धड़कन | भाग 19 | Dhadkan Part 19 | Heart Touching Hindi Love Story

पीकर तो दिखाएं। फिर देखिए मैं क्या करती हूं। श्लोका ने रोब से कहा। और शिवाय उसके इस अंदाज़ पर हंस पड़ा। उसकी सारी टेंशन दूर हो चुकी थी। इस वक्त उस के आसपास सिर्फ खुशियां ही खुशियां थी। 

अब मैं जा रही हूं सोने, बहुत थक गई हूं। सिर्फ आप के लिए आई थी क्योंकि मुझे मालूम था कि आज आप सिगरेट ज़रूर पियेंगे। अगर मैं ना आती तो दूसरी भी जल चुकी होती। श्लोका सादगी से कहती हुई वापस घूम गई। 

उसके घूमते ही शिवाय ने उसके बाल से क्लौचर निकाल दिया। और उसके बाल आज़ाद होते ही बिखर गए। 

श्लोका शिवाय की तरफ देखे बिना आगे बढ़ गई। क्योंकि वह शिवाय की खुशी को अपने दिल में महसूस कर रही थी। और शिवाय वहां खड़ा श्लोका की बातों पर गौर कर रहा था कि वह सिर्फ उसके लिए आई थी। और उसको खुशी देकर चली गई। 

मतलब श्लोका सुमन सिंह आप को शिवाय सिंह ओबेरॉय की फ़िक्र है। सोचते हुए शिवाय रूम में जाकर लेट कर भी सिर्फ श्लोका को ही सोच रहे थे। और फिर सोचते हुए वह नींद की आगोश में चला गये।

बहुत दिनों के बाद आज वह तीनों एक साथ नाश्ता कर रहे थे। 

अरे अम्मा आप कब आईं? शिवाय हैरान होकर खड़ा हो गया। और उन के पास जाकर उन के गले लग जाता है।

सुधीर जी भी मुस्कुरा उठे। मगर श्लोका हैरान थी।

आप कब आईं? 

थोड़ी देर पहले।

मुझे बता देती आप। गाड़ी भेज देता।

गई तो थी गाड़ी।

अच्छा.... 

मुझे नहीं पता।

तुम्हारे डैड ने भेजी थी।

श्लोका अभी भी हैरान खड़ी थी।

यह सविता जी हैं। कमला की मां। सुधीर जी श्लोका को बताते हैं।

श्लोका हैरान रह जाती है। एक काम वाली की मां की इतनी इज़्ज़त? शिवाय जो अपनी मां से ठीक से बात नहीं करता वही शिवाय एक कामवाली को गले लगा रखा था। श्लोका उन को नमस्ते करती है। सविता जी उस के सिर पर हाथ रख देती हैं।

आप आराम करें। आफिस से आने के बाद आप से बात करता हूं। कहते हुए शिवाय ऊपर चले जाते हैं।

श्लोका और सुधीर जी भी अपने कमरे में चले जाते हैं। 

श्लोका तैयार हो कर कालेज चली जाती है। वहां से वापसी पर वह अनु के साथ उसके रूम पर चली जाती है।

दोनों साथ में ही डिनर करते हैं। और फिर बैठ कर बातें करने लगती हैं।

शिवाय डिनर करके वहीं हॉल में ही बैठा रहते हैं। ताकि श्लोका आ जाए तो उससे मिल कर तब रूम में जाए। डिनर टाइम उसे पता चला कि श्लोका घर पर नहीं है। जब काफी टाइम हो गया तो शिवाय की बेचैनी बढ़ गई।

घर आ रही हो? शिवाय ने श्लोका को मैसेज किया।

हां बस निकल रही हूं।

रूको मैं आ रहा हूं। कहां हो अनु के पास?

जी...

