धड़कन | भाग 13 | Dhadkan Part 13 | Heart Touching Hindi Love Story

लेकिन शिवाय सिर्फ उसे देखता रहा। मेरे अंदर कोई फीलिंग कोई जज़्बात नहीं है मैं प्यार को नहीं समझता। मैं सारी ज़िन्दगी प्यार के लिए तरसता रहा। और तुम ने इतनी आसानी से कह दिया कि मेरा दिल पत्थर है। शिवाय की नज़र श्लोका पर थी। और दिमाग अमोल की बातों की ओर था।


श्लोका ने गाड़ी स्टार्ट कर दी। 


तुम कहीं जा रही थी?


हूं....


कहां?


है एक जगह....


मुझे नहीं बताओगी?


अभी नहीं....


भरोसा नहीं मुझ पर?


है....


तब फिर क्यों नहीं?


बस यूं ही....


डैड से पूछ लूं?


आप की मर्ज़ी....


वह मुझे बताएंगे?


नहीं पता.....


तुम बता दो प्लीज़।


नहीं....


ओ के।


दोनों की नज़र एक दूसरे पर थे। दोनों ही एक दूसरे के करीब थे। मगर फिर भी बहुत दूर।


गाड़ी एक टी स्टॉल पर रूक गई।


दो चाय देना। और साथ में मलाई टोस्ट। श्लोका ने आवाज़ देकर कहा।


यहां की चाय पियोगी? शिवाय ने हैरानी से पूछा। उस ने आज तक इस तरह की टी स्टॉल से चाय नहीं पी थी।


हां, हम दोनों। श्लोका ने अपने और शिवाय की तरफ इशारा किया।


लेकिन.... चलो कहीं बैठ कर पीते हैं। किसी कैफे चलो। शिवाय ने रिक्वेस्ट की।


नहीं आज हम यहीं पियेंगे। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा। उसी वक्त मलाई टोस्ट आ गया।


श्लोका ने शिवाय की तरफ किया। और खुद भी एक पीस उठा कर खाने लगी। शिवाय ने भी उठा लिया।


वाह...यह तो बहुत टेस्टी है। शिवाय ने खाते हुए कहा।


मुझे पता था आप को पसंद आयेगी।


उसी वक्त चाय भी आ गई। शिवाय का फोन बजा। उस ने फोन उठा लिया। और बात करने लगा। ओके मैं देख कर बताता हूं।


शिवाय चाय पीते हुए अपने फोन में कुछ देखने लगे।


यह देखो कैसा लग रहा है? शिवाय ने फोन श्लोका की तरफ किया।


यह है क्या यह बताएं? श्लोका ने देखते हुए पूछा।


सिंगापूर में एक फौशन शो होने वाला है उसी में हम पार्टीसिपेट कर रहे हैं। शिवाय ने उसे दिखाते हुए कहा।


श्लोका ने देखा बहुत सारी ड्रेस की स्केचिंग थी। लेकिन उसे पहले इस फैशन शो के बारे में जानना था कि क्या है क्यों है? 


आप मुझे पूरी बात बताएं। तब ही मैं कुछ बता सकती हूं। श्लोका ने मोबाइल अपने हाथ में लेकर देखते हुए पूछा।


इस फैशन शो में सारी दुनिया की कम्पनी पार्टीसिपेट कर रही है। अगर हम यह शो जीत गए तो बहुत बड़ा आर्डर मिल सकता है हमें। शिवाय ने खुशी से कहा 


और अगर नहीं जीते तो ? श्लोका ने पूछा।


तो भी कोई नुक्सान नहीं है। हमारी कम्पनी का नाम तो होगा।


तो फिर मैं यह कहूं कि मुझे यह डिज़ाइन पसंद नहीं है। श्लोका ने स्केचिंग देखते हुए कहा।


वजह ? शिवाय हैरान हुआ। क्योंकि उसकी कम्पनी की बेस्ट डिज़ाइनर ने यह स्केचिंग तैयार की थी जो बहुत ही हाई लेवल की थी।


मुझे लगता है हमें ऐसी ड्रेस शो करना चाहिए जो हमारे कल्चर को भी दर्शाता हो। लेकिन यह सारी स्केचिंग आप देख रहे हैं। सारे के सारे शरीर दिखाते हुए वेस्टर्न कल्चर के जैसे हैं। हमारे देश की सभ्यता यहां की संस्कृति का एक अलग ही महत्व है। आप को अपनी संस्कृति को अपने पहनावे से ज़ाहिर करनी चाहिए। ना कि विदेशी पहनावा से। यह मुझे तो नहीं पसंद हैं बाकी आप देख लें। वैसे भी मुझे इन चीज़ों की जानकारी नहीं है।


