धड़कन | भाग 10 | Dhadkan Part 10 | Heart Touching Hindi Love Story
शिवाय अपना हाथ श्लोका के पीछे ले जाता है और उसके बाल में लगे क्लैचर को छुड़ा कर वहीं अपने तकिए के पास रख देता है। क्लैचर छूटते ही उसके सारे बाल दोनों तरफ से आगे आ जाते हैं।
शिवाय उसके बालों को पीछे करता है। श्लोका खामोश बैठी रहती है। शिवाय एक नज़र श्लोका को देखता है और आंख बन्द कर लेता है। श्लोका खामोशी से शिवाय को देखती रहती है। इतनी तकलीफ में भी यह हरकत, शायद उस के खुले बाल शिवाय को ज़्यादा पसंद हैं। और यह सोचते ही श्लोका मन ही मन मुस्कुरा देती है।
शिवाय आंख खोल कर श्लोका को देखता है।
क्या हुआ? श्लोका परेशान हो गई।
बहुत बेचैनी हो रही है। शिवाय की तकलीफ उसके चेहरे से ज़ाहिर हो रही थी।
मुझे एक टावेल चाहिए। श्लोका ने कुछ सोचते हुए कहा।
वहां पर है। शिवाय ने इशारे से बताया।
श्लोका तुरंत अलमारी से टावेल निकालती है और उस को बाथरूम में जाकर भिगो कर लाती है।
शिवाय मैं इस से आप का चेहरा पोंछ देती हूं इस से आप को आराम मिलेगा।
श्लोका ने शिवाय के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।
शिवाय ने आंख खोल कर श्लोका को देखा। और आंख बन्द कर ली।
श्लोका बहुत आहिस्ता से शिवाय का चेहरा तौलिया से साफ करती है। तौलिये की ठंडक से शिवाय को आराम मिल रहा था। वह चेहरे के बाद हथेली को पोंछ देती है। जिस से शिवाय को ठंडक मिले।
वह दोबारा तौलिया धोकर ऐसे ही करती है। और फिर शिवाय के तलवे पर ऐसे ही करती है। कुछ देर तक वह ऐसे ही करती है। और फिर वापस आकर चेयर पर बैठ जाती है।
शिवाय आंख खोल कर श्लोका को देखता है। और उसका बायां हाथ बेड पर फैला कर करवट होकर उस पर सिर रख कर आंख बन्द कर लेता है। शिवाय के ऐसा करते ही श्लोका भी थोड़ा झुक जाती है। और बेड पर अपना सिर रखकर आंख बन्द कर लेती है। श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय उस के ऊपर हाथ रख लेते हैं। मगर श्लोका खामोशी से सोई रहती है। और वैसे ही उसे तुरंत नींद भी आ जाती है। शिवाय को भी आराम मिलता है। उसे भी नींद आ जाती है।
नींद अगर हमें सुकून देती है। तो कुछ लोग भी ऐसे होते हैं जिनके पास हमें सुकून मिलता है। शिवाय को भी इस वक्त श्लोका की वजह से सुकून मिल रहा था।
सुबह श्लोका की नींद खुलती है। वह दोनों जैसे सोए थे। वैसे ही अब तक सो रहे थे। श्लोका के हिलने पर शिवाय की भी आंख खुल जाती है। शिवाय तुरंत सीधे हो जाते हैं। श्लोका अपना हाथ हटा लेती है। उस का हाथ बहुत तेज़ दर्द कर रहा था। लेकिन वह खामोश रहती है।
सॉरी... शिवाय भी शर्मिन्दा हो जाते हैं।
किस लिए? श्लोका अंजान बन गई। और शिवाय भी खामोश रह गए।
जाओ अब तुम अपने रूम में जाकर आराम करो।
शिवाय उस के चेहरे को देखते हुए कहता है।
क्यों मैं यहां आराम नहीं कर सकती?
