धड़कन | भाग 31 | Dhadkan Part 31 | Heart Touching Hindi Love Story

गुज़रते वक्त के साथ शिवाय की पकड़ हल्की हो गई। श्लोका ने हल्की नींद में आंख खोल कर शिवाय की तरफ देखा। लेकिन उसे कुछ दिखाई नहीं दिया। नींद की देवी उस पर मेहरबान थी। कब रात गुज़री पता नहीं चला।

जैसे ही श्लोका ने करवट लेना चाहा। वह हड़बड़ा गई। और उसकी हड़बड़ाहट से शिवाय की भी नींद खुल गई। सारे कम्बल इधर-उधर थे। एक भी उनके ऊपर नहीं थे।श्लोका तुरंत उठ कर बैठ गई। और शिवाय के माथे पर फीवर चेक करती है। जो बिल्कुल ठीक था।

आप फ्रेश हो जाएं मैं नाश्ते का देख लूं। श्लोका तुरंत बेड से उठ कर खड़ी हो गई। और कहते ही बाहर चली गई।

शिवाय चुपचाप लेटे बहुत कुछ याद कर रहे थे। ज़िंदगी में पहली बार ऐसा लगा कि मौत मेरे बहुत करीब है। मुझे उस वक्त सिर्फ अपनी मौत दिखाई दे रही थी। मगर तुम ने मुझे बचा लिया। 

कैसे तुम ने इतना बड़ा फैसला लिया मुझे नहीं पता। लेकिन तुम ने मेरी ज़िन्दगी पर बहुत बड़ा ऐहसास किया है। मैं इसे कभी नहीं भूल सकता श्लोका। शिवाय सोचे जा रहे थे। वह अपने दिल पर हाथ रख देते हैं। जहां श्लोका पूरे शान से विराजमान थी। शिवाय उठ गये और फ्रेश होने चले गए। 

आयें नाश्ता कर लें। नाश्ता लग चुका था। श्लोका शिवाय को देख कर कहती है। शिवाय खामोशी से बैठ जाते हैं।

यह सब परेशान होने की क्या ज़रूरत थी? शिवाय नाश्ता  देख कर हैरान हुए।

थी ज़रूरत इस लिए बनाया। श्लोका ने नार्मली कहा। और खुद भी बैठ गई।

आप ठीक हैं? चाय पीते हुए श्लोका नार्मल होकर पूछती है। हालांकि रात वाले अपने फैसले पर वह संतुष्ट थी। उसने जो किया शिवाय के लिए क्या। अब शिवाय उसके बारे में क्या सोचते हैं। उससे उसे कोई मतलब नहीं था।

हां ठीक हूं। सिर्फ पूरे बॉडी में दर्द हो रहा है। शिवाय ने सच कह दिया। वरना वह सोच रहा था कि कहूं या ना कहूं। वरना एक बार फिर वह परेशान हो जायेगी।

हां ऐसा होता है। बहुत ज़्यादा ठंडी लगने की वजह से शरीर में दर्द हो जाता है। मैं शंकर को भेज देती हूं। वह आप का मसाज कर देगा। आप को आराम मिलेगा।

नहीं मुझे मसाज नहीं कराना है। किसी को भेजना मत। शिवाय ने घबरा कर कहा।

और कोई दिक्कत? रूकेंगें या चलें शहर अगर आप को डाक्टर को दिखाना है तो? श्लोका चाहती थी शिवाय को कोई तकलीफ ना हो।

नहीं मैं ठीक हूं। तुम अपना काम करो। मैं आराम करूगां। शिवाय ने जल्दी से कहा। वैसे भी उसकी वजह से श्लोका पहले ही परेशान हो चुकी थी।

ठीक है आप कमरे में जाएं। मैं शंकर को भेजती हूं। श्लोका मुस्कुरा कर कहते हुए उठ गई। शिवाय ने उसे आंख दिखाई। 

श्लोका बाहर चली गई। कुछ लोग उसका इंतेज़ार कर रहे थे वैसे भी गांव में सुबह जल्दी हो जाती है।

शिवाय रूम में चले गये। लेटते ही शिवाय के मन में श्लोका थी। मैं तुम को समझ नहीं पा रहा श्लोका की तुम क्या हो। तुम परतों में छुपी हो। जैसे-जैसे लेयर हट रही है तुम ज़ाहिर होती चली जा रही हो। पता नहीं और कितनी परत तुम्हारे ऊपर है। वह हटेगी तो क्या होगा। शिवाय सोचे जा रहे थे।

