डोर धड़कन से बंधी भाग 59 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 59 | Hindi Romantic Story
पूजा बड़े ध्यान से आरव की बातें सुन रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह सब कोई सपना है या हकीकत।
इसका मतलब तुम ने मुझ से यह शादी पा के कहने पर की?
नहीं…आरव कहते ही उसे देखने लगा।
पा से बात करने के बाद तुम हर वक्त मेरे मन में रहने लगी। पा के अल्फाज़ हर वक्त मेरे कानों में गूंजते रहते। कालेज में जब कोई लड़की मेरे सामने आती तो मेरी आंखों में तुम्हारा चेहरा आ जाता।
उस के बाद पा ने मुझ से तुम्हारे बारे में कोई बात नहीं की।
जब भी मैं तुम्हारे घर आता चुपके-चुपके तुम को देखता रहता। हम साथ बैठते बातें करते। लेकिन तुम कभी यह नहीं जान पाई कि मैं तुम में अपना प्रेम ढूंढ रहा हूं।
और इसी तरह तुम्हें सोचते-सोचते मुझे महसूस हुआ कि मैं सचमुच तुम से प्यार करने लगा हूं।
मैंने कभी तुम से प्यार की बातें नहीं की, कभी तुम्हारे आगे पीछे-पीछे नहीं घूमा। कभी तुम से कोई वादा नहीं किया। लेकिन दिल में तुम्हारी मुहब्बत छा गई थी। मैं खामोशी से तुम्हे चाहने लगा।
पूजा बहुत प्यार से आरव को देखते हुए उसकी बातें सुन रही थी। आरव का वह प्रेम जो कभी वह महसूस ही नहीं कर पाई। वह आज बारिश की नन्ही बूंदों की तरह उस पर बरस रहा था। और वह खामोशी से उस प्रेम में भींगती जा रही थी।
मेरे दिल में कभी यह ख्याल नहीं आया कि मैं तुम से अपने प्यार का इज़हार करूं…मैं खामोशी से तुम्हें चाहता रहा। आरव ने कहना शुरू किया।
जब मेरे प्यार की शिद्दत बहुत बढ़ गई, और मैं पढ़ाई की वजह से तुम्हारे घर नहीं आ सकता था तब मैंने एक रास्ता निकाला।
मैंने चुपके से तुम्हारी एक फोटो ले ली। और फिर तुम्हारी वह तस्वीर मेरे दर्द की दवा बन गई। जब तुम्हारी बहुत याद आती तो मैं तुम्हारी फोटो से बातें कर लेता वह बातें जो मैंने कभी तुम से नहीं की।
तो तुम कहना चाहते हो कि तुम्हारा प्यार…तुम्हारा फैसला…तुम्हारे पा ने पहले ही कर लिया था? पूजा की आवाज़ में हल्की सी नमी थी।
आरव उसके चेहरे को देखता है, जैसे कुछ ढूंढ रहा हो।
हां…लेकिन सच कहूं तो मैंने कभी इसे बोझ की तरह महसूस नहीं किया। पा ने मुझे सिर्फ रास्ता दिखाया था…
अगर तुम को मुझ से सच में प्यार ना होता? तो क्या तुम यह शादी करते?
पूजा थोड़ी देर चुप रही। फिर धीरे से बोली।
आरव ने बिना सोचे उसका हाथ पकड़ लिया।
नहीं पूजा… तब मैं कभी तुम्हें अपने जीवन में जगह नहीं देता। पा का सपना पूरा करना मेरी ज़िम्मेदारी थी। लेकिन उस सपने को साकार करने के लिए दिल का होना ज़रूरी था।
और मेरा दिल तो उसी दिन तुम्हारा दीवाना हो गया था…जब एक बार खेलते हुए तुम ने कहा था कि तुम अपना पार्टनर आरव को बनाओगी।
एक खेल के लिए कही गई तुम्हारी वह बात मेरे दिल को लग गई।
पूजा की आंखें आरव की बात पर चौड़ी हो गईं।
तुमने कभी बताया क्यों नहीं?
आरव हंस पड़ा।
तुम बहुत सीधी साधी थी, पूजा। मुझे डर था कि कहीं मेरी बातें सुनकर तुम मुझसे दूर ना चली जाओ।
और फिर पा की बातें मेरे दिमाग में गूंज रही थी…प्यार को जल्दी नहीं, धीरे-धीरे समझो।
पूजा की आंखों में आंसू भर आए।
तो यह सब बचपन से ही तय था? हमारी तकदीर?
लेकिन मैंने तो तुम से प्यार नहीं किया। पूजा ने सच्चाई बताई।
लेकिन तुम ने मुझ से शादी की।
आरव ने उसके आंसू पोछ लिए।
जब डैड ने मुझसे कहा कि अगर तुम्हारी शादी आरव से हो जाये तो…
तब मैंने डैड से पूछा था कि आप का क्या फैसला है? और उन्होंने कहा था....
ऐसे रिश्तों पर आंख बन्द कर के फैसला लिया जाता है।
तब मैंने डैड से कहा था…आपका फैसला मेरा फैसला है।
उस वक्त मैं तुम्हारी मुहब्बत से अंजान थी।
लेकिन डैड ने इतना कहा था...इस फैसले में आरव का भी फैसला शामिल है।
और फिर इस फैसले में मैं भी शामिल हो गई।
शायद तकदीर का नाम यही है…दो लोगों के लिए एक ही रास्ता चुन लेना।
अब हमें हमेशा साथ चलना है फिर चाहे रास्ता आसान हो या मुश्किल…
हम अब प्रेम करेंगे...एक ऐसा प्रेम जिस पर दुनिया गर्व करेगी।
आरव प्यार से पूजा का हाथ थाम कर अपनी मुहब्बत की मुहर लगाता है।
सोफे पर बैठे दोनों के बीच की दूरी अब पूरी तरह मिट चुकी थी। कमरे की हल्की रौशनी में उनका नया सफर जैसे शुरू हो चुका था।
जारी है...
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