धड़कन | भाग 27 | Dhadkan Part 27 | Heart Touching Hindi Love Story
कब से शिवाय बैचैन थे। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि इतनी बेचैनी क्यों है। और जब कुछ समझ नहीं आया तो वह श्लोका के रूम में चले गये थे। श्लोका दुखी थी इस लिए मुझे इतनी बेचैनी थी।
ऐसा कैसे हो सकता है। शिवाय उसी पर गौर कर रहे थे। मैं इतनी ज़्यादा उससे मुहब्बत करने लगा हूं कि उसके दर्द मेरे दिल तक पहुंच रहे हैं। इन्हीं सोचों के साथ शिवाय सो गये।
श्लोका को कालेज नहीं जाना था। उसे अपने प्रोजेक्ट पर काम करना था। वह नाश्ते के लिए नीचे गई। थोड़ी देर में शिवाय और सुधीर जी भी आ गये। उसी वक्त अराध्या भी आ गई।
क्या बात है आज सूरज किधर से निकला है? शिवाय हंस कर अराध्या से पूछते हैं।
सूरज को आज दूसरी तरफ से निकलने का मन कर रहा था। अराध्या ने भी मस्ती से कहा। श्लोका भी मुस्कुरा दी। उसे अच्छा लगा। सब लोग साथ में नाश्ता करने लगे। साथ ही शिवाय और सुधीर जी अराध्या को परेशान भी कर रहे थे।
अगर आप लोगों को इतनी ही दिक्कत है तो फिर ठीक है मैं अब कल से आप लोगों के साथ ब्रेकफास्ट नहीं करूंगी। अराध्या ने नाराज़गी से कहा।
ओह माई गॉड.... अब रोज़ सुबह-सुबह तुम को झेलना पड़ेगा। मुझे लगा सिर्फ आज ही। शिवाय हैरान होने की ऐक्टिंग करते हैं। जिसकी बात पर अराध्या और ज़्यादा गुस्सा हो जाती है।
शिवाय तुम को तंग कर रहा है। तुम परेशान मत हो। सुधीर जी उसे प्यार से देखते हुए कहते हैं।
सुमन को तो परेशान करते इन्हें कभी नहीं देखा। सिर्फ मुझे ही क्यों? अराध्या नाराज़गी से शिवाय को देख कर कहती है।
अराध्या की बात पर शिवाय और श्लोका दोनों एक दूसरे को देखते हैं। सुधीर जी की नज़र भी श्लोका से होते हुए शिवाय पर जाती है। लेकिन वह तुरंत अपनी नज़र प्लेट पर कर लेते हैं।
बोलो.... अराध्या जवाब के इंतेज़ार में थी।
श्लोका तुम्हारी तरह थोड़ी है। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं।
क्यों मैं कैसी हूं? अराध्या एक बार फिर नाराज़ हुई।
तुम बहुत अच्छी हो मेरी बहन। शिवाय उठकर अराध्या के चेयर के पास जाकर पीछे से उसके गले में बाहें डाल कर कहते हैं।
सच में?
हां सच में....
तब ठीक है अब आप जितना चाहें मुझे परेशान कर सकते हैं। अराध्या ने खुशी से कहा।
श्लोका और सुधीर जी भी मुस्कुरा दिये।
सुधीर जी उठ कर बाहर चले गए। अराध्या भी अपनी कॉफी लेकर बाहर चली गई। श्लोका भी अपनी चाय लेकर जाने लगी।
तुम भी बहुत अच्छी हो। पीछे से श्लोका के कान के पास जाकर शिवाय धीरे से कहते हैं। श्लोका पीछे मुड़कर हैरानी से शिवाय को देखती है। शिवाय मुस्कुरा देते हैं।
मुहब्बत की अपनी एक अलग ही कहानी होती है जो इसे समझ ले समझो वह कामयाब रहा। शिवाय और श्लोका की मुहब्बत भी ऐसी ही मुहब्बत थी जिसे महसूस किया जा सके। जिसे लफ़्ज़ों की ज़रूरत नहीं होती है।
ठीक हो ना?
हूं.....
कोई दिक्कत हो तो मुझे बता सकती हो। अकेले रोने की ज़रूरत नहीं है।
कहते हुए शिवाय आगे बढ़ गये। उसका जवाब सुने बिना। और वह हैरान शिवाय को जाता देखती रह गई।
चाय पीते ही वह लोग बाहर निकल गये।
डैड आज साथ में चलें। शिवाय ने सुधीर जी से कहा। वरना रोज़ वह अलग गाड़ी से ड्राइवर के साथ जाते थे। और शिवाय अपनी गाड़ी से। ताकि जिस को जब भी आना हो आ जाए।
सुधीर जी शिवाय की गाड़ी में बैठ गये। गाड़ी रोड पर दौड़ने लगी। मगर शिवाय खामोश थे। या यूं कहें कि वह शब्दों को तरतीब दे रहे थे कि कैसे बात शुरू करें।
कुछ बात करना है? सुधीर जी ने बात शुरू की।
मैं श्लोका से शादी करना चाहता हूं। शिवाय ने एक झटके में बोल दिया। और सुधीर जी उसकी बात सुनकर हैरान रह गये।
क्या हुआ इतना हैरान क्यों हो गये आप? शिवाय की नज़र सुधीर जी पर गई। और फिर दोबारा सामने नज़र जमा लेते हैं।
तुम सीरियस हो?