श्लोका ने मुस्कुराते हुए पूछा।
बिल्कुल कर सकती हो। मुझे खुशी होगी। शिवाय भी मुस्कुरा दिये।
वह तो मैं देख ही रही हूं। बार-बार मुझे अपने रूम से निकलने का कह रहे हैं।
श्लोका ने झूठी नाराज़गी दिखाते हुए कहा।
शिवाय ने उस की बात पर आंख बन्द कर ली।
ठीक है अब मैं चली जाऊंगी। लेकिन पहले आप को नाश्ता करा लूं। इस लिए आप उठें। फ्रेश हो जाएं। तब तक मैं नाश्ते का बोल देती हूं।
श्लोका इंटर कॉम से किचन में शिवाय के नाश्ते का बोल कर वापस शिवाय की तरफ मुड़ती है। और शिवाय को सहारा देकर उठाती है। और शिवाय को सहारा देकर बाथरूम तक ले जाती है। और वहीं पर बाहर खड़ी रहती है।
शिवाय बाहर आकर वहीं सोफे पर बैठ जाते हैं। श्लोका तौलिया लाकर शिवाय का मुंह हाथ पोंछती है। शिवाय सिर्फ उसे देख रहा था।
कैसा लग रहा है?
बहुत अच्छा.... शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं.... श्लोका कुछ कहने जा रही थी मगर फिर खामोश हो गई।
उसी वक्त कमला नाश्ता लेकर आ गई। और रख कर चली गई।
श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा और खामोशी से खिलाने लगी। नाश्ते के बाद श्लोका ने शिवाय को दवा दी। और फिर चाय निकाल कर दी। जिसे शिवाय अपने हाथ में लेकर पीने लगे। श्लोका वहीं पास ही बैठी रही। चाय पीकर शिवाय को अच्छा लगा। रात से इस वक्त उसे बहुत आराम मिल रहा था।
अब आप लेटेंगे? श्लोका ने सोचा शिवाय को लिटा कर तब वह अपने रूम में जाए।
हां सिर्फ कुछ मिनट.... कह कर शिवाय वहीं सोफे पर उस के पैर पर सिर रख कर लेट जाता है।
शिवाय.... श्लोका को ठीक नहीं लगता, इस तरह शिवाय का उसके पैरों पर लेटना। शिवाय सिर्फ उस के चेहरे को देख रहा था।
प्लीज़ श्लोका कुछ मिनट.... शिवाय ने रिक्वेस्ट की और आंख बन्द कर ली।
श्लोका खामोश रह गई।
श्लोका शिवाय के सिर पर हाथ रख देती है। और पीछे अपना सिर टिका कर आंख बन्द कर लेती है। इस वक्त दोनों के दिल की हालत एक जैसी थी। दोनों ही अपनी तेज़ होती धड़कनों को बहुत अच्छे से महसूस कर रहे थे।
थोड़ी देर बाद शिवाय आंख खोल देता है। श्लोका को देख कर वह मुस्कुरा देता है। क्योंकि वह एक और गुस्ताखी करने जा रहा था।
शिवाय अपने माथे पर श्लोका के रखे हाथ को उठाता है और उसको अपने होंठ पर रख लेता है। और फिर तुरंत वह उठ कर बैठ जाता है।
श्लोका भी शिवाय की हरकत पर हड़बड़ा कर आंख खोल कर शिवाय को देखती है। मगर शिवाय सोफे से उठ रहे था। श्लोका की तरफ देखे बिना।
श्लोका भी तुरंत उठ कर शिवाय को सहारा देती है। और बेड तक लाती है। बेड के पास जाकर शिवाय रुक जाता है और श्लोका की तरफ पलट कर उसे गले लगा लेता है। श्लोका भी उसे थाम लेती है। लेकिन उस ने ऐसा नहीं सोचा था। कुछ लम्हे यूं ही बीत जाते हैं।
शिवाय.... श्लोका खुद को शिवाय से अलग होने की कोशिश में शिवाय को आवाज़ देती है। और शिवाय ना चाहते हुए भी हट जाता है। और बेड पर लेट कर आंख बन्द कर लेता है।
मैं रुम में जा रही हूं कोई काम हुआ तो फोन कर देना। श्लोका ने शिवाय को देखते हुए कहा। और शिवाय का जवाब सुने बिना कमरे से निकल जाती है।
उसके जाते ही शिवाय आंख बन्द किये हुए ही उन लम्हों में खो जाता है जो अभी उस ने श्लोका के संग बिताए थे। शिवाय के अंदर एक सुकून एक खुशी थी। जिसे वह साफ महसूस कर रहा था।
श्लोका रूम में जाकर सीधे बेड पर लेट जाती है। और शिवाय की हरकतों को महसूस करने लगती है। वह क्यों शिवाय को मना नहीं कर पाई। यह बात सबसे ज़्यादा उसे हैरान कर रही थी। वह यूं ही लेटी रही। और फिर उसे नींद आ गई।
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सुधीर जी नाश्ता करने से पहले शिवाय के रुम में जाते हैं। शिवाय की तबीयत इस वक्त ठीक थी इस लिए उसे नींद आ गई।
सुधीर जी ने आकर उसके सिर पर हाथ रखा जिससे शिवाय की नींद खुल गई।
कैसा फील हो रहा है? सुधीर जी ने प्यार से पूछा।
ठीक हूं डैड, आप टेंशन ना लें।
नाश्ता क्या करोगे?
