धड़कन | भाग 23 | Dhadkan Part 23 | Heart Touching Hindi Love Story

श्लोका चेंज करके बालकनी पर चली गई। शिवाय वहां नहीं थे। उस ने सुकून की सांस ली। इस वक्त वह परेशान थी। अंकल की बातों पर गौर कर रही थी। लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था।

उसी वक्त शिवाय भी आ जाते हैं। हाथ में दो मग था। एक श्लोका की तरफ बढ़ा दिया। जिसे उसने खामोशी से थाम लिया। 

क्या सोच रही हो? शिवाय उस के चेहरे को देख कर पूछते हैं। जो इस वक्त सच में सोचनीय लग रहा था।

है कुछ सोच। श्लोका ने सोचते हुए कहा।

मुझे बता दो, हो सकता है हल निकल आये। शिवाय ने प्यार से कहा।

हूं मैं भी यही सोच रही हूं। लेकिन फिर सोचती हूं आप यकीन के काबिल हैं या नहीं। श्लोका अभी भी चिंतित थी।

ऐसी क्या बात हो गई कि तुम इतना सोच रही हो। शिवाय को फिक्र हुई। 

बोलो क्या बात है। मुझ पर भरोसा कर सकती हो। शिवाय भी सोचने लगे कि ऐसी क्या बात हो गई जो यह इतना फिक्रमंद है।

श्लोका वहीं चेयर पर बैठ कर कॉफी पीने लगी। शिवाय भी खामोश रहे।

कॉफी पीते ही वह उठ गई। कॉफी के लिए शुक्रिया। अब सोने जा रही हूं। श्लोका ने नार्मल लहजे में कहा।

और वह बात? 

फिर कभी।

तुम ठीक हो ना?

जी,

लग नहीं रहा।

श्लोका मुस्कुरा दी।

मुझे यह झूठी मुस्कुराहट मत दिखाओ। शिवाय ने नाराज़गी से कहा।

तो फिर कैसी दिखाऊं? श्लोका ने भी सवाल कर दिया। 

कुछ दिखाने की ज़रूरत नहीं मुझे सब दिख रहा है। शिवाय अभी भी नाराज़ थे।

मैंने बोल कर गलती कर दी। ऐसी कोई बात नहीं। श्लोका ने देखा कि शिवाय टेंशन में आ गये हैं तो उसे भी टेंशन हो गई कि क्यों बोला मैंने।

नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं। कहते ही शिवाय अपने रूम की तरफ बढ़ गये।

शिवाय को जाते हुए श्लोका एक नज़र देखती है। और दौड़ कर शिवाय के सामने जाकर खड़ी हो जाती है। 

जाओ सो जाओ‌ गुड नाइट...शिवाय एक नज़र उसे देखते हैं और कहते हैं।

श्लोका कुछ कहे बिना अपने रूम की तरफ बढ़ जाती है। शिवाय रुक कर उसे जाता देखते हैं। शिवाय को श्लोका की इस वक्त की उदासी बहुत तकलीफ दे गई। 

शिवाय रुम में जाकर भी श्लोका के बारे में ही सोच रहे थे। फैशन शो खत्म हो जाए तो मैं श्लोका से शादी की बात करूंगा। उससे पहले नहीं। मैं नहीं जानता कि उसका जवाब क्या होगा। अगर उसने ना कर दिया तो यह बात मेरे लिए बहुत तकलीफ देह होगी। मैं कैसे बर्दाश्त करुंगा।

मुझे श्लोका के बारे में ज़्यादा कुछ मालूम भी नहीं और वह बताना भी नहीं चाहती। हो सकता है जो मैं समझ रहा हूं कि वह भी मुझ से मुहब्बत करती है वह गलत हो। वह रोज़ पता नहीं कहां जाती है किस से मिलती है। मुझे कुछ नहीं पता। डैड को सब पता है। लेकिन डैड भी खामोश हैं। वैसे तो डैड मुझे हर बात बताते हैं। मगर श्लोका के मामले में खामोश हैं। शिवाय के सोचों का सिलसिला रूक ही नहीं रहा था। 

शिवाय लेट तो गये। मगर नींद उनकी आंखों से कोसो दूर थी। 

श्लोका भी बिस्तर पर आंख खोले लेटी हुई थी। वह चाह रही थी कि नींद आ जाए। मगर नींद का कही अता पता नहीं था।

सुबह नाश्ता करते ही श्लोका कालेज चली गई।

शिवाय नाश्ते के टाइम श्लोका को ना देख कर समझ गये कि वह चली गई।

क्या बात है सब ठीक है ना? सुधीर जी शिवाय के चेहरे को देख कर पूछते हैं। जो कुछ बदला हुआ सा लग रहा था।

हां डैड सब ठीक है। मुझे क्या होना है? शिवाय ने नार्मल होने की कोशिश की।

कुछ तो बात है सुधीर जी ने सिर्फ सोचा। बोले नहीं। और नाश्ता करके वह दोनों आफिस चले गए।

शाम को श्लोका घर आई तो फ्रेश होकर फौरन नीचे चली गई। उसी वक्त अराध्या अपने रूम से आती है। और श्लोका के पास बैठ जाती है।

अमोल ठीक है?

टाइम लगेगा ठीक होने में। 

तुम गई उन के पास? 

