धड़कन | भाग 29 | Dhadkan Part 29 | Heart Touching Hindi Love Story
जिसके लिए इतना लम्बा सफर तय करके आ गया। उसकी एक छोटी सी बात पर नाराज़ हो जाऊं।
शिवाय श्लोका के पास जाकर कहते हैं।
अब क्या करोगी? आराम कर लो अभी।
हां थोड़ी देर आराम ही करूंगी। मैं बगल वाले रूम में हूं। कोई काम हो या किसी भी चीज़ की ज़रूरत हो तो बोल देना। या फोन कर देना।
ठीक है। शिवाय की नज़र श्लोका पर थी। शिवाय कल तक जो किसी लड़की की तरफ देखता भी नहीं था। आज उसकी नज़र एक लड़की से हट नहीं रही थी।
श्लोका शिवाय की नज़रों की तपिश से घबरा कर बाहर चली जाती है। और शिवाय उस की हरकत पर मुस्कुरा देते हैं। और बेड पर जाकर लेट जाते हैं। थके होने की वजह से और सुबह जल्दी उठने की वजह से शिवाय को जल्द ही नींद आ जाती है।
श्लोका भी रूम में जाकर लेट जाती है। थकन के बावजूद उसे नींद नहीं आ रही थी। शिवाय सिर्फ उसके लिए यहां तक आये। यही बात उसे खुशी दे गई। और फिर सोचते हुए उसे नींद आ गई। लेकिन जल्द ही उसकी नींद खुल गई। वह बाहर चली गई। खाने का देख कर वह अपने रूम में चली गई। वहां जाकर वह कुछ सामान हटाती है। मेडल और ट्राफी जो सामने रखी हुई थी उसे हटाती है। और एक नज़र डाल कर वह रुम बन्द करके बाहर आ जाती है। और उस रूम में चली जाती है जो शिवाय के बगल में था। वह अपने रूम में नहीं रह सकती थी। क्योंकि उस का रूम कुछ अलग तरह का था।
दीदी कुछ लोग आये हैं आप से मिलने। उसी वक्त एक लड़की आकर खबर देती है।
श्लोका बाहर चली जाती है। गांव वालों के बहुत सारे मसले होते थे जिसे वह हल करती थी। उसका गांव में आने का सुन कर कुछ लोग आ गये। और चौपाल लग गई।
श्लोका वहीं कुर्सी पर बैठ कर सब की बातें सुनने लगी।
शिवाय की भी नींद खुल गई। उसने और सोने की कोशिश की। मगर नींद नहीं आई तो वह उठ कर बैठ गये। और फ्रेश होकर बाहर चले गए। बगल वाला रुम खुला था जिसमें श्लोका नहीं थी। वह बाहर निकलते गये। और वहां पहुंच गये जहां पर चौपाल लगी थी।
शिवाय को देख कर हैरानी हुई। इतने सारे लोग और श्लोका किसी जज की तरह कुर्सी पर बैठी थी। शिवाय श्लोका के पीछे थे इस लिए श्लोका शिवाय को देख नहीं पाती। और सब की बातें सुनकर अपना फैसला सुनाती जाती है। काफी देर तक यह सिलसिला चलता रहा। शिवाय चुपचाप दीवार की टेक लगाए सब देखते रहे।
जैसे ही श्लोका ने कहा कि अब बाकी लोगों का फैसला कल होगा। शिवाय वहां से हट गये। और अंदर जाकर बैठ कर मोबाइल देखने लगे।
थोड़ी देर बाद श्लोका अंदर आई। और शिवाय के पास बैठ गई। नींद आई?
हां आई तो लेकिन जल्दी खुल गई। और सोना चाहता था।मगर नाकाम रहा तो उठ गया। शिवाय ने मोबाइल रख कर कहा।
खाना खा लिया जाए।
जैसा आप हुक्म करें। बन्दा आप का गुलाम है। शिवाय ने मस्ती करते हुए कहा। उसे बाहर का थोड़ी देर पहले वाला मंज़र याद आ गया कि किस तरह सब उसको झुक कर सलाम कर रहे थे।
अगर आपने मुझे परेशान किया तो मैं आप को वापस भेज दूंगी। श्लोका ने धमकी दी।
अब इतना भी हुक्म नहीं मानूंगा। शिवाय ने शरारत से कहा।
चलें खाना खाते हैं। श्लोका शिवाय के चेहरे की शरारत देख कर जल्दी से कहती है। लेकिन अपनी मुस्कुराहट वह भी ना रोक सकी।
और दोनों खाना खाने चले गए।
हवेली दिखाओ मुझे। शिवाय ने खाना खाकर कहा।
चलिए। श्लोका साथ चल दी। श्लोका ने उसे पूरी हवेली दिखाई। ऊपर शाम में चलेंगे। अभी धूप है। श्लोका हवेली दिखा कर कहती है।
बहुत बड़ी हवेली है। कुछ कमरे अभी भी बाकी हैं देख लिया जाए। शिवाय ने देखा कुछ कमरे में ताले लगे हुए थे।
थक गये होंगें बाद में देख लेना। श्लोका ने टाल दिया।
ठीक है। और दोनों वापस शिवाय के रूम में आ गये।
शिवाय सोफे पर बैठ गये। और श्लोका का हाथ पकड़ कर उसको भी अपने करीब बैठा लेते हैं। और उसके बाल से क्लौचर निकाल कर उसके बाल बिखेर देते हैं।
श्लोका की नज़र शिवाय के चेहरे पर थे। जो खुशी से दमक रहा था।
बहुत खूबसूरत हैं तुम्हारे बाल। शिवाय के हाथ अभी भी श्लोका के बालों पर थे।
इन बालों पर मेरी मां की मेहनत है।
और तुम इसे कटवाने जा रही थी।
क्या करती फिर?
