धड़कन | भाग 30 | Dhadkan Part 30 | Heart Touching Hindi Love Story
चेंज करते ही शिवाय लेट जाते हैं। वह बस दुआ कर रहे थे कि सब ठीक रहे। वरना बहुत परेशानी हो जायेगी।
थोड़ी देर बाद शिवाय बाहर चले जाते हैं। खाना खा कर जल्द ही वह अपने रूम में चले जाते हैं। श्लोका को भी कुछ हिसाब-किताब देखना था। इस लिए वह भी स्टडी रूम में चली गई।
वह चाहती थी जल्द से जल्द सब काम हो जाए और वह वापस चली जाए। शिवाय को भी आफिस का काम होगा। वह मेरे लिए आ गये हैं। यही सब सोचते हुए वह अपना काम करती रही। तभी उसका फोन बजा।
हां शिवाय बोलो।
चाय चाहिए मिल जायेगी।
हां ला रही हूं।
श्लोका घड़ी देखती है शिवाय अभी तक जाग रहे हैं। मुझे लगा वह सो गये होंगें। मैने भी अपने काम के चक्कर में उन पर ध्यान ही नहीं दिया।
वह फटाफट सब समेट कर रखती है। किचन में जाकर चाय बना कर शिवाय के रूम में जाती है तो देखती है शिवाय चादर ओढ़ कर सो रहे थे।
शिवाय चाय...उसे कुछ गड़बड़ लगता है।
शिवाय उठ कर चाय का मग ले लेते हैं।
आप ठीक हैं ना? श्लोका परेशान हो जाती है।
हां ठीक हूं। यहां गांव में डाक्टर हैं या नहीं? शिवाय ने परेशानी से पूछा।
हां, दिन में रहते हैं इस वक्त नहीं मिलेंगे। हुआ क्या यह बताओ। श्लोका की परेशानी बढ़ती जा रही थी।
कुछ नहीं। शिवाय सोचने लगे कि वह करे तो क्या करे। उसे याद ही नहीं था कि वह कोई मेडिसिन रख लेता।
कुछ परेशानी है शिवाय तो मुझे बताएं। श्लोका शिवाय का माथा छूती है उसे लगता है शिवाय को हल्का फीवर है। और क्या दिक्कत है आप मुझे बताएं। श्लोका शिवाय का चेहरा देखती है जो लाल हो रहा था।
कम्बल है तो लाओ। मुझे ठंड लग रही है। शिवाय चाय पीते ही लेट जाते हैं। श्लोका वहीं अलमारी से कम्बल निकाल कर शिवाय के ऊपर डाल देती है। और सोचने लगती है कि शिवाय को क्या दवा दे।
शिवाय मैं अभी आती हूं।
नहीं, तुम यहां से मत जाना। यहीं रूको।
हां मैं बस तुरंत आ रही हूं कहते ही श्लोका जाती है और फर्स्ट एड बॉक्स लाती है। उसमें से दवा निकाल कर पानी निकालती है।
शिवाय आप उठे यह दवा खा लें। आप को आराम हो जायेगा। श्लोका शिवाय को सहारा देकर उठाती है। उन के मुंह में दवा डालकर पानी पिलाती है। पानी पीते ही शिवाय तुरंत लेट जाते हैं। श्लोका मुझे और ठंड लग रही है। प्लीज़ तुम कुछ करो। कहीं से डाक्टर को बुलाओ। या फिर यहां से चलो। श्लोका मेरे ऊपर और ब्लैंकेट डालो। श्लोका वहां से एक और कम्बल निकाल कर शिवाय के ऊपर डालती है।
शिवाय आप के साथ ऐसा कभी हुआ है?
नहीं।
श्लोका मुझे ठीक नहीं लग रहा है। मैं क्या करूं। और कम्बल डालो मेरे ऊपर वरना मैं मर जाऊंगा ठंड से। शिवाय सिर से पैर तक कम्बल से ढंके थे। उसके बावजूद थर-थर कांप रहे थे।
श्लोका तुरंत दूसरे रूम से कम्बल लाती है और शिवाय के ऊपर डाल देती है।
श्लोका गाड़ी निकालो जल्दी मुझे लेकर शहर चलो अभी। शिवाय से अब ठंड बर्दाश्त नहीं हो रही थी। और श्लोका सोच रही थी कि क्या किया जाए जिस से शिवाय को आराम मिले। उसका दिमाग बहुत तेज़ी से चल रहा था।
शिवाय आप घबराएं नहीं अभी ठीक हो जायेगा। श्लोका ने उसे तसल्ली दी।
तुम नहीं समझ रही मैं मर जाऊंगा ठंड से। शिवाय ने गुस्से से कहा।
मैं आप को मरने नहीं दूंगी शिवाय। आप हिम्मत रखें। ऐसा होता है मैंने सुना है। आप अभी ठीक हो जायेगा।
श्लोका..... शिवाय की आवाज़ भर्रा गई। शायद वह रो रहे थे। श्लोका शिवाय की हथेली को कपड़े से रगड़ती है फिर उसके पैर के तलवे को रगड़ती है जिससे उस के शरीर में गर्मी पैदा हो।
शिवाय कुछ ठीक लग रहा है?
मगर शिवाय कुछ बोल नहीं पाये। श्लोका शिवाय के चेहरे के पास जाकर कम्बल हटा कर उसका चेहरा देखती है। और दोबारा शिवाय को कम्बल से ढंक देती है।
और वह फैसला ले लेती है। शिवाय को बचाने के लिए कुछ भी। फिर चाहे शिवाय उसे गलत ही क्यों ना समझें। उस से दूर हो जाएं या उससे नफरत करें। उसे अब किसी भी बात से मतलब नहीं था। उसे सिर्फ शिवाय को बचाना था।
वह कमरे की लाइट बन्द करती है। और बेड पर शिवाय के कम्बल में लेट जाती है। उसके लेटते ही शिवाय की पकड़ उसके ऊपर बहुत सख्त होती है। मगर वह खामोश रहती है। शिवाय पूरे कांप रहे थे। उनकी पूरी बॉडी हिल रही थी। श्लोका भी शिवाय को अपनी बाहों में जकड़ लेती है।
शिवाय आप अभी ठीक हो जायेंगे मैं आप को कुछ नहीं होने दूंगी। कुछ भी नहीं होने दूंगी। आप हिम्मत रखें। आप मुझ पर भरोसा रखें। शिवाय आप ठीक हैं ना। वह बोले जा रही थी ताकि उसे पता चल सके कि शिवाय की क्या पोजिशन है।
मगर शिवाय खामोश थे। बिल्कुल खामोश। यूं जैसे किसी डूबते को सहारा मिल गया हो।
गुज़रते वक्त के साथ शिवाय की पकड़ हल्की हो गई। श्लोका ने हल्की नींद में आंख खोल कर शिवाय की तरफ देखा। लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दिया। नींद की देवी उस पर मेहरबान थी। कब रात गुज़री पता नहीं चला।
जारी है...
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