डोर धड़कन से बंधी | भाग 84 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 84 | Hindi Romantic Story
अब तुम सब इंज्वॉय करो, हम थोड़ा आराम करके गांव के लिए निकल जायेंगे। शिवाय अंदर की तरफ जाते हुए कहते हैं। साथ में श्लोका भी बढ़ जाती है।
अंदर कहां जा रहे हैं मिस्टर शिवाय सिंह ओबेरॉय?…
काजल की तेज़ आवाज़ उन के कदम रोक देती है। साथ ही साथ हर किसी की नज़र काजल पर उठ जाती है।
ओबेरॉय मेंशन अब मेरा है। और मैं नहीं चाहती कि कोई बाहर का आदमी मेरे घर में रहे। काजल मुस्कुरा कर शिवाय से कहती है।
काजल यह क्या कह रही हो? प्रेम जल्दी से उसके पास जाकर कहता है।
शायद तुम ने ठीक से सुना नहीं मिस्टर प्रेम सिंह ओबेरॉय यह घर अब मेरा है। काजल एक बार फिर कहती है।
काजल यह घर हमने तुम्हारे नाम कर दिया है लेकिन हम सब यहां साथ में रहेंगे। प्रेम को तो समझ ही नहीं आ रहा था कि वह काजल को कैसे समझाए।
चलो श्लोका…शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर बाहर की तरफ मुड़ते हैं।
नहीं डैड आप कहीं नहीं जायेंगे। हम सब यहीं पर साथ में रहेंगे। प्रेम श्लोका का हाथ पकड़ कर अंदर की तरफ बढ़ता है।
नहीं प्रेम तुम और काजल यहां पर रहो। हम को गांव के लिए निकलना है। श्लोका प्रेम का हाथ छुड़ा कर वापस मुड़ जाती है।
हर कोई खामोश रहता है क्योंकि शिवाय खामोश थे।
प्रेम खामोशी से अंदर की तरफ बढ़ता है।
आप कहां जा रहे हैं मिस्टर ओबेरॉय?
काजल प्रेम के आगे हाथ करते हुए कहती है।
लेकिन प्रेम कोई जवाब देने के बजाए आगे बढ़ता है।
आप मेरे घर में इस तरह नहीं जा सकते। यह मेरा घर है। काजल का अंदाज़ सब को हिला गया।
क्या मतलब? प्रेम उलझा।
मतलब यह कि आप सब अभी के अभी यहां से निकल जाएं। काजल साफ लफ़्ज़ों में कहती है।
काजल के अल्फाज़ शिवाय के बढ़ते कदमों को रोक देती है।
प्रेम से तुम्हारी सगाई हुई है। बहुत जल्द तुम दोनों की शादी होने वाली है। तुम हमें निकाल सकती हो। लेकिन प्रेम को नहीं। उसी के कहने पर हमने तुम को सब कुछ दिया है।
तुम दोनों एक दूसरे से प्यार करते हो। शिवाय हैरानी से उसे देखते हुए कहते हैं।
आप ने कैसे सोच लिया कि मैं इस प्रेम से शादी करुंगी। मुझे किसी से शादी नहीं करनी। मैं किसी प्रेम से प्रेम नहीं करती। मैं सिर्फ दौलत से प्रेम करती है। जो कि मुझे मिल गई है। काजल बेगैरती से कहती है।
तुम ऐसा नहीं कर सकती… मैं तुम से प्यार करता हूं। प्रेम की आंख नम हो गई। गुस्से से ज़्यादा उसे दुख हो रहा था।
लेकिन मैं तुम से प्यार नहीं करती। तुम सब अभी के अभी यहां से जाओ। काजल गुस्से से कहती है।
हम अभी पुलिस को फोन करते हैं। पूजा गुस्से से कहती है।
जिसे फोन करना है कर लो। पेपर मेरे पास है। काजल खुशी से कहती है।
आंटी आप काजल को समझाएं…यह क्या कह रही है। प्रेम काजल की मां की तरफ बढ़ता है।
