धड़कन | भाग 6 | Dhadkan Part 6 | Heart Touching Hindi Love Story
जब दिल किसी को चाहने लगे और वह चाहत हमारे सामने हो तो अपने अन्दर एक अलग ही ऐहसास होता है।आंख चमकने लगती है। दिल और दिमाग में एक सुकून रहता है। लब बार-बार मुस्कुराते हैं। और दिल हर वक्त महबूब को देखने की चाह करता है।
आप कुछ पूछ रहे थे।
श्लोका तुरंत टॉपिक पर आ गई।
तुम ने कहां तक पढ़ाई की है?
शिवाय उसको देखने लगता है। और शिवाय का सवाल सुनकर श्लोका के चेहरे का रंग बदल जाता है।
देखो नाराज़ मत होना। मैंने पहले ही बोल दिया था कि मेरी बात का बुरा मत मानना।
श्लोका का चेहरा देख कर शिवाय तुरंत सफाई देने लगता है। उसे लगता है श्लोका को उसकी बात बुरी लग गई।
और श्लोका सोच रही थी कि क्या जवाब दे। और उसी वक्त शिवाय का फोन आ जाता है और वह बात करने लगता है।
श्लोका सुमन चैन की सांस लेती है। शिवाय बात करते हुए अपने रूम में चला जाता है।
श्लोका सुमन फोन देखने लगती है। जो शिवाय लेकर आये थे।
और अलमारी से पैसे निकाल कर फोन के साथ वहीं टेबल पर रख देती है कि अगर शिवाय आ गये तो उन्हें दे देगी। लेकिन बहुत देर हो गई। और शिवाय नहीं आये तो वह रूम बंद करके अपना काम करने लगती है। क्योंकि कल उसे कालेज भी जाना था।
दोपहर में हर कोई डाइनिंग टेबल पर मौजूद था। मगर सुबह की बात पर हर किसी का मूड आफ था।
सुमन आज सन्डे है जाओ कहीं बाहर घूम आओ।
सुधीर जी ने बहुत प्यार से कहा।
नहीं अंकल आज नहीं, फिर कभी।
श्लोका सुमन ने मना कर दिया।
शिवाय खामोशी से खाना खा रहा था। खाना खाते ही श्लोका सुमन अपने रूम में चली गई। क्योंकि बाकी लोग वहीं बैठ कर बातें करने लगे थे। और उसे अच्छा नहीं लगा कि उन के बीच वह भी बैठे।
रूम में जाकर वह दरवाज़ा खुला ही छोड़ देती है ताकि शिवाय आयें तो वह उन्हें मोबाइल का पैसा दे दे।
शिवाय जी....
जैसे ही शिवाय आते हैं वह उन्हें आवाज़ देती है।
शिवाय श्लोका को देखता है। शुक्र है कि शिवाय के साथ जी लगाया। अगर भैया लगाती तो फिर क्या होता। शिवाय ने मन-ही-मन सोचा। और मन ही मन मुस्कुरा भी दिया।
क्या हुआ?
शिवाय ने वहीं से पूछा।
श्लोका सुमन पैसे ले जाकर शिवाय को देती है।
यह कैसे पैसे हैं?
शिवाय को इतने पैसे देखकर हैरानी होती है।
एक लाख हैं मोबाइल के।
श्लोका सुमन ने शिवाय को देखते हुए कहा।
चुपचाप से पैसा रख लो।
शिवाय ने हक से कहा।
अगर आप पैसे नहीं लेंगे तो फिर मोबाइल ले जाएं।
श्लोका ने टेबल से मोबाइल उठा कर शिवाय को दे दिया।
मैंने देख लिया कि तुम्हारे पास बहुत पैसा है। यह रख लो अब कुछ लाऊंगा तो पैसे ले लूंगा।
शिवाय ने उसे मनाते हुए कहा। क्योंकि शिवाय ने देख लिया था कि वह आसानी से मानने वाली नहीं है।
नहीं मैं इतना महंगा फोन ऐसे नहीं ले सकती।
श्लोका सुमन ने साफ मना कर दिया।
ठीक है, अभी तुम रख लो मैं बाद में पैसे ले लूंगा। शिवाय ने हार मानते हुए कहा।
अभी आप को लेने में क्या दिक्कत है?
