डोर धड़कन से बंधी | भाग 87 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 87 | Hindi Romantic Story
खुशियों का बसेरा वहीं रहता है। जहां समझदारी और मुहब्बत रहती है। श्लोका और शिवाय की शिक्षा ऐसी थी कि अगर कोई राह भटक भी जाए तो उस के वापस आने के रास्ते खुले रहते हैं।
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आफिस में इंटरव्यू लेते हुए भी शिवाय का मन प्रेम में लगा हुआ था। उसके साथ जो हुआ गलत हुआ। शिवाय को अब उसके आगे की ज़िन्दगी की फिक्र थी कि जल्दी से जल्दी उस की ज़िन्दगी रास्ते पर आ जाए।
सर आप ठीक हैं। शिवाय के मैनेजर पूछते हैं।
हां क्यों क्या हुआ? शिवाय हैरान होते हैं।
सर आप कुछ परेशान लग रहे हैं।
नहीं ऐसी कोई बात नहीं।
तो फिर इंटरव्यू को आगे बढ़ाया जाए।
जी...
मैनेजर बेल बजाते हैं।
उसी वक्त एक लड़की अंदर आती है। शिवाय उसे देख कर हैरान रह जाते हैं। ऐसी लड़कियां हैं भी दुनिया में? वह मन ही मन सोचते हैं।
सिम्पल सूट सलवार में बालों को सादगी से बांधे हुए। कानों में छोटा सा टाप्स और हाथ में घड़ी लगाए वह डरी सी लड़की पहली ही नज़र में शिवाय के दिल को छू गई।
इंटरव्यू लेते हुए भी शिवाय का ध्यान उस के हर अंदाज़ पर था।
मिस तनाशा…शिवाय उस की फाइल पर एक नज़र उस का नाम देखते हैं और कहना शुरू करते हैं।
आप को काम का तजुर्बा नहीं है। इस लिए हम पहले आप का काम देखेंगे। उसके बाद फाइनल होगा कि आप इस जॉब के लायक हैं भी नहीं। अगर आप को मंज़ूर है तो आप कल से काम पर आ जाएं। वरना…
मुझे मंज़ूर है… शिवाय की बात पूरी भी नहीं होती कि वह बीच में ही बोल देती है।
गुड, शिवाय मुस्कुरा दिए।
आप जाएं। बाकी बातें आप को बाहर बता दिया जायेगा। मैनेजर नताशा से कहते हैं।
वह उठ कर नमस्ते करते हुए बाहर चली जाती है।
कोई और बाकी है?
नहीं,
ठीक है फिर नताशा को काम समझा दें। और कल इसे प्रेम के आफिस में उसके केबिन में बैठने की जगह बना दें। शिवाय कुछ सोच कर कहते हैं।
और मैनेजर हैरानी से शिवाय को देखता है।
लेकिन…इंटीरियर में टेक्सटाइल? मैनेजर हुआ।
हां अभी करने दें। मैं लंदन से आता हूं फिर देखता हूं। शिवाय लापरवाही से कहते हैं। और उठ खड़े होते हैं।
मैनेजर भी पीछे-पीछे उठ जाता है। बॉस का हुक्म था मानना ही था।
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अगले दिन सुबह प्रेम अपनी केबिन जाता है तो हैरान रह जाता है। एक लड़की उस के केबिन में बैठी लैपटॉप पर कुछ कर रही थी।
आप कौन? और यहां कैसे?
मैं नताशा… सर ने मुझे यहां पर बैठने के लिए कहां है। वह जल्दी से कहती है।
प्रेम तुरंत अपने मैनेजर को फोन करता है। और उसकी बात सुनकर हैरान रह जाता है। उसे हैरत होती है कि डैड ने उस लड़की को यहां पर क्यों जगह दी।
जब कि वह टेक्सटाइल से थी।
लेकिन फिर वह खामोश रह गया कि वह पहले ही बहुत सब को नाराज़ कर चुका है।
वह खामोशी से अपना काम करने लगा।
नताशा भी खामोशी से अपना काम करने लगी।
काम करते हुए अचानक से प्रेम को उस रात वाला मंज़र याद आ गया। वह काम छोड़कर पीछे चेयर पर सिर टिका कर आंख बन्द कर लेता है।
काजल तुम ने मुझ से मेरा सब कुछ छीन लिया। मेरी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी गलती तुम से प्यार करना था। लेकिन मैं भी क्या करता तुम को देखते ही मुझे तुम से प्यार हो गया। मैं तुम्हारी अदाओं का दीवाना हो गया। मैंने तुम्हारे चेहरे की खूबसूरती देखी। मैं तुम्हारे दिल की बदसूरती और तुम्हारे मन का मैल नहीं देख पाया।
प्रेम सोचे जा रहा था। और हर सोच हर याद के साथ उसका दिल टूटता जा रहा था।
नताशा की नज़र बार-बार उस पर उठ रही थी।
प्रेम इंटरकॉम पर कॉफी का बोल कर दोबारा लैपटॉप पर नज़र जमा देता है।
आप भी नए हैं क्या? नताशा प्रेम से पूछ ही लेती है।
क्यों? प्रेम हैरान हुआ।
आप परेशान लग रहे हैं। इस लिए मुझे लगा। नताशा सादगी से कहती है।
इस का मतलब इसे नहीं पता कि मैं इस कम्पनी का मालिक हूं। प्रेम मन ही मन सोचता है।
जी, प्रेम भी अंजान बन गया।
परेशान मत हों…धीरे-धीरे सब ठीक हो जायेगा। वह उसे तसल्ली देती है।
