धड़कन | भाग 33 | Dhadkan Part 33 | Heart Touching Hindi Love Story
शिवाय को समझ नहीं आ रहा था कि श्लोका किस की बात कर रही है। वह उलझ जाते हैं। वैसे ही श्लोका ने अपनी ज़िंदगी के बहुत सारे पन्नों को उस से छुपा कर रखा था। अब यह चौथा कौन है।
तुम बाबा अम्मा और? शिवाय की धड़कन तेज़ हो गई।
और राजवीर सिंह मेरा भाई। श्लोका ने धमाका किया। जब हम को साथ सोने का मन होता था तो चारों इसी कमरे में सोते थे। वरना फिर अपने-अपने रूम में।
शिवाय ने सुकून की सांस ली। वरना उसका दिमाग पता नहीं कहां-कहां जा रहा था।
कहां है वह?
पता नहीं।
क्या मतलब? शिवाय हैरान हुए।
श्लोका खामोशी से वहीं बेड पