धड़कन | भाग 9 | Dhadkan Part 9 | Heart Touching Hindi Love Story
श्लोका दरवाज़ा बन्द करने लगती है लेकिन शिवाय तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है।
मुझ से भाग रही थी? शिवाय ने मुस्कुराते हुए पूछा। मुझे पता था कि तुम कुछ ऐसा ही करोगी। इस लिए मैं यहां था । तुम रात में बालकनी में ज़रूर आती हो लेकिन मेरी वजह से आज नहीं आ रही थी ना?
शिवाय ने उसे हर तरफ से फंसा दिया था।
जब आप को सब पता है तो फिर क्यों पूछ रहे हैं। श्लोका ने मासूमियत से कहा। और उसके मासूम चेहरा को देख कर शिवाय को उस पर बेसाख्ता बहुत प्यार आ गया।
लेकिन वह कोई भी हरकत करने से खुद को रोक लेता है। क्योंकि वह नहीं चाहता था कि वह कोई ऐसा काम करे जिससे श्लोका उस से दूर हो जाए।
पाजामा और शर्ट पहने श्लोका बहुत अच्छी लगी शिवाय को। उसके बाल क्लैचर में जकड़े हुए थे।
शिवाय को इतना ध्यान से खुद को देखता पाकर श्लोका आगे बढ़ जाती है। शिवाय खामोशी से उसे जाता देखता है। श्लोका टहलते हुए शिवाय के पास वापस आती है और जैसे ही मुड़ती है शिवाय उस के बाल से क्लैचर निकाल देते हैं। और उसके क्लौचर को अपने टी शर्ट पर लगा लेता है। श्लोका मुड़ कर शिवाय को देखती है मगर शिवाय शांत रहता है। श्लोका आगे बढ़ जाती है। शिवाय भी उसके साथ आगे बढ़ जाता है। और जैसे ही वह दोनों शिवाय के रूम के दरवाज़े पर पहुंचते हैं। शिवाय उस के बाल बिखेर देता है।
श्लोका हैरानी से उसे देखती है।
गुड नाइट बोलते हुए शिवाय मुस्कुराते हुए उसे देखता है।और अपने रूम में चला जाता है। और श्लोका हैरानी से देखती रह जाती है। श्लोका के होंठों पर भी मुस्कान आ जाती है।
वह वापस से टहलने लगती है। टहलते हुए उसका पूरा ध्यान शिवाय की हरकतों पर होता है। और थोड़ी देर टहल कर वह अपने रूम में चली जाती है। नींद आने तक वह सिर्फ शिवाय के रवैए पर ही गौर करती रहती है। और सोचते-सोचते वह नींद की वादियों में चली जाती है।
आज शिवाय बहुत खुश था। श्लोका के साथ बिताए हुए टाइम को वह बार-बार याद कर रहा था।
श्लोका के दिल में क्या है मुझे नहीं पता। लेकिन मैं उसे पसन्द करता हूं। क्या यह बात वह समझ गई है? क्या अब मुझे उस से अपने प्यार का इज़हार कर देना चाहिए? शिवाय एक बार फिर सवालों में घिर चुक था।
नहीं अभी नहीं कहूंगा अगर उस को मेरी बात बुरी लग गई तो वह मुझ से बात भी नहीं करेगी। क्योंकि एक बार वह कुछ ठान ले तो फिर वह वही करती है। मैं अभी कुछ नहीं कहूंगा। जो जैसा चल रहा है चलने दो।
यही सोच कर शिवाय खुद को तसल्ली देता है। और आंख बन्द कर लेता है।
सुबह नाश्ता करते ही श्लोका कालेज के लिए निकल जाती है।
सुबह शिवाय की नींद खुलती है तो उसको अपनी तबियत ठीक नहीं लगती। उसके सिर में भी दर्द था। और फीवर भी लग रहा था। मुझे आइस्क्रीम नहीं खाना चाहिए था। श्लोका की मुहब्बत में खा लिया। और बीमार हो गए। उस के मन में ही सवाल जवाब चल रहे थे।
वह उठने का इरादा छोड़ कर वैसे ही लेटा रहा। और नाश्ते के टाइम डैड को फोन कर के बता देता है कि वह आज आफिस नहीं जायेगा।
कुछ देर आराम करके वह अपना ब्रेकफास्ट भी अपने रूम में ही लाने के लिए बोल देता है ताकि ब्रेकफास्ट करके वह मेडिसिन ले ले।
श्लोका गई?
