धड़कन | भाग 26 | Dhadkan Part 26 | Heart Touching Hindi Love Story
मतलब आप अपने बेटे पर मुझे ज़बरदस्ती थोपेंगे? श्लोका ज़ख्मी नज़रों से सुधीर जी को देखती है।
नहीं बेटा ऐसा नहीं है। तुम एक खूबसूरत पढ़ी-लिखी लड़की हो। तुम उसको ज़रूर पसंद आओगी। मैं जानता हूं उसे। सुधीर जी उसे मनाने में लगे थे।
लेकिन फिर भी मैं नहीं चाहती कि आप का बेटा किसी वादे पर कुर्बान हो। श्लोका अपनी बात पर कायम थी।
तो फिर तुम क्या चाहती हो? तुम मेरे साथ नहीं चलोगी? तुम यहीं रहोगी? सुधीर जी हार मानते हुए कहते हैं।
मैं आप के साथ चलूंगी। लेकिन आप वहां पर किसी को भी अपने वादे के बारे में नहीं बताएंगे। अपने बेटे को भी नहीं। मैं वहां पर एक गांव की लड़की बन कर जाऊंगी। अगर आप के बेटे ने मुझे स्वीकार कर लिया तो ठीक है। वरना फिर कोई वादा याद नहीं रखा जायेगा।
लेकिन कन्हैया ने तो बताया था कि तुम पढ़ी-लिखी हो। सुधीर जी को हैरानी हुई।
हां बाबा ने सही बताया था। मैं आप के शहर से ही पढ़ी हूं। इस वक्त मैं पी-एच-डी कर रही हूं। और साथ ही साथ यूनिवर्सिटी में पढ़ाती भी हूं। इस के इलावा मैंने फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा किया है। और भी बहुत कुछ है जो मैं पढ़ चुकी हूं। मैं खेती-बाड़ी भी कर सकती हूं। साईकिल से लेकर ट्रेक्टर तक चला लेती हूं। लेकिन फिर भी मैं आप के साथ गांव की एक साधारण लड़की बन कर चलूंगी। श्लोका सुधीर जी को देखती है।
तुम क्यों ऐसा चाहती हो? जब की तुम्हारी काबिलियत देख कर मेरा बेटा फौरन राज़ी हो जाएगा। क्या तुम किसी को पसंद करती हो। सुधीर जी को उसकी बात समझ नहीं आ रही थी।
नहीं ऐसा कुछ नहीं है।
तो फिर तुम क्यों ऐसा चाहती हो। सुधीर जी बेबस हो गये।
मेरी यही शर्त है अगर मंज़ूर है तो मैं पैकिंग करूं। वरना आप जा सकते हैं। क्योंकि आप सिर्फ मेरी वजह से रूके हैं।
वहां से जब तुम बाहर जाओगी तो सब को पता लग ही जायेगा। सुधीर जी सोचते हुए कहते हैं।
किसी को कुछ पता नहीं लगेगा। और हमारी कोशिश होगी कि हम को झूठ ना बोलना पड़े। लेकिन अगर कभी बताना पड़ा तो कुछ भी कह दूंगी। वह मेरा मसला है। श्लोका लापरवाही से कहती है।
मेरे बेटे का इम्तिहान लेना चाहती हो? सुधीर जी मुस्कुराए।
नहीं, अपने हमसफर का। श्लोका भी मुस्कुरा दी।
और अगर उसने तुम्हारी खामियों समेत तुम्हारा हाथ मांगा तो?
मैं उसी वक्त उसका हाथ थाम लूंगी। श्लोका ने यकीन से कहा।
और अगर मेरा शिवाय तुम को पसंद ना आया तो? सुधीर जी के पास भी सवालों की कमी नहीं थी।
मेरी पसंद की यहां पर कोई बात नहीं है। मैं आप लोगों के वादों को पूरा करने के लिए तैयार हूं। श्लोका इत्मीनान से कहती है।
इतनी पढ़ी-लिखी होकर यह बात?
