धड़कन | भाग 12 | Dhadkan Part 12 | Heart Touching Hindi Love Story
शिवाय अपनी तकिए खींच कर बिल्कुल बेड के किनारे करता है जिससे वह श्लोका के बहुत ही पास आ जाता है। और फिर शिवाय आंख बन्द कर लेता है। श्लोका की नज़र शिवाय के हर हरकत पर थी।
श्लोका खामोशी से उस के सिर को सहलाती रही। वह चाहती थी कि शिवाय को जल्द से जल्द नींद आ जाए तभी शिवाय को सुकून मिलेगा। बहुत देर बाद जब उसे लगा कि शिवाय सो चुके हैं। जैसे ही श्लोका ने शिवाय के सिर से हाथ हटाया शिवाय ने उस का हाथ थाम लिया।
श्लोका को हैरत हुई कि शिवाय अभी तक जाग रहे हैं। उस ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की मगर शिवाय ने हाथ नहीं छोड़ा। श्लोका को भी अब नींद आ रही थी। वह वहीं बेड पर सिर रख कर आंख बन्द कर लेती है।
श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय के अंदर जान आ जाती है। वरना उसे लगता था कि श्लोका उसे छोड़ कर चली जायेगी। और फिर दोनों को ही नींद आ जाती है।
श्लोका की नींद हल्की होती है वह बेकाबू हो कर लेटी थी। उसका शरीर दर्द करने लगा था। वह धीरे से शिवाय के हाथ से अपना हाथ छुड़ाती है और उठ खड़ी होती है। एक नज़र शिवाय को देखती है और अपने रूम में जाकर सो जाती है।
सुबह उठकर श्लोका तैयार हो कर कालेज चली जाती है। वहां से आ कर वह सीधे शिवाय के रूम में जाती है। मगर शिवाय वहां नहीं थे। क्योंकि शिवाय आफिस चले गए थे।वह वापस आकर आराम करने लगती है।
जब डिनर करने नीचे जाती है तो देखती है शिवाय वहीं सोफे पर लेटे हुए थे। शिवाय आफिस से आकर वहीं लेट जाते हैं। दोनों की नज़र मिलती है मगर दोनों ही खामोश रहते हैं। सब लोग डाइनिंग टेबल पर बैठ जाते हैं। और खाना खाने लगते हैं।
सुमन कल चलोगी पार्लर? कल मैं फ्री हूं। अराध्या ने श्लोका को देखते हुए पूछा।
सुमन को भी पार्लर का नशा चढ़ा रही हो किया अराध्या? श्लोका कुछ बोलने ही जा रही थी तभी सुधीर जी बोल पढ़े।
अरे नहीं डैड यह तो खुद ही इतनी सुन्दर है। सुमन को हेयर कट कराना था कह रही थी इतने लम्बे बालों की वह केयर नहीं कर पा रही है।
अराध्या ने पूरी बात बताई। शिवाय सिर्फ खामोशी से सुन रहा था।
ठीक ही है वैसे भी आज कल कौन इतने लम्बे बाल रखना चाहता है। गांव वाले तो रख लें। शहर वाले तो बिल्कुल भी नहीं रखते। ममता जी भी बोल पड़ी। लेकिन कोई भी ममता जी की बातों पर कोई ध्यान नहीं देता है। क्योंकि हर कोई उनके नेचर से वाकिफ था।
ठीक है तुम लोग देख लो मुझे इस की जानकारी नहीं है। लेकिन मैं इतना कहूंगा कि श्लोका के लम्बे बाल अच्छे लगते हैं। सुधीर जी ने शिवाय को देखते हुए कहा। सुधीर जी की आंखों के सामने शिवाय के तकिए के पास रखा क्लैचर था।
शिवाय तुरंत नज़रें प्लेट पर कर लेता है। उस के चेहरे पर इस वक्त कोई भाव नहीं थे। खाना खाते ही वह ऊपर चला गया। क्योंकि उसे दवा भी खानी थी।
अराध्या कल रहने दो। फिर देखते हैं। श्लोका ने कुछ सोच कर कहा। उस ने बाल कट कराने का फैसला तो ले लिया था मगर अपने ही फैसले से वह संतुष्ट नहीं थी।
