धड़कन | भाग 7 | Dhadkan Part 7 | Heart Touching Hindi Love Story

मैं जा रहा हूं अब तुम भी सुकून से सो जाओ। कहते हुए शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर अपने होंठों तक ले जाकर वापस छोड़ देता है। श्लोका हैरानी से शिवाय को देखती है। शिवाय भी उसे ही देख रहे होते हैं। 


गुड नाईट.....शिवाय का दिल श्लोका के पास से उठने का नहीं कर रहा था लेकिन उसे तो अपने रूम में जाना ही था इस लिए वह उठ गया। और चेयर साइड में रखकर रूम से निकल कर वह रूम बंद कर के अपने रूम में चला जाता है।


शिवाय के जाते ही श्लोका अपने हाथ को दूसरे हाथ में ले लेती है। शिवाय आप बहुत तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन मैं आप को रोक क्यों नहीं पाई? श्लोका सुमन को खुद पर हैरत हो रही थी। अगर कोई गलती से भी उसे टच कर जाए तो वह उसको सौ बातें सुना देती थी। और शिवाय उसके हाथ को किस करके चला गया और वह खामोश रह गई। शिवाय मुझे आप को रोकना होगा। श्लोका सुमन ने अपने आप को समझाया। और सोने की कोशिश करने लगी। क्योंकि उसे सुबह कालेज भी जाना था। 


लेटते ही शिवाय की आंखों के सामने श्लोका का चेहरा था। शिवाय जो किसी लड़की की तरफ नज़र उठा कर नहीं देखता वह श्लोका के इतने करीब हो गया था।


♥️


सुबह नाश्ता करके श्लोका आठ बजे ही कालेज के लिए निकल गई। वह चाहती थी टाइम से पहुंच जाए। उसे प्रोफेसर से भी मिलना था। क्योंकि वह कालेज में असिस्टेंट प्रोफेसर थी। और प्रोफेसर से मिल कर अपनी क्लास लेना था। 


नमस्ते सर....


आओ सुमन, कैसी हो? हेमराज सर ने मुस्कुराते हुए पूछा।


ठीक हूं सर, आप कैसे हैं?


श्लोका ने अदब से पूछा।


मैं भी ठीक हूं। श्लोका मुस्कुरा दी।


तुम्हारी शादी का क्या हुआ? प्रोफेसर ने कुछ सोचते हुए पूछा।


कुछ नहीं सर, अब आगे देखते हैं। श्लोका ने कुछ सोचते हुए कहा। उसकी आंखों के सामने शिवाय का चेहरा था।


हां वह तुम ने बताया था ना कि तुम्हारे बाबा अब तुम्हारी शादी करना चाहते थे। इस लिए पूछा। अब बाबा तो रहे नहीं इस लिए पूछा कि कहीं रिश्ता वगौरह तो नहीं कर दिया था। अगर मेरी कोई भी हेल्प चाहिए तो मुझे बताना। मैं भी तुम्हारे बाबा जैसा हूं 


प्रोफेसर से अपनायित से कहा।


जी सर ज़रूर।


प्रोफेसर से मिल कर वह क्लास लेने चली गई।


नाश्ते की टेबल पर श्लोका नहीं थी। शिवाय को हैरत हुई। क्योंकि वह रोज़ उन के साथ ही ब्रेकफास्ट करती थी। कहीं उसे कल रात वाली मेरी हरकत बुरी तो नहीं लग गई?यही सब सोचते हुए शिवाय नाश्ता करता रहा और नाश्ता करके आफिस चला गया। 


आफिस में काम ज़्यादा होने की वजह से उसे कुछ सोचने का मौका ही नहीं मिला। लेकिन डिनर टाइम उसे श्लोका याद आ गई। तो उसने सोचा घर पर डिनर कर लेता हूं उसी बहाने श्लोका को भी देख लूंगा। एक बार डैड से भी पूछ लूं।


डैड आप घर जा रहे हैं डिनर करने?


