धड़कन | भाग 18 | Dhadkan Part 18 | Heart Touching Hindi Love Story

 श्लोका अब मुझे डैड से तुम्हारे बारे में बात करनी होगी। अब मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। और मुझे पक्का यकीन है कि तुम भी मुझे पसंद करती हो। शिवाय ने मन ही मन सोचा। और वापस अपनी जगह आकर काम करने लगे।


श्लोका घर पहुंची तो सामने ही सुधीर जी मिल गये। वह उनसे गांव जाने का फाइनल करने लगी। क्योंकि बहुत सारे काम थे जो उसे गांव में अभी करने थे। सब फाइनल करके वह ऊपर चली गई। थोड़ा आराम करके उसने कुछ सामान रखे जो उसे गांव लेकर जाना था। फिर वह आराम करके वापस नीचे चली गई। उसी वक्त अराध्या भी अपने रूम से आई और दोनों बातें करनी लगी। अराध्या ने टीवी चालू कर दिया। फिल्म देखते हुए भी दोनों बातें करती रही। सुधीर जी भी वहीं आकर बैठ गए। 


डैड मुझे भी गांव लेकर चलें। मुझे सुमन का घर देखना है।


सुधीर जी के आते ही अराध्या ने कहा।


सुधीर जी ने श्लोका की तरफ देखा। नहीं बेटा इस बार रहने दो। फिर कभी चलना। इस बार श्लोका को कुछ काम है इस लिए वह तुम को गांव नहीं दिखा पायेगी। सुधीर जी ने बात संभाल ली।


ठीक है, लेकिन नेक्स्ट टाइम भूलना मत। अराध्या ने प्यार से कहा।


हां ठीक है। श्लोका ने कहा। और वह लोग टीवी देखने लगे। डिनर करते ही श्लोका रूम में चली गई। क्योंकि उसे पांच बजे निकलना था।


शिवाय आफिस से सीधा रवि के बताए ऐड्रेस पर पहुंच गये। सब ने मिलकर शेरवानी पसंद की। और फिर बाकी सामान लेकर वह मॉल चले गए। जहां से उसे कुछ और सामान लेना था।


अरे यार यह लड़कियों वाले सामान तुम बाद में लेना। मुझे यह सब समझ नहीं आयेगा। शिवाय उन सब को गर्ल्स काउंटर पर चीज़ों को देखता देखकर कहते हैं।


अरे शिवाय बस दो तीन सामान है। अभी हो जायेगा। रवि ने कहा। अच्छा ऐसा करो तुम भी कुछ श्लोका के लिए ले लो। उसे गिफ्ट कर देना। रवि ने उसे राय दी।


मैं क्या लूं? नहीं मुझे कुछ नहीं लेना। शिवाय ने लापरवाही से कहा।


कुछ उसकी पसंद का ले लो। अपनी पसंद से। हेमंत ने कहा।


शिवाय ने एक पल सोचा। उसकी आंखों के सामने श्लोका के बाल आ गया। और कुछ सोच कर वह इधर-उधर देखने लगा। और उसे अपने मतलब की चीज़ नज़र आ गया। उसने जाकर पसंद किया और ले लिया। कुछ और चीज़े भी उसे पसंद आ गई। और वह लेता गया।


लो अभी कह रहे थे कुछ समझ नहीं आ रहा है और अब इनका पैकेट देखो। हेमंत ने हंसते हुए कहा।


अब तुम्ही ने तो कहा था। इस लिए ले लिया। कहो तो वापस रख दूं। शिवाय ने झूठी नाराज़गी से कहा।


अच्छा रख लो। फिर मैं बताता हूं कि क्या करना है। हेमंत आंख से इशारा करके कहता है। और हेमंत की बात पर सब हंस पड़े। पेमेंट करके वह लोग बाहर निकल गये। गाड़ी में सामान रख कर वह लोग डिनर के लिए सीधे होटल गये। क्योंकि बहुत देर हो गई थी और उनको भूख भी लग गई थी।


डिनर करके शिवाय घर पहुंचे तो बहुत रात हो गई थी। वह सीधे अपने रूम में चले गये। 


रूम में जाते ही पैकेट रखकर शिवाय ने पहले बालकनी का दरवाज़ा खोल कर देखा। और बन्द करके वापस रूम में आ गये। 