जी...
श्लोका को अच्छे से जान लिया। वह एक गांव की लड़की है। सुधीर जी ने जानना चाहा।
जितना जान लिया। उतना काफी है। उससे ज़्यादा जानना नहीं चाहता। हां यह सच है मैंने उसकी पढ़ाई के बारे में जानना चाहा था और वह कहां जाती है। लेकिन वह टाल गई। आप को तो सब पता ही होगा। लेकिन अब मुझे कुछ नहीं जानना। मैं सिर्फ उसे अपनाना चाहता हूं। शिवाय ने सच बता कही।
ज़िंदगी भर का साथ है। अच्छे से सोच लो। सुधीर जी उसे आज़माने लगे।
जी मुझे पता है। इस से बेहतर मेरे लिए कोई नहीं हो सकता। शिवाय ने सिर्फ इतना ही कहा।
मेरे दिल ने उसे कबूल किया है। मेरा दिल धड़कता है उसे देख कर। मेरे चेहरे पर मुस्कान वह लाई। मेरे दिल में सुकून उसकी वजह से है। शिवाय सोचे जा रहे थे।
तुम ने सुमन को बता दिया?
नहीं....
क्यों?
अभी नहीं बताऊंगा।
क्यों?
ऐसे ही।
अगर उस ने मना कर दिया तो?
मना नहीं करेगी वह।
अगर कर दिया तो।
तब की तब देखी जायेगी। लेकिन वह मना नहीं करेगी।
इतना यकीन?
हां.....
ठीक है फिर। तुम जब सुमन से बात कर लेना तो मुझे बता देना। मुझे तुम्हारे फैसले से खुशी हुई। सुधीर जी खुश होकर कहते हैं। शिवाय भी मुस्कुरा दिये।
आफिस पहुंच कर दोनों लोग अपने काम में लग गये। काम से फुर्सत मिली तो शिवाय का जी चाहा कि श्लोका से बात करे। उसने अपना फोन उठा कर उसका नंबर सर्च किया। लेकिन उसका नंबर सामने आते ही सोचने लगे कि बात क्या करूंगा। और फिर बैक करके मोबाइल रख देते हैं।
श्लोका सारा दिन अपना काम करती रही। और फिर अगले दिन उसे गांव भी जाना था तो वह पैकिंग करके आराम करने लगती है। डिनर भी वह पहले ही कर लेती है। पता नहीं क्यों आज वह शिवाय के सामने जाना नहीं चाहती थी।
सुमन कहां है आज? आई नहीं अभी तक। अराध्या बैठते ही पूछती है। जो बात शिवाय भी सोच रहे थे।
सुमन बीबी ने डिनर कर लिया है। कमला ने बताया।
कल सुबह उसे जल्दी गांव जाना है। इस लिए हो सकता है सो गई हो।
आप भी तब जा रहे हैं? शिवाय ने जानना चाहा।
नहीं मैं नहीं जा रहा। श्लोका ने मना कर दिया। उसको दो-तीन दिन लग सकता है। इस लिए सुमन ने कहा कि वह अकेली चली जायेगी। ड्राइवर साथ में रहेगा वहीं। जब उसका काम हो जायेगा तो वह वापस आ जायेगी। सुधीर जी ने शिवाय से कहा।
सब लोग डिनर करके अपने रूम में चले गए। सुधीर जी स्टडी रूम में चले जाते हैं। शिवाय भी कुछ सोच कर स्टडी रूम में चले गए।
डैड मैं श्लोका के साथ गांव जा रहा हूं कल? शिवाय ने इंफार्म किया।
लेकिन श्लोका ने अगर ना चाहा तो? सुधीर जी को चिंता हुई।
वह आप मुझ पर छोड़ दें। और अभी उसे कुछ बताने की ज़रूरत नहीं है। सुबह मैं देख लूंगा। शिवाय ने सोचते हुए कहा।
ठीक है।
शिवाय ऊपर जाते हैं। श्लोका का रूम बंद था। वह सीधे अपने रूम में गये। और अपना सामान निकाल कर पहले पैकिंग की। फिर चेंज करके सो गए। शिवाय इस वक्त कुछ भी सोचना नहीं चाह रहे थे। वह सिर्फ श्लोका के साथ जाना चाह रहे थे।
जारी है...
Comments
Post a Comment