नहीं, सुमन के लिए अक्सर चला जाता था। लेकिन आज वह घर पर नहीं है तो यहीं करुंगा।


सुधीर जी ने पूरी बात बता दी।


ठीक है मैं भी यहीं करूंगा। शिवाय ने तुरंत कहा‌।


लेकिन फोन रखते ही वह सोचने लगा कि श्लोका कहां जा सकती है। पता नहीं सुबह गई है, या फिर बाद में। लेकिन इस शहर में वह कहां जा सकती है।


शिवाय के दिमाग में एक बार फिर श्लोका ही थी।


कालेज से श्लोका देर से आई। आते ही उसने खाना खा लिया तो वह डिनर के लिए नहीं गई।


शिवाय के मन में एक बार फिर श्लोका ही घूम रही थी। अगले दिन सुबह भी श्लोका जल्दी नाश्ता करके चली गई। 


शिवाय को समझ नहीं आ रहा था कि कैसे पता करे कि श्लोका घर पर है या नहीं है। एक बार उसने सोचा कि फोन करे। लेकिन उसे समझ नहीं आया कि फोन करके वह बात क्या करेगा। इस लिए वह और परेशान हो गया। सारा दिन आफिस में उसका मूड खराब रहा‌। 


शाम को कालेज से आकर जैसे ही श्लोका आटो से उतरती है। उसी वक्त शिवाय की गाड़ी भी आ जाती है। श्लोका आटो वाले को पैसा देकर जैसे ही घर में जाने लगती है। शिवाय भी गाड़ी से निकल कर तेज़ कदमों से चलते हुए उसके साथ हो जाता है।


जब तुम से कहा था कहीं भी आना जाना हो तो गाड़ी से जाना। फिर क्यों तुम आटो से आ रही हो?


शिवाय ने गुस्से से पूछा। और फिर शिवाय की नज़र उस के चेहरे से होते हुए उसके कपड़े पर पड़ जाती है। श्लोका साड़ी पहने बालों की ढ़ीली चोटी जो कि उसने बायें कंधे से आगे कर रखा था। इस अंदाज़ में वह कुछ और ही लग रही थी।


मैंने भी बोल दिया था कि मैं नहीं जाऊंगी। फिर आप क्यों गुस्सा हो रहे हैं।


श्लोका ने भी नाराज़गी से कहा।


यह मेरा घर है। इस लिए मैं जैसा कह रहा हूं वैसा करो।


शिवाय ने गुस्से से कहा।


श्लोका शिवाय को देखती रह गई। क्योंकि शिवाय की बात का उस के पास कोई जवाब नहीं थी। वह चुपचाप अंदर चली गई। और शिवाय उसे देखता रह गया। ना जाने गुस्से में कैसे यह बात कह दी मैंने उसे ज़रूर बुरा लगा होगा। शिवाय को एक बार फिर गुस्सा आ गया लेकिन इस बार उसे गुस्सा खुद पर आया था।


श्लोका सीधे अपने रूम में चली गई। और बिना कुछ खाये पिये ही वैसे ही बिस्तर पर लेट गई। शिवाय की आवाज़ उसके कानों में गूंज रही थी। उसे उम्मीद नहीं थी कि शिवाय ऐसा भी बोल सकता है। सोचते हुए उसे नींद आ गई। डिनर टाइम उठ कर चेंज करके नीचे चली गई। थोड़ी ही देर में सब लोग आ गये। 


शिवाय ने एक नज़र श्लोका को देखा। लेकिन श्लोका सिर नीचे किये खाना खाती रही।


श्लोका तुम आज कल कहां जाती हो? कमला बता रही थी कि तुम सुबह आठ बजे ही चली जाती हो।


अराध्या खाना खाती श्लोका से पूछती है। जिसे सुनकर श्लोका के होश उड़ जाते हैं कि अब क्या जवाब दे।