ठीक है मैं आ रहा हूं। मैसेज सेंड होते ही शिवाय उठ कर चाबी लेकर बाहर निकल जाता है।

श्लोका अनु की तरफ अपना फोन करती है। अनु मैसेज पढ़ती है। बहुत फिक्र करता है तेरी। अनु ने मुस्कुरा कर कहा।

हां।

क्या मैं इसे प्यार समझू? श्लोका उलझी हुई थी।

तुम उसका इतना ख्याल रखती हो क्यों? अनु ने उलटा उसी से सवाल कर दिया।

तू तो जानती है फिर क्यों पूछ रही है। 

हां तो जैसे तू उससे प्यार करती है इस लिए उसका ख्याल रखती है उसकी बात मानती है। उसी तरह वह भी तुझसे प्यार करता है इस लिए तेरी इतनी फिक्र करता है। अनु ने उसे समझाया।

वह एक बार करे तो इज़हार। श्लोका परेशान थी।

परेशान मत हो। वह तुम से प्यार करता है। अनु ने उसे तसल्ली दी।

और अगर जिसे हम प्यार कह रहे हैं वह प्यार ना हुआ तो? श्लोका बिखर रही थी। उसका दिल बैचैन था। वह शिवाय का साथ चाहती थी। मगर वह शिवाय को समझ नहीं पा रही थी।

तुम कभी भी प्यार वगैरह के चक्कर में नहीं पड़ी। तुम हमेशा इन सब बातों से दूर रही। और आज देखो तुम भी बेकरार हो। 

अगर बाबा इस बात का ज़िक्र ना करते तो शायद मैं कभी भी शिवाय की तरफ आकर्षित ना होती। लेकिन जब भी शिवाय मेरे सामने आते हैं। मेरे सामने वह वक्त चलने लगता है। और फिर मैं उन लम्हों को याद करते हुए शिवाय के नज़दीक होती गई। श्लोका ने सच्चाई बताई।

यस आई नो, इसी लिए तो कह रही हूं जो जैसा चल रहा है चलने दो। सब ठीक हो जायेगा। अनु ने समझाया। उसी वक्त श्लोका का फोन बजा।

आ गये तेरे आशिक, अनु ने मुस्कुराते हुए कहा। श्लोका भी मुस्कुरा कर उठ गई। अनु श्लोका के साथ बाहर आई। श्लोका गाड़ी में बैठ गई। अनु ने शिवाय को भी नमस्ते कर दिया।

आप भी घर पर आ सकती हैं। यह तो बुलाने से रही। शिवाय ने श्लोका को देखते हुए अनु से कहा।

जी आऊंगी। अनु भी मुस्कुरा दी।

वैसे आप के पास इन का बहुत मन लगता है। क्या करती है आप कुछ हमें भी बता दें। शिवाय इस वक्त शरारत पर आमादा थे। श्लोका ने शिवाय को घूरा। 

अनु हंस पड़ी। कभी फुर्सत से आएं तो बताती हूं। कहती हुई अनु बाय बोल कर गाड़ी के पास से हट गई। शिवाय ने गाड़ी स्टार्ट कर दी।

क्या हुआ नाराज़ क्यूं लग रही हो? 

मगर श्लोका जवाब देने के बजाय सिर्फ शिवाय को घूरती है।

आइसक्रीम खाओगी? 

नहीं।

इतनी नाराज़गी? शिवाय मुस्कुराये। और खामोशी से गाड़ी चलाते रहे। 

एक आइसक्रीम पार्लर के पास गाड़ी रोक कर शिवाय उतरते हैं और आइसक्रीम लेकर वापस आ जाते हैं। और गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं। जैसे ही गाड़ी रुकती है श्लोका गेट खोल देती है। शिवाय उसे आइसक्रीम का पैकेट थमा देते हैं।

मुझे नहीं चाहिए।

लेकर चलो मैं आ रहा हूं।

श्लोका पैकेट लेकर चली जाती है। 

जैसे ही वह हॉल से गुज़रती है सविता जी आ जाती हैं। सुमन तुम्हारे बाल की मालिश कब करना है? 

