धड़कन | भाग 14 | Dhadkan Part 14 | Heart Touching Hindi Love Story
हां ठीक है मुझे याद है। लेकिन वह काम तो अभी बताएं जिस के लिए मुझे बुलाया है। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा।
शिवाय उठे और अपना लैपटॉप लेकर वहीं सोफे पर श्लोका के पास बैठ गये। यह देखो डिज़ाइन और फाइनल करो। शिवाय डिज़ाइन ओपेन करते ही बोले।
एक बात कहूं शिवाय मुझे इन सब बातों की जानकारी नहीं है। आप के पास बेहतरीन डिज़ाइनर हैं। जिन के जरिए आप अपनी डिज़ाइन बनवा सकते हैं। मैंने सिर्फ एक बात कही थी। लेकिन आप लोग ज़्यादा समझ सकते हैं क्योंकि आप लोगों का यही काम है।
श्लोका ने अपनी बात कही। जो कि बिलकुल सही थी। क्योंकि शिवाय का यही काम था। और श्लोका इस से अंजान थी।
शिवाय ने उसकी बात बहुत ध्यान से सुनी। वह जो कह रही थी गलत नहीं कह रही थी।
हां ठीक है तुम सही कह रही हो। लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम एक बार अपने आईडिया दो। फिर मैं फाइनल करता हूं कि मुझे क्या करना है। शिवाय ने सोचते हुए कहा।
ठीक है। श्लोका डिज़ाइन देखती जाती है। शिवाय उसे दिखाता जाता है। तुम इस को दायें-बायें कर के देखो मैं आ रहा हूं। शिवाय लैपटॉप पर उसे बता कर चला गये।
श्लोका मुस्कुरा दी शिवाय के इस तरह समझाने पर। लैपटॉप चलाने की एक्सपर्ट को शिवाय समझा रहे हैं।
श्लोका सारे डिज़ाइन को बहुत गौर से देखती जाती और फाइनल करती जाती। वह चाहती तो अभी बहुत कुछ कर सकती थी लेकिन वह अभी करना नहीं चाहती थी।
शिवाय आयें देख लें। श्लोका ने शिवाय से कहा जो वापस जाकर अपना काम कर रहे थे।
शिवाय ने तुरंत किसी को फोन करके अपने केबिन में बुलाया।
उसी वक्त एक लड़की आ गई। जी सर आप ने बुलाया।
यस, देखो मैम कुछ बता रही हैं उसको नोट करो। और अनुष्का मैम को बता देना। वह अभी जा चुकी है। शिवाय ने उस लड़की से कहा।
श्लोका तुम स्नेहा को सब बताओ। कहते हुए शिवाय भी आकर वहीं श्लोका के सामने बैठ गया। और स्नेहा श्लोका के बगल में बैठ गई। एक-एक कर श्लोका बताती गई। और स्नेहा नोट करती गई।
शिवाय तो उसे देखता रह गया। जिस समझदारी और ध्यान से वह सब कर रही थी। शिवाय उससे बहुत इम्परेस हुआ। श्लोका मेरे दिल ने तुम्हें चुन कर कोई गलती नहीं की। शिवाय ने मन ही मन अपनी तारीफ की।
सर मैंने सब नोट कर लिया है मैं अनुष्का मैम को बता दूंगी । स्नेहा उठते हुए कहती है।
ठीक है। अब आप जा सकती हैं। उसी के साथ श्लोका भी उठ खड़ी हुई। शिवाय भी उठ गये।
मैं भी अब जा रही हूं। स्नेहा के जाते ही श्लोका ने कहा।
कहां जा रही हो घर? शिवाय पैंट की पाकेट में हाथ डालते हुए पूछते हैं।
जी, श्लोका तो शिवाय की इस अदा पर मर मिटी। क्या स्टाईल था इस वक्त शिवाय का। श्लोका मुस्कुरा दी।
क्या हुआ? शिवाय को उसकी मुस्कराहट से हैरत हुई।
कुछ नहीं। कह कर श्लोका आगे बढ़ गई।
मैं भी चल रहा हूं। दो मिनट रुको। शिवाय अपना लैपटॉप उठा कर उसको टेबल पर रख कर बन्द करता है। और श्लोका के साथ बाहर निकल जाता है। दोनों पार्किंग में जाकर गाड़ी में बैठ कर घर के लिए निकल जाते हैं।
पूरे रास्ते वह दोनों फैशन शो के बारे में बातें करते रहे। शिवाय से बात करके श्लोका को फैशन शो के बारे में बहुत कुछ और भी मालूम हो गया। जिसकी उसे जानकारी नहीं थी।
घर के बाहर शिवाय ने गाड़ी रोक दी। श्लोका उतर गई।
सुनो...
हूं....
सुबह वाली बात भूला नहीं हूं मैं। शिवाय ने कहा। और गाड़ी स्टार्ट करके वापस मेन रोड पर मुड़ गये। और वह देखती रह गई।
♥️
शादी की तैयारी हो गई?
