धड़कन | भाग 32 | Dhadkan Part 32 | Heart Touching Hindi Love Story
मैं तो तुम्हारे कहने पर भीग गया था। लेकिन जो हुआ अच्छा हुआ। कहते ही शिवाय मन ही मन सोचने लगे कि इसी बहाने मुझे पता चल गया कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो। वरना मैं जान ही ना पाता तुम्हारी मुहब्बत को। तुम चाहती तो किसी को बुला सकती थी मदद के लिए। लेकिन तुम ने मुझे खुद बचाया।
आप को यह करना करना चाहिए था? श्लोका ने नाराज़गी से कहा।
फिर मुझे कैसे पता चलता कि तुम मेरे लिए कुछ भी कर सकती हो? इसी बहाने पता लग गया।
मुश्किल में तो किसी की भी मदद कर दी जाती है। श्लोका ने बात को सरसरी कर दिया।
अच्छा तो फिर कल रात तुम ने जो किया। वह तुम किसी के भी साथ कर सकती हो? क्या तुम...
शिवाय... शिवाय की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि श्लोका ने बीच में ही ज़ोर से कहा और उठने लगी। उसका चेहरा एकदम से बिल्कुल लाल हो गया था। लेकिन शिवाय ने उसे उठने नहीं दिया।
नाराज़ हो गई?
आपने बात ही ऐसी की है।
और तुम ने जो कहा? वह सही था?
कुछ लोग सब में नहीं होते हैं श्लोका। कुछ लोग बहुत खास होते हैं। उस के लिए हम कुछ भी कर सकते हैं। कहते ही शिवाय उसके हाथ को बहुत हल्के से पुश करते हैं।
श्लोका खामोश रह जाती है। क्योंकि शिवाय बिल्कुल सही कह रहे थे। क्योंकि उस ने कल रात जो शिवाय के लिए किया वह कभी भी किसी के लिए नहीं कर सकती।
सच बताऊं तुम्हें मेरी जो हालत थी। मैं बता नहीं सकता। मुझे यही लग रहा था कि मैं मर जाऊंगा।
मुझे यह बात पता नहीं थी कि आप को बारिश का पानी नुकसान करता है। वरना मैं कभी नहीं कहती। श्लोका पछता रही थी।
सिर्फ बारिश का पानी नहीं, और भी बहुत कुछ। हर ठंडी चीज़ें मुझे नुकसान करती हैं।
एक बार तुम्हारे साथ आइसक्रीम खाया था, याद है क्या हुआ था? शिवाय ने मुस्कुराते हुए पूछा।
शिवाय के कहते ही श्लोका को सब याद आ गया कि उस दिन आइसक्रीम खाने के बाद ही शिवाय की इतनी तबीयत खराब हुई थी।
तुम ने शायद गौर नहीं किया मेरे रूम में रेफ्रीजिरेटर नहीं है। शिवाय ने उसे याद दिलाया।
शिवाय के कहते ही श्लोका को याद आ गया। जब की खुद उसके रूम में फ़्रीज़ था और शिवाय के रूम में नहीं। इसी लिए उस दिन मुझे आइसक्रीम खिला कर आप कॉफी पी रहे थे। श्लोका को एक-एक कर सारी बात याद आ गई।
आप ने बहुत बड़ी गलती की है। श्लोका ने नाराज़ होते हुए कहा।
इसी लिए तो उस दिन आइसक्रीम नहीं खाई। वरना मुझे बीमार होने में कोई परेशानी नहीं थी। जब सेवा करने वाला मैजूद हो। लेकिन उस दिन बारिश में मैं खुद को रोक नहीं पाया। लेकिन जो ठंड लग रही थी वैसा पहली बार हुआ था। शिवाय अपनी रात वाली हालत याद करके डर गये।
होता है कभी-कभी ऐसा कुछ लोगों को। यह अलग बात है कि आप को पहली बार हुआ था। और आप ने ऐसी सिचुएशन पहले नहीं देखी थी। इस लिए आप डर गये।
चलिए बहुत रात हो गई है। अब सो जाएं। श्लोका एक बार फिर उठती है।
सुनो
हूं
यहीं सो जाओ।
क्यों?
ऐसे ही।
आप सो जाएं। कुछ काम हुआ तो फोन कर देना।
भरोसा नहीं मुझ पर?...
अगर मौके का फायदा उठाना होता तो कल ही उठा चुका होता। रिश्तों का लिहाज़ है मुझे। तुम मेरे करीब थी, बहुत करीब। तुम्हारे शरीर ने मेरे जान की हिफाज़त की। और मेरे दिल ने मेरे जज़्बात की। और तुम जब सब कुछ भूल कर मेरी बाहों में आ गई तो उस वक्त तुम्हारी हिफाज़त की ज़िम्मेदारी मुझ पर थी। शिवाय ने एक बार फिर उस का हाथ थाम लिया। और उठ खड़े हुए।
दोनों की नज़र एक-दूसरे पर थी। ज़ुबां खामोश थी। धड़कन तेज़ हो रही थी। दोनों ही एक दूसरे की मुहब्बत को कबूल कर चुके थे। मगर ज़ुबान आज भी खामोश थी।
जाओ सो जाओ। शिवाय बहुत प्यार से उसके माथे पर बोसा देकर कहते हैं। श्लोका के अंदर तो जैसे जान ही नहीं थी।
आप चलें मेरे साथ। श्लोका शिवाय का और अपना फोन उठाती है। और शिवाय का हाथ पकड़ कर बाहर निकल जाती है। और एक कमरे में ले जाती है। जो काफी बड़ा और खूबसूरत था। वहां पर कुछ-कुछ दूरी पर चार बेड लगी हुई थी।
आज हम यहां से जाते हैं। श्लोका बेड की तरफ इशारा करती है।
यह किसका रूम है?
हमारा।
लेकिन यहां तो चार बेड है। और तुम लोग तो तीन।
तीन नहीं हम चार लोग हैं।
शिवाय को समझ नहीं आ रहा था कि श्लोका किस की बात कर रही है। वह उलझ जाते हैं। वैसे ही श्लोका ने अपनी ज़िंदगी के बहुत सारे पन्नों को उस से छुपा कर रखा था। अब यह चौथा कौन है।
जारी है...
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