धड़कन | भाग 8 | Dhadkan Part 8 | Heart Touching Hindi Love Story

अब बोलो क्या कह रही थी? और श्लोका को देखने लगता है। सुबह उसका यह रूप दूर से देख ही चुका था अब पास से देख कर उसको और ज़्यादा खुशी मिली।


शिवाय को इस तरह देखता पाकर एक पल के लिए श्लोका गड़बड़ा जाती है लेकिन तुरंत वह खुद को सम्हालती है।


लेकिन शिवाय उसी तरह उसे देखता चला जाता है बल्कि यूं कहें कि वह उसमें बिल्कुल खो गया था।


घर चलें।


श्लोका ने उसके आगे हाथ करते हुए कहा।


घर चलेंगे लेकिन डिनर करने के बाद। तुम ने भी डिनर नहीं किया है ना?


शिवाय ने उससे पूछा।


मैं घर जाकर कर लूंगी डिनर, आप घर चलें।


श्लोका उसकी मुस्कुराहट और चमकती आंखों को देख कर कहती है।


नाराज़ हो? कल मैंने जो कहा वह गलत कहा।


शिवाय अपनी गलती मानते हुए कहता है।


और आज जो किया? श्लोका ने सवालिया नज़रों से उसे देखते हुए पूछा।


यह गलत नहीं। शिवाय ने हंसते हुए कहा।


अच्छा, शिवाय की बात सुनकर श्लोका भी मुस्कुरा दी लेकिन उस ने फौरन अपनी मुस्कुराहट छुपा ली।


मैं नहीं चल रही आप जाएं डिनर करके आयें। श्लोका ने नाराज़गी से कहा।


मान जाओ यार, कोशिश करुंगा कि अब गलत ना बोलूं। प्लीज़....


शिवाय ने कहते हुए आंख से मिन्नतें की।


श्लोका को अब अपनी हंसी रोकना मुश्किल हो गया। वह खिड़की पर हाथ रख कर बाहर देखने लगती है ताकि शिवाय उसकी हंसी ना देख ले। मगर शिवाय कहां कम था। वह श्लोका की हंसी देख चुका था।


अचानक शिवाय की नज़र श्लोका के हथेली पर जाता है।जो खिड़की पर उस ने रखा था।


यह हाथ इधर करो। 


क्या हुआ? श्लोका को हैरानी होती है। लेकिन शिवाय तुरंत उसका हाथ खींच कर उसकी हथेली को देखने लगता है। जिस पर मेहंदी से छोटा सा दिल बना हुआ था। और उस दिल में S बना हुआ था।


शिवाय उसकी हथेली पर हाथ फेरते हुए देखता जाता है उसे बड़ी खुशी होती है।


यह क्या है? शिवाय आंख से इशारा करके हथेली की तरफ इशारा करता है।


यह मेरी हथेली है जिस पर मेरा दिल बना है और उस दिल में मेरे नाम का S है श्लोका सुमन सिंह....


श्लोका ने उसे जताते हुए कहा।


अच्छा.... शिवाय एक नज़र फिर हथेली को देखता है और उसकी हथेली पर किस करता है।


शिवाय..... श्लोका को जैसे करेंट लगता है। उसकी सांसें तेज़ हो जाती हैं। वह अपनी हथेली खींच लेती है। शिवाय मुस्कुरा देता है।


शिवाय अपनी तरफ का दरवाज़ा खोल कर बाहर निकल जाता है। और श्लोका की तरफ आकर उसके साइड का दरवाज़ा खोलता है। श्लोका एक नज़र शिवाय को देखती है और खामोशी से निकल जाती है। शिवाय गाड़ी की चाबी गार्ड को देते हैं। और आगे बढ़ जाते हैं श्लोका भी शिवाय के साथ आगे बढ़ जाती है। 


शिवाय एक नज़र अपने साथ चलती श्लोका को देखता है और फिर सामने देखते हुए धीरे से उसका हाथ पकड़ लेता है। शिवाय के ऐसा करते ही श्लोका उसकी तरफ देखती है लेकिन शिवाय मुस्कुराते हुए आगे बढ़ता चला जाता है। शिवाय का जी चाह रहा था यह सफर और लम्बा हो जाए और वह यूं ही उसका हाथ थामे चलता रहे।


रिसेप्शन पर बात करके शिवाय मैनेजर के साथ आगे बढ़ता है लेकिन श्लोका का हाथ अब भी उसके हाथ में था।


श्लोका कई बार अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश करती है। मगर नाकाम रहती है।


वह दोनों एक केबिन में पहुंच कर बैठ जाते हैं। उन को बैठा कर मेन्यू दे कर मैनेजर चले जाते हैं। लेकिन मेन्यू के बजाय शिवाय एक बार फिर श्लोका को देखता है। और मुस्कुरा देता है।