बाहर का काम करते-करते दोपहर हो गई। जब खाना लग गया तब वह अंदर आई। उसी वक्त शिवाय भी आ गये।

तुम ने अच्छा नहीं किया मेरी बात ना मान कर? शिवाय ने नाराज़गी से कहा।

ऐसा क्या कर दिया मैंने? श्लोका को हैरत हुई।

शंकर को क्यों भेजा मेरे पास? जब मैंने मना किया था।

ओह तो यह बात है मुझे लगा मैंने ऐसा क्या कर दिया जिससे आप नाराज़ हो गये। श्लोका ने सुकून की सांस ली।

मैंने उस को मना किया। लेकिन उस ने कहां कि मालकिन का हुक्म है मानना पड़ेगा। मुझे भी मानना पड़ा मालकिन का हुक्म। शिवाय ने हाथ जोड़ दिये उसके आगे। श्लोका मुस्कुरा दी।

ऐसे ही हुक्म मानते रहना। वरना सज़ा मिलेगी। श्लोका ने शरारत से कहा।

बस आप अपनी बाहों में जगह दे दें। यह गुलाम ऐसे ही आप का हुक्म मानता रहेगा। शिवाय ने एक बार फिर हाथ जोड़ कर थोड़ा उस की तरफ झुक कर कहा।

लगता है आप को सज़ा देनी पड़ेगी? कहते हुए श्लोका ने अपनी प्लेट पर नज़र जमा दी। शिवाय से नज़र मिलाने की पोज़ीशन में इस वक्त वह नहीं थी। 

और शिवाय उसे देख कर रह गये।

आप आराम करें। मैं कुछ काम से जा रही हूं। कोशिश कर रही हूं कि आज काम हो जाए और रात तक हम लोग घर के लिए निकल जाएं। खाना खाते ही श्लोका उठ गई और शिवाय को बोल कर अंदर जाने लगी। शिवाय भी उठ कर श्लोका के पीछे हो लिए।

आज हम वापस नहीं जा रहे हैं तुम्हारा काम हो या ना हो। शिवाय उसके बराबर चलते हुए कहते हैं।

क्यों?

ऐसे ही। 

लेकिन मेरा काम खत्म हो जायेगा।

हो जाए, लेकिन हम आज नहीं चल रहे। शिवाय ने फैसला सुनाया।

ठीक है कल सुबह निकल जायेंगे। श्लोका ने जल्दी से कहा। उसे शिवाय की नज़रों से आज उलझन हो रही थी।

नहीं सुबह तो नहीं। देखते हैं कल। शिवाय ने सोचते हुए कहा। और अपने रूम की तरफ बढ़ गये। श्लोका वहीं खड़ी शिवाय को देखती रह गई। और फिर बाहर चली गई।

शाम को शिवाय भी बाहर आ गये। यहां आकर शिवाय को बहुत सुकून लग रहा था। हर तरफ खामोशी थी। कोई शोर-शराबा नहीं। गाड़ियों का शोर नहीं। कोई भागम भाग नहीं। किसी को जल्दी नहीं। हर कोई अपने काम को अपने हिसाब से कर रहा था।

श्लोका ने शिवाय को देखा। और दोबारा लोगों को अपनी बात समझाने लगी। उन के जाते ही चाय और स्नैक्स आ गया। श्लोका शिवाय के खाने पीने का बहुत ध्यान रख रही थी कि उसे किसी तरह की परेशानी ना हो। 

चाय पीते ही वह दोनों गांव में ऐसे ही घूमने निकल गये। बातें करते हुए दोनों बहुत दूर निकल गये।

गाड़ी बुला लें। आप थक गये होंगें? श्लोका को शिवाय की फिक्र हुई। जो इंसान एक कदम पैदल नहीं चलता वह आग इतना चल गये।

खूबसूरत हमराही जब साथ हो तो थकान का पता नहीं चलता, क्यों क्या ख्याल है? शिवाय ने उस पर नज़र टिका दीं।

