धड़कन | भाग 16 | Dhadkan Part 16 | Heart Touching Hindi Love Story

गेट पर जाकर शिवाय ने अपना गाड़ी नं बताया। थोड़ी देर में उसकी गाड़ी गेट पर आ गई। शिवाय ने गेट खोला श्लोका खामोशी से बैठ गई। शिवाय भी अपनी साइड बैठ कर गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं।

आप रूकी क्यों नहीं? शिवाय श्लोका को देखता है।

बस ऐसे ही। आप क्यों नहीं रूके? श्लोका ने भी पूछ लिया। 

इतना रुक गया बहुत था। इस से ज़्यादा नहीं। शिवाय ने सादगी से कहा।

कोई परेशानी तो नहीं हुई। वह लेडी दोबारा नहीं ना मिली? 

शिवाय ने कुछ सोचते हुए पूछा।

कौन वह जो जाते ही मिली थी? 

हां वही। 

मिली थी दोबारा और अकेली नहीं। बल्कि बेटे के साथ। श्लोका ने हंसते हुए कहा।

क्या हुआ हंस क्यों रही हो। शिवाय को उसकी बात में दिलचस्पी हुई।

कुछ नहीं बेटे को मुझ से मिला रही थीं। 

कुछ लोगों की आदत होती है इस तरह से बात करने की। शिवाय ने कहा।

लेकिन यह मां बेटा दोनों ही अच्छे थे। श्लोका ने सोचते हुए कहा। किस तरह उन्होंने उसका चेहरा देख कर बता दिया कि वह पढ़ी-लिखी है।

अच्छा एक ही मुलाकात में मां और बेटा दोनों पसंद आ गये। क्या बात है। शिवाय ने भी मुस्कुराकर कहा।

हां, क्योंकि मां कुछ और समझा कर बेटे को गई थी। और बेटा कुछ और ही बात कर रहा था। मां कह कर गई थी कि फोन नंबर लेना। मगर उसने एक बार भी उस तरह की कोई बात नहीं की। और ना ही नम्बर मांगा।

श्लोका ने शिवाय को देख कर कहा।

अच्छा, अब घर जाकर बेटा डांट सुनेगा।

शिवाय ने हंस कर कहा। श्लोका भी हंस पड़ी।

वैसे अगर ज़्यादा पसंद आ गया तो बताओ रिश्ते की बात की जाए।

शिवाय ने सीरियस होकर पूछा।

चुपचाप से गाड़ी चलाएं। फिर मैं बताती हूं पसंद है या नहीं। श्लोका कह कर बाहर देखने लगी। और शिवाय उसे।

वैसे जो भी हो। आज का दिन बहुत शानदार गया। शिवाय एक मुहब्बत भरी नज़र श्लोका पर डाल कर कहता है। शिवाय की आंखों में इस वक्त एक नशा था। जिसे शायद मुहब्बत कहते हैं।

घर पहुंच कर दोनों साथ-साथ ऊपर जाते हैं। श्लोका जैसे ही रूम में जाती है शिवाय भी साथ में अंदर चले जाते हैं। श्लोका को हैरानी होती है मगर खामोश रहती है। शिवाय कोट उतार कर वहीं सोफे पर रख देते हैं। और बड़े आराम से सोफे पर बैठ जाते हैं।

श्लोका अपनी ज्वेलरी उतारने के लिए ड्रेसिंग टेबल के पास चली जाती है। 

एक बात कहना था। शिवाय उसे शीशे में देखते हुए कहता है।

हां बोलें। श्लोका अपनी घड़ी उतारते हुए कहती है।

तुम को जहां भी जाना हो अब गाड़ी से जाना। कौन सी गाड़ी लोगी बता दो तो मैं चाबी दे दूं। तुम को गाड़ी चलाने आता है अगर तुम पहले बता देती तो यह काम बहुत पहले ही हो जाता। 

