डोर धड़कन से बंधी | भाग 86 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 86 | Hindi Romantic Story
आज की रात बहुत मुश्किल भरी रात थी। हर कोई परेशान था। हर कोई जाग रहा था। अगली सुबह का सूरज एक नई उम्मीद एक नई रौशनी के साथ रौशन होगा। इसी उम्मीद के साथ हर कोई सुबह होने का इंतेज़ार कर रहा था। लेकिन शायद आज की रात बहुत लम्बी थी।
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श्लोका हाउस के गेट पर जैसे ही गाड़ी रूकती है। श्लोका शिवाय के बाहर निकलते ही प्रेम दौड़ कर श्लोका के गले लग जाता है। और पूजा शिवाय का हाथ थाम लेती है।
सब अंदर जाते हैं। अंदर जाकर प्रेम शिवाय के गले लग जाता है। मुझे माफ कर दें प्लीज़…मैंने बहुत बड़ी गलती की है। प्रेम रो देता है।
मेरा बच्चा…श्लोका भी दूसरी तरफ से प्रेम को थाम लेती है।
कोई बात नहीं…गलतियां इंसान से ही होती हैं। शिवाय उसकी पीठ थपथपाते हुए कहते हैं। और वहीं सोफे पर बैठ जाते हैं।
मौम काजल ने मुझे अंदर जाने नहीं दिया। मैं उस से प्यार करता था। मैंने हमेशा उसका ख्याल रखा था। लेकिन वह मुझे धोखा दे गई। उसका प्यार झूठा था मौम… मां को देख कर प्रेम के दर्द जाग उठे।
मुहब्बत एक बहुत ही प्यारी और खूबसूरत चीज़ है।
मुहब्बत… जो किसी को मिल जाए तो इंसान को खुशकिस्मत समझना चाहिए। काजल बदनसीब है जो तुम्हारी मुहब्बत को समझ ना सकी। अगर वह खुशकिस्मत होती तो वह समझ पाती कि तुम्हारी मुहब्बत के साथ उसे दौलत गाड़ी बंगले सब मिल रहे हैं। लेकिन वह बदकिस्मत है।
काजल को एक बुरा ख्वाब समझ कर भूल जाओ। ज़िन्दगी रुकने का नाम नहीं। आगे बढ़ो अपने काम पर ध्यान दो। श्लोका प्रेम को समझाती है।
लेकिन मौम हमारा सब कुछ चला गया। प्रेम को दौलत जायदाद और ओबेरॉय मेंशन याद आया जो काजल के नाम हो चुका था।
मेरी सबसे बड़ी दौलत मेरे बच्चे मेरे साथ हैं। मुझे और क्या चाहिए। श्लोका एक बार फिर प्रेम को गले लगा कर कहती है।
आप लोग हर बात को कैसे इतना आसान बना देते हैं? पूजा हैरानी से अपने मौम डैड को देखती है।
ज़िन्दगी में मुश्किल और परेशानियां हमेशा लगी रहेंगी। लेकिन उन मुश्किलों और परेशानियां से हमें कैसे निपटना है। यह हमारे ऊपर है। एक बात और…परेशानी में परेशान होने के बजाए सुकून से उस परेशानी को हल करने की कोशिश करना चाहिए।
शिवाय अपने बच्चों को समझाते हैं।
लेकिन डैड हमारा बहुत कुछ चला गया। प्रेम को एक बार फिर चिंता हुआ।
हमें कुछ खिलाओगे या यूं ही खाली पेट रखोगे? शिवाय उसकी बात को नज़रंदाज़ करके उठते हुए कहते हैं।
हां डैड मैं देखती हूं। तब तक आप लोग फ्रेश हो जाएं। पूजा जल्दी से उठ खड़ी होती है।
डैड आप कल लंदन जा रहे हैं? प्रेम भी शिवाय के साथ उठ खड़ा होता है।
हां, कल सुबह कुछ इंटरव्यू लेने हैं। शाम को निकल जाऊंगा। श्लोका और काजल भी कल गांव जा रही हैं। शिवाय उसे सारी बात बताते हैं।
आप सब फिर मुझे अकेला छोड़ देंगे? प्रेम परेशान हुआ उन के जाने का सुन कर।
कोई अकेला नहीं है हर किसी के साथ हर कोई है। कल से तुम आफिस जाओ और काम पर ध्यान दो। तुम्हारा नया काम है। अपने काम में नाम और पहचान बनाओ। शिवाय एक बार फिर समझाते हैं। और अपने रूम की तरफ बढ़ जाते हैं।
श्लोका भी उठ जाती है।
एक बात कहूं भाई? पूजा प्रेम के गरीब बैठ जाती है।
हां बोलो…
काजल ने जब आप के साथ गलत किया। तो मुझे लगा कि आप बहुत परेशान होंगे। मुझे आपकी बहुत फिक्र हुई थी। कल पूरी रात मैं सो नहीं पाई। मुझे यही फिक्र थी कि आप का क्या होगा।
जैसा मैंने अक्सर फिल्मों और कहानियों में पढ़ा और देखा था कि नाकाम प्रेम में लोग क्या-क्या कर लेते हैं। मुझे डर था कि आप कहीं कुछ गलत ना कर लें। लेकिन आप को देख कर मुझे खुशी हुई कि आप ठीक हैं। पूजा अपने मन में आए सवालों को प्रेम के सामने रखती है जो कल से उसे परेशान किए हुए थे।
काजल के रवैए से मुझे बहुत दुख हुआ। मैं उससे बहुत प्यार करता था। लेकिन जब उस ने मुझ से मेरा सब कुछ ले लिया। उसे मेरे प्यार की कद्र ही नहीं है। तो पता नहीं क्यों मुझे उससे बहुत नफरत हुई। मेरा दिल जो उसकी खुशियों के लिए पागल रहता था। उसके ऐसा करते ही मुझे लगा वह मेरे दिल से निकल गई। प्रेम उदासी से कहता है।
आप ने बिल्कुल सही किया भाई…किसी ऐसे इंसान के लिए हम क्यों अफसोस करें जो हमारा ही नहीं है। हमारे मौम डैड हमारे साथ हैं। हमें और क्या चाहिए।
काजल मुस्कुरा कर कहती है।
क्या मीटिंग चल रही है भाई-बहन की? आरव अंदर आते हुए कहता है।
कुछ नहीं यार…मेरी यह छोटी बहन मुझ से ज़्यादा समझदार है। प्रेम मुस्कुरा कर कहता है।
वह तो है…आरव भी मुस्कुराया।
भाई मेरी वजह से आरव को बहुत परेशानी हुई। लेकिन यह हमेशा मेरे साथ रहे। पूजा मुहब्बत से आरव को देख कर कहती है।
एक ही बीवी है…अब इस का ख्याल नहीं रखूंगा तो किस का रखूंगा? आरव सीरियस होकर कहता है।
आरव…पूजा आरव को आंख दिखाती है।
और आरव आगे बढ़ कर उसे गले लगा लेता है। मेरी इकलौती बीवी…
और फिर सब हंस पड़ते हैं।
खुशियों का बसेरा वहीं रहता है। जहां समझदारी और मुहब्बत रहती है। श्लोका और शिवाय की शिक्षा ऐसी थी कि अगर कोई राह भटक भी जाए तो उस के वापस आने के रास्ते खुले रहते हैं।
जारी है…
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