कमला जब उसके रूम में ब्रेकफास्ट लेकर आती तो वह उससे पूछता है।
जी, वह जल्दी चली गई। कमला ने शिवाय को पानी देकर कहा।
ठीक है तुम जाओ।
शिवाय को इस वक्त श्लोका की ज़रूरत महसूस हो रही थी। पता नहीं क्यूं वह चाहता था इस वक्त श्लोका उस के पास रहे। मगर ऐसा नहीं हो सकता था। वह आंख बन्द करके खामोश लेटा रहा।
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जैसे ही श्लोका फ्री हुई वह आफिस चली गई। उसी वक्त अनु भी आ गई। एक दूसरे को देख कर दोनों के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
और बताओ कैसा रहा कल का सफर? तेरा हीरो तो बिल्कुल हीरो निकला।
अनु श्लोका के बगल वाली चेयर पर बैठते हुए पूछती है।
श्लोका अनु की बात पर सिर्फ मुस्कुरा देती है बोलती नहीं है।
क्या मुस्कुरा रही हो कुछ बोलोगी भी? अनु उसे प्यार से देखते हुए कहती है।
क्या बताऊं तुम्हें तो सब पता है।
तुम्हारे यहां से हम सीधे डिनर के लिए गए। क्योंकि तुम्हारे हाथ में पैकेट देखकर और तुम्हारी बात सुनकर शिवाय समझ गये कि मैंने डिनर नहीं किया है। शिवाय भी वैसे ही आ गया था। इस लिए मुझे जाना पड़ा।
श्लोका ने उसे पूरी बात बताई।
ओ... हो.... जाना पड़ा अनु ने हंसते हुए कहा।
और फिर दोनों हंस पड़ी।
शिवाय तुम्हें बहुत पसंद करता है।
अनु ने कुछ सोचते हुए कहा।
पता नहीं कह नहीं सकते क्योंकि हमारे बीच ऐसी कोई बात नहीं हुई है जिससे हम कुछ समझ सकें। ऐसा ना हो कि वह कुछ ऐसा सोच ही ना रहा हो जैसा हम सोच रहे हैं। श्लोका ने सादगी से कहा।
लेकिन तुम?
अनु को फिक्र हुई।
मेरा छोड़ो।
श्लोका ने लापरवाही से कहा। और फिर थोड़ी देर में वह दोनों दोबारा क्लास लेने के लिए निकल जाती है।
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शाम होते-होते शिवाय का फीवर बहुत तेज़ हो गया। डाक्टर आये मेडिसिन और आराम का कह कर चले गए। श्लोका इन सब बातों से अंजान थी। कालेज से आकर खाना खाकर वह रूम में आराम करने लगी।
डिनर टाइम उसे पता चला कि शिवाय को फीवर है और शिवाय का खाना उस के रुम में जायेगा।
श्लोका ने खामोशी से खाना खाया। और खाना खाकर वह सीधे शिवाय के रूम में गई। उस ने देखा खाना वहीं पर वैसे ही रखा हुआ था और शिवाय सो रहे थे।
शिवाय.... श्लोका शिवाय के माथे पर हाथ रख कर उसे देखने लगती है। एक ही दिन में शिवाय की क्या हालत हो गई थी। कल तक तो बिल्कुल ठीक थे।
शिवाय ने आंख खोल कर श्लोका की तरफ देखा। शिवाय श्लोका को देख कर मुस्कुरा दिया। ऐसा लगा जैसे श्लोका को देख कर उस के अंदर जान आ गई हो।
क्या हो गया? कल तक तो ठीक थे। मुझे पता ही नहीं चला अभी मुझे मालूम हुआ।
श्लोका ने परेशानी से कहा।
कोई बात नहीं। मैं ठीक हूं। शिवाय ने कहते हुए आंख बन्द कर ली
आप उठें खाना खा लें। फिर आप को दवा भी खानी है। श्लोका ने दोबारा उसके माथे पर हाथ फेरते हुए कहा।
मुझे कुछ खाने का मन नहीं है। शिवाय ने मना किया।
आप उठे। कहते हुए श्लोका ने शिवाय को उठाने के लिए सहारा दिया।
शिवाय उठ कर बैठ गया। श्लोका ने देखा मूंग की खिचड़ी थी। श्लोका बाउल में खिचड़ी निकाल कर वहीं पर खड़ी होकर अपने हाथों से शिवाय को खिलाने लगी।
शिवाय खामोशी से मुंह खोल देता खाने के लिए। श्लोका भी खामोशी से खिलाती जा रही थी।
अब बस और नहीं खाया जायेगा। शिवाय ने मना किया।
थोड़ा सा और खा लें। फिर दवा खा लें।
शिवाय ने मुंह खोल दिया। श्लोका मुस्कुरा दी। शिवाय भी मुस्कुरा दिया।
श्लोका ने खाना खिला कर शिवाय को दवा दी। दवा खाकर शिवाय तुरंत लेट गये। ऐसा लग रहा था कि शिवाय से बैठा नहीं जा रहा था। श्लोका रूम में रखी चेयर खींच कर बेड के पास लाती है और वहीं पर बैठ जाती है।
शिवाय लेटते ही आंख बन्द कर लेते हैं। उसी वक्त कमला आती है। और बर्तन लेकर वापस चली जाती है।
श्लोका वैसे ही उसके पास बैठी रहती है। थोड़ी देर बाद शिवाय आंख खोल कर देखता है और श्लोका को बैठा देख कर वह हैरान रह जाता है। जाओ सो जाओ। क्यों बैठी हो अभी तक?