और उसकी बात पर प्रेम के होंठों पर मुस्कान छा जाती है।
उसी वक्त प्रेम की काफी आ जाती है।
कॉफी? प्रेम कॉफी की तरफ इशारा करता है।
नो थैंक्स…वह मुस्कुरा दी।
प्रेम का मन कॉफी पीते हुए उसी की तरफ लगा हुआ था। कॉफी पीकर वह एक नज़र उस पर डालता है। जो लैपटॉप पर काम कर रही थी। प्रेम भी अपनी नज़र लैपटॉप पर जमा देता है।
लंच टाइम नताशा अपना लंच लेकर डाइनिंग ऐरया में चली जाती है। और चुपचाप एक कोने में बैठ कर अपना लंच करके वापस केबिन में आकर काम करने लगती है।
शाम तक वह काम करती रही लेकिन प्रेम नहीं आया। उसे प्रेम की फिक्र हुई। कहीं ऐसा तो नहीं कि काम की परेशानी की वजह से काम छोड़ कर चला गया।
यही सब सोचते हुए नताशा भी अपने घर चली गई।
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मिस्टर ओबेरॉय आप बहुत हैंडसम हैं। मीटिंग खत्म करते ही शिवाय जैसे ही बाहर निकलते हैं। एक औरत आकर कहती हैं।
शिवाय नज़र उठा कर उसे देखते हैं। मीटिंग हॉल में वह भी थीं। शिवाय को याद आया।
जी, शुक्रिया…शिवाय मुस्कुराए।
क्या आप अपना थोड़ा सा कीमती वक्त मुझे दे सकते हैं? वह मुस्कुरा कर अपने बालों को एक अदा से पीछे करते हुए कहती है।
कोई ज़रूरी काम? शिवाय हैरान हुए। पहली ही मुलाकात में इतनी बेतकल्लुफी।
ज़रूरी काम तो हो चुका। मीटिंग खत्म हो चुकी है। वह एक अदा से मुस्कुराई।
मैं माफी चाहता हूं। लेकिन काम के बाद मैं आराम करता हूं। शिवाय आगे बढ़े।
ठीक है फिर रात में डिनर टाइम मिलते हैं। वह झट से कहती है।
शिवाय एक नज़र उसे देखते हैं। और खामोशी से आगे बढ़ जाते हैं।
और पीछे वह कुछ सोच कर मुस्कुरा देती है।
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कल आप लंच बाद आए नहीं तो मुझे लगा कि आम काम छोड़कर चले गए क्या? अगली सुबह आफिस में प्रेम को देखकर नताशा कहती है।
और उसकी बात पर प्रेम हैरानी से उसे देखता है। कल लंच के बाद उसकी मीटिंग थी। जो देर तक चलती रही। इस लिए वह दोबारा आफिस नहीं आया। और उस ने क्या कुछ सोच लिया।
प्रेम के खामोश रहने पर नताशा भी खामोशी से काम करने लगी।
नताशा का फोन आता है। वह घबराई हुई सी बात करती है। और फोन रखते ही उठ खड़ी होती है। जल्दी-जल्दी अपना सामान बैग में रखती है।
प्रेम की नज़र उसी पर थी। फोन बजने पर प्रेम का ध्यान भी उस की बातें में लग गया था।
कोई परेशानी? उसे परेशान देखकर प्रेम भी अपनी जगह से उठ खड़ा होता है।
मेरी मां की तबियत खराब हो गई है। मैं घर जा रही हूं। आप सर को बोल देना। कहते ही वह आगे बढ़ी।
प्रेम भी कुछ सोच कर उसके पीछे-पीछे निकल गया।
गाड़ी में बैठो…नताशा बाहर जाकर आटो का इन्तेज़ार कर रही थी तभी प्रेम गाड़ी लेकर उसके सामने आ जाता है।
यह गाड़ी? इतनी परेशानी में भी वह हैरान हुई।
पहले बैठो। प्रेम उसकी बात नज़रंदाज़ कर गया।
वह जल्दी से बैठ गई। बैठते ही रास्ता बताने लगी।
तंग गलियों से होते हुए गाड़ी एक जगह पर रूकती है।
गाड़ी रूकते ही नताशा उतर कर एक घर में अंदर चली जाती है।
और तुरंत कुछ औरतों के साथ नताशा एक लेडी को थाम कर बाहर लाती है। और गाड़ी में पीछे बैठाकर नताशा खुद उन के साथ बैठ जाती है।
चलें…नताशा जल्दी से कहती है।
और कोई नहीं चलेगा? प्रेम को हैरत हुई।
नहीं, आप जल्दी हास्पिटल चलें। वह एक सरकारी अस्पताल का नाम लेती है। जिसे प्रेम जानता भी नहीं था। वह खामोशी से अपने रास्ते गाड़ी मोड़ देता है।
रास्ते में ही प्रेम डाक्टर को फोन कर देता है।
गाड़ी रूकते ही नर्स और वार्ड ब्वॉय स्ट्रेचर उनकी गाड़ी के पास लेकर आ जाती है। और उसकी मां को लेकर तुरंत अंदर चले जाते हैं।
यह हम कहां आ गए? हम यहां का खर्च नहीं उठा सकते। वह हैरानी से प्रेम को देखती है।
प्रेम एक नज़र उसे देखता है। और खामोशी से उसका हाथ थाम आगे बढ़ जाता है।
इसनी परेशानी में भी उसे पैसों की चिंता थी। शायद गरीबी इसी का नाम है। इंसान अपनों को बचाना तो चाहता है। मगर ऐसे की उसको उस वजह से कोई दूसरी परेशानी ना हो।
जारी है…
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