शिवाय भी सोचने लगता है कि इतनी सुबह कहां जा सकती है।


उस को जहां मर्ज़ी वहां जाए। इस घर में कभी कोई किसी को बता कर नहीं गया। ना ही आज तक किसी से किसी ने पूछा कि वह कहां था। इस लिए मैं चाहता हूं कि कोई सुमन से भी ना पूछे। मैंने तुम से कभी नहीं पूछा कि तुम कहां जाती हो।


सुधीर जी ने अराध्या को देखते हुए कहा। और सुमन की तरफ देखा जिस के चेहरे पर अब सुकून था।


आप नाराज़ क्यों हो रहे हैं डैड। मैंने तो सिर्फ इस लिए पूछा कि नया शहर है और इसे यहां क्या काम हो सकता है भला।


अराध्या ने सफाई दी।


अराध्या इसी शहर की रहने वाली है। और पढ़ी-लिखी है यह अपना भला-बुरा समझती है। लेकिन सुमन एक गांव की लड़की है उसे शहर के बारे में क्या पता? और इसे शहर में क्या काम हो सकता है जो यह सुबह की गई शाम को वापस आती है।


ममता जी ने नाराज़गी से सुधीर जी को देखते हुए कहा।


अंकल आप को हक है कि किसी से कभी भी कुछ भी पूछ सकते हैं। आप इस घर के बड़े हैं। आप को पूछना चाहिए ना सिर्फ मुझसे बल्कि इन सब से भी।


श्लोका सब को देख कर कहती हुई खड़ी हो जाती है। और सीधे अपने रूम में चली जाती है।


जाहिल लड़की.... ममता जी ने दांत पीसते हुए कहा।


जाहिल नहीं समझदार..... सुधीर जी कहते हुए उठ गए। और हर कोई सुधीर जी को देखता रह गया।


खाना खा कर शिवाय बाहर हॉल में बैठ गया। सुधीर जी भी वहीं थे। शिवाय सुधीर जी को देख कर मुस्कुरा देता है।


क्या हुआ? यह मुस्कुराहट किस लिए?


सुधीर जी ने भी मुस्कुराते हुए पूछा। 


आप भी तो मुस्कुरा रहे हैं। शिवाय ने हंसते हुए कहा।


अच्छा.....


सुधीर जी हंस पड़े।


सुमन बहुत खुद्दार लड़की है। सुधीर जी ने कुछ सोचते हुए कहा।


हां पता है, शाम को मैंने भी कुछ गलत बोल दिया था। शिवाय ने सोचते हुए कहा।


अच्छा, तुम ने क्या बोल दिया? सुधीर जी जानना चाहते थे कि क्या बात थी।


अब तो गलत बोल दिया। अब देखता हूं उस को सही करने के लिए क्या करना पड़ता है।


शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा।


ठीक है डैड चलता हूं। कहते हुए शिवाय उठ गया। उसे जल्द से जल्द श्लोका से बात करना है यही सोचते हुए वह ऊपर चला गया।


थोड़ी देर बाद वह बालकनी पर गया। मगर वहां पर श्लोका नहीं थी वह वापस रूम में आ गया। और कुछ सोचते हुए वह श्लोका के दरवाज़े पर था।


श्लोका.... थोड़ा सा दरवाज़ा खोल कर वह श्लोका को आवाज़ देता है। जब वह नहीं बोलती है तो अंदर जाकर देखता है। वह सो रही थी।


श्लोका.... शिवाय एक बार फिर आवाज़ देता है। जब उसे लगा कि वह सो रही है तब वह वापस चला जाता है।


जैसे ही दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आती है। श्लोका आंख खोल देती है। मुझे पता था तुम ज़रूर आओगे। इस लिए मैंने सोने का नाटक किया। 


इस वक्त मैं तुम से कोई बात नहीं करना चाहती शिवाय। श्लोका ने मन ही मन कहा। श्लोका को पता था उसके ऐसा करने से शिवाय और परेशान होगा। लेकिन श्लोका इस वक्त कठोर बन गई।