आप आराम करें मैं चली जाऊंगी। श्लोका शिवाय का सर सहलाते हुए कहती है।
श्लोका के इस तरह करने पर शिवाय के अंदर एक बेचैनी आ जाती है। उसे बहुत कुछ याद आ जाता है। उसकी आंख नम हो जाती है। मगर वह आंख बन्द ही रखता है ताकि श्लोका उसके आंसू ना देख ले। और वह श्लोका की तरफ करवट ले लेता है और बिल्कुल साइड आ जाता है। यूं जैसे वह कोई कंधा या कोई आगोश चाहता हो जिस में वह छिप जाए।
श्लोका भी एक हाथ शिवाय के सिर पर और एक हाथ उसके पीठ पर रख देती है। और बराबर उस के सिर को सहलाती रहती है। जिससे शिवाय को बहुत आराम मिलता है।
रात बीतती जा रही थी मगर श्लोका वैसे ही बैठी रही। और वैसे ही बैठे-बैठे वह बेड पर अपना सिर रख देती है। और उसे नींद आ जाती है।
तेज़ बुखार था जिसकी वजह से शिवाय को बेचैनी थी। शिवाय की नींद हल्की होती है। उसे श्लोका को देखकर हैरत होती है।
श्लोका गहरी नींद में थी। शिवाय धीरे से अपना हाथ श्लोका के ऊपर रखता है। और आंख बन्द कर लेता है। श्लोका मेरा इतना ख्याल क्यों रख रही है। यही सवाल शिवाय के मन में था।
शिवाय आंख खोलता है। शिवाय और श्लोका का चेहरा बहुत ही पास था। शिवाय का जी चाहता है कि वह उसे देखता रहे। मगर कमज़ोरी की वजह से वह दोबारा आंख बन्द कर लेता है।
श्लोका की नींद हल्की होती है वह बेड से सिर उठाती है। लेकिन उसे महसूस होता है कि शिवाय का हाथ उस के ऊपर है। तभी शिवाय भी आंख खोल देता है।
कैसी तबीयत है? कुछ खायेंगे? श्लोका शिवाय की यह हालत देख कर बहुत ही दुखी थी।
पानी पिला दो।
श्लोका तुरंत उठ कर पानी निकालती है। कुछ खा लें भूख लगी होगी।
नहीं सिर्फ पानी दो। शिवाय ने मना कर दिया।
मैं रूम से लेकर आती हूं कुछ खाने का। कहकर श्लोका जाने लगती है।
श्लोका... शिवाय श्लोका को रोकता है।
और अलमारी की तरफ इशारा करता है। श्लोका अलमारी खोलती है जहां पर बहुत सारा खाने का सामान रखा हुआ था। श्लोका देख कर एक कूकीज़ निकालती है और शिवाय को लाकर खिलाती है।
शिवाय वैसे ही लेटे हुए खा लेते हैं। और फिर वह शिवाय को थोड़ा सा उठा कर पानी पिलाती है। और गिलास रख कर वापस चेयर पर बैठ जाती है।
शिवाय एक बार फिर श्लोका की तरफ करवट ले लेता है और बेड के बिल्कुल किनारे पर आ जाता है। जिससे कि श्लोका उसके पास रहे।
क्या हुआ? परेशान मत हों। ठीक हो जायेंगे। श्लोका एक बार फिर शिवाय का सिर सहलाते हुए कहती है। वह भी बिल्कुल बेड के पास थी जिससे शिवाय के सिर को सहला सके।
शिवाय अपना हाथ श्लोका के पीछे ले जाता है और उसके बाल में
लगे क्लैचर को छुड़ा कर वहीं अपने तकिए के पास रख देता है। क्लैचर छूटते ही उसके सारे बाल दोनों तरफ से आगे आ जाते हैं।
जारी है....
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