यह बिल्कुल सही कह रही है। गरीबी में इस का बचपन बीता। जैसे-जैसे यह बड़ी होती गई। दौलत गाड़ी बंगले के लिए मुझसे लड़ती रहती। इसे अपनी गरीबी से नफरत थी। और दौलत इसे मैं दे नहीं सकती थी।
एक दिन मैंने इससे गुस्से में बोल दिया कि अगर अमीर बनना है तो किसी अमीरज़ादे को बेवकूफ बनाओ।
बहुत से लड़के इस के दोस्त बने। इस पर दौलत भी लुटाई। मगर किसी ने भी अपना घर जायदाद नहीं दिया। लेकिन आज यह अपनी कोशिश में कामयाब हो गई।
वाकई में तुम इस से सच्ची मुहब्बत करते हो। लेकिन यह इस लायक नहीं है।
काजल की मां बहुत सुकून से कहती है।
काजल तुम ऐसा नहीं कर सकती। प्रेम एक बार फिर काजल की तरफ बढ़ता है।
मैं ऐसा कर चुकी हूं। मेरे इस घर में, मेरे दिल में कहीं भी तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है। वैसे मुझे यह सब देने के लिए बहुत शुक्रिया। मैंने तुम्हारे जैसा बेवकूफ आज तक नहीं देखा। काजल हंसी।
प्रेम तुम ने इसी लड़की से मुहब्बत के दावे करते हुए अपने माता-पिता की मुहब्बत पर उंगली उठाई थी ना? आदर्श गुस्से से आगे आकर कहते हैं।
आदर्श प्लीज़…शिवाय के अल्फाज़ कहीं गहरी खाईं से आती हुई सुनाई दी। लेकिन आदर्श उसकी प्लीज़ को नज़रंदाज़ कर गए।
बोलो…अब कुछ कहो।
तुम जानते ही नहीं हो कि मुहब्बत होती क्या है।
तुम्हारे सामने मुहब्बत की जीती-जागती मिसाल थी। उसके बाद भी तुम धोखा खा गए।
तुम्हें पता है तुम क्यों धोखा खा गए?
क्योंकि तुम ने इनकी मुहब्बत देखी ही नहीं।
आदर्श…शिवाय एक बार फिर आदर्श को रोकने की कोशिश करते हैं।
मैं आज चुप नहीं रहूंगा शिवाय… इस ने शिवाय और श्लोका की मुहब्बत पर उंगली उठाई थी। वह शिवाय जिस की एक आवाज़ पर श्लोका अपना सब कुछ छोड़ कर चली गई।
महलों में रहने वाले अपना परिवार बचाने, अपने बच्चों की खुशियों के लिए घर से बेघर हो गए। हमेशा नर्म मुलायम बिस्तर पर सोने वाले सख्त बिस्तर पर सोए।
जिस के छोटे छोटे कामों के लिए कदम-कदम पर बंदे खड़े थे। उस ने अपने काम खुद किए। जिस के अंडर लाखों नौकर काम करते हैं। उस ने दूसरों की नौकरी की।
तुम ने कहा था कि यह सब तुम्हारे दादू ने बनाया है। तुम्हारा बाप सब कुछ छोड़ कर खाली हाथ निकला था घर से।
तुम अपने बाप को नहीं पहचान पाए। यह आज खाली हाथ भी जहां खड़ा हो जायेगा वहां हज़ारों कम्पनियों को खड़ा कर सकता है।
पूछो अपने दादू से कि कभी उनके शिवाय ने उन से ऊंची आवाज़ में बात की है। कभी श्लोका को पाने के लिए उनके खिलाफ खड़ा हुआ था।
पूछो अपनी दादी से कि शिवाय का बचपन कैसे गुज़रा था।
आदर्श थोड़ा रूके। शायद अल्फाज़ उनका साथ नहीं दे रहे थे। उनका लहजा भर्रा गया। आंख आंसुओं से भर गई। वहां पर मौजूद हर किसी की आंख नम थी।
जारी है…
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