धड़कन | भाग 17 | Dhadkan Part 17 | Heart Touching Hindi Love Story

शिवाय की नज़र बार-बार श्लोका पर उठ रही थी। और उनके मन में एक ही अल्फाज़ गूंज रहे थे मैं होती कौन हूं। कल रात से शिवाय अपसेट था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह श्लोका को कैसे बताए कि वह उससे मुहब्बत करता है। और वह उसकी सब कुछ है। एक बार फिर शिवाय ने श्लोका की तरफ देखा और अपने लैपटॉप पर नज़रें जमा ली।

आप लोग लंच कर लें। फिर काम करें। शिवाय घड़ी देख कर कहते हैं।

ठीक है सर थोड़ा सा काम बाकी है कर लूं। फिर लंच कर लेते हैं। स्नेहा ने जवाब दिया।

थोड़ी देर बाद स्नेहा जाने लगी।

क्या हुआ कहां जा रही हैं आप? शिवाय स्नेहा को जाते देख पूछ्ता है।

सर लंच करने। स्नेहा ने सिर झुकाकर कहा।

आप यहीं पर श्लोका के साथ लंच कर लें। शिवाय ने आर्डर दिया।

नहीं सर मैं अपना लंचबॉक्स लेकर आई हूं। स्नेहा को अच्छा नहीं लगा।

ठीक है आप श्लोका को भी साथ ले जाएं और साथ में लंच कर लें। शिवाय स्नेहा से कहकर श्लोका की तरफ देखते हैं।

श्लोका तुरंत उठ खड़ी होती है। और सीधे बाहर निकल जाती है शिवाय की तरफ देखे बिना।

लंच करते हुए भी दोनों काम के बारे में डिस्कस करती रही। लंच करते ही वह दोनों वापस शिवाय के केबिन में जाने लगती है।

स्नेहा मैम अभी नहीं सर ने मना किया है किसी को भी अंदर जाने से। वहां पर रिसेप्शन पर बैठी लड़की कहती है।

ओ-के स्नेहा वापस चली जाती है। लेकिन श्लोका वहीं रूक जाती है।

अंदर कोई और भी है? कोई मीटिंग चल रही है?

नहीं।

ओ-के कहते ही श्लोका आगे बढ़ती है।

मैम मत जायें प्लीज़, मेरी जॉब चली जायेगी। थोड़ी देर में आप चले जाना। जब सर बुलाएंगे। लड़की डर गई।

आप डरें नहीं आप को कुछ नहीं होगा। और वह आगे बढ़ती रही। और पीछे-पीछे वह लड़की।

मैम मैं एक बार सर से पूछ लेती हूं। वह अपने फोन से फोन मिलाने लगी।

आप जाएं अपनी जगह और कोई फोन नहीं करेंगी। वरना मैं आप को नौकरी से निकलवा दूंगी कहती हुई श्लोका केबिन में चली गई। लेकिन अंदर जाकर वह देखती है वहां पर शिवाय नहीं थे। वह इधर-उधर देखती है उसे दो दरवाज़े दिखते हैं। एक को खोलती है उसी में उसे शिवाय दिख जाते हैं। वह अंदर चली जाती है।

मैंने मना किया था उसके बावजूद आप यहां? 

आप फिर सिगरेट पी रहे हैं। श्लोका शिवाय के सवाल को नज़रंदाज़ कर के पूछती है।

शिवाय एक नज़र श्लोका को देखता है। और उसका हाथ पकड़ कर अपने पास बैठा लेता है। और उसे देखने लगता है।

कल रात भी आप ने सिगरेट पी थी ना? श्लोका शिवाय के चेहरे को देखते हुए पूछती है। जो कि बहुत ही उदास और दुखी लग रहा था।

क्यूं तुम ने देखा था?

नहीं।

फिर...

फिर भी मुझे पता है कि आप ने पी होगी। श्लोका ने बहुत यकीन से कहा।

इतना यकीन...