कर लिया डैड। शिवाय ने धीमी आवाज़ में कहा।
सुधीर जी की नज़र शिवाय के तकिए के पास रखी श्लोका के क्लैचर पर पड़ती है।
ठीक है तुम आराम करो। कोई काम हुआ तो फोन करना। कहते हुए सुधीर जी जाने के लिए मुड़ते हैं तभी उन की नज़र ड्रेसिंग टेबल पर रखे श्लोका के क्लैचर पर पड़ती है। और वह खामोशी से बाहर निकल जाते हैं। एक नज़र श्लोका के कमरे के दरवाज़े पर डालते हैं जो बन्द था। कुछ सोचते हुए वह नीचे चले जाते हैं।
नाश्ता करते हुए भी सुधीर जी की नज़र में श्लोका का वह क्लैचर ही था जो शिवाय के तकिए के पास रखा हुआ था।
नाश्ता करके सुधीर जी आफिस चले जाते हैं।
श्लोका सो कर उठी। घड़ी देखा बारह बज रहे थे। उस ने नाश्ता भी नहीं किया था। उसे भूख लग रही थी। कुछ सोच कर वह उठी। फ्रेश होकर वह सीधे किचन में गई। और सैंडविच बनाने लगी। कमला ने उसकी हेल्प करा दी। सैंडविच बना कर साथ में रसगुल्ले भी लेकर वह ऊपर चली गई। और शिवाय के रुम में चली जाती है। शिवाय लेटे हुए थे। आहट पाकर वह आंख खोल देते हैं।
कुछ खाया आपने?
नहीं।
उठें सैंडविच और रसगुल्ला लाई हूं खा लें। श्लोका ने लापरवाही से कहा। जिसे शिवाय ने भी महसूस किया।
शिवाय खामोशी से उठ गए। श्लोका ने वहीं पास में रखे टेबल पर रख दिया। और प्लेट में निकाल कर शिवाय को दिया। और दूसरी प्लेट में निकाल कर खुद भी खाने लगी। उस ने सैंडविच शिवाय की तबीयत को देखते हुए ही बनाई थी। शिवाय को सैंडविच पसंद आई। खाने के बाद उसने रसगुल्ला भी खा लिया। श्लोका भी साथ में खाती रही।
श्लोका ने शिवाय को पानी दिया। और सब समेटने लगी। आप आराम करें मैं आती हूं। श्लोका सब बर्तन लेकर जाने लगी।
रुक जाओ थोड़ी देर। शिवाय ने बहुत उम्मीद से कहा। इस तरह उस ने कभी किसी से रिक्वेस्ट नहीं की थी। लेकिन आज वह दिल के हाथों मजबूर हो गया।
श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा। और सब लेकर बाहर निकल गई।
शिवाय खामोशी से बैठा रहा। उसे श्लोका की एक-एक बात याद आ रही थी। किस तरह कल से वह उसकी खिदमत कर रही है। शिवाय को श्लोका के संग बिताए एक-एक लम्हे बहुत खास थे। जो किसी हसीन कहानी की तरह उसके यादों में बस गए थे। जिसे महसूस करके उस के होंठों पे मुस्कान आ रही थी।
श्लोका सब सामान रख कर वापस शिवाय के रुम में आ गई।
श्लोका को देख कर शिवाय की आंख में चमक आ गई। श्लोका खामोशी से चेयर पर बैठ गई।
शिवाय ने देखा श्लोका ने अपने बालों की चोटी बना रखी थी। शिवाय अंदर ही अंदर मुस्कुरा दिया।
कुछ बातें करते हैं। शिवाय ने बात शुरू की।
श्लोका ने ऐसे ही शिवाय की तरफ देखा।