ठीक है जब चलना होगा तब बताना। अराध्या ने श्लोका से कहा। श्लोका ऊपर चली गई।
क्या बात है सुमन से बात कर रही हो। वह भी इतने अच्छे से। सुधीर जी को हैरत हुई।
जी डैड आप ने ही तो कहा था कि उससे बात करुं। अब कर रही हूं तो भी आप बोल रहे हैं।
अराध्या ने नाराज़गी से कहा।
नाराज़ मत हो। मैं तो मज़ाक कर रहा था वैसे मुझे अच्छा लगा।
सुधीर जी ने अराध्या को देखते हुए कहा।
जी डैड वह वैसी नहीं है जैसा मैंने समझा था। और वह गांव की भी नहीं लगती है। अराध्या ने सोचते हुए कहा।
हां ठीक है। तुम लोग अच्छे से रहो। सुधीर जी ने उठते हुए कहा।
शिवाय अपने रूम में जाकर टहल रहा था उसके कानों में श्लोका के बाल कट होने की बात गूंज रही थी।
तुम ऐसा कैसे कर सकती हो? जब की तुम जानती हो कि मुझे तुम्हारे लम्बे बाल पसंद है। तुम क्यों मेरी फीलिंग को नज़रंदाज़ कर रही हो? तुम्हें मेरी मुहब्बत क्यों नहीं दिखती या फिर तुम जान कर भी अंजान बन रही हो? शिवाय को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह क्या करे। और फिर वह श्लोका के दरवाज़े पर पहुंच गया। और नॉक किया।
श्लोका जो बेड पर बैठ कर लैपटॉप पर काम कर रही थी। तुरंत वह लैपटॉप पर कम्बल डाल देती है।
नॉक करते ही शिवाय अंदर आ जाते हैं। श्लोका भी उठ कर खड़ी हो जाती है। उस के चेहरे पर घबराहट थी। अचानक इस तरह शिवाय के आ जाने पर। वरना आज उसकी चोरी पकड़ी जाती।
कोई काम था? श्लोका को हैरत हुई कि शिवाय क्यों आये हैं।
क्यों ऐसे नहीं आ सकता? शिवाय की नज़र उसके चेहरे पर थे। लेकिन श्लोका ने उसकी बात का कोई जवाब नहीं दिया।
तुम्हें बाल नहीं कटवाने हैं। यही कहने आया था। शिवाय ने हुक्म देते हुए कहा।
लेकिन मुझे कटवाना है। अब मैं इस की देखभाल नहीं कर पा रही हूं। गांव में थी तो मौसी देख लेती थी। अब मुझ से नहीं होता।
श्लोका ने किसी छोटी बच्ची की तरह कहा।
जो भी हो यह बाल नहीं कटने चाहिए। कल पार्लर जाकर शैम्पू करवा लेना। और जो भी ज़रूरत हो करा लेना। लेकिन बाल कटने नहीं चाहिए।
शिवाय ने सख्त लहजे में कहा।
श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा और बेड की तरफ मुड़ गई।
शिवाय एक कदम आगे बढ़ कर उसके बाल में लगे क्लैचर को निकाल देता है। क्लैचर से आज़ाद होते ही उसके बाल बिखर जाते हैं।
श्लोका वापस मुड़ कर शिवाय को देखती है। जिसके चेहरे पर एक खुशी थी। कुछ देर पहले वाली सख्ती गायब हो चुकी थी।
दस मिनट बाद मेरे रूम में आना कुछ काम है। शिवाय ने उसे देखते हुए कहा।
क्या काम है अभी बता दें। श्लोका ने नाराज़गी से कहा।
वह काम दस मिनट बाद का है। अभी नहीं हो सकता। मैं इन्तेज़ार करूंगा। कहते हुए शिवाय रूम से चले जाते हैं। श्लोका वहीं बेड पर बैठ जाती है। उसे शिवाय की बात कुछ समझ नहीं आती है। और अब दस मिनट बाद क्या काम हो सकता है। नहीं जाऊंगी मैं। श्लोका ने मन में इरादा किया और दोबारा लैपटॉप पर काम करने लगी।
उसका फोन बजता है स्क्रीन पर शिवाय का नाम चमक रहा था। उस ने फोन उठा लिया।
दस मिनट का आधा घंटा हो गया। तुरंत आओ। कहते ही फोन कट कर दिया।