शिवाय ने बैठते ही पूछा।
हां चल रही है। एक दिन तुम सब को भी चलना है। शेरवानी भी देख लूंगा। और बाकी सामान भी ले लूंगा। रवि ने कहा।
ठीक है जब चलना होगा बोल देना। सब ने कहा।
और तुम बताओ तुम्हारा? हेमंत ने मुस्कुरा कर पूछा।
बहुत मस्त... शिवाय ने मुस्कुरा कर कहा।
सच बताऊं तुम्हें खुश देखकर बहुत खुशी हो रही है। और थोड़ी देर पहले वह साथ थी। तो कुछ ज़्यादा ही खिल रहे हो। हेमंत ने प्यार से कहा।
अच्छा ऐसा है। शिवाय भी हंस पड़ा।
क्या बात है किस बात पर इतनी हंसी आ रही है? अशोक ने भी मुस्कुराते हुए पूछा। जो अभी-अभी आया था।
आज कल महफ़िल की जान दो ही लोग हैं। एक अपना रवि जिसकी शादी हो रही है। और दूसरा अपना शिवाय जिसकी आगे होगी। हम दोनों को तो कोई पूछता भी नहीं है।
हेमंत ने बेचारी सी शक्ल बना कर कहा। और सब हंस पड़े।
कोई बात नहीं कभी अपना भी वक्त आया था। उसी तरह आज इनका वक्त है। फिर हम सब एक जैसे हो जायेंगे। और सब एक बार फिर हंस पड़े।
अच्छा यह बताओ शापिंग के लिए कब चल रहे हो फाइनल कर लेते हैं। उसे हिसाब से मैं वक्त निकाल लूंगा। क्योंकि इतने सारे काम हैं कि समझ नहीं आता कि कौन सा काम पहले करुं और कौन सा काम बाद में। रवि ने सोचते हुए कहा। सैटरडे (Saturday) को रख लेते हैं। अगर सब कोई फ्री हो तो?
हां ठीक है। नो प्राब्लम। सब ने कहा।
ठीक है शापिंग के बाद हम सब साथ में डिनर करेंगे। मेरी तरफ से। रवि ने खुशी से कहा।
ओ के डन👍
शिवाय श्लोका को भी शादी में लेकर आना। रवि को अचानक से याद आ गया।
हां तो बिल्कुल ले कर आऊंगा। अगर तुम ना भी कहते तब भी लेकर आता। शिवाय ने हक से कहा।
वैसे सब ठीक चल रहा है ना? अशोक ने फिक्रमंदी से पूछा।
हां सब ठीक चल रहा है। बल्कि यह कहूं कि बहुत अच्छा चल रहा है। और एक बात बताऊं उसको ड्राइविंग भी आती है। शिवाय ने खुशी से बताया।
अरे वाह यह तो बहुत अच्छी बात है। एक गांव की लड़की और ड्राइविंग? हैरत की बात है।
वही तो मैं भी हैरान रह गया। वह भी मेरी बी एम डब्ल्यू शिवाय श्लोका की ड्राइव याद करते हुए बोला।
लेकिन तुम तो अपनी गाड़ी किसी को देते नहीं हो। फिर वह? बात समझ नहीं आई। रवि ने सोचते हुए पूछा।
हां यार बात कुछ ऐसी हो गई कि उसी ड्राइव करनी पड़ी। और मुझे गाड़ी देनी पड़ी। शिवाय ने गोल मोल जवाब दिया।
समझ गये सब समझ गये हम लोग। अशोक ने हंसते हुए कहा। और सब हंस पड़े।
♥️
शिवाय घर आकर पहले रूम में चले गये। फ्रेश होकर वह चेंज करके लेट गये। उसे सुबह की बात याद आ गई। अमोल क्यों होटल गया। और वह लड़की कैसी कि वह भी चली गई। उसने अमोल को मना क्यों नहीं किया।
एक लड़का चाहे जैसी भी हरकत करें। लड़की को मानना नहीं चाहिए। उसने क्यों अमोल को मना नहीं किया। अगर मैं श्लोका को ऐसा बोलूं तो चलेगी? कभी भी नहीं चलेगी। और ना ही मैं कभी ऐसा बोलूंगा।
एक लड़का और लड़की को रिश्ते को बहुत पाक रखना चाहिए कि अगर कभी पीछे मुड़कर देखें तो शर्मिन्दा ना हों। शिवाय सोचे जा रहा था। हर बात के बाद वह सोचता कि अगर मैं ऐसा करता तो श्लोका क्या करती। और हर बार उसका दिल श्लोका को सही साबित कर देता। और फिर उसे अपने दिल पर फख्र हुआ जिसने श्लोका को चुना। उसे अपनी धड़कन पर गर्व हुआ जो श्लोका को देख कर धड़का। और वह मुस्कुरा उठा। और ऐसा लगा उसके मुस्कुराते ही उसका रोम-रोम खिल उठा हो। वह उठ कर खाने के लिए नीचे चला गया।
कल मिस्टर खन्ना के यहां चलना है सब को याद हैं ना? और श्लोका तुम को भी चलना है। मेरे दोस्त के बेटी की शादी है। सुधीर जी ने खाने के बाद कहा। और सब को देखने लगे।
हां डैड याद है। खन्ना अंकल इतना मानते हैं हम सब को। अराध्या ने कहा।
हां सब को चलना है। ममता जी ने भी कहा।
मुझे रहने दें। श्लोका ने धीरे से कहा।
क्यों रहने दें। सब को चलना है। सुधीर जी ने बात क्लीयर कर दी।
अंकल मैं किसी को जानती नहीं वहां। थोड़ा अजीब लगेगा। आप मुझे रहने दें। श्लोका ने एक बार फिर मिन्नत की।
नहीं, तुम भी चल रही हो। तुम अराध्या के साथ रहना। क्यों अराध्या? सुधीर जी श्लोका से कहकर अराध्या की तरफ देखने लगे।
जी डैड आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मैं सुमन को अपने साथ रखूंगी। अराध्या ने खुशी से कहा। और शिवाय ने सुकून की सांस ली। वरना अगर वह नहीं जाती तो फिर वह भी ना जाता या फिर वह उसे ज़बरदस्ती लेकर जाता।
जारी है...
Comments
Post a Comment