अब तुम्हारे बालो की देखभाल अम्मा करेंगी। कटवाने का सोचना भी मत।
ठीक है। और फिर वह दोनों देर तक बातें करते रहे।
आराम करेंगे? श्लोका शिवाय के हाथ से अपना हाथ छुड़ाते हुए पूछती है। जो बातें करते हुए शिवाय थाम लेते हैं।
नहीं इतनी आदत नहीं है ना आराम करने की। शिवाय दोबारा उसका हाथ पकड़ लेते हैं और कहते हैं।
चलें फिर गांव ही घूम लें। मुझे कुछ काम है मैं जा ही रही हूं। श्लोका उठ जाती है।
चलें। आप को तो हाथ छुड़ाने की जल्दी है। शिवाय श्लोका का हाथ छोड़ देते हैं। जिसे श्लोका छुड़ाने की कोशिश कर रही थी।
दोनों बाहर निकल जाते हैं। श्लोका एक तरफ जाती है। शिवाय भी साथ होते हैं। जहां चार गाड़ियां खड़ी हुई थी। श्लोका जीप में बैठ जाती है। शिवाय भी बैठ जाते हैं। श्लोका जीप स्टार्ट कर देती है।
श्लोका शिवाय को गांव दिखाते हुए उसे जिससे मिलना था उनसे भी मिल लेती है। जहां गाड़ी रुकती वहां लोग हाथ जोड़कर खड़े हो जाते। श्लोका बहुत अपनेपन से सब से बात कर रही थी। वरना ऐसी जगहों पर जहां रूतबा हो लोग अपने से नीचे वालों को हकीर समझते हैं। मगर श्लोका में वह बात नहीं है। शिवाय ने उस चीज़ को महसूस किया।
गांव घूम कर आते-आते शाम हो गई। हवेली आते ही चाय और नाश्ता आ गया। चाय पीते हुए भी वह दोनों बातें करते रहे।
चलें छत पर चलें। श्लोका चाय पीते ही उठ खड़ी हुई। और शिवाय का हाथ पकड़ कर उसे भी उठा देती है। दोनों छत पर जाते हैं। काफी बड़ी छत था। शिवाय ने तो इतनी बड़ी छत आज तक देखी ही नहीं थी। छत से दूर का मंज़र भी बहुत खूबसूरत लग रहा था। हर तरफ खेत ही खेत थे। हरे-भरे पेड़-पौधे उसे बहुत अच्छे लगे। नीचे-नीचे घर थे। कोई बिल्डिंग नहीं। हर तरफ पेड़ ही पेड़। शहर में कोई कितने भी पौधे लगा ले। गांव वाली हरियाली नहीं आ सकती।
अंधेरा होने लगा था। आसमान में काले बादल घिर आये थे। हल्की-फुल्की बूंदा-बांदी शुरू हो गई थी।
चलो श्लोका नीचे चलते हैं। लगता है बारिश होने वाली है। शिवाय आसमान को देख कर कहते हैं।
रूकें ना। इतना अच्छा मौसम है। श्लोका को ऐसा मौसम बहुत पसंद था।
नहीं अभी चलो। फिर बाद में आ जायेंगे। शिवाय को डर था कि बारिश ना शुरू हो जाए।
थोड़ी देर रूकें फिर चलते हैं। श्लोका मौसम का भरपूर आनंद ले रही थी।
ठीक है मैं जा रहा हूं। तुम बाद में आ जाना। शिवाय जाने लगे। लेकिन श्लोका शिवाय का हाथ थाम कर वापस अपनी तरफ लाती है। बारिश तेज़ हो चुकी थी। श्लोका को मज़ा आ रहा था भीगने में। और शिवाय की टेंशन शुरू हो गई थी। लेकिन फिर वह श्लोका को खुश देखकर सब भूल कर वह भी बारिश का आनन्द लेने लगे।
चलो इतना हो गया ना अब चलो। शिवाय श्लोका का हाथ पकड़ कर सीढ़ियों की तरफ बढ़ते हैं। श्लोका भी इस बार मना नहीं करती। और नीचे चली जाती है। दोनों अपने रूम में जाकर चेंज करते हैं।
चेंज करते ही शिवाय लेट जाते हैं। वह बस दुआ कर रहे थे कि सब ठीक रहे। वरना बहुत परेशानी हो जायेगी।
जारी है...
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