श्लोका ने कुछ सोचते हुए कहा। और फोन शिवाय को देकर गाड़ी स्टार्ट कर दी। वैसे भी बातों-बातों में वह अंग्रेज़ी शब्द बोल दे रही थी जो उसे नहीं बोलना था। क्या पता कब शिवाय उस की कोई बात पकड़ ले। और उसे शिवाय पर अभी यह ज़ाहिर नहीं करना था।


शिवाय श्लोका की बातों पर गौर करने लगा। उसे श्लोका की बात भी सही लगी।


कुछ दूर जाकर श्लोका ने गाड़ी रोक दी। अब आप घर जाएं। मैं जा रही हूं। श्लोका गाड़ी से उतरते हुए कहती है।


मुझे छोड़ कर जा रही हो? शिवाय ने शिकवा किया।


हां, अब आप ठीक हैं। श्लोका ने मुस्कुरा कर कहा। और गाड़ी का गेट बंद कर के आगे बढ़ गई।


शिवाय यह सोचता ही रह गया कि श्लोका कहां जाती है। श्लोका वहीं पर एक आटो खड़ा था वह उसी पर बैठ कर चली गई। और शिवाय देखता रह गया।


श्लोका.... शिवाय हैरान रह गया। उसने तुरंत श्लोका को फोन किया। तुम ने अभी जो किया अच्छा नहीं किया। फोन उठते ही शिवाय ने कहा और फोन रख दिया। और ड्राइविंग सीट पर आकर गाड़ी स्टार्ट कर दी। और घर के रास्ते पर गाड़ी कर दी।


शिवाय मैं बहुत जल्द आप को सब सच बता दूंगी लेकिन अभी वह वक्त नहीं आया है। श्लोका ने मन ही मन कहा।


घर पहुंचते ही शिवाय अपने रूम में चला जाते हैं। और बेड पर लेट जाते हैं। लेटते ही उस के मन में श्लोका आ जाती है। कितनी अच्छी ड्राइव कर रही थी। और उसको कितना ख्याल था कि मैं गुस्से में गाड़ी ना चलाऊं। अगर आज उसे मेरा ख्याल ना होता तो मुझे उसके गाड़ी चलाने वाली बात पता ही नहीं चलती। और ना ही वह बताती। 


अब सवाल यह था कि वह जाती कहां है? और क्यों उसे नहीं बता रही है। शिवाय सोचों में गुम थे। एक के बाद एक बात उसे याद आ रही थी। लेकिन जो भी है वह मेरा ख्याल बहुत रखती है। शिवाय ने मन ही मन कहा। और आंख बन्द कर के वह उसके ख्यालों में खो गया। 


थोड़ी देर बाद शिवाय सो कर उठे। और तैयार हो कर ब्रेकफास्ट करते ही आफिस चले गये। ब्रेकफास्ट टाइम आज सुधीर जी भी नहीं थे।


आफिस जाकर वह फाइलों में उलझ गया। दोपहर में उनकी डिज़ाइनर अनुष्का शर्मा आ गई। जिन्हें खास तौर से इस फैशन शो के ड्रेस बनवाने के लिए हॉयर किया गया था।


शिवाय ने नज़र उठा कर अनुष्का को देखा जो शॉर्ट टॉप और जींस पहने हुए थे। बालों को एक अंदाज़ से वह पीछे करते हुए बैठ जाती है।


सर आप ने डिज़ाइन देखे? कैसे लगे? मुझे यकीन है आप को वह ज़रूर पसंद आये होंगे। अनुष्का ने मुस्कुराते हुए कहा।


हां मैंने आप के डिज़ाइन देखे तो हैं। लेकिन अभी फाइनल नहीं किया है। कल मैं आप को बताता हूं। अभी आप जायें।


शिवाय के मन में श्लोका की बात आ गई। वह जो कह रही थी वह भी सही था। पहले मुझे श्लोका से बात करना चाहिए। फिर कोई फैसला लेना चाहिए।


शिवाय ने श्लोका को फोन किया। तुम घर कब तक जाओगी? फोन उठते ही शिवाय पूछते हैं।


शाम को। श्लोका ने पूछा।


आफिस आ सकती हो? 


कब शाम को?


हां,


ठीक है एड्रेस भेज दें।


और सुनो सुबह वाली तुम्हारी हरकत अभी मैं भूला नहीं हूं। शिवाय ने उसे याद दिलाते हुए कहा। जो वह गाड़ी से उतर कर आटो में बैठ कर चली गई थी।


लेकिन श्लोका ने कोई जवाब दिये बिना फोन रख दिया। क्योंकि वह क्लास ले रही थी। वह स्टूडेंट्स को फोन के लिए मना करती है। और खुद भी क्लास में फोन यूज़ नहीं करती है। इस लिए उसने तुरंत फोन कट कर दिया। लेकिन शिवाय की नाराज़गी का उसे अंदाज़ा हो गया था।


क्लास लेकर वह आफिस में चली गई। और मोबाइल में उस फैशन शो के बारे में जानने के लिए सर्च करने लगी। सब कुछ पढ़ने के बाद उस ने बहुत सारी चीज़ों पर गौर किया। और फिर अपने काम में लग गई।