श्लोका ने लैपटॉप बन्द किया। सब समेट कर वह शिवाय के रूम की तरफ बढ़ी। देखते हूं क्या काम है।
नॉक करके अन्दर गई। नाईट लैम्प जल रहा था। शिवाय लेटे हुए थे।
क्या काम है? वह उसके बेड के पास जाकर रुक गई।
बैठो। शिवाय ने चेयर की तरफ इशारा किया।
आप काम बताएं। श्लोका के भाव गुस्से वाले थे। लेकिन शिवाय को उससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।
पहले बैठो। शिवाय ने कहा।
ना चाहते हुए भी श्लोका बैठ गई। उसके बैठते ही शिवाय बिल्कुल बेड के किनारे आ जाते हैं और श्लोका का हाथ पकड़ कर अपने माथे पर रख लेते हैं।
सिर्फ पांच मिनट.... शिवाय ने रिक्वेस्ट की।
श्लोका ने हैरानी से शिवाय को देखा।
प्लीज़, कहते ही शिवाय ने आंख बन्द कर ली।
श्लोका का हाथ वैसे ही शिवाय के माथे पर रखा हुआ था। वह बीमार था तब उस ने उसकी देखभाल कर दी। लेकिन अब नहीं। वह ऐसा नहीं कर सकती। उसका हाथ वैसे ही शिवाय के माथे पर था। और दिमाग कहीं और चल रहा था।
उसने शिवाय को देखा वह वैसे ही आंख बन्द किए हुए था। शिवाय की मासूमियत देखकर श्लोका का दिल बदल गया। और उसके हाथ शिवाय के सिर पर चलने लगे। ना जाने कितनी ही देर हो गई। वह वैसे ही बैठी हुई थी। उसे नींद आने लगी वह उठी और अपने कमरे में चली गई।
सुबह श्लोका जल्दी से तैयार हो कर अपना बैग लेकर नीचे जाने के लिए रूम से निकली तो उसे सब की आवाज़े सुनाई दी। यह इतनी सुबह-सुबह आज सब लोग क्या बात हो सकती है? सोचते हुए श्लोका नीचे गई। जहां पर हर कोई था और हर किसी के चेहरे का रंग बदला हुआ था।
मैं पूछता हूं यह क्यों गया होटल के रुम में? वह भी लड़की के साथ।
शिवाय ने गुस्से से कहा। श्लोका ने देखा शिवाय का चेहरा गुस्से से लाल हो गया था।
सिमरन मेरी गर्लफ्रेंड है। कोई गैर नहीं, मैं उसे लेकर होटल गया था।
अमोल ने भी चिल्लाते हुए कहा।
क्या ज़रूरत थी उसके साथ होटल जाने की? वैसे ही पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय बेकार की बातों में लगे हुए हो।
शिवाय ने गुस्से से कहा।
बेकार की बात नहीं है शिवाय सिंह ओबेरॉय... मैं सिमरन से प्यार करता हूं। हम दोनों वहां पर बेहतर टाइम स्पेंड करने गए थे। हमें क्या पता था कि वहां पर रेट पड़ने वाली है। एक गलत लड़की को ढूंढने के चक्कर में पुलिस वाले सभी को पकड़ कर ले गए।
लेकिन आप यह सब क्यों समझेंगे। आप ने कभी किसी से प्यार किया हो तो जाने कि प्यार किया होता है। आप का दिल तो पत्थर है पत्थर... जो प्यार मुहब्बत से बहुत दूर है। और आज मेरा प्यार देखकर आप को जलन हो रही है।
अमोल खामोश हो जाओ। एक तो गलती की ऊपर से बोलते जा रहे हो। आधी रात से परेशान होकर वह तुम्हें छुड़ा कर लाया है। उसकी तबीयत भी अभी ठीक नहीं हुई है। उसके बावजूद वह तुम्हारे लिए परेशान हुआ। बजाय उसको थैंक्स कहने के तुम उलटा उसे ही सुनाये जा रहे हो।
अमोल तेज़ आवाज़ में बोलता जा रहा था जब सुधीर जी ने गुस्से से कहा।
अब सब लोग चुप हो जाओ। और जाओ अपने कमरे में। अमोल तुम्हें तो पता है कि शिवाय तुम्हारी तरह आज़ाद ख्याल नहीं है फिर क्यों बहस कर रहे हो...
