डोर धड़कन से बंधी| भाग 89 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 89 | Hindi Romantic Story

मुश्किल वक्त में तसल्ली के दो बोल, किसी अपने का कंधा, कोई हाथ जो मदद को आगे आ जाए। यही तो हैं ज़िन्दगी के असल रंग…

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हॉल में बड़े से गोल मेज़ पर खाना लगा हुआ था। बहुत सारे लोग आ चुके थे। शिवाय भी आकर बैठ जाते हैं।

हेलो…

शिवाय आवाज़ की तरफ घूमते हैं। बगल वाली चेयर पर दोपहर वाली मैडम बैठी हुई थीं। और मुस्कुरा रहा थी।

हाय… शिवाय भी मुस्कुरा दिए।

देखिए, हमारी फिर मुलाकात हो गई। एक बार फिर वह मुस्कुराई।

मुलाकात तो होना ही था। मिस…शिवाय कहते-कहते रूक जाते हैं।

मिसेज़ सोफिया अग्रवाल…वह नाम बताती हैं। 

हां तो मिसेज अग्रवाल…अभी पूरे हफ्ता हमारी मुलाकात होगी। क्योंकि हम सब इस प्रोग्राम का हिस्सा हैं। शिवाय सब की तरह इशारा करते हैं। 

हां,  मगर फिर भी…कुछ सोच वह मुस्कुराई ।

डिनर करते हैं। शिवाय खाने पर ध्यान देते हैं। 

खाना खाते हुए हर कोई बातें करता रहा। 

खाना खाते ही शिवाय उठ कर बाहर की तरफ निकल जाते हैं।

आइसक्रीम? मिसेज अग्रवाल एक बार फिर शिवाय के सामने थे।

नो थैंक्स…मैं आइसक्रीम सिर्फ अपनी वाइफ के साथ खाता हूं। शिवाय की नज़रों में श्लोका थी।

ओह…ऐसा क्या? मिसेज अग्रवाल को हैरत हुई।

अभी कॉफी…पास आ रहे वेटर के हाथ से कॉफी लेकर शिवाय उसकी बात को नज़रंदाज़ कर गए।

उसी वक्त कुछ लोग और आ जाते हैं। और फिर वह सब बातें करने लगते हैं।

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मौम इस बार आप डैड के साथ नहीं गईं। ऐसा क्यों? वरना डैड तो अक्सर आप को साथ लेकर जाते थे। पूजा मां के बिस्तर पर उन के साथ लेटी कब से बातें कर रही थी। 

हां, जाती तो हूं। लेकिन इस बार मेरा मन नहीं था। मैं कुछ दिन गांव में रहना चाहती थी। इस लिए मुझे यह सही लगा कि मौका अच्छा है। शिवाय लंदन जा रहे हैं। मैं गांव रह जाऊंगी। श्लोका मुस्कुरा कर कहती है।

आप और डैड एक दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। और एक दुसरे का बहुत ख्याल रखते हैं। यह चीज़ मैंने हमेशा देखी थी। लेकिन इस बात को मैंने सब से ज़्यादा तब महसूस किया जब मेरी शादी हुई।

जब-जब आरव मेरा ख्याल रखता। मुझे आप दोनों का प्यार याद आता। 

मैंने सुना था मौम कि कुछ हस्बैंड अच्छे नहीं होती। पति-पत्नी में लड़ाई भी होती है। मुझे इन बातों से डर लगता था। लेकिन मुझे खुशी है कि मुझे आरव जैसा साथी मिला। पूजा खुशी से कहती है।

और बेटी का मुस्कुराता चेहरा देख श्लोका भी मुस्कुरा देती है। बेटी अपने ससुराल में खुश है। एक मां को इस से ज़्यादा और क्या चाहिए।

यह खुशियां, यह मुहब्बतें, यह सुकून… यह सब किस्मत के साथ आप के व्यवहार पर भी निर्भर करता है। कभी-कभी हमारी ज़रा सी समझदारी और खामोशी हमारी ज़िन्दगी बना देती है। और कभी-कभी हमारा गुस्सा और ज़िद सब कुछ बर्बाद कर देता है। 

इस लिए ज़िन्दगी में कभी भी मुश्किल और परेशानी आए तो उसे समझदारी और सुकून से हल करना। श्लोका उसे समझाती है।

हां मौम आप सही कह रही हैं। आप लोगों के जाने से मैं परेशान थी। हमारी नई ज़िंदगी की शुरुआत थी। लेकिन आरव ने मेरे दुख को समझा। और वक्त दिया। वरना अगर आरव भी उन कुछ खास मर्दों की तरह करता तो शायद मैं आज इतना सुकून से ना रह पाती। पूजा की आंखों में आरव के साथ बिताए हर लम्हें थे।

उसी वक्त पूजा का फोन बजता है।

तुम ने याद किया और आरव का फोन आ गया। श्लोका हंसते हुए कहती है।

पूजा भी खिलखिला कर हंस पड़ती है।

मौम मैं आरव से बात करके आती हूं। जब तक आप भी डैड से बात कर लें। पूजा उठते हुए कहती है।

नहीं, अब मैं सोनो जा रही हूं। शिवाय से मेरी बात हो चुकी है। श्लोका रीमोट से नाइट लैम्प जलाकर कमरे की सारी लाइट बन्द करते हुए कहती हैं।

ठीक है आप आराम करें। मैं आती हूं। पूजा बाहर निकल जाती है।

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अब आप घर जाएं, काफी रात हो गई है। आप के घर वाले परेशान हो रहे होंगें। नताशा जब देखती है कि वह जाने का नाम ही नहीं ले रहा है तो उसके घर वालों का बहाना बनाती है। 

घर पर मेरी बात हो गई है। मैं कल सुबह जाऊंगा। अभी तुम रूम में जाकर आराम करो। मैं यहीं पर हूं। प्रेम सोफे पर आराम से बैठते हुए कहता है।

लेकिन नताशा कोई जवाब देने के बजाए चुपचाप बैठी रही। उसके साथ रहने से उसे तसल्ली थी। इस लिए वह चुप रह गई कि सुबह तो चला ही जायेगा।

बैठे-बैठे वह सोफा पर पीछे सिर रख कर आंख बन्द कर लेती है। सुबह से वैसे ही बैठी हुई थी। थोड़ी ही देर में उसे नींद आ गई।

प्रेम ने जब उसे सोता देखा तो अन्दर से कम्बल लाकर धीरे से उस के ऊपर डाल देता है। और वहीं उस के सामने बैठ जाता है।

कुछ देर वैसे ही उसकी नज़र नताशा के चेहरे पर जमी हुई थी। उसकी नज़र नताशा पर थी मगर उस का मन दूर कहीं वीरानें में था। जहां वह तन्हा खड़ा था। उसकी आंखों में आंसू आ गए।

मगर जल्द ही वह वापस हकीकत की दुनिया में आ जाता है। आंसू पोंछ कर जेब से फोन निकाल कर अपनी नज़रें उसमें जमा देता है।

मम्मी…नताशा हड़बड़ा कर सीधी होती है।

क्या हुआ? मम्मी ठीक हैं। प्रेम जल्दी से उठकर उस के पास जाता है। और उसका हाथ पकड़ कर उसे वहीं पर रखे कुशन की तकिया लगा कर लिटा देता है। वह भी खामोशी से लेट कर आंख बन्द कर लेती है।

प्रेम जैसे ही उसके पास से हटने लगता है वह उसका हाथ थाम लेती है। और प्रेम…


जारी है…

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