सुबह सुधीर जी के साथ श्लोका गांव के लिए निकल गई।


संडे की वजह से शिवाय देर तक सोता रहा। फ्रेश होकर तैयार हो कर वह रूम से निकला तो उसकी नज़र सीधे श्लोका के रुम पर गई। रूम बंद देख कर वह नाश्ते के लिए नीचे चले गए। नाश्ता करते ही वह वापस रूम में आ गये। लंच टाइम जब वह नीचे गये तो पता चला कि वह लोग गांव गये हैं। शिवाय लंच करके वहीं बैठ कर अराध्या से बात करने लगता है। क्योंकि अब अराध्या उससे बहुत अच्छे से बात करती थी।


शिवाय रूम में जाते हैं तो डिनर टाइम आते हैं। सुधीर जी और श्लोका भी आ चुके थे। जैसे ही वह लोग डाइनिंग टेबल पर बैठते हैं अमोल के साथ एक लड़की आती है और सब को नमस्ते करके उनके साथ डाइनिंग टेबल पर बैठ जाती है।


सुधीर जी ने अमोल की ओर देखा। यूं जैसे पूछ रहे हो कि यह कौन है।


डैड यह सिमरन है मेरी दोस्त। सिमरन के भाई बाहर गए हैं। इस लिए यह दो-तीन दिन हमारे साथ रहेगी। अमोल ने खुशी से बताया।


आप का और कोई नहीं है? 


सुधीर जी ने सिमरन से पूछा।


जी नहीं, हमारा कोई नहीं है। हम भाई-बहन साथ रहते हैं। भाई को कुछ काम से दूसरे शहर जाना पड़ गया। इस लिए अमोल ने कहा कि मेरे घर चलकर रहो।


सिमरन ने बहुत तमीज़ से कहा।


पहली बार तुम्हारा भाई बाहर गया है? सुधीर जी की नज़र उसी पर थी।


नहीं पहले भी जा चुके हैं। सिमरन को कुछ समझ नहीं आया। 


तो फिर इस बार क्या हुआ कि आप को यहां आना पड़ा। सुधीर जी की आवाज़ सख्त थी।


मैं तो आना नहीं चाहती थी अमोल ही मुझे ज़बरदस्ती लेकर आया है। सिमरन की आंख डबडबा गई।


अमोल ने सिमरन को देखा। और सोचने लगा कि सिमरन ने ही तो कहा था चलने के लिए और अब मेरा नाम ले रही है। मगर वह खामोश रहा।


शिवाय सिमरन को देख कर ही गुस्सा हो गये थे। क्योंकि उसे होटल वाली रेट याद आ गई। मगर इस वक्त शिवाय खामोश ही रहे। क्योंकि सुधीर जी खुद ही सख्त हो गये थे।


आप कल सुबह अपने घर चली जाना इस तरह दोस्त के घर रहना अच्छी बात नहीं है। जब की दोस्त एक लड़का है। सुधीर जी ने सख्ती से कहा। और खाना शुरू कर दिया।


अब आ गई है तो रहने दें। दो-तीन दिन की तो बात है। ममता जी ने सुधीर जी से कहा।


सुधीर जी ने सिर्फ उन्हें देखा। मगर खामोश रहे। श्लोका खामोशी से खाती रही। खाना खाते ही सब लोग अपने-अपने रूम में चले गए।


आप को क्या ज़रूरत थी बीच में बोलने की जब मैं ने जाने का बोल दिया था तो? सुधीर जी ने गुस्से से पूछा।


दिक्कत क्या है उसे यहां रहने में। ममता जी भी भड़क गई।


मैं वहां पर इस लिए खामोश रह गया कि तुम्हारी इज़्ज़त बनी रहे। मगर आप उस लायक ही नहीं हो। सुधीर जी ने गुस्से से कहा। 


शिवाय ऊपर जाकर भी बहुत गुस्से में था। और गुस्से में उसे सिर्फ एक ही चीज़ याद रहती है। वह सिगरेट लेकर बालकनी में चला गया। श्लोका भी चेंज करके बालकनी में चली गई। उस ने जो सोचा था वही हुआ। शिवाय खड़े सिगरेट पी रहे थे।


शिवाय ने श्लोका को देखा मगर अपनी जगह खड़े रहे। श्लोका शिवाय के पास गई। अब क्या टेंशन हैं? जब की श्लोका को वजह पता थी। लेकिन वह शिवाय के मुंह से सुनना चाहती थी।


