं। तुम लोग रूम में जाओ, और जल्दी रेडी होकर आओ।
अराध्या जल्दी से कहती है। और उन को लेकर अंदर चली जाती है।
शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर आगे बढ़ते हैं। श्लोका से नज़र मिलाने की हिम्मत नहीं थी शिवाय में।
आदर्श धीरे से शिवाय का हाथ पकड़ कर उसे पुश करते हैं। आदर्श के ऐसा करते ही शिवाय नज़र उठा कर आदर्श को देखते हैं।
आंखों ही आंखो में शायद वह कुछ कहते हैं। और फिर तीनों ही मुस्कुराते हुए अंदर की तरफ बढ़ जाते हैं। उन के अंदर की तरफ बढ़ते ही हर कोई उन के साथ अंदर चला जाता है।
पार्टी चल रही थी। प्रेम और काजल तैयार हो कर पार्टी ज्वाइन कर चुके थे।
देर रात तक पार्टी चलती रही।
और फिर धीरे-धीरे एक-एक कर सारे मेहमान चले गए।
श्लोका और शिवाय भी थकावट का कह कर सीधे रूम में चले गए।
हमारी तरबियत में कहां कमी रह गई थी शिवाय?
कमरे में जाते ही श्लोका शिवाय के गले लग कर कहते ही रो पड़ती है।
पार्टी में झूठी मुस्कान सजाए हुए वह थक चुकी थी।
तुम्हारी तरबियत में कोई कमी नहीं श्लोका…कमी शायद हमारी किस्मत में है। अब कुछ मत सोचो, वह प्रेम की ज़िन्दगी है तो हम उसे प्रेम की ज़िन्दगी में खुशी-खुशी शामिल कर देंगे।
शिवाय की आंख भी नम हो जाती है।
वह अच्छी लड़की नहीं है शिवाय…
क्या? शिवाय हैरान होते हैं।
हां शिवाय वह अच्छी लड़की नहीं है। वरना अपने बेटे की पसंद को मैं खुशी-खुशी उस की ज़िन्दगी में शामिल कर देती।
जारी है...
Comments
Post a Comment