श्लोका सुमन ने नाराज़ होते हुए कहा।
है कुछ दिक्कत बाद में बता दूंगा। फिलहाल तुम मोबाइल यूज़ करो। और अगर कुछ समझ ना आये तो मुझ से पूछ लेना।
शिवाय ने श्लोका के चेहरे को देखते हुए कहा। और अपने रूम में चला गया।
श्लोका मैं तुम्हें जल्द से जल्द उस कमरे से इस कमरे में लाना चाहता हूं। मैं हर खामियों के साथ तुम्हें स्वीकार करता हूं।
शिवाय बेड पर लेटते ही अपने आप से बातें करने लगता है।
उसके दिल ने आज तक किसी को पसंद नहीं किया। किसी को देख कर उसे खुशी नहीं हुई। किसी से मिल कर उसे सुकून नहीं मिला। किसी से मिलने के बाद दोबारा उससे मिलने के लिए बेचैन नहीं हुआ। मगर श्लोका सुमन से मिल कर वह सब कुछ हार गया। अपना सुख, चैन, सुकून सब कुछ। मगर सब कुछ हार कर भी वह खुश था। और इसी को शायद मुहब्बत कहते हैं।
डिनर करते हुए श्लोका सुमन सोच ही रही थी कि आज आंटी डिनर क्यों नहीं कर रही हैं तभी उसे उन की आवाज़ सुनाई देती है जो बहुत तेज़ आवाज़ से किसी से फोन पर बात करते हुए आ रही थी। और बहुत गुस्से में भी थी।
मोहन तुम अभी के अभी जाओ और उस राहुल की दुकान खुलवा कर इस को ठीक करा के लाओ।
ममता जी बहुत ही गुस्से से घर के नौकर मोहन से कहती हैं।
क्या हो गया जो आप इतना चिल्ला रही हैं?
अमोल ने मां को देखते हुए पूछा।
मुझे अभी पार्टी में जाना है। ब्लाउज़ टाइट लग रहा है। राहुल को फोन किया तो कह रहा है कि अब घर आ गया हूं। कल ठीक कर दूंगा।
हां तो ठीक है। आप कुछ और पहन लें।
अमोल ने रास्ता निकाला।
मुझे तुम्हारी राय की ज़रूरत नहीं है। आज मुझे यही पहनना है। मोहन तुम जाओ।
ममता जी ने गुस्से से अपनी बात कही।
सुधीर जी, शिवाय, श्लोका और अराध्या खामोशी से खाना खा रहे थे।
लेकिन जब वह घर जा चुका है तो अब कैसे वापस आयेगा। वैसे भी उसका घर यहां पास में नहीं है।
अमोल ने एक बार फिर मां को समझाया।
तुम चुप रहो।
ममता जी गर्जी।
भैय्या कोई फायदा नहीं मौम को समझाने का। इस लिए तो मैं कुछ नहीं बोल रही हूं।
अराध्या ने खाना खाते हुए कहा।
तुम अपना मुंह बन्द रखो।
ममता जी ने अराध्या को भी डांट दिया।
देखा इसी लिए मैं इन के बीच में नहीं बोलती।
अराध्या ने सुधीर जी को देखते हुए कहा।
सुधीर जी सिर्फ सब को देख कर रह गये।
मुझे दें आंटी, मैं देखूं क्या करना है?
श्लोका सुमन से जब रहा नहीं गया तो वह बोल पड़ी।
तुम क्या करोगी? यह मेरा डिज़ाइनर ब्लाउज़ है।
ममता जी ने बेरूखी से कहा।
मुझे बताएं क्या करना है?