शाम को शिवाय को ख्याल आया कि वह श्लोका से बात करके गाड़ी भेज दे या वह खुद चला जाए। लेकिन फिर उसने इरादा बदल दिया कि वह गाड़ी से आयेगी नहीं। ना उसके साथ और ना ही ड्राइवर के साथ। वह कहां जाती है वह अभी बताना नहीं चाहती है। इस लिए वह दोबारा अपने काम में लग गये।


शाम को श्लोका को ट्रैफिक मिल गया। और उसको आते-आते बहुत देर हो गई। आफिस बिल्डिंग में आकर वह गार्ड से पूछ कर ऊपर शिवाय के आफिस में आ गई।


रिसेप्शन पर उसने शिवाय से मिलने के लिए कहा। जिसने फोन पर किसी से बात करके उसे शिवाय के आफिस में भेज दिया।


दरवाज़े पर जाकर उसने नॉक किया।


यस कम इन... 


श्लोका अंदर गई। सामने ही शिवाय अपनी शानदार चेयर पर बॉस की तरह बैठे हुए थे। यहां पर शिवाय के चेहरे पर कुछ और ही आभा थी। जिसे श्लोका ने महसूस किया। 


बैठें। शिवाय ने चेयर की तरह इशारा किया।


श्लोका खामोशी से बैठ गई। शिवाय एक टिक उसे देखने लगा। कितनी अपनी-अपनी सी लगती है यह।


कुछ काम था? श्लोका ने शिवाय को देखते हुए पूछा।


हां काम तो था। लेकिन मैं बाद में तुम्हारी सुबह वाली बात के लिए बात करूंगा। तैयार रहना। शिवाय ने नाराज़गी से कहा।


ऐसा मैंने क्या कर दिया कि आप बार-बार वही बात याद करा रहे हैं। श्लोका ने हैरानी से पूछा।


मैंने कहा ना कि हम उस बारे में बाद में बात करेंगे। अभी जो काम है वह हो जाए। शिवाय ने लैपटॉप पर नज़रें जमा ली। और श्लोका उसे गौर से देखने लगी। कितने स्मार्ट लग रहे हैं शिवाय। बिल्कुल किसी प्रिंस की तरह। और फिर श्लोका खुद ही अपनी सोच पर मुस्कुरा दी।


कुछ खाओगी या फिर चाय? शिवाय ने अपना काम करते हुए पूछा।


कुछ खिला दें तो अच्छा रहेगा भूख लगी है। श्लोका ने सादगी से कहा।


शिवाय ने तुरंत उसके लिए बर्गर और बेबी कार्न का बोल कर अपना काम करने लगा।


तुम जाओ वहां पर आराम से बैठो। मैं भी आ रहा हूं। शिवाय ने सोफे की तरफ इशारा किया जो एक तरफ लगा हुआ था। 


श्लोका सोफे पर बैठ कर शिवाय के आफिस पर नज़र दौड़ाती है। काफी बड़ा और खूबसूरत केबिन था। सब तरफ देखते हुए उसकी नज़र शिवाय पर जाकर टिक जाती है। और वह लगातार शिवाय को देखती जाती है।


उसी वक्त एक लड़का ट्रे लेकर आता है। और सारा सामान रख कर वापस चला जाता है।


तुम खाओ मैं भी आ रहा हूं। शिवाय ने उसे इशारा किया। और फटाफट अपना काम पूरा करने लगे।


श्लोका वैसे ही बैठी रही। जब शिवाय आये तो उसने खाना स्टार्ट किया। अच्छे से खाओ। भूख लगी थी तो कुछ खा लेना चाहिए था। शिवाय ने खाते हुए कहा।


खा तो रही हूं। श्लोका ने खाते हुए कहा। खाने के बाद कॉफी आ गई।


खा-पीकर श्लोका के अंदर नई जान आ गई। मज़ा आ गया खाकर सब कुछ बहुत ही टेस्टी था।


श्लोका ने शिवाय को देखते हुए कहा। शिवाय उसे ही देख रहे थे। कितनी मासूमियत थी उसके चेहरे पर। कोई मेकअप नहीं। होंठों पर हल्की लिपस्टिक जो शायद सुबह की लगी थी। जो इस वक्त बहुत हल्की हो गई थी। या यूं कहें कि अब सिर्फ उसके निशान थे।


अब काम बताएं? शिवाय को सोचों में गुम देखकर उसने जल्दी से कहा।


मैं बहुत नाराज़ हूं तुम से। शिवाय को एक 

बार फिर सुबह वाली बात याद आ गई।


हां ठीक है मुझे याद है। लेकिन वह काम तो अभी बताएं जिस के लिए मुझे बुलाया है। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा। 


जारी है...

धड़कन भाग 12

धड़कन भाग 14




























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