बात मेरे पढ़ी-लिखी होने की नहीं। बात उन वादों की है जो दो दोस्त ने बहुत मुहब्बत और यकीन से किये है। मरते हुए दोस्त की बेटी के साथ आप गलत नहीं करेंगे। श्लोका बड़े यकीन से कहती है।
ठीक है मुझे तुम्हारी शर्त मंजूर है। अब मैं तुम को अपने बेटे के बारे में भी कुछ नहीं बताऊंगा। तुम खुद ही उसे जानो।पैकिंग कर लो। और जब मेरा बेटा शिवाय तुम से शादी के लिए तैयार हो जायेगा। तब हम आप दोनों की शादी कर देंगे। और मैं चाहता हूं वह वक्त बहुत जल्द आये।
और तुम जो कह रही थी गांव के काम के बारे में तो तुम जब आना चाहो आ सकती हो। जब मेरा दिल करेगा मैं भी तुम्हारे साथ आ जाऊंगा। तुम उसकी फिक्र मत करो। सुधीर जी कहते हुए उठ गये।
श्लोका भी अपने रूम में चली गई। और पैकिंग करने लगी। आज तक उसने किसी भी लड़के पर ध्यान नहीं दिया था। हमेशा अपनी पढ़ाई पर ध्यान देती। उसी मेहनत का फल था कि वह आज कामयाब थी। ऐसा नहीं था कि उसे शादी नहीं करनी थी। लेकिन उसने ऐसी शादी नहीं सोची थी।
वह सुधीर अंकल से ही पहली बार मिली थी। अब पता नहीं उनका बेटा कैसा है? यही सब सोचते हुए वह पैकिंग करती जा रही थी। सारा सामान रख कर वह लेट गई। लेटते ही उसे बाबा की याद आ गई। काश आप होते तो मुझे इस तरह जाना नहीं पड़ता। उसकी आंख में आंसू थे। वह सिसकने लगी। मगर उसका आंसू पोंछने वाला वहां कोई नहीं था। और फिर अगले दिन वह सुधीर जी के साथ उनके घर आ गई।
श्लोका की तकिया आंसूओं से तर थी। तब से वह सोचते हुए रोए जा रही थी।
और आज भी उसके पास कोई नहीं था जो उसका आंसू पोंछ सके।
श्लोका.... दरवाज़ा खोल कर शिवाय आवाज़ देते हैं और अंदर आ जाते हैं। श्लोका आंख बन्द कर लेती है। इस वक्त शिवाय से नज़र मिलाने की उस के अंदर हिम्मत नहीं थी। शिवाय यहां आये क्यों? यही वह सोच रही थी।
शिवाय उसके बेड के पास आकर खड़े हो जाते हैं। कमरे की मद्धिम रोशनी में भी शिवाय को उसकी सफेद तकिए पर गीलापन नज़र आ जाता है।
मुझे पता है तुम जाग रही हो। इस लिए अपनी यह ऐक्टिंग छोड़ कर मेरी तरफ देखो। शिवाय उसके बेड के पास कुर्सी खींच कर बैठ जाते हैं। और चुपचाप उसे देखने लगते हैं। श्लोका को अब आंख बन्द करना मुश्किल हो जाता है। वह आंख खोल देती है।
आंसू से डबडबाई आंखें देख शिवाय बेचैन हो जाते हैं। क्यों रो रही थी? शिवाय को हैरत हुई कि वह रो क्यों रही है।
कुछ नहीं बस ऐसे ही। बाबा की याद आ रही थी। श्लोका ने धीरे से कहा। क्योंकि उसे पता था जब तक शिवाय को वजह नहीं बताएगी वह जायेंगे नहीं।
कोई और बात है तुम नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं। शिवाय उस का हाथ थाम कर कहते हैं।
आप क्यों आये हैं? कोई काम था? श्लोका को उसका आना याद आ गया।
क्यों ऐसे नहीं आ सकता?
नहीं, इतनी रात हो गई है। इस लिए पूछा।
मुझे लगा कि तुम को मेरी ज़रूरत है इस लिए मैं आ गया। शिवाय ने सच्चाई बताई।
ठीक है अब आप जाएं मैं ठीक हूं। श्लोका ने सादगी से कहा। उसे हैरत हो रही थी किस तरह उस के दर्द शिवाय तक पहुंच गये।
आप नाराज़ थे मुझसे?
वह तो अब भी हूं।
तो फिर यहां क्यूं आये?
नाराज़गी अपनी जगह, फिक्र अपनी जगह।
आप की बातें कभी-कभी बहुत अजीब होती हैं समझ नहीं आती।
क्यों ऐसी क्या बात हो गई।
आप सारी बातों को मिक्स नहीं करते हैं बल्कि उन्हें अलग-अलग रखते हैं। जैसे आप मुझ से नाराज़ है। लेकिन फिर भी आप मेरे पास हैं।
हां तो, इस वक्त तुम को मेरी ज़रूरत है। हो सकता है नाराज़गी खत्म होने के बाद तुम को मेरी ज़रूरत उतनी ना महसूस हो जितनी इस वक्त हो रही है। तुम रो इस वक्त रही हो। उदास अभी हो। और मैं अपनी नाराज़गी लेकर बैठा रहूं। शिवाय ने बहुत प्यार से कहा।
तो फिर आप कैसे राज़ी होंगे। श्लोका को शाम वाली बात याद आ गई।
देखा जायेगा। अभी फिलहाल सुकून से सो जाओ। नाराज़ मत होना कहते ही शिवाय उसकी हथेली पर अपने होंठ रख देते हैं। और तुरंत हाथ छोड़ कर उठ खड़े होते हैं। एक नज़र श्लोका को देखते हैं।
सो जाओ। उसके सिर पर हाथ फेरते हैं। श्लोका आंख बन्द कर लेती है। शिवाय दरवाज़ा बंद कर के अपने रूम में चले जाते हैं।
कब से शिवाय बैचैन थे। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बेचैनी क्यों है। और जब कुछ समझ नहीं आया तो वह श्लोका के रूम में चले गये थे। श्लोका दुखी थी इस लिए मुझे इतनी बेचैनी थी।
ऐसा कैसे हो सकता है। शिवाय उसी पर गौर कर रहे थे। मैं इतनी ज़्यादा उससे मुहब्बत करने लगा हूं कि उसके दर्द मेरे दिल तक पहुंच रहे हैं। इन्हीं सोचों के साथ शिवाय सो गये।
जारी है...
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