नहीं।

चलो हम दोनों चलते हैं। श्लोका उठ गई। इसी लिए तो वह नीचे आई थी।

आप चलेंगी? अराध्या हैरान हुई।

क्यों मैं नहीं चल सकती? श्लोका ने उलटा उसी से सवाल कर दिया।

चलिए। अराध्या सोच रही थी यह सुमन आखिर किस मिट्टी की बनी है। हर किसी की इसे फिक्र रहती है।

अराध्या नॉक करके अंदर जाती है। श्लोका भी साथ में चली जाती है। अमोल लेटे हुए थे।

आप....अमोल श्लोका को देख कर उठ कर बैठ जाते हैं।

क्यों मैं ना आऊं? श्लोका ने मुस्कुराते हुए पूछा।

अरे नहीं आइये ना। आप कभी आई नहीं ना। इस लिए हैरत हुई।

क्या कमरे में बन्द हो। बाहर निकलो। श्लोका ने प्यार से डांटा।

आप सब जानती हैं फिर भी। अमोल ने बात अधूरी छोड़ दी।

तुम उससे प्यार करते थे? श्लोका पता नहीं क्या करने वाली थी। अराध्या और अमोल दोनों उसे हैरत से देख रहे थे।

बोलो।

हां। 

प्यार का मतलब पता है? श्लोका ने सख्ती से पूछा। और अमोल हैरानी से श्लोका को देखने लगा। शायद उस के पास श्लोका की बात का कोई जवाब नहीं था।

जवाब दो मेरी बात का। और फिर जब अमोल नहीं बोले तो वह खुद ही बोलने लगी।

प्यार का मतलब पता नहीं। और कमरे में उदास रोग लगा कर बैठे हैं। पहले प्यार का मतलब समझो।

किसी को देखा वह अच्छा लगा। और प्यार हो गया। यही तो होता है हमारे साथ। उससे आगे का हम कुछ जानना ही नहीं चाहते। और हो जाती हैं जीने-मरने की कसमें। सामने वाला कोई ज़िद करे। अपनी बात मनवा ले। बन्दा सब करता जाए। क्योंकि वह प्यार जो करता है। यही होता है ना? श्लोका रूक कर अमोल की तरफ देख कर पूछती है।

लेकिन वह खामोश रहता है। और अराध्या तो हैरत से सिर्फ श्लोका को देख रही थी। उसने उसे इतना बोलते पहली बार उसे देखा था।

प्यार बहुत प्यारा है अमोल। प्यार कहने से ज़्यादा महसूस किया जाता है। आप जिस से प्यार करते हैं वह आप को समझे, और आप उसे। फिल्मों और कहानियों वाला प्यार हकीकत में नहीं होता है। लेकिन आज हम वही प्यार करना चाहते हैं और जब प्यार नहीं मिलता तो पछताते हैं।

तुम सिर्फ यह सोचो कि सिमरन तुम्हारे लिए नहीं थी। तुम्हारे लिए कोई बहुत अच्छी लड़की बनी है। जो तुम्हारा इंतज़ार कर रही है। आगे बढ़ो। अपनी पढ़ाई पर ध्यान दो। 

एक दिन तुम्हारा प्यार खुद बा खुद तुम्हारे सामने आ जायेगा। भूल जाओ कि कोई लड़की तुम्हारी ज़िंदगी में थी। और अगर ना भूल पाए तो अपने मौम डैड को देख लेना। और महसूस करना उन की मुहब्बत को जो तुम्हारे उदास होने पर उदास हो जाते हैं और खुश होने पर खुश।

चलें अराध्या.... कहते ही श्लोका उठ खड़ी हुई और अराध्या की तरफ देखती है।

आप बहुत अच्छी हैं। अराध्या खुशी से कहती है।

ऐसी कोई बात नहीं, चलो अब। श्लोका ने अराध्या को खींचा।

अमोल कुछ दुख ऐसे होते हैं उनसे जितना जल्दी बाहर आ जाएं उतना अच्छा होता है।

समझ रहे हो ना? श्लोका ने प्यार से पूछा।

मैं उससे बहुत प्यार करता था। अमोल दुख से बोला।

उसने तुम्हारे प्यार की कद्र की। श्लोका ने सख्ती से पूछा।

नहीं, अमोल उदासी से बोला।

तो फिर तुम क्या चाहते हो?

पता नहीं। 

तुम तो शुक्र मनाओ कि तुम्हें पता लग गया उसके बारे में। वरना अगर सगाई हो जाती और तुम्हें कोई नुक्सान पहुंचाती या फिर बहुत सारी दौलत लेकर भाग जाती तब तुम क्या करते।

तब भी तुम ऐसे ही करते। इस वक्त तुम को सिर्फ अपना प्यार दिख रहा है। उस का धोखा नहीं। तुम एक काम करो तुम अपना प्यार भूल कर एक दिन सिर्फ उसका धोका याद करो। श्लोका ने एक बार फिर सख्ती से कहा और कमरे से निकल गई। उसके पीछे-पीछे अराध्या भी निकल गई। वैसे भी उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह वहां अमोल के पास रुक कर करेगी क्या।

श्लोका हॉल में जाकर बैठ गई। अराध्या भी आ गई।

 फिल्म देखोगी? अराध्या ने खुशी से कहा। अब उसे श्लोका के संग मज़ा आ रहा था।

शिवाय आफिस से आये तो वह दोनों मस्ती करती हुई फिल्म देख रही थी।

आयें ना भाई। बहुत मज़ेदार फिल्म है। अराध्या ने शिवाय से कहा। शिवाय वहीं बैठ गये। और श्लोका की तरफ देखा। शिवाय कल रात वाली बात भूले नहीं थे। श्लोका को भी याद आ गई।

जारी है....

धड़कन भाग 22

धड़कन भाग 24


 



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