धड़कन | भाग 15 | Dhadkan Part 15 | Heart Touching Hindi Love Story

जी डैड आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। मैं सुमन को अपने साथ रखूंगी। अराध्या ने खुशी से कहा। और शिवाय ने सुकून की सांस ली। वरना अगर वह नहीं जाती तो फिर वह भी ना जाता या फिर वह उसे ज़बरदस्ती लेकर जाता।

सुबह श्लोका जल्दी कालेज चली जाती है।

शिवाय भी आफिस जाकर उलझ जाता है। क्योंकि अनुष्का ने डिज़ाइन बनाने से इंकार कर दिया था। उन्होंने कह दिया था कि जो डिज़ाइन उन्होंने बनाई है वह परफेक्ट है। और वह उसमें इतने चेंजिंग नहीं कर सकती। जो श्लोका ने बताया था। 

बल्कि अनुष्का ने तो श्लोका की राय को बिल्कुल बकवास कह दिया था। कोई और डिज़ाइनर दूसरे के स्केचिंग पर काम नहीं करना चाहता था। क्योंकि हर किसी के काम करने का तरीका अलग होता है। और नये सिरे से बनवाने का टाइम नहीं था। इन्हीं उलझनों में उसका सारा टाइम बीत गया। शाम को वापस आकर शिवाय तुरंत सो गया। क्योंकि वह बहुत थक गया था। और रात में शादी में भी जाना था।

श्लोका कालेज से आकर फ्रेश होकर अलमारी खोल कर खड़ी हो गई। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कौन सा ड्रेस पहने। पता नहीं कैसे लोग हैं। और फिर उसने एक ड्रेस निकाल ली। और आराम करने के लिए लेट गई। दस बजे जाना था। कल ही अंकल ने बता दिया था।

दस बजे श्लोका तैयार हो गई। वह नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से कोई लेट हो। वह नीचे चली गई। दस मिनट के अंदर ही बाकी लोग भी आ गये।

वाव सुमन तुम्हारी ड्रेस कितनी प्यारी है। और तुम भी बहुत सुंदर लग रही हो। अराध्या जैसे ही बाहर की तरफ हॉल में आई जहां पर श्लोका बैठी थी। वह श्लोका को देखते ही सॉक्ड हो गई। उसी वक्त शिवाय और बाकी लोग भी अंदर हॉल से बाहर हॉल में आ गये। और अराध्या के ऐसा कहते ही हर किसी की नज़र श्लोका पर पड़ गई।

श्लोका ने कॉफी कलर के डिज़ाइनर लहंगा और लाइट मेकअप के साथ कान में डायमंड ईयररिंग्स पहन रखा था। एक हाथ में डायमंड ब्रेसलेट और एक हाथ में हमेशा की तरह घड़ी पहनी हुई थी। हमेशा की तरह उसके बायें हाथ के अंगूठे में रिंग भी थी। गले में उसने कुछ नहीं पहना था।

शिवाय भी उसे देखता रह गया। क्योंकि वह बहुत ही ज़्यादा खूबसूरत लग रही थी। ममता जी को भी उसे देख कर हैरत हुई। कौन कह सकता था कि वह गांव की लड़की है।

चलो अब चलें। अमोल आगे बढ़ते हुए कहता है। और उसी के साथ हर कोई बाहर निकल जाता है।

सुमन तुम भाई के साथ बैठ जाओ। अराध्या सुमन से कहती है और गाड़ी में ममता जी के बगल में पीछे बैठ जाती है। आगे अमोल बैठ जाता है। सब के बैठते ही ड्राइवर गाड़ी स्टार्ट कर देता है।

श्लोका शिवाय की ओर देखती है। शिवाय गाड़ी का दरवाज़ा खोल देते हैं। श्लोका खामोशी से बैठ जाती है। इस वक्त शिवाय के चेहरे की चमक देखने लायक थी। भला श्लोका उसके साथ थी। शिवाय बैठते ही गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं। गाड़ी मेन रोड पर दौड़ने लगती है।

थैंक्स.... शिवाय ने खुशी से कहा।

किस बात  के लिए? श्लोका को हैरानी हुई।

मेरे साथ चलने के लिए।

और कोई चारा भी तो नहीं था। श्लोका ने उदासी से कहा।

अच्छा, अगर कोई आप्शन होता तो तुम यहां नहीं होती। शिवाय ने हंसते हुए पूछा।

आप खुद ही समझदार हैं। अब मैं क्या कहूं। श्लोका ने मासूमियत से कहा।

और उसकी मासूमियत देख कर शिवाय मुस्कुरा दिया। दरअसल डैड पहले ही चले गए थे। वरना वह होते तो शायद तुम यहां नहीं होती इस वक्त।

