धड़कन | भाग 22 | Dhadkan Part 22 | Heart Touching Hindi Love Story

वह तो शुक्र है कि डैड ने तुम्हारे बारे में पता लगवा लिया। वरना मैं तो शादी के बाद अपना सब कुछ तुम्हारे नाम करने वाला था। इतनी मुहब्बत करता था मैं तुमसे। आलोक ने गुस्से से कहा।

शांत हो जाओ बेटा। अशोक जी से अपने बेटे की तकलीफ देखी नहीं जा रही थी।

इंस्पेक्टर साहेब गिरफ्तार कर लें इसे। अशोक जी ने इंस्पेक्टर साहेब ने कहा।

तुम्हारा पति कहां है? इंस्पेक्टर साहेब ने गुस्से से पूछा। 

सिमरन ने देखा अब बचना मुश्किल है उसने पता बता दिया।

इंस्पेक्टर साहेब ने तुरंत फोन करके उसे पकड़ने का आर्डर दिया।

अच्छा अब हम लोग चलते हैं। इंस्पेक्टर साहेब ने कहा।

ऐसे कैसे जायेंगे। डिनर करें पहले। सुधीर जी ने कहा और साथ में शिवाय ने भी कहा।

डिनर तो घर जाकर करूंगा। वरना हमारी मैडम गुस्सा हो जायेंगी। इंस्पेक्टर साहेब ने हंसते हुए कहा।

इतने बड़े इन्स्पेक्टर होकर बीवी से डरते हैं। शिवाय ने भी मज़ाक किया।

बड़ा मैं आप लोगों के सामने हूं। बीवी के सामने उसका हुक्म मानने वाला पति। बीवी को कभी कमज़ोर मत समझना। 

इंस्पेक्टर साहेब ने शिवाय के कंधे पर हाथ रख कर कहा।

शिवाय सिर्फ मुस्कुरा दिये। उसकी नज़र सीधे श्लोका पर गई। शायद कोई सवाल या फिर शायद कोई जवाब। श्लोका ने नज़रें नीची कर ली।

वैसे एक बात कहूं। अगर बीवी अच्छी मिल गई तो समझ लो ज़िंदगी बन गई। क्योंकि वह सारे घर को जिस तरह हैंडल करती है वह काम हम कभी नहीं कर सकते। इंस्पेक्टर साहेब ने मुस्कुराते हुए कहा।

सही कहा आपने। अशोक जी ने कहा। और बाकी लोग सिर्फ मुस्कुरा दिये।

चलिए फिर कॉफी ही पीजिए। 

सुधीर जी ने कॉफी का बोल दिया। और सब लोग बैठ गए। 

अमोल बेटा ज़्यादा कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं है। यह सब बातें एक बुरे ख्वाब की तरह भूल कर आगे बढ़ो। एक खूबसूरत ज़िंदगी तुम्हारे इंतेज़ार में है। अशोक जी ने प्यार से अमोल को समझाया।

हां अमोल डैड की बातें मुझे ज़िंदगी की तरफ ले आई। वरना मैं तो मरना चाहता था। लेकिन डैड ने मुझे जीना सिखाया। और आज मैं यहां आप सब के साथ हूं। आलोक फख्र से अपने डैड को देख कर कहता है।

तुम सही कह रहे हो। वरना आज कल के नौजवान प्यार में पड़ कर अपनी ज़िंदगी बर्बाद कर लेते हैं। उन्हें अपने मां बाप और परिवार भी नहीं दिखता है। इंस्पेक्टर साहेब ने दुख से कहा।

प्यार करो मैं प्यार के खिलाफ नहीं हूं। मगर साथ ही साथ आंख और कान भी खुले रखो। दिल से मुहब्बत करो मगर दिमाग को भी खुला रखो। मुझे यकीन है मेरे बेटे को एक बहुत प्यार करने वाली हमसफर मिलेगी। जो इस से प्यार करेगी इस की दौलत से नहीं। अशोक जी ने सब को देख कहा। 

उसी वक्त काफी आ गई। सिमरन बाहर की तरफ दौड़ी। भागने की एक आखरी कोशिश में, मगर वह नाकाम रही। 

अमोल खामोश वहां बैठा रहा। बोलने के लिए उसके पास कुछ नहीं था। इस धोके ने उसे हिला कर रख दिया था। 

फिर मिलेंगे। बिज़नेस पार्टी में तो मुलाकात होती ही रहती है। अशोक जी सुधीर जी से हाथ मिला कर कहते हैं। और फिर शिवाय से हाथ मिला कर बाहर निकल जाते हैं।

दो लेडी पुलिस सिमरन को लेकर बाहर निकल गई। और इंस्पेक्टर साहेब की गाड़ी में बैठ गई।

आप इस तरह आये हैं? शिवाय को हैरत हुई। 

जब बात दोस्तों की हो तो करना पड़ता है। एक गलत लड़की मेरे दोस्त के घर मिले। जब की आप सही हों। मैं गलत का साथ नहीं देता और सही का साथ नहीं  छोड़ता। कोई मेरे यार को गलत कहे, यह मुझे मंज़ूर नहीं है।

इंस्पेक्टर साहेब ने मुस्कुरा कर कहा।

थैंक्यू। शिवाय ने हाथ जोड़ दिये। और सुधीर जी इंस्पेक्टर साहेब के गले लग गए। और फिर अशोक जी और आलोक से हाथ मिला कर उन के गाड़ी में बैठने तक वहीं खड़े रहे।जब दोनों गाड़ी चली गई तो सब लोग अंदर आ गये। 