हां क्योंकि मैं आप को जानती हूं। श्लोका ने यकीन से कहा। और शिवाय उसे हैरानी से देखने लगे। इतने कम वक्त में यह मुझे पहचान गई। जो मुझे जानती भी नहीं थी और मेरे अपने जो बचपन से मुझे जानते हैं। मगर पहचान नहीं पाए।

शिवाय के चेहरे की नसें तन गई। उसकी आंख डबडबा गई।

मुझे माफ कर दें शिवाय। मैं जब से आफिस आई हूं मैं देख रही हूं कि आप टेंशन में हैं। इस लिए मुझे लगा कि आप ने रात में भी पी होगी। श्लोका शर्मिन्दा हो गई। लेकिन शिवाय कुछ कहे बिना उसके कंधे पर अपना सिर रख देते हैं। और आंख बन्द कर लेते हैं। शिवाय की सिगरेट ऐश ट्रे में सुलग रही थी। 

शिवाय मैंने कल ऐसे ही कह दिया था। मैंने आप की बात को सीरियस नहीं लिया था।  

मुझे पता है तुम ऐसी नहीं हो। लेकिन मैंने कहा क्यूं मुझे खुद पर गुस्सा आ रहा है। शिवाय सीधे हो कर कहते हैं।

शिवाय अब आप शांत हों पहले। 

मेरी एक बात मानोगी? मैं जो भी कहूं तुम नाराज़ नहीं होगी? शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर कहता है।

ऐसा कैसे हो सकता है। मैं नहीं मान सकती आप की बात। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा।

अच्छा मतलब तुम नाराज़ होगी। अब शिवाय के चेहरे पर भी मुस्कुराहट थी।

बिल्कुल...

मतलब मुझे तुम से सोच कर बात करनी होगी। वरना तुम नाराज़ हो गई तो? 

अब यह आप जानें। श्लोका ने लापरवाही से कहा।

अच्छा एक बात बताओ। तुम अंदर आ कैसे गई। क्योंकि मैं जब मना कर देता हूं कोई अंदर ना आये तो उसके बाद कोई नहीं आ सकता। फिर तुम? शिवाय हैरान था।

आप ही अंदाज़ में।

मतलब...

कोई अंदर आया तो आप नौकरी से निकाल देते। वही वाली चाल मैंने चल दी। श्लोका ने आंख मारते हुए कहा। और उसकी हरकत पर शिवाय बहुत ज़ोर से हंस देता है। मतलब तुम धमकी देकर अंदर आ गई। शिवाय बहुत खुल कर हंसा उसकी बात पर। लग ही नहीं रहा था कि वह थोड़ी देर पहले टेंशन में था।

लेकिन मैं किसी को इतनी छोटी बात पर काम से नहीं निकालता। वह तो मैं धमकी दे देता हूं। वरना कोई भी उसकी मिन्नत करके अंदर आ जाए। शिवाय अभी भी मुस्कुरा रहे थे।

तो मैं कौन सा उसे नौकरी से निकाल रही थी। मैं होती कौन हूं उसे निकालने वाली। श्लोका ने हंसते हुए कहा।

अच्छा, बात घूम फिरकर वहीं आ गई। अब मैं नाराज़ हो जाऊंगा। शिवाय श्लोका के चेहरे को देख कर कहते हैं। कितनी सादगी से वह उसे मुस्कुराहट दे गई।

श्लोका भी शिवाय को देखने लगी। और सोचने लगी कि वैसे मैं होती कौन हूं? और नज़र शिवाय के चेहरे से हटा कर अपने हाथ पर करती है जिसे शिवाय अभी तक पकड़े हुए थे। 

खाना खाया? वह हाथ छुड़ाते हुए पूछती है। शिवाय की नज़र भी हाथ पर जाती है। मगर वह छोड़ते नहीं हैं।