चलें वापस, श्लोका वापसी के लिए मुड़ गई।

क्या बात है मेरी बात का जवाब नहीं दिया। 

कुछ बातों के जवाब नहीं होते। कहते ही श्लोका ने रफ्तार बढ़ा दी।

शिवाय ने देख लिया था कि श्लोका उस से नज़रें चुरा रही है।

घर पहुंचते ही फ्रेश होकर दोनों ने खाना खा लिया। शहर की तरह गांव की रात नहीं होती। गांव में जल्दी सोना और जल्दी उठना आज भी कायम है।

खाना खाने के बाद भी दोनों वहीं पर बैठ कर बातें करने लगे। धीरे-धीरे करके सारे नौकर चले गये। और श्लोका ने  एक दरवाज़ा बन्द कर दिया।

यहां अंदर कोई भी स्टाफ रात में नहीं रहते। शिवाय ने जब देखा सब लोग चले गए तो उस ने पूछ लिया।

नहीं, इस दरवाज़े के अंदर रात में कोई नहीं रहता। लेकिन बाहर सब का कमरा है। सब का परिवार है। सब लोग वहां रहते हैं। कोई भी काम हुआ तो आवाज़ देते ही हर कोई आ जायेगा। यही नियम शुरू से चला आ रहा है कि वह लोग अपने परिवार के साथ रात में अपने कमरे में रहें।

सारे स्टाफ बहुत पुराने लगते हैं?

हां, पुश्तों से यह सिलसिला चल रहा है। चलें अब आप आराम करें।

श्लोका उठ गई। शिवाय भी साथ में उठ गये।

मेरे रूम में चलो। जैसे ही श्लोका अपने रूम में जाने लगी। शिवाय ने उसका हाथ पकड़ कर कहा।

श्लोका ने शिवाय को देखा। और शिवाय के साथ अंदर चली गई।

शिवाय बेड पर बैठते ही श्लोका को भी इशारा करते हैं। लेकिन वह खड़ी रही। बैठ भी जाओ। इतना सोचो मत। श्लोका किनारे पर टिक कर बैठ गई। शिवाय मुस्कुरा दिया उसकी इस हरकत पर। कल जो उसे बचाने के लिए क्या से क्या कर गई। और आज करीब बैठने से भी हिचकिचा रही है।

तुम ने डैड से बात की। शिवाय ने जब देखा कि श्लोका घबरा रही है तो उन्होंने बात शुरू कर दी।

हां बात हुई थी। अराध्या से भी हुई थी।

आप को कुछ काम है तो कर सकते हैं। रात में यहां नेटवर्क अच्छा रहता है। 

नहीं कोई काम नहीं करना। फोन आया था आफिस से मैंने बोल दिया है मैं छुट्टी पर हूं। मुझे डिस्टर्ब ना किया जाए जब तक कि कोई बहुत ज़रूरी बात ना हो। शिवाय बहुत प्यार से उसके हाथ को अपने हाथ में ले लेते हैं।

शिवाय आप आराम करें। मैं भी सोने जा रही हूं। श्लोका ने अपना हाथ खींचते हुए कहा। मगर शिवाय की पकड़ मज़बूत थी।

इतना भाग क्यों रही हो मुझसे?

कौन भाग रहा है?

तुम और कौन?

किसने कहा कि मैं भाग रही हूं?

अभी क्या कर रही हो?

क्या कर रही हूं।

वही जो मैं कह रहा हूं।

अच्छा....

और नहीं तो क्या।

एक बात कहूं?

कहें।

मुझे ज़िन्दा रखने के लिए शुक्रिया। वरना मैं मर ही जाता।

मैं आप को मरने देती तब तो मरते।

मरने ना देती मुझे?

बिल्कुल भी नहीं। चाहे उस के लिए कुछ भी करना पड़ता।

वैसे ऐसा क्यों हुआ? बारिश में भीगने की वजह से? 

हां, मेरे लिए यह सब नहीं बना।

बतलब? आपको पता था कि यह आपको नुकसान कर सकता है? श्लोका हैरान रह गई। तो आप क्यों भीगे बारिश में?

मैं तो तुम्हारे कहने पर भीग गया था। लेकिन जो हुआ अच्छा हुआ। कहते ही शिवाय मन ही मन सोचने लगे कि इसी बहाने मुझे पता चल गया कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो। वरना मैं जान ही ना पाता तुम्हारी मुहब्बत को। तुम चाहती तो किसी को बुला सकती थी मदद के लिए। लेकिन तुम ने मुझे खुद बचाया।


जारी है...

धड़कन भाग 30

धड़कन भाग 32









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