श्लोका सुमन टिश्यू पेपर से हाथ पोंछ कर उठ गई। और हाथ धोकर वापस आई और आंटी के हाथ से ब्लाउज़ लेकर उनसे पूछती है।
इसको हाफ इंच चौड़ा करना है कर दोगी?
ममता जी उसका मज़ाक उड़ाते हुए पूछती हैं।
श्लोका ममता जी की बातों पर गौर किये बिना ब्लाउज़ को देखती है।
सुधीर जी खामोशी से सब तमाशा देख रहे थे। ऐसे मौकों पर वह हमेशा खामोश ही रहते थे।
और शिवाय वह तो अपनी मौम के बीच में कभी बोलता ही नहीं था। जब तक की बात उसकी ना हो। ऐसे मौकों पर वह अपने रूम में चला जाता था। या फिर दोस्तों के पास चला जाता था। अभी भी वह रूम में ही जाने वाला था लेकिन जैसे ही श्लोका बोली तो शिवाय रूक गया। वह नहीं चाहता था कि कोई उसे बुरा कहे।
मैं बना दूंगी। सिलाई मशीन कहां है?
श्लोका ने ब्लाउज़ देखते हुए कहा।
अगर मेरा ब्लाउज़ खराब हुआ तो समझ लेना। मुझ से बुरा कोई नहीं होगा।
ममता जी ने गुस्से से कहा।
वैसे भी आप से बुरा कोई नहीं है। शिवाय ने मन-ही-मन कहा। और ज़ख्मी नज़रों से ममता जी को देख कर श्लोका को देखने लगता है जो बेकार के पचड़े में पड़ी थी।
श्लोका इस घर में सिलाई मशीन नहीं है।
सुधीर जी ने सादगी से कहा।
तुम यह बना दोगी? ममता जी ने सुमन से पूछा।
जी, कोशिश करती हूं।
श्लोका सुमन ने धीमी आवाज़ में कहा। क्योंकि उसे भी अब डर लग रहा था कि अगर ठीक नहीं हुआ तो ममता जी को उसे बुरा कहने का एक और मौका मिल जायेगा।
कमला तुम चाबी लेकर सुमन के साथ सिलाई सेंटर जाओ।
ममता जी ने कमला से कहा।
कमला तुरंत गई। और चाबी लेकर सिलाई सेंटर सुमन को लेकर गई। घर में ही बाहर एक रूम था जिसे ममता जी ने गरीब लड़कियों को सिलाई सिखाने के लिए खोल रखा था। जहां सिलाई कम सिखाई जाती थी अपने मतलब के लिए मौकै बे मौके अपनी समाज सेवा दिखाती रहती थी। जो ना तो सुधीर जी को पसंद था और ना ही शिवाय को।
वहां जाकर श्लोका सुमन ने देखा बहुत, सारी सिलाई मशीन रखी हुई थी।
उसने फटाफट एक मशीन पर उसे सही कर दिया। और कमला को देकर भेजा कि जाओ दिखा कर लाओ। और खुद वह वहीं पर बैठी रही कि अगर कुछ और काम हुआ तो कर देगी।
कुछ देर बाद कमला आई और बताया कि ठीक हो गया है तब वह कमला के साथ बाहर आ गई। और रूम बंद करके वापस आ गई।
वह हॉल में आई तो वहां पर कोई नहीं था। वह भी अपने रूम में चली गई।
उसके सामने नीचे का मंज़र चल रहा था कि किस तरह आंटी बोल रही थी। ना जाने क्यों उसे वह सब अच्छा नहीं लगा।
सुबह उसे कालेज भी जाना था। वह अपना ड्रेस देखने लगी। सब रेडी करके वह नोट्स बनाने लगी। नोट्स बना कर उठी तो वह बहुत थक चुकी थी। घड़ी देखा तो एक बज रहे थे।
बैठी-बैठी वह थक गई थी। टहलने के लिए बालकनी में गई तो उसकी नज़र सीधे शिवाय के तरफ वाले बालकनी पर चली गई। उसे देख कर हैरत हुई कि शिवाय वहां पर खड़े सिगरेट पी रहे थे। और मोबाइल पर कुछ देख भी रहे थे।
श्लोका सुमन वापस जाने के बजाय वहीं पर रूक गई। शिवाय ने भी उसे देख लिया था।
मैं आ जाऊं? शिवाय ने फोन को पाकेट में रख कर उस से पूछा।
शिवाय ने खुद पर उंगली रख कर उसकी तरफ करके इशारे से पूछा।
वैसे भी श्लोका को देख कर उस को जो खुशी मिली थी। वह उस का दिल ही जानता था।
श्लोका जवाब देने के बजाय खुद ही उस की तरफ बढ़ जाती है।
आज फिर??