शिवाय ने बहुत अपनेपन से कहा। 

श्लोका ने मुड़कर शिवाय को देखा। जब की उसे शिवाय शीशे में भी नज़र आ रहे थे। वह वापस शीशे की ओर मुड़  गई। और अपने बालों की क्लिप निकालने लगी।

तुम ने जवाब नहीं दिया मेरी बात किया।

मुझे कोई गाड़ी नहीं चाहिए।

क्यों नहीं चाहिए तुम को रोज़ जाना होता है। और कह रही हो नहीं चाहिए। शिवाय ने नाराज़गी से कहा। अच्छा स्कूटी से जाओगी? कल चलो मेरे साथ स्कूटी ले लेते हैं। शिवाय ने दुसरा आप्शन भी रख दिया।

नहीं मुझे कुछ नहीं चाहिए। जब चाहिए होगा तो मैं आप को बता दूंगी। और अब इस बारे में कोई बात नहीं होगी। श्लोका ने बात खत्म दी। 

अच्छा और जो तुम ने कल क्या था उसका क्या? शिवाय ने उदासी से पूछा।

मैंने कुछ गलत नहीं किया। श्लोका ने भी सख्ती से कहा।

क्यों मना कर रही हो? प्लीज़ मान जाओ। शिवाय ने रिक्वेस्ट की।

मैं होती कौन हूं। श्लोका के दर्द भी ज़ाहिर हो गये। 

शिवाय लाजवाब हो गया। उसे अपने अल्फाज़ याद आ गये।

श्लोका अपना नाइट ड्रेस अलमारी से निकाल कर अंदर चेंज करने चली गई। वापस आई तब भी शिवाय वैसे ही बैठे थे।

मैंने जो कहा गुस्से में कह दिया था। लेकिन तुम क्यों इस तरह कह रही हो। शिवाय उसके सामने आकर खड़े हो गये। और उसे देखने लगे। 

अब वह क्या बताता कि वह उसकी क्या लगती है। श्लोका तुम से पहले भी मेरा कोई नहीं था और तुम्हारे बाद भी मेरा कोई नहीं है। तुम जानना चाहती हो ना कि तुम कौन होती है। तो बता दूं कि तुम मेरी ज़िन्दगी हो। तुम मेरी जान हो। तुम्हें देख कर मैं चाहता हूं मेरी सुबह हो और तुम्हें देख कर मेरी शाम हो। 

नींद आने से पहले तुम मेरे ख्यालों में रहती हो। और नींद आने के बाद तुम मेरे ख्वाबों में रहती हो। 

शिवाय उसे निहारते हुए सोचे जा रहा था। उसके सोचों का कोई अंत नहीं था। लेकिन उसकी ज़ुबान खामोश थी।

दोनों एक दूसरे को देखे जा रहे थे। नज़र से नज़र मिली थी। दिल मुहब्बत की गवाही दे रहा था। मगर ज़ुबां खामोश थी।

शिवाय उसकी आगे आई बालों की लटों को बहुत प्यार से पीछे करता है। एक नज़र दोबारा श्लोका को देखता है और गुड नाईट बोल कर चला जाता है।

श्लोका खामोश अपनी जगह खड़ी रह जाती है। शिवाय यह कैसी मुहब्बत है। वह मन ही मन शिवाय से सवाल करती है। लेकिन उस का जवाब देने के लिए शिवाय वहां नहीं था।

श्लोका कुछ देर वैसे ही शिवाय के बारे में सोचती रही। और फिर बिस्तर पर लेट गई। नींद तो आने से रही। सोचों का सिलसिला जारी था। कल कालेज नहीं जाऊंगी। यही सोचते हुए वह सो गई।

शिवाय चेंज करते हुए सिर्फ श्लोका को ही सोच रहे थे।

सुबह श्लोका आराम से सोती रही। आज उसका जल्दी उठने का कोई इरादा नहीं था। 

शिवाय भी नाश्ता करते ही आफिस चले गए। आफिस जाते ही शिवाय ने अनुष्का को फोन कर के बुलाया। लेकिन उसने मना कर दिया। आने से भी और इस प्रोजेक्ट पर काम करने से भी।

शिवाय सोचों में गुम था। और फिर उसने श्लोका को फोन कर दिया।

क्या हुआ सो रही थी? शिवाय को उसकी आवाज़ से लगा।

जी,

आज तुम को कोई काम है? 