मेरे बाल की मालिश? श्लोका हैरान हुई।

हां शिवाय ने कहा है तुम्हारे बाल की देखभाल अब मुझे करनी है।

लेकिन....

लेकिन वेकिन कुछ नहीं सारे काम अम्मा को बता दें। वह कर देंगी। शिवाय ने आते हुए कहा।

ठीक है मैं बाद में बता दूंगी। कह कर श्लोका ऊपर चली गई। शिवाय वहीं रुक गये। कमला कॉफी बना दें मेरे लिए।। शिवाय कमला से बोल कर वहीं बैठ गये।

रूम में जाकर चेंज करके श्लोका जैसे ही बाहर आई। उसी वक्त शिवाय आ गये।

आइसक्रीम खाओ।

 मुझे नहीं खाना।

इतनी नाराज़गी? ऐसा क्या कर दिया? अच्छा आइसक्रीम निकालो।

आप तो कॉफी पी रहे हैं। 

हां तो तुम आइसक्रीम लेकर आओ।

श्लोका आइसक्रीम का पूरा बॉक्स लेकर बैठ जाती है और उसी में से खाने लगती है।

गुड.... शिवाय मुस्कुरा देते हैं।

क्या ज़रूरत थी आंटी से कहने की? 

ज़रूरत थी तभी कहा है। प्लीज़ तुम अपना देख कर उन को बता देना। यह बाल बहुत कीमती हैं। शिवाय उसके बाल से क्लौचर निकाल कर कहते हैं। और श्लोका शिवाय को देखती रह जाती है।

अच्छा यह बताओ तुम्हारा मूड इतना खराब क्यों है? शिवाय कॉफी की सिप लेकर पूछते हैं। 

खराब नहीं है मेरा मूड, मैं ठीक हूं। और जब आपको आइसक्रीम नहीं खाना तो आप यहां आये क्यों है?

तुम्हारा साथ देने के लिए।

इस को साथ देना कहते हैं? श्लोका अपनी आइसक्रीम और शिवाय की कॉफी की तरफ इशारा करती है।

तुम नहीं समझोगी। इसी को तो साथ देना कहते हैं। 

अच्छा....

हूं, नाराज़गी दूर हुई?

नहीं...

ठीक है मैं दूर कर दूंगा। अभी कुछ और बात करें?

बोलो....

अमोल चाहता है कि उसकी सिमरन से इंगेजमेंट हो जाए। 

क्या अभी? लेकिन अभी तो वह पढ़ रहा है।

हां, वह कहता है इंगेजमेंट हो जाए। शादी की अभी कोई बात नहीं।

अंकल ने क्या कहा।

डैड ने कहा कि उसका भाई आ जाए फिर बात होगी।

आप को कल सुबह मेरे साथ चलना है। श्लोका ने कुछ सोचते हुए कहा।

ठीक है। चलो कहां चलना है। 

मैं सारी बातें सोच कर आप को मैसेज करती हूं। श्लोका सोचते हुए कहती है।

ओ के मैं अभी आया। शिवाय कहते हुए बाहर चले गए। और तुरंत एक पैकेट लेकर वापस आए और पैकेट श्लोका को देते हैं।

क्या है?

खुद ही देख लो।

श्लोका निकालती जाती है और हैरान होती जाती है। उसमें बहुत सारे क्लैचर और घड़ी थी। इस की क्या ज़रूरत थी?

शापिंग करने गया था दोस्तों के साथ पसंद आ गया तो ले लिया। कैसा है?

बहुत अच्छा, लेकिन क्या ज़रूरत थी लेने की।

पसंद आया ना रख लो। और यूज़ भी करना। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं। यह मुहब्बत के किस्से भी अजीब होते हैं। महबूब की हमनशीनी ही चाहता है दिल।

जारी है...

धड़कन भाग 18

धड़कन भाग 20





 

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