श्लोका सिगरेट की तरफ इशारा करती है।
चाय पीयोगी?
शिवाय उसकी बात को नज़रंदाज़ करते हुए पूछता है।
नहीं, सोने जा रही थी। सोचा एक राउड लगा लूं ताज़ी हवा ले लूं।
श्लोका ने सादगी से कहा।
शिवाय तो सिर्फ उसे देखे ही जा रहा था तभी शिवाय का फोन बजता है।
डैड का फोन इतनी रात को... जैसे ही शिवाय पाकेट से फोन निकाल कर देखते हैं। और डैड का फोन देख कर घबरा जाते हैं। फोन रिसीव करने के साथ ही शिवाय रूम की तरफ बढ़ जाते हैं। शिवाय के पीछे श्लोका भी चली जाती है। वह समझ जाती है कि कुछ गड़बड़ है। वह दोनों बहुत तेज़ी से डैड के रूम में जाते हैं।
क्या हुआ डैड?
ममता को पेट में बहुत तेज़ दर्द हो रहा है जो बढ़ता ही जा रहा है। इस लिए तुम को फोन किया।
सुधीर जी ने परेशानी से कहा।
श्लोका ने देखा वह बहुत बेचैन थीं। दर्द उनके चेहरे से पता चल रहा था।
डॉक्टर को फोन किया?
शिवाय ने पूछा।
हां कर तो दिया है। लेकिन वह रास्ते में हैं और दूर हैं उन्होंने कहा है वह आ रहे हैं।
श्लोका चुपचाप वहां से बाहर आती है। श्लोका को बाहर जाता देख शिवाय सोचता है कि यह क्या बात हुई कि इतनी तकलीफ में देखने के बाद भी वह चली गई ना कुछ पूछा ना कुछ कहा। शिवाय को थोड़ा अजीब लगा। उसी वक्त अराध्या और अमोल भी आ गये। मां की तबीयत देख कर वह दोनों भी परेशान हो गए।
उसी वक्त श्लोका रूम में आती है। आंटी उठें। आप यह खा ले।
श्लोका ने बहुत प्यार से उनसे कहा।
नहीं मुझे नहीं खाना है। जल्दी डाक्टर को बुलाएं।
ममता जी ने दर्द से कराहते हुए कहा।
आंटी आप इस को खा ले। तब तक डॉक्टर भी आ जायेंगे। श्लोका ने एक बार फिर मन्नत की।
मैंने कहा ना कि मुझे नहीं खाना है। मुझे गांव की गंवार लड़की की एडवाइस नहीं चाहिए।
ममता जी इतनी तकलीफ में भी चिल्ला रही थी।
ममता खा लो वह दे रही है तो उस को कुछ तो पता होगा।
सुधीर जी ने गुस्से से कहा। और अराध्या से कहा कि मां को खिलाओ।
अराध्या श्लोका से लेकर मां को खिलाती है। और साथ में उसका लाया हुआ गर्म पानी भी पिला देती है।
अगर मुझे कुछ हुआ तो तुम्हारी खैर नहीं। खाने के बाद ममता जी ने उसे धमकी दी।
शिवाय खामोश खड़ा सब देख सुन रहा था।
श्लोका उनका जवाब दिये बिने कमरे से निकल जाती है और अपने कमरे में चली जाती है। उसे अफसोस होता है ममता जी की सोच देख कर। इतने दर्द में भी वह उसको ज़लील करना नहीं भूलीं।
वह बिस्तर पर लेट तो जाती है लेकिन उस को नींद नहीं आती है। और वह नीचे जाना नहीं चाहती थी। वह जानती थी उसने जो दिया है उससे अगर फायदा ना भी हुआ तो नुकसान नहीं होगा।
सुधीर डाक्टर को फोन करो। ममता जी ने बेचैनी से कहा। हां बात हुई है वह यहां ही आ रहे हैं।
बहुत देर हो गई डॉक्टर के आते-आते। और जब तक डॉक्टर आये तब तक ममता जी का दर्द ठीक हो गया।
आपने तो कहा था कि बहुत तेज़ दर्द है। लेकिन देखने में तो नहीं लग रहा है। कोई दवा खाई है इन्होंने?