नहीं,

ठीक है फिर रेडी हो कर आफिस आओ। मैं ड्राइवर को बोल देता हूं। 

ठीक है।

श्लोका कुछ देर वैसे ही लेटी रही। फिर उठ कर तैयार हो गई। और नाश्ता करते ही आफिस चली गई। नॉक करके वह शिवाय के केबिन में गई।

बैठो, उसे बैठने का कह कर शिवाय कोहनी को टेबल से टिका कर दोनों हाथ ठोढ़ी पर रख कर उसे देखने लगता है। 

क्या हुआ? क्यूं बुलाया था? श्लोका शिवाय की हरकत से डिस्टर्ब हो गई।

कुछ काम था। शिवाय वैसे ही बैठे-बैठे बोले। श्लोका जब सामने हो तो उस का जी चाहता है कि उसे देखता रहे।

तो बताएं।

स्नेहा तुरंत आओ। शिवाय सीधे होते ही इंटरकॉम पर कहते हैं।

यस सर....

तुम दोनों मिल कर आज डिज़ाइन फाइनल करो। शिवाय ने हुक्म दिया।

लेकिन सर मैं कैसे? स्नेहा घबरा गई।

क्यों आपको डिज़ाइन बनाने नहीं आता है। शिवाय ने सख्त आवाज़ में पूछा।

आता है सर लेकिन मैंने अभी ज्वाइन किया है। मैंने पहले भी कहा था कि मुझे काम करने का तजुर्बा नहीं है। स्नेहा अभी भी घबराई हुई थी।

काम करोगी तभी तो तजुर्बा होगा। आप जाएं मैम के साथ और काम कम्प्लीट करें। शिवाय ने आर्डर दिया।

लेकिन शिवाय मुझे जो बताना था मैं बता चुकी। उससे आगे की मुझे जानकारी नहीं है। श्लोका भी हैरान थी कि शिवाय को क्या हो गया है।

मुझे अब कुछ नहीं सुनना। आप दोनों जाएं और डिज़ाइन तैयार करें। इस वक्त शिवाय बॉस बन गये।

ठीक है सर कहते ही स्नेहा बाहर जाने लगी।

आप लोग यहां बैठ कर काम करेंगी। आप अपना लैपटॉप लेकर आयें। बॉस का एक और आर्डर आया। शिवाय ने सोचा इसी बहाने कम से कम वह श्लोका को देख तो लेगा। लेकिन उसने कुछ भी ज़ाहिर नहीं किया।

श्लोका सिर्फ शिवाय को देख रही थी। इस वक्त उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं थे। 

स्नेहा लैपटॉप लेकर आ गई और सोफे पर बैठ गई। श्लोका भी वहीं स्नेहा के साथ बैठ गई।

श्लोका ने एक बार फिर सारी डिज़ाइन को बहुत ध्यान से देख कर काम शुरू कर दिया। 

शिवाय की नज़र बार-बार श्लोका पर उठ रही थी। और उसके मन में एक ही अल्फाज़ गूंज रहे थे मैं होती कौन हूं... कल रात से शिवाय अपसेट था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह श्लोका को कैसे बताए कि वह उससे मुहब्बत करता है। एक बार फिर शिवाय ने श्लोका की तरफ देखा और अपने लैपटॉप पर नज़रें जमा ली।

जारी है...

धड़कन भाग 15

धड़कन भाग 17






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