शिवाय ने मुस्कुरा कर कहा। श्लोका भी मुस्कुरा दी। 

एक बात पूछूं? आप बहुत अलग-अलग रहते हैं। ऐसा क्यों? आप हर जगह अकेले अपनी गाड़ी से जाते हैं? जो सवाल श्लोका को बहुत दिन से परेशान कर रहा था। वह सवाल आज उसने पूछ ही लिया।

श्लोका के सवाल से शिवाय के चेहरे का रंग बदल गया। थोड़ी देर पहले वाली चमक पता नहीं कहां गायब हो गई। 

हां मैं हर जगह अपनी गाड़ी से अकेले जाता हूं। बिल्कुल अकेला ड्राइवर भी नहीं। शिवाय ने तुरंत बात संभाल ली।

आप का कभी दिल नहीं करता कि आप भी सब के साथ जाएं? श्लोका की नज़र शिवाय पर थी।

नहीं, शिवाय ने बहुत सख्ती से श्लोका की ओर देख कर कहा। और सामने देखने लगा।

कुछ तो बात है जिससे शिवाय दुखी हैं। क्या है यह श्लोका नहीं समझ पा रही थी।

तुम इस ड्रेस में बहुत अच्छी लग रही हो। शिवाय की नज़र श्लोका पर गई तो इस बार उसने तारीफ कर दी। वरना वह कितनी देर से तारीफ करना चाह रहा था।

श्लोका सिर्फ मुस्कुरा दी। और शिवाय को देखने लगी। ब्राऊन कलर के थ्री पीस सूट में शिवाय भी बहुत हैंडसम लग रहे थे। 

क्या हुआ? मैं भी हैंडसम लग रहा हूं ना? शिवाय ने मुस्कुरा कर पूछा।

चुपचाप सामने देख कर गाड़ी चलाएं। श्लोका ने अपनी मुस्कुराहट छुपा कर कहा। शिवाय भी मुस्कुरा दिया।

जैसे ही गाड़ी रूकती है। श्लोका की नज़र लॉन पर पड़ती है जहां पर शादी थी। बहुत ही खूबसूरत सजावट थी। दोनों ही गाड़ी साथ ही साथ पहुंचती है। श्लोका ने देखा वह लोग भी निकल रहे थे। श्लोका भी गाड़ी का गेट खोलती है।

सुनो...

हूं...

अच्छा लग रहा हूं ना?

हूं....

थैंक्स.....

दोनों ही मुस्कुरा दिये। श्लोका और शिवाय दोनों बाहर निकल गये। शिवाय की चाबी गार्ड ने ले ली। और सब लोग आगे बढ़ गये। अराध्या श्लोका का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ने लगी।

वह रहे डैड, अंदर जाकर अराध्या को सुधीर जी दिख जाते हैं। सब लोग आगे बढ़ते हैं। सुधीर जी भी उनके पास आ जाते हैं। उसी वक्त एक लेडी आती हैं और श्लोका को देख कर कहती हैं।

सो ब्यूटीफुल तुम बहुत सुन्दर हो। और बहुत पढ़ी हुई भी लगती हो। 

जी, पी एच डी कर रही है। सुधीर जी ने कहा।

मुझे देखते ही लग गया था कि यह लड़की पढ़ी-लिखी है। तभी मैंने कहा। यह मेरे बेटे के लिए बिल्कुल परफेक्ट है। कहती हुई वह आगे निकल गईं। 

आप ने झूट क्यों बोला? ममता जी ने गुस्से से कहा।

सुधीर जी ने अपने होंठ पर उंगली रख कर उन को खामोश रहने का कहा। और आगे बढ़ गये। 

उन के जाते ही श्लोका समेत हर कोई सुधीर जी की तरफ हैरानी से देखने लगता है। हर कोई हैरान था कि सुधीर जी ने झूठ क्यों बोला। और श्लोका हैरान थी कि सुधीर जी ने सच क्यों बोला।

चलो सुमन तुम मेरे साथ चलो। अराध्या ने श्लोका से कहा।

नहीं अराध्या अभी तुम जाओ। मैं कुछ देर बाद तुम्हारे पास आती हूं।

श्लोका कहते ही आगे बढ़ जाती है। और वहां रखी कुर्सी पर बैठ जाती है। अराध्या आगे चली जाती है। ममता जी और अमोल भी आगे बढ़ जाते हैं।

शिवाय कुछ देर अपनी जगह खड़ा रहता है। और फिर श्लोका के पास चला जाता है। तुम ठीक हो? शिवाय ने धीमी आवाज़ में पूछा।

