डोर धड़कन से बंधी भाग | 90 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 90 | Hindi Romantic Story
प्रेम जैसे ही उसके पास से हटने लगता है वह उसका हाथ थाम लेती है। और प्रेम हैरानी से उसे देखता है। क्योंकि उसकी आंख बन्द थी।
वह धीरे से अपना हाथ छुड़ा कर बगल वाले सोफे पर बैठ जाता है।
और उसे देखने लगता है। मुश्किल वक्त में किसी अपने का साथ बहुत ज़रूरी होता है।
ऐसा कैसे हो सकता है कि इस का कोई रिश्तेदार ही ना हो…प्रेम की सूई अब इस पर अटकी हुई थी।
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शिवाय का दिन बहुत ही बिज़ी गया। सुबह मीटिंग और उसके बाद उसे कुछ और भी काम था। जिसे करते हुए उसे रात हो गई। होटल पहुंचते ही वह सीधा डाइनिंग ऐरया में चला गया कि डिनर करके तब रूम में जाए।
बैठते हुए उस ने यूं ही इधर-उधर देखा। और फिर खाना निकालने लगे।
क्या हुआ मुझे ढूंढ रहे थे? पास से कानों में मिसेज़ अग्रवाल की आवाज़ आती है।
इतनी खुशफहमी भी अच्छी नहीं। शिवाय हंसे।
यही खुशफमही तो हमें ज़िंदा रखती है। वरना…मिसेज अग्रवाल कहते-कहते बात अधूरी छोड़ देती हैं।
लेकिन शिवाय कुछ कहने के बजाए अपने खाने पर ध्यान देते हैं। क्योंकि मिसेज अग्रवाल की आंखें में कुछ और ही दिख रहा था।
डिनर करते ही शिवाय बाहर निकल गए। रुम में जाकर उनको श्लोका से भी बात करने थी। पूजा ने भी कहा था कि वह वीडियो कॉल करेगी।
कॉफी…शिवाय जैसे ही अपने रूम के दरवाज़े पर पहुंचते हैं। मिसेज अग्रवाल पास आकर कॉफी उन की तरफ बढ़ाती हैं।
इसकी ज़रूरत नहीं थी। शिवाय कॉफी लेकर कहते हैं। और अंदर की तरफ बढ़ जाते हैं।
मिसेज अग्रवाल भी अंदर आ जाती हैं।
शिवाय हैरानी से उन्हें देखते हैं।
बैठ सकती हूं? शिवाय की हैरानी को नज़रंदाज़ करते हुए वह पूछती हैं।
जी, शिवाय इतना ही कह पाए।
थैंक्स… आप भी बैठे।
हूं। शिवाय भी सामने सोफे पर बैठ जाते हैं।
कॉफी खत्म होते ही शिवाय उठ गए। यूं जैसे अब आप जा सकती हैं।
लेकिन वह जाने के बजाए शिवाय को इशारे करती हैं। जिसे देख कर शिवाय हैरान रह जाते हैं।
आप गलत जगह आ गई हैं। शिवाय बहुत सख्ती से कहते हैं।
इतने लोगों में मैंने आप को चुना। यह आप की खुशनसीबी है। वह पहलू बदलती हैं।
मैंने कहा ना कि आप जा सकती हैं। शिवाय बात खत्म करते हैं।
आप ऐसा क्यों कह रहे हैं? क्या मैं आप को पसंद नहीं आई? लेकिन आप मुझे बहुत पसंद आए। मिसेज अग्रवाल एक अदा से मुस्कुराई।
आप शायद भूल रही हैं कि आप किसी की बीवी हैं।
बिल्कुल नहीं…मैं यह कैसे भूल सकती हूं।
तो फिर उसके बाद यह सब…शिवाय हैरान हुए।
यही तो ज़िन्दगी है…वह हंसी।
पति को धोखा देना? शिवाय की आंखें हैरत से फैल गईं।
वह भी तो यही करता है। मिसेज अग्रवाल के चेहरे का रंग बदला।
क्या? शिवाय की हैरानी बढ़ती जा रही थी।
हां, वह भी यही सब करता है। और सारे मर्द यही सब करते हैं।
लेकिन मैं नहीं करता। मैं अपनी बीवी को धोखा नहीं देता।
और आप की बीवी?
खामोश…आप को कोई हक नहीं पहुंचता मेरी बीवी के किरदार पर उंगली उठाने का। शिवाय चींखें।
क्यों? मेरे पति ने मुझ पर ऐसे ही विश्वास नहीं किया। वह बुदबुदाई।
क्योंकि आप गलत हैं…शिवाय दुख से कहते हैं।
मैं गलत नहीं थी। लेकिन उसने मुझे गलत बना दिया। वह उदास हुई।
शिवाय को यू लगा कि उसके चेहरे की खूबसूरती उसके होंठों की मुस्कान सब बदल गई है। वह वह नहीं जो दिखती है।
शिवाय खामोशी से दोबारा उस के सामने वाले सोफे पर बैठ जाते हैं। और उस की तरफ देखते हैं।
उसने बनाया और आप बन गई? अगर आप सही थी तो सही रहती। गलत होकर आपने उसको सही कर दिया। शिवाय को उससे हमदर्दी हुई।
मैं गलत नहीं होना चाहती थी। लेकिन उस ने मुझे मजबूर कर दिया गलत होने पर। और आप देख ही रही हैं…वह अपनी तरफ इशारा करती है।
लेकिन शिवाय खामोश रहे।
मेरा फैशन और मेरे पति का हीरों का कारोबार है। काम के सिलसिले में हम बाहर जाते हैं। मैं बाहर जाती थी। लेकिन अपने काम से काम रखती थी। मिसेज अग्रवाल ने कहना शुरू किया।
एक बार एक पार्टी में ऐसी बातें सुनकर मैं हैरान रह गई। और मिस्टर अग्रवाल ने मज़ाक में वह बात कह दी। जो मैं सोच भी नहीं सकती थी। वह ज़रा ठहरी।
मैं लाख एडवांस और नए ज़माने के साथ चलने वाली थी। लेकिन मुझे अपनी हदों और संस्कार पता थे। लेकिन उस ने मुझे गलत बना दिया।
आप ने समझाया नहीं मिस्टर अग्रवाल को?
मैंने उन्हें समझाया कि वह जो कर रहे हैं गलत है। तो पता है उस ने क्या कहा?… उसने कहा कि तुम सही हो। यह बात मैं कैसे मानूं। और उस वक्त मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं था। मैं अपनी सफाई में एक लफ्ज़ नहीं बोल पाई। कहते-कहते मिसेज अग्रवाल की आंख नम हो गई।
और फिर आप गलत हो गई? शिवाय दुख से कहते हैं।
हां, मैं गलत हो गई। उस ने मेरा मान, मेरा विश्वास, मेरा प्यार सब कुछ तोड़ दिया। एक लम्हे मैं टूट गई थी। लेकिन फिर मेरे अंदर भी ज़िद आ गई। और आज देखें… मैं कहां आ गई।
ज़माने के लिए हम एक कामयाब पति-पत्नी हैं। कहने को मैं उस शख्स के साथ रहती हूं। लेकिन मेरा दिल मर चुका है।
उसने भले आप को गलत समझा लेकिन आप को सही रहना चाहिए था। अगर आप सही रहती तो कम से कम आप अपनी ही नज़रों में तो ना गिरती।
कौन हमें क्या समझता है। हमारे लिए यह मायने नहीं रखता है। हम क्या हैं… हमारे लिए यह ज़रूरी है।
जारी है…
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