ममता जी ने अमोल को समझाते हुए कहा। यह हमेशा हमें गलत ही समझेगा।
नफरत है मुझे ऐसी आज़ादी से जो हमारे संस्कार ही हम से छीन ले। शिवाय ने एक बार फिर गुस्से से कहा और टेबल पर रखी गाड़ी की चाबी उठा लेता है।
श्लोका तो खामोश बुत बनी सब तमाशा देख रही थी। लेकिन जैसे ही उसने शिवाय को गाड़ी की चाबी उठाते देखा वह डर गई। इतने गुस्से में गाड़ी चलाना ठीक नहीं है ।यही सोच कर वह बाहर निकल गई। उसी वक्त शिवाय भी बाहर आये और गाड़ी की तरफ बढ़ने लगे।
शिवाय आप अंदर चलें। इस वक्त बाहर ना जाएं। श्लोका ने समझाया। लेकिन शिवाय बहुत ही गुस्से में था वह कोई जवाब दिये बिना आगे बढ़ने लगे।
शिवाय आप इस वक्त नहीं जा सकते। श्लोका ने एक बार फिर कहा। लेकिन शिवाय आगे बढ़ते रहे। श्लोका भी साथ-साथ कदम बढ़ाती रही।
शिवाय आप समझ क्यों नहीं रहे। आप अंदर चलें। इस वक्त आप बाहर नहीं जा सकते।
श्लोका ने सख्ती से शिवाय को रोकते हुए कहा।
तुम कौन होती हो मुझे रोकने वाली? कहते हुए शिवाय आगे बढ़ गया। श्लोका एक मिनट के लिए रूक गई शिवाय की बात सुनकर। लेकिन फिर वह दौड़ कर गाड़ी के पास गई। और गाड़ी में ड्राइविंग सीट पर बैठ गई। शिवाय भी गाड़ी के पास पहुंच चुके थे।
श्लोका निकलो बाहर। मुझे परेशान मत करो।
आप उधर से आयें बैठें। श्लोका ने शिवाय को इशारा किया। शिवाय ने एक नज़र श्लोका को देखा। शिवाय गाड़ी में आ कर बैठ गये।
क्यों परेशान कर रही हो, मुझे जाने दो। शिवाय ने उदासी से कहा।
कहां जाना है?
कहीं भी।
इतना गुस्से में गाड़ी चलाना ठीक नहीं है। श्लोका ने नाराज़गी से कहा।
ठीक है तुम भी चलो। शिवाय का गुस्सा ठंडा हो गया था।
मुझे मरने का कोई शौक नहीं है। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा।
तुम्हें क्या लगता है मैं कहां जा रहा हूं?