कुछ अपने गांव के बारे में बताओ। कुछ अपने बारे में बताओ। शिवाय ने कुछ सोचते हुए कहा।
जैसा गांव होता है वैसा ही मेरा गांव है। और मेरे बारे में तो अंकल ने सब बता ही दिया है।
श्लोका ने बात को शुरू करने से पहले ही बात खत्म कर दी। वह नहीं चाहती थी कि बात में कोई ऐसी बात निकले जिससे उसे झूठ बोलना पड़े। क्योंकि वह झूठ नहीं बोलना चाहती थी।
मतलब तुम बात नहीं करना चाहती, शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा।
लेकिन श्लोका ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया। और उठ खड़ी हुई। मैं जा रही हूं। आप आराम करें। कहते हुए वह मुड़ी।
सुनो....
हूं,
यह लेती जाओ।
श्लोका वापस मुड़ी।
शिवाय के हाथ में उसका क्लैचर था। श्लोका शिवाय के हाथ से ले लेती है।
चोटी खोल कर इस को लगा लेना। एक वहां पर भी रखा है। शिवाय ने ड्रेसिंग टेबल की तरफ इशारा किया।
श्लोका वहां से भी उठा लेती है। और रूम से बाहर निकल जाती है।
श्लोका खाने के टाइम नीचे जाकर लंच करती है। और किचन में चली जाती है।
शिवाय का खाना गया ऊपर? श्लोका ने कमला से पूछा।
जी, कमला ने जवाब दिया।
श्लोका सीधे शिवाय के रुम में जाती है। खाना वैसे ही रखा था। और शिवाय लेटे हुए थे।
आप ने खाना नहीं खाया अभी तक?
श्लोका ने हैरानी से पूछा।
तुम ने खिलाया नहीं तो कैसे खाता।
शिवाय ने सादगी से कहा।
और जब मैं नहीं थी तो कौन खिलाता था?
श्लोका ने थोड़ा नाराज़गी से कहा। क्योंकि शिवाय कुछ ज़्यादा ही उसे देख कर खुश हो रहे थे।
तब की बात मत करो। अब की करो। शिवाय ने उदासी से कहा। और उठ कर बैठ गये। और टेबल की तरफ मुड़ने लगे जहां पर खाना रखा था।
बैठे रहें सीधे। श्लोका ने डांटते हुए कहा। और प्लेट में खाना निकालने लगी। खाना निकाल कर वहीं खड़ी होकर शिवाय को खिलाने लगी। शिवाय भी खामोशी से खाने लगे। खाना खिला कर उसने दवा निकाल कर शिवाय को दी।
अगर दवा ना खाऊं तो? शिवाय ने बहुत ही बचकाना सवाल किया।
ठीक नहीं होना है? बीमार ही रहना है? श्लोका ने डांटते हुए पूछा।
हां, शिवाय ने सादगी से कहा।
श्लोका ने हैरानी से शिवाय को देखा। मगर बोली नहीं क्योंकि इस वक्त शिवाय की आंखे कुछ और ही बोल रही थी।
श्लोका ने शिवाय के हाथ से दवा लेकर उसके मुंह में डाल दी। और पानी का गिलास आगे कर दिया।
जिसे शिवाय ने खामोशी पी लिया।
पानी पीते ही शिवाय लेट गया। और आंख बन्द कर ली। श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा और वहीं चेयर पर बैठ गई। और शिवाय के माथे पर हाथ फेरने लगती है।
जारी है....
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