नहीं खाया। 

आप उठें पहले खाना खाएं। शिवाय के हाथ ना छोड़ने पर श्लोका के दिल की धड़कन कुछ तेज़ हो जाती है। शिवाय का दिल भी एक अलग ही साज़ गा रहा था।

श्लोका झटके से अपना हाथ छुड़ा कर उठ खड़ी होती है। मैं बाहर जा रही हूं। आप स्नेहा को बोल दें कि वह आ जाए। और आप भी लंच करें।

ओ-के मैडम शिवाय शरारत से कहता है। और श्लोका बाहर निकल जाती है। उसी वक्त स्नेहा अंदर आती है। और एक लड़का शिवाय का लंच लेकर अंदर आता है और सीधा अंदर कमरे में चला जाता है जहां पर शिवाय थे। और तुरंत देकर वापस निकल जाता है।

श्लोका और स्नेहा दोनों काम करने लगती है।

शिवाय खाना खाते हुए श्लोका के बारे में सोच रहे थे कि कैसे वह सारी चीज़ों को इतनी आसानी से हैंडल कर लेती है। शिवाय का दिल बहुत खुश था। उसका मूड बिल्कुल ठीक हो चुका था। लंच करके वह थोड़ी देर बाद बाहर निकले। एक नज़र श्लोका और स्नेहा पर डाल कर अपनी चेयर पर बैठ गये।

सर एक बार आप देख लें। सब फाइनल हो गया है। स्नेहा लैपटॉप लेकर शिवाय के पास जाती है। शिवाय एक-एक कर सारी स्केचिंग देखते हैं। उन्हें बहुत पसंद आती है।

ओ-के डन आप काम आगे का शुरू कर दें। और श्लोका की कोई भी हेल्प चाहिए तो आप डायरेक्ट श्लोका से बात कर लें। आप इन का नंबर ले लें। शिवाय ने देखने के बाद कहा। स्नेहा बाहर चली गई।

मैं भी जा रही हूं। शाम हो गई थी। श्लोका बहुत थक गई थी। एक जगह बैठे-बैठे। उस की आदत नहीं थी इस तरह बैठने की। वह तो क्लास में पूरे टाइम टहलते हुए क्लास लेती थी।

थक गई?

हूं थोड़ा सा।

घर जाकर आराम कर लेना।

हूं।

चाय पियोगी?

पिला दें।

कुछ खाओगी।

खिला दें।

गुड....

शिवाय ने तुरंत इंटरकॉम पर आर्डर दिया। और श्लोका को देखने लगे।

क्या देख रहे हैं?

तुम्हें। शिवाय ने नज़र हटा ली। क्योंकि यह आफिस था। श्लोका भी वापस मुड़ कर सोफे के पास चली गई।

आर्डर आते ही शिवाय भी वहीं सोफे पर आ कर बैठ गये। पिज़्ज़ा खाकर वह दोनों चाय पीने लगे। दोनों ही खामोश थे। चाय पीते ही श्लोका उठ खड़ी हुई। शिवाय भी साथ में उठ गये। पिज़्ज़ा खाकर मज़ा आ गया। श्लोका आगे बढ़ते हुए कहती है।

पसंद है पिज़्ज़ा? 

हां बहुत...

थैंक्स....शिवाय ने हाथ आगे बढ़ा कर कहा।

थैंक्स....श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा और हाथ मिला कर कहा।

और दोनों मुस्करा दिये।

मैं ड्राइवर से बोल देता हूं। 

ठीक है।

श्लोका बाहर निकल गई।

श्लोका अब मुझे डैड से तुम्हारे बारे में बात करनी होगी। अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। और मुझे पक्का यकीन है कि तुम भी मुझे पसंद करती हो। शिवाय ने मन ही मन सोचा। और वापस अपनी जगह आकर काम करने लगे।

जारी है...

धड़कन भाग 16

धड़कन भाग 18


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