मैं आप के साथ आ गई हूं तो ज़्यादा खुश ना हों। जल्दी खाना खाएं और घर चलें।


श्लोका उसे ख्वाबों से हकीकत में ले आई।


खुश तो खौर मैं बहुत हूं। अच्छा देखो क्या खाना है। शिवाय ने मेन्यू उसकी तरफ करते हुए कहा।


आप को जो खाना है मंगा लें। मैं भी खा लूंगी। श्लोका ने मेन्यू देखते हुए कहा।


फिर भी कुछ तो बताओ। शिवाय ने पूछा।


ठीक है आइस्क्रीम खाने के बाद। श्लोका ने उसे देखते हुए कहा। 


ओके... और फिर शिवाय ने आर्डर कर दिया।


नाराज़ नहीं हो ना?


शिवाय ने उदासी से पूछा।


नहीं.... श्लोका ने सादगी से कहा।


तो फिर आज घर क्यों नहीं आ रही थी।


बस ऐसे ही लेकिन कल आ जाती। श्लोका ने सच कहा।


और मुझे लगा कि तुम को मेरी बात बुरी लग गई इस लिए तुम घर नहीं आ रही हो। और यह सोच कर मैं परेशान हो गया कि तुम पता नहीं कहां होगी। इस लिए मैंने सख्ती से तुम से बात की। शिवाय ने भी सच कहा।


आप ने गलत कहा था। लेकिन वह घर मेरे अंकल का है। जब वह कुछ कहेंगे तब मैं कुछ सोचूंगी। 


श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा।


हां यह बात भी सही है। शिवाय भी हंस पड़ा।


तुम्हें पता है कल से मैं परेशान हूं इस बात को लेकर। कल तुम्हारे रूम में भी गया था। पता नहीं तुम सच में सो रही थी या सोने का नाटक कर रही थी। और मैं वापस आ गया। लेकिन आज के बाद मुझे जब भी तुम से बात करना होगी मैं उसी वक्त करूंगा। फिर चाहे तुम सो ही क्यों ना रही हो।


शिवाय उस के चेहरे को निहारते हुए कहता है।


अच्छा ऐसा.... श्लोका भी हंस देती है।


हां ऐसा...कल से मैं परेशान हूं। और यह मस्त हैं। शिवाय श्लोका का हाथ पकड़ लेता है जो कि वह टेबल पर रखे होती है।


हाथ छोड़ दें। श्लोका ने धीरे से कहा।


यह मिटना नहीं चाहिए। शिवाय उसकी हथेली को देखते हुए कहता है।


इस में ऐसा क्या है। मेरा दिल है और मेरे नाम का S.... श्लोका हथेली को देखते हुए कहती है।


शिवाय कुछ कहने के बजाय खामोशी से उसकी हथेली पर हाथ फेरता है और हाथ छोड़ देता है। यह शिवाय का S है जो तुम्हारे दिल में है। शिवाय मन में सिर्फ सोचता है। कुछ कहता नहीं है। श्लोका उसे देखती रह जाती है।


उसी वक्त वेटर खाना लेकर आ जाता है। 


अच्छे से खाओ। शिवाय श्लोका की प्लेट में निकालते हुए कहता है।


आप अपना निकाले मैं खुद ले लूंगी। श्लोका ने जब देखा कि शिवाय बहुत सारा उसके प्लेट में निकाल रहे हैं तो वह अपनी प्लेट उठा लेती है।


अच्छा ठीक है, तुम ही निकालो। शिवाय अपनी प्लेट में निकाल कर उससे कहता है। 


खाना बहुत ही टेस्टी है। श्लोका खाते हुए कहती है।


यह मेरी फेवरेट जगह है इसी लिए तो मैनेजर साहेब खुद साथ में आये थे। यहां पर बहुत सुकून मिलता है मुझे। और आज तो तुम भी साथ में हो। शिवाय ने खाते हुए कहा। खाना खाने के बाद शिवाय आइस्क्रीम बोल देता है।


श्लोका मोबाइल निकाल कर कुछ टाइप करती है और फोन रख देती है।


अमरिकन नट्स फ्लेवर था। जो कि श्लोका को बहुत पसंद था।


आप भी तो लें। श्लोका ने देखा शिवाय बहुत कम ले रहे हैं।


हां खा रहा हूं। तुम अच्छे से खाओ। शिवाय ने चम्मच पर उठाते हुए कहा।


आप लें। श्लोका एक चम्मच उस को खुद से खिलाती है। श्लोका को इस तरह खिलाते देख शिवाय उस को रोकता नहीं है। और खा लेता है।


आराम से खाना खा कर दोनों बाहर निकलते हैं और गाड़ी में बैठ जाते हैं।


बेहतरीन टाइम.... शिवाय गाड़ी में बैठते हुए कहता है और श्लोका को देखने लगता है। और फिर उसके बालों का क्लैचर निकाल कर उसके बाल पीछे से बिखोर देता है। और गाड़ी स्टार्ट कर देते हैं।


श्लोका सिर्फ शिवाय को देखती है। क्योंकि वह यह हरकत कई बार कर चुके थे।


घर पहुंचकर जैसे ही गाड़ी रूकती है। श्लोका गेट खोलने लगती है।


सुनो... शिवाय ने रोका।


श्लोका रूक कर शिवाय को देखने लगती है।


कल भी जाना है?