मुझे पता है कि तुम इतनी जल्दी नहीं सोती हो। तुम जानती थी कि मैं तुम्हारे पास आऊंगा। शायद इस लिए तुम सो गई। तुम मुझ से बात नहीं करना चाहती हो। शिवाय कमरे में बैठा यही सब सोच रहा था। जब कुछ समझ नहीं आया तो टीवी चालू करके बैठ गया। 


अगली सुबह शिवाय आठ बजे बालकनी पर था। थोड़ी देर बाद श्लोका घर से बाहर निकली। आज भी उसने साड़ी पहन रखा था। लेकिन आज चोटी नहीं बनी थी। बल्कि उसने आगे से बालों में किलिप लगा रखा था। और पीछे से बालों को समेट कर क्लैचर से फंसा रखा था। हमेशा की तरह वह बिल्कुल फ्रेश लग रही थी। शिवाय ने महसूस किया था कि उसके चेहरे पर एक खास ताज़गी रहती थी।वह मेन रोड तक पैदल गई। थोड़ी देर में एक आटो आया। और वह आटो पर बैठ कर चली गई।


शिवाय वापस आ कर लेट गया। और कुछ सोच कर वह दोबारा सो गया। सो कर उठा तो ब्रेकफास्ट करके आफिस चला गया। शाम को आफिस टाइम खत्म होते ही उसके तीनों दोस्त आ गये। जिसे शिवाय ने पहले ही मैसेज कर दिया था।


क्या बात है सब ठीक?


रवि ने पानी पीते हुए पूछा।


हां ठीक है, कई दिन से मिले नहीं थे। और मुझे लगा कि आज भी नहीं मिल पायेंगे इस लिए।


शिवाय ने कुछ सोचते हुए कहा।


सब ठीक चल रहा है? आज कल तुम्हारे सिवा कुछ सूझता ही नहीं है। हेमंत ने मुस्कुराते हुए पूछा।


हां सही चल रहा है। कल कुछ गलत बोल दिया था श्लोका को आज उसी को मनाने का इरादा है।


शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा।


अच्छा तो बात रूठने मनाने तक पहुंच गई?


रवि ने हैरानी से पूछा।


नहीं यार...बात कुछ और है। दो दिन से श्लोका से ठीक से बात नहीं हुई है। आज आराम से बात करूंगा। 


शिवाय ने कहा। और मन में सोचने लगा कि अगर आज भी जल्दी सो गई तो आज जगा दूंगा।


उसी वक्त पिज़्ज़ा और कॉफी आ गई। और वह खाते हुए देर तक बातें करते रहे। डिनर टाइम सब उठ गये। और अपने-अपने घर चले गए।


शिवाय भी घर चला गया।


हेलो डैड कहते हुए वहीं हॉल में ही बैठ गया। और मोबाइल देखने लगा। मोबाइल देखना तो एक बहाना था वह तो श्लोका का इंतेज़ार कर रहा था जो अभी डिनर के लिए नीचे आयेगी।


डैड मैं अपने ग्रुप के साथ डिनर करने जा रही हूं। अराध्या ने सुधीर जी को देखते हुए कहा। जिस की बात पर सुधीर जी और शिवाय दोनों ही हैरानी से उसे देखते हैं।


ऐसे क्या देख रहे हैं। मुझे सुमन की बात सही लगी कि हम कहां हैं हमारे पैरेंट्स को यह बात पता होनी चाहिए। वैसे सुमन अभी तक आई नहीं। कहां है वह? अराध्या ने सुधीर जी से पूछा।


वह आज नहीं आयेगी। उसने मुझे फोन करके बता दिया था। 


सुधीर जी ने फख्र से कहा।


इसका मतलब यह शहर उसके लिए नया नहीं है। अराध्या ने सोचते हुए कहा।


हूं.... सुधीर जी ने कहा।


अराध्या चली गई। 


शिवाय मोबाइल रख कर कुछ सोचने लगा। और फिर उठ खड़ा हुआ। डैड मैं आता हूं आप लोग डिनर कर लेना। मैं बाद में कर लूंगा।