डॉक्टर ने चेक करते हुए कहा।
दवा तो नहीं खाई। वह इन्होंने बड़ी इलायची के दाने खाकर गर्म पानी पिया था उसके बाद से धीरे-धीरे इन को आराम हो गया। सुधीर जी ने डाक्टर से कहा।
हां ठीक किया। जो बड़ी इलायची के दाने दे दिये। इन्होंने बहुत लेट और हैवी खाना खाया था। इस वजह से गौस फंस गई थी जो कि बड़ी इलायची और गर्म पानी से ठीक हो गई। मुझे तो आप ने बेकार ही बुलाया। जब इलाज आपको पता था।
डॉक्टर ने हंसते हुए कहा और बाहर निकल गये।
उनके साथ शिवाय भी निकल गया। और डाक्टर को बाहर तक छोड़ कर वह भी ऊपर अपने रूम में चला गया। लेकिन अपने रूम के पास जाकर वह रूक गया। उसे पता था श्लोका सो नहीं रही होगी। कुछ सोच कर उसने श्लोका का रूम नॉक करके दरवाज़ा खोल कर श्लोका को आवाज़ दी।
श्लोका....
हां आ जाएं। श्लोका ने वैसे ही लेटे हुए ही कहा। शिवाय अंदर जाकर उसके बेड के पास जाकर खड़ा हो गया। कमरे में नाईट लैम्प जल रहा था। जिसकी हल्की रौशनी पूरे कमरे में फैली हुई थी।
डॉक्टर आये? आंटी का दर्द ठीक हुआ?
श्लोका ने उठते हुए कहा।
तुम लेटी रही। शिवाय ने उसे वापस लिटा दिया। और खुद वहां पर टेबल के पास रखी हुई कुर्सी खींच कर बैठ जाता है। और बहुत गौर से उसे देखने लगता है।
क्या हुआ आंटी ठीक हैं ना?
शिवाय को इस तरह अपनी तरफ देखता पाकर उसे उलझन होती है।
हां वह ठीक हैं। डॉक्टर साहेब ने भी कहा कि कोई घबराने वाली बात नहीं है। तुम ने सही दवा दी थी। लेकिन उन्होंने तुम्हें इतना बुरा कहा उसके लिए सॉरी।
शिवाय ने उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा। अब मैं भी सोने जा रहा था। लेकिन मुझे लगा कि तुम जाग रही होगी। इस लिए सोचा तुम को बता दूं। ताकि तुम को भी इत्मीनान हो जाए।
मैं जा रहा हूं अब तुम भी सुकून से सो जाओ। कहते हुए शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर अपने होंठों तक ले जा
कर वापस छोड़ देता है। श्लोका हैरानी से शिवाय को देखती है। शिवाय भी उसे ही देख रहे होते हैं।
जारी है...
शिवाय और श्लोका की यह कहानी प्यार, रिश्तों और भावनाओं के खूबसूरत सफर की है। उनकी जिंदगी के उतार-चढ़ाव, खामोशियों में छुपा प्यार, और रिश्तों की गहराई को जानने के लिए पढ़ें।
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