हूं...


मेरी बात नहीं मानोगी?


नहीं।


अच्छा मुझे फोन कर देना। मैं ले लूंगा।


नहीं....


अच्छा ठीक है। जब भी मेरी ज़रूरत हो मुझे फोन कर देना।


ठीक है। वैसे ज़रूरत नहीं पड़ेगी। श्लोका ने शरारत से कहा।


सिर्फ डैड को अपने हर पल की खबर देती हो?


आपको कैसे पता? श्लोका को हैरानी हुई।


इतनी देर में कितनी बार तुम ने डैड को मैसेज किया। शिवाय ने मुस्कुराते हुए पूछा।


कभी मुझे भी मैसेज कर लिया करो। शिवाय ने एक अदा से कहा।


मैं अंकल की ज़िम्मेदारी हूं। इस लिए उन को बताना ज़रूरी है। श्लोका ने मुहब्बत से कहा।


आज अराध्या भी डैड को बोल कर गई जाते टाइम। शिवाय ने खुशी से बताया।


अच्छा यह तो बहुत ख़ुशी की बात है। कम से कम मां बाप को पता होना चाहिए कि उन के बच्चे कहां हैं।


कहते हुए श्लोका गाड़ी से उतर जाती है। शिवाय भी गाड़ी से बाहर आ जाता है और गार्ड को चाबी देकर अंदर चला जाता है।


सर यह बैग... गार्ड अंदर आकर शिवाय को श्लोका का बैग देता है।


ठीक है यहीं रख दो। गार्ड बैग वहीं रख कर चला जाता है। गार्ड के जाते ही शिवाय बैग लेकर ऊपर चला जाता है। और श्लोका के रूम को नॉक करके थोड़ा दरवाज़ा खोल कर आवाज़ देता है।


क्या हुआ? श्लोका दरवाज़े पर आती है।


शिवाय उसके आगे बैग करता है।


ओह मैं गाड़ी में ही भूल गई थी। श्लोका बैग लेकर कहती है।


बालकनी में आ रही हो? शिवाय किसी उम्मीद से पूछता है।


पता नहीं, कह कर श्लोका शिवाय को देखती है। जो बड़ी उम्मीद से उसे देख रहा था।


अब मैं जा रही हूं कपड़े बदलने। श्लोका ने शिवाय को देखते हुए कहा। जो बहुत ध्यान से उसे देख रहा था। और श्लोका की बात पर अपने रूम में चला जाता है।


शिवाय चेंज करके फ्रेश होकर बाहर बालकनी में टहलने के लिए चला जाता है। टहलते हुए वह श्लोका के बारे में ही सोच रहा था कि वह आज कल जाती कहां है। क्या मैं उस से पूछूं? लेकिन अगर उस को बुरा लग गया तब क्या होगा। डैड को तो पता है कि वह कहां जाती है। क्यों ना डैड से पूछ लूं? लेकिन अगर डैड ने पूछा कि उस को क्या काम तब मैं क्या कहूंगा।


शिवाय सारे सवाल जवाब खुद ही कर रहा था। और यह सब सोचते हुए शिवाय बार-बार श्लोका की बालकनी की तरफ देख रहा था। यूं जैसे उसे श्लोका का इंतेज़ार हो।


श्लोका भी चेंज करके सोच रही थी कि बालकनी में जाए लेकिन उसे यकीन था कि शिवाय भी वहां होंगे। वह थोड़ा सा दरवाज़ा खोल कर चुपके से देखना चाहती है कि अगर शिवाय होंगे तो वह नहीं जायेगी।


लेकिन उस का सारा प्रोग्राम धरा की धरा रह जाता है। शिवाय उसके दरवाज़े के ठीक सामने रेलिंग की टेक लगाए उसके दरवाज़े की तरफ मुंह करके खड़े थे।


श्लोका अपनी चोरी पकड़े जा

ने पर शर्मिन्दा थी तो वहीं शिवाय को बहुत ज़ोर से हंसी आ जाती है।


श्लोका दरवाज़ा बन्द करने लगती है लेकिन शिवाय तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींच लेता है।


जारी है...

धड़कन भाग 7

धड़कन भाग 9






























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