धड़कन | भाग 28 | Dhadkan Part 28 | Heart Touching Hindi Love Story
शिवाय ऊपर जाते हैं। श्लोका का रूम बंद था। वह सीधे अपने रूम में गये। और अपना सामान निकाल कर पहले पैकिंग की। फिर चेंज करके सो गए। शिवाय इस वक्त कुछ भी सोचना नहीं चाह रहे थे। वह सिर्फ श्लोका के साथ जाना चाह रहे थे।
सुबह श्लोका तैयार हो कर नीचे गई। वहां पर कोई नहीं था। वह सीधे बाहर चली गई। शिवाय अपनी गाड़ी में बैठे उसका इंतेज़ार कर रहे थे।
आप इतनी सुबह कहीं जा रहे हैं? श्लोका शिवाय को देख कर हैरान हुई।
हां....
मैं भी गांव जा रही हूं। अभी तक ड्राइवर नहीं आये। श्लोका इधर उधर देख कर कहती है।
आ जाओ। मैं ही चल रहा हूं। शिवाय ने गाड़ी की तरफ इशारा किया।
लेकिन आप क्यों? मैं ड्राइवर के साथ चली जाऊंगी। मुझे आज वापस नहीं आना है।
श्लोका को लगा शिवाय को पता ना हो।
मुझे पता है। आओ जल्दी बैठो।
लेकिन....
अब आओ भी।
नहीं आप मत चलें। श्लोका ने मना किया।
मैं चल रहा हूं।
श्लोका खामोशी से बैठ गई। उसे और कोई रास्ता नहीं दिखा।
शिवाय ने गाड़ी स्टार्ट कर दी।
आप क्यों चल रहे हैं? श्लोका को समझ नहीं आ रहा था कि शिवाय क्यों चल रहे हैं।
क्यों मैं नहीं चल सकता?
चल सकते हैं लेकिन.....
क्या लेकिन?
कुछ नहीं।
शिवाय श्लोका को देखते हैं। जो बाहर देख रही थी। उस के बाल बार-बार उड़ रहे थे जिसे वह पीछे कर रही थी।
शीशा बन्द कर दो। सिग्नल पर गाड़ी रूकी तो शिवाय उसे देख कर कहते हैं। और उसके बाल का क्लैचर निकाल देते हैं। श्लोका शिवाय को देखती है। जिसके चेहरे पर मुस्कान थी।
मेरे चलने से नाराज़ हो? शिवाय श्लोका को देख कर पूछते हैं।
नहीं, बहुत खुश हूं। श्लोका मुंह बना कर कहती है। जिसे देख कर शिवाय बहुत ज़ोर से हंस देते हैं। शिवाय की हंसी देखकर श्लोका उसे देखने लगती है।
क्या हुआ क्या देख रही हो? शिवाय गाड़ी स्टार्ट करके कहते हैं।
कुछ नहीं। आप गाड़ी चलाएं।
चाय पियेंगे?
नहीं रहने दो। अब पहुंच कर नाश्ता करेंगे। शिवाय ने मना कर दिया।
आप को लग रहा है फिर कहीं स्टॉल वाली चाय पिला दूंगी। श्लोका को पिछली बार वाली बात याद आ गई।
नहीं ऐसी बात नहीं। उस दिन की चाय अच्छी थी। शिवाय को चाय याद आ गई।
इतनी देर से गाड़ी चला रहे हैं थक गये होंगें। श्लोका को अच्छा नहीं लग रहा था कि शिवाय उस की वजह से परेशान हो रहे हैं।
थक तो गया हूं। खैर कोई बात नहीं। पहुंच कर आराम कर लूंगा।
मैं ड्राइवर के साथ आ जाती वही सही था।
अच्छा...
और नहीं तो क्या बेकार में आप परेशान हुए। मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।
क्या अच्छा नहीं लग रहा? मेरा आना?
नहीं, आप को इस तरह इतनी देर गाड़ी चलाना।
अब थोड़ी दूर ही तो है।
और फिर दोनों बातें करते हुए गांव पहुंच गए।
हवेली के आगे गाड़ी रूक गई। शिवाय ने गाड़ी से उतर कर एक लम्बी सी अंगड़ाई ली। जिसे देख कर श्लोका मुस्कुरा दी। शिवाय ने उसकी मुस्कुराहट देखी। लेकिन तुरंत दूसरी तरफ देखने लगे। क्योंकि वहां पर कुछ स्टाफ आ गये थे। शिवाय ने नज़र उठा कर हवेली की तरफ देखा। क्या खूबसूरत हवेली है। शिवाय ने मन ही मन तारीफ की।
बहुत सारे लोग वहां पर खड़े हुए थे। जो श्लोका का और उस का हाथ जोड़कर स्वागत कर रहे थे। श्लोका सब को हाथ जोड़कर नमस्ते करती है और अंदर चली जाती है। शिवाय भी उसी के साथ अंदर चले जाते हैं।
आप फ्रेश हो जाएं। तो नाश्ता कर लिया जाए। श्लोका शिवाय को देख कर कहती है। और वाशरूम की तरफ इशारा करती है। और वह खुद भी फ्रेश होने चली जाती है।
उनके आते ही नाश्ता लग जाता है। श्लोका शिवाय को लेकर डाइनिंग हॉल में जाती है। शिवाय जिधर जाते। सब तरफ नज़र घुमा कर देखते। बहुत शानदार हवेली है। शिवाय ने तारीफ की।
जी और बहुत पुरानी भी है। श्लोका ने बताया।
पुरानी होने के बावजूद इतनी बेहतरीन है। शिवाय ने सब तरफ देखते हुए कहा।
आइए। श्लोका ने चेयर की तरफ इशारा किया। और खुद भी बैठ गई। नाश्ता लगा कर सारे सर्वेंट अंदर चले गए।
लीजिए क्या खायेंगे? श्लोका ने टेबल की तरफ इशारा किया।
जो आप खिला दें। इस वक्त हम आप के मेहमान हैं। शिवाय ने खुशी जताई।
कोई मेहमान नहीं हैं। चुपचाप नाश्ता करें।
शिवाय चुपचाप नाश्ता करने लगे। श्लोका ने एक दो बार शिवाय की तरफ देखा। लेकिन शिवाय का पूरा ध्यान नाश्ते पर था।
मैं आराम करना चाहता हूं। नाश्ता करते ही शिवाय चाय लेकर उठ गए।
चलें। श्लोका भी उठ गई। लेकिन वह शिवाय की खामोशी महसूस कर रही थी।
आप यहां आराम कर लें। श्लोका एक रूम में ले गई। जो काफी बड़ा और खूबसूरत था। एक किंग साइज बेड थी। एक तरफ टेबल चेयर लगी थी। एक तरफ सोफा लगा हुआ था।
नाराज़ हो गये मेरी बात पर? श्लोका ने उदासी से पूछा।
जिसके लिए इतना लम्बा सफर तय करके आ गया। उसकी एक छोटी सी बात पर नाराज़ हो जाऊं।
जारी है...
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