इतना गुस्से में गाड़ी चलायेंगे तो कुछ भी हो सकता है। श्लोका ने मुंह बनाते हुए कहा।
अच्छा, तब क्या करूं? शिवाय ने हार मानते हुए कहा।
आप अंदर चलें। श्लोका ने सीधी बात की।
नहीं, इस वक्त कहीं बाहर जाना चाहता हूं। शिवाय पीछे सिर टिका कर आंख बन्द कर लेते हैं। श्लोका एक नज़र शिवाय को देखती है। और सोचने लगती है कि क्या करे। शिवाय को अकेले जाने नहीं दे सकती। और ना ही वह चाहती थी कि शिवाय ड्राइव करें। और अगर वह गाड़ी चलाती है तो शिवाय पर उस का राज़ खुल जायेगा।
क्या करे? और फिर वह फैसला ले लेती है। और चाबी घुमा देती है।
जैसे ही गाड़ी हिलती है शिवाय हड़बड़ा कर आंख खोल देता है।
यह क्या कर रही हो? शिवाय घबरा जाता है। लेकिन तब तक गाड़ी गेट से निकल चुकी थी।
श्लोका.... शिवाय हैरान था। गाड़ी मेन रोड पर दौड़ने लगी। शिवाय हैरानी से कभी श्लोका को तो कभी सामने रोड पर देखता। लेकिन श्लोका की नज़र सिर्फ सामने रोड पर थी। शिवाय ने एक बार फिर श्लोका को देखा। और पीछे सीट पर सिर टिका कर आंख बन्द कर ली। श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा। और फिर सामने देखने लगी।
गाड़ी जब रूकी तो शिवाय ने आंख खोल कर देखा। गाड़ी एक सुनसान रोड के किनारे रूकी थी।
इतने बेहतरीन सफर के लिए शुक्रिया। शिवाय ने स्टेरिंग पर श्लोका के रखे हाथ पर हाथ रखते हुए कहा।
यह कैसी हम नशीनी,यह कैसा दिल सुकूं में
तुम कौन हो ओ हमदम,अपना मुझे बना लो
श्लोका ने तुरंत अपना हाथ खींच लिया। क्योंकि शिवाय की नज़र इस वक्त कुछ और ही कह रही थी।
तुम और गाड़ी? शिवाय अभी भी हैरान था।
हम गांव की लड़कीयों को कभी कमज़ोर मत समझना। गांव की लड़की को साईकिल नहीं चलाने आती लेकिन ज़रूरत पड़ने पर वह ट्रेक्टर भी चला लेती हैं। श्लोका ने गर्व से कहा।
यह बात तो तुम्हारी माननी पड़ेगी। शिवाय को भी उस पर गर्व हुआ।
मूड ठीक हो गया? अब घर चलें? श्लोका ने सोचते हुए कहा। क्योंकि उसे कालेज भी जाना था।
नहीं अभी ठीक नहीं हुआ है। शिवाय भी कहां कम था।
चुपचाप से घर चलें। श्लोका ने डपटा।
जी नहीं पहले चलो मुझे कहीं नाश्ता कराओ। फिर हम सोचेंगे। शिवाय ने अपना मोबाइल निकाल कर टाईम देख कर कहा। उसी वक्त शिवाय का फोन बजता है। लेकिन शिवाय रिसीव करने के बजाय सामने रख देते हैं। दो बार फोन आता है मगर शिवाय नहीं उठाते हैं। लेकिन जब तीसरी बार आता है तो श्लोका उठा लेती है।
जी अंकल मैं हूं साथ में। कहते हुए श्लोका फोन रख देती है।
फोन क्यों नहीं उठा रहे थे? अंकल परेशान थे। श्लोका ने नाराज़ हो कर कहा।
लेकिन शिवाय सिर्फ उसे देखता रहा। मेरे अंदर कोई फीलिंग कोई जज़्बात नहीं है मैं प्यार को नहीं समझता। मैं सारी ज़िन्दगी प्यार के लिए तरसता रहा। और तुम ने इतनी आसानी से कह दिया कि मेरा दिल पत्थर है। शिवाय की नज़र श्लोका पर थी। और दिमाग अमोल की बातों की ओर था।
जारी है...
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