घर में तो रोज़ शांति रहती थी। लेकिन आज की शांति कुछ अलग थी।

अमोल जाओ आराम करो। और कुछ सोचने की ज़रूरत नहीं है। जो हुआ उसे भूल जाओ। आगे बढ़ो और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो। सुधीर जी अमोल को समझाते हैं। 

मैं उसे क्यों नहीं पहचान पाया डैड? कैसे उस ने मेरे भरोसे को तोड़ दिया। अमोल का गला भर आया। आंखें झुकी हुई थी।

क्योंकि बेटा इंसान जब प्यार करता है तो दिल की सुनता है। और आंख बन्द कर लेता है। लेकिन याद रखो, असली प्यार वह है जो तुम्हें मज़बूत बनाए। तुम्हारी पहचान को मिटाये नहीं।

सुधीर जी ने प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा।

क्या अब मैं किसी पर भरोसा कर पाऊंगा? अमोल ने टूटे दिल से पूछा।

वक्त के साथ घाव भर जाते हैं, बेटा। और जो तुम्हें सच्चे दिल से प्यार करेगा, वह तुम्हारी मजबूरी नहीं बल्कि ताकत बनेगा। बस खुद को वक्त दो और अपनी ज़िंदगी पर फोकस करो। 

यह जो तुम जिस दौर से गुज़र रहे हो यह वक्त सबसे अच्छा भी है और सबसे बुरा भी। क्योंकि यह उम्र सीखने की होती है। जो यह बात समझ लेते हैं वह कामयाब रहते हैं। 

और जो प्यार मुहब्बत में पड़ जाते हैं। वह या तो नाकाम रहते हैं। या फिर सारी ज़िन्दगी उन की यू ही बीत जाती है। ऐसे लोगों का कोई मकसद नहीं होता है। वह सिर्फ ज़िंदगी गुज़ार लेते हैं।

और जो इस उम्र में पढ़ लिख कर मेहनत करके कुछ बन जाते हैं। वह सारी ज़िन्दगी ऐश से गुज़ारते हैं। सुधीर जी ने समझाते हुए कहा।

जैसा शिवाय भाई, यह हमेशा इन बातों से दूर रहे। और देखें आज कितने कामयाब हैं। अराध्या ने खुशी से कहा। अराध्या के ऐसा कहते ही सब की नज़र शिवाय पर चली जाती है।

ठीक कह रही हो तुम। लेकिन अब हमको शिवाय की शादी करनी है। सुधीर जी ने हंसते हुए कहा।

हां डैड यह सही है कितना मज़ा आयेगा। आप जल्दी करें शिवाय भाई की शादी। अराध्या सोच कर ही खुश हो गई।

हां हां करेंगे पहले शिवाय लड़की तो पसंद करे। सुधीर जी  ने मुस्कुरा कर कहा।

श्लोका खामोश बैठी सब की बातें सुन रही थी। सुधीर जी की बात पर शिवाय भी मुस्कुरा दिये। और उठ खड़े हुए।

यह क्या भाई आप की शादी की बात शुरू हुई और आप जा रहे हैं। आप जल्दी से कोई लड़की पसंद करें और बताएं। हमें जल्द से जल्द आपकी शादी करनी है। अराध्या ने हंसते हुए कहा।

अच्छा दादी अम्मा, शिवाय एक चपत अराध्या के सिर पर लगा कर कहते हैं। और फिर उसे गले लगा लेते हैं।

ममता जी खामोशी से सब देख सुन रही थी। मगर कुछ बोली नहीं। शायद उन्होंने सारे हक खो दिए थे। 

लेकिन उन को देख कर हैरत हुई कि शिवाय और अराध्या में इतनी गहरी बॉन्डिंग कैसे हो गई। वरना ना तो शिवाय ज़्यादा बोलते थे और ना अराध्या। लेकिन इस वक्त तो माहौल ही कुछ और है।

शिवाय ऊपर चले गए। एक-एक कर सब लोग चले गए। सिर्फ सुधीर जी और श्लोका रह गये।

सुधीर जी उठ कर श्लोका के पास आकर बैठ गये। बहुत शुक्रिया बेटा आज तुमने हमारे परिवार को एक बहुत बड़ी मुसीबत से बचा लिया। सुधीर जी ने खुशी से कहा।

नहीं अंकल यह तो मेरा फर्ज़ था। जिसमें शिवाय ने मेरा साथ दिया। श्लोका ने सादगी से कहा।

और कोई बात? सुधीर जी ने जानना चाहा। 

नहीं, 

अब क्या इरादा है?

जो जैसे चल रहा है चलने दें।

कब तक?

पता नहीं। कहते ही श्लोका उठ गई और ऊपर चली गई। सुधीर जी उसे जाता देखते रहे। और वह भी उठ कर रूम में चले गए।

यह सिमरन का सच आप लोगों के सामने कैसे आया? सुधीर जी जैसे ही कमरे में गए। ममता जी ने पूछ लिया।

जैसे तुम्हारे सामने आया। सुधीर जी ने बात टाल दी। 

मैं इतनी बेवकूफ नहीं हूं कि समझ ना सकूं। आप दोनों को सब पता था। ममता जी ने गुस्से से कहा।

लेकिन इतनी समझदार भी नहीं हो कि सब समझ जाओ इस लिए खामोश रहो। सुधीर जी ने गुस्से से कहा। और बाथरूम चले गए। ममता जी तिलमिला कर रह गई।

❤️

श्लोका चेंज करके बालकनी पर चली गई। शिवाय वहां नहीं थे। उस ने सुकून की सांस ली। इस वक्त वह परेशान थी। अंकल की बातों पर गौर कर रही थी। लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

जारी है...

धड़कन भाग 21

धड़कन भाग 23











 

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