अमोल ने जो क्या वह सही है? शिवाय ने उसे ही पूछ लिया।


आप के शहर में बहुत कुछ होता है जिस से आप अंजान नहीं है। हमारे गांव में इन बातों को बहुत बुरा माना जाता है। इस लिए मैं कुछ नहीं कह सकती। आप शहर वाले हैं हो सकता है आप लोगों के लिए भी यह आम बात हो। क्योंकि अगर अमोल उस को लेकर आया है तो कुछ सोच कर ही लाया होगा। हर इंसान को अपनी हद पता होती है कि वह कहां तक जा सकता है। श्लोका ने सादगी से जवाब दिया।


अमोल सही रास्ते पर नहीं जा रहा है। उसको दुनिया की समझ नहीं है। शिवाय ने गुस्से से कहा।


आंटी को और आप लोगों को उसे समझाना चाहिए तब। श्लोका को हैरत हुई कि जब पता है कि अमोल सही राह नहीं जा रहा तो कोई उसे रोकता क्यों नहीं।


वह अपनी मां का बेटा है जब मां ही गलत हों तो बेटे को क्या कहें। शिवाय गुस्से से बोले।


बुरी बात शिवाय इस तरह नहीं कहते। श्लोका को बुरा लगा।


शिवाय ने एक नज़र श्लोका को देखा और खामोश हो कर सिगरेट पीने लगे।


शिवाय एक बात कहूं?


हां बोलो।


यह लड़की मुझे सही नहीं लग रही है। आप किसी तरह इसके बारे में जानकारी ले सकते हैं किसी से? श्लोका ने डरते हुए पूछा।


जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो दूसरे को क्या कहे। शिवाय ने दुख से कहा।


आप ठीक कह रहे हैं लेकिन मैं जो कह रही हूं उसका बताएं। लेकिन किसी को भी पता नहीं लगना चाहिए। क्योंकि मुझे सिर्फ शक है यकीन नहीं।


क्या तुम सीरियस हो? शिवाय ने पूछा।


 हां....


ओ के मैं देखता हूं।


अब छोड़ो यह सब। तुम बताओ गांव जाकर तुम्हारा काम हुआ? शिवाय की नज़र अब श्लोका पर थी।


कुछ कटाई बुआई करवाना था। कुछ नये बीज़ का आर्डर देना था। इस के इलावा भी बहुत सारे काम थे शुक्र है कि सब हो गया। वरना रूकना पड़ता एक दिन और। श्लोका ने सोचते हुए कहा। 


मुझे बता कर नहीं गई। शिवाय की नज़र अभी भी श्लोका पर ही थी। श्लोका हैरानी से शिवाय को देखती है यूं जैसे पूछ रही हो आप मेरे होते कौन हैं जो मैं बता कर जाती। मगर वह खामोश रही।


क्या सोचने लगी?


कुछ नहीं।


मुझे पता है क्या सोच रही हो।


तो फिर पूछ क्यों रहे हैं?


तुम्हारे मुंह से सुनना चाहता हूं।


अच्छा यह बताएं आप का मूड ठीक हुआ? श्लोका ने बात बदल दी।


और शिवाय उस के अंदाज़ पर मुस्कुरा उठे।


हां, हो गया ठीक। 


तो फिर अब जाएं और सो जाएं। और खबरदार जो आप ने दूसरी सिगरेट पी। श्लोका ने डांटते हुए कहा।


और अगर पी ली तो? शिवाय को उसका इतने हक से डांटना बहुत अच्छा लगा।


पीकर तो दिखाएं। फिर देखिए मैं क्या करती हूं। श्लोका ने रोब से कहा। और शिवाय उसके इस अंदाज़ पर हंस पड़ा। उसकी सारी टेंशन दूर हो चुकी थी। इस वक्त उस के आसपास सिर्फ खुशियां ही खुशियां थी।


जारी है...

धड़कन भाग 17

धड़कन भाग 19






 

Comments

Popular posts from this blog

कुछ अनकही (कालेज वाला प्यार) भाग 1 | Kuch Ankahi: Unspoken College Love Story Part 1 | Emotional Hindi Romance

नादां तेरे शहर को | Desolate Memories of a Mother's Love

दिल दोस्ती और प्यार | Heartstrings of Love, Friendship, and Trust