सुधीर जी ने उसे हैरानी से देखा। 


गलत को सही करने जा रहा हूं। शिवाय ने मुस्कुरा कर कहा।


सुधीर जी एक मिनट के लिए चौंक गए। और फिर उन्हें शिवाय की बात याद आ गई। और वह मुस्कुरा दिये। और शिवाय बाहर निकल गया।


कहां हो? एड्रेस बताओ या लोकेशन सेंड करो तुरंत।


गाड़ी में बैठते ही उसने श्लोका को फोन किया। और फोन उठते ही सीधा मुद्दे पर आ गया।


मैं नहीं बताउंगी। श्लोका ने मना कर दिया।


पांच मिनट में तुम्हारा ऐड्रेस नहीं मिला तो पुलिस तुम को ढूंढने निकल जायेगी। मैं पांच मिनट बाद पुलिस को फोन कर रहा हूं। 


शिवाय ने धमकी देते हुए कहा। और फोन रख दिया।


चार मिनट हो गया और उसका मैसेज नहीं आया। लेकिन पांच मिनट में उसका मैसेज आ गया।


मैं लेने आ रहा हूं, तैयार रहो। मैसेज टाइप कर के फोन को रखते ही शिवाय ने गाड़ी स्टार्ट कर दी।


मैं बाहर हूं। आ गया हूं। आ जाओ।


शिवाय ने उसे फोन कर के कहा और तुरंत फोन रख दिया।उसी वक्त वह बाहर आ गई। लेकिन गाड़ी में बैठने के बजाय बाहर ही खड़ी रही, यूं जैसे किसी का इन्तज़ार कर रही हो। शिवाय खामोशी से बैठे रहे। उसी वक्त एक लड़की स्कूटी से आती है।


अरे यार डिनर तो कर के जाओ। मैं इतना सारा सब लेकर आई हूं। उस लड़की ने अपने पैकेट की तरफ इशारा किया।शिवाय को उन की बात साफ सुनाई दे रही थी। लेकिन श्लोका ने मना कर दिया। और उस से गले लग कर मिलती है। और गाड़ी में आकर बैठ जाती है। लेकिन शिवाय की तरफ नहीं देखती है।


शिवाय समझ जाता है कि एक गलती के बाद उसने दूसरी गलती भी कर दी है। सज़ा के लिए तैयार रहना शिवाय... शिवाय ने खुद से कहा और मुस्कुरा दिया।


श्लोका ने अंकल को मैसेज कर दिया कि वह घर आ रही है। जिसे पढ़ कर सुधीर जी मुस्कुरा दिये। इस का मतलब शिवाय उसे लेने गया है।


यह आप कहां जा रहे हैं? श्लोका ने जब देखा कि गाड़ी कुछ और ही रास्ते पर जा रही है तो उस ने पूछ लिया।


लेकिन शिवाय कुछ बोलने के बजाय खामोशी से गाड़ी चलाते रहे।


आप पहले मुझे घर छोड़ दें उसके बाद जहां जाना हैं जाएं।


लेकिन फिर भी शिवाय ने कोई जवाब नहीं दिया।


आप घर चल रहे हैं या मैं पुलिस को फोन करूं?


श्लोका ने धमकी देते हुए कहा। जिसे सुनकर शिवाय बहुत ज़ोर से हंस पड़ा। और उसकी हंसी देख कर श्लोका को और गुस्सा आ गया। अभी पुलिस आ जायेगी तब देखती हूं आप की हंसी।


श्लोका ने एक बार फिर धमकी दी। लेकिन शिवाय जवाब देने के बजाय अपनी ड्राइव पर ध्यान देते हैं

। और थोड़ा आगे जाकर गाड़ी साइड में करके रोक देते हैं। 


अब बोलो क्या कह रही थी? और श्लोका को देखने लगता है। सुबह उसका यह रूप दूर से देख ही चुका था अब पास से देख कर उसको और ज़्यादा खुशी मिली।


जारी है...

धड़कन भाग 6

धड़कन भाग 8
























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