हां मैं ठीक हूं और आप भी जाएं। यहां मत बैठें। श्लोका ने सख्ती से कहा। 

शिवाय ने एक नज़र श्लोका को देखा। और उठ कर आगे बढ़ गये।

श्लोका सोचने लगी की अंकल ने क्यों कहा। उसके मन में यह भी आ रहा था कि अगर उन्होंने कहा है तो कुछ सोच कर ही कहा होगा। बहुत सारे सवालों से बचने के लिए वह अकेली बैठी थी। क्योंकि वह किसी के भी साथ जाती फिर चाहे वह अराध्या ही क्यों ना हो। परिचय देना ही पड़ता और परिचय के बाद बहुत सारे सवाल होते जो कि एक आम बात है। इस लिए उसे अकेले  बैठना ही ज़्यादा सही लगा। ना कोई पहचानेगा और ना ही सामने से सवाल आयेगा। लेकिन वह लेडी भी गज़ब की थी। श्लोका ने मन-ही-मन सोचा। और चुपचाप से बैठी रही।

सुमन चलो दुल्हन से मिल लेते हैं। अराध्या श्लोका के पास आकर कहती है।

हां ठीक है चलो। अब शादी में आये हैं तो दुल्हन को मुबारकबाद देना तो बनता है। श्लोका ने उठते हुए कहा। और अराध्या के साथ स्टेज पर चली जाती है। 

बहुत ही शानदार और खूबसूरत स्टेज था। दूल्हा दुल्हन भी उतने ही खूबसूरत थे। काफी रिच फैमली है। श्लोका  सजावट, ड्रेस और शान व शौकत देख कर सोचती है।

दुल्हन से मिल कर अराध्या वहां पर खड़ी और लड़कियों से बात करने लगती है। श्लोका चुपचाप अराध्या से कुछ कहे बिना स्टेज से उतर जाती है। 

उसके स्टेज से उतरते ही फिर वह लेडी पता नहीं कहां से उसके सामने आ जाती हैं। श्लोका उन को देख कर हड़बड़ा जाती है।

क्या नाम है तुम्हारा? स्मार्ट लेडी ने पूछा।

श्लोका, उसने धीरे से कहा।

नाम भी तुम्हारी तरह ही प्यारा है।

यह मेरा बेटा है केशव तुम इस से बात करो। मैं अभी आती हूं। तुम इसका फोन नंबर ले लेना। वह लेडी कहते ही दूसरी ओर निकल गई। और श्लोका को समझ नहीं आया कि वह क्या करे।

आप मौम की बात का बुरा ना मानें। जब बेटा शादी के लायक हो जाए तो इन मांओं को हर लड़की में अपनी बहू नज़र आती है। केशव मुस्कुराते हुए कहता है।

शिवाय की नज़र श्लोका पर ही थी।

मैं वैसे भी इस तरह की शादियों में नहीं आता हूं। लेकिन आज आना पड़ा। और मां को आप नज़र आ गई। केशव ने एक बार फिर अपनी बात रखी।

कोई बात नहीं। कहते हुए श्लोका आगे बढ़ गई। और जिस तरफ खाने का टेबल था वह वहीं पर चली गई। काफी बड़े ऐरया में खाने का इन्तेज़ाम था। श्लोका अपनी प्लेट में निकाल कर खाने लगी।

दूसरी तरफ शिवाय भी खाने के लिए आ गये। खाना खाते ही शिवाय का इरादा घर जाने का था।

डैड मैं घर जा रहा हूं। शिवाय खाना खाते ही सुधीर जी के पास जाकर कहते हैं।

ठीक है जाओ। सुधीर जी जानते थे कि उसको इन सब फंक्शन से कोई दिलचस्पी नहीं है। इस लिए वह उसे रोकते नहीं है।

उसी वक्त श्लोका भी सुधीर जी के पास आती है।

अंकल आप ड्राइवर से बोलें की मुझे घर छोड़ दे। 

शिवाय भी जा रहा है। इसी के साथ चली जाओ। सुधीर जी ने शिवाय की तरफ इशारा किया।

श्लोका ने शिवाय की तरफ देखा।

चलें।

श्लोका चुपचाप शिवाय के पीछे चल पड़ी।

गेट पर जाकर शिवाय ने अपना गाड़ी नंबर बताया। थोड़ी देर में उसकी गाड़ी गेट पर आ गई। शिवाय ने गेट खोला श्लोका खामोशी से बैठ गई। शिवाय भी अपनी साइड बैठ कर गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं।

जारी है...

धड़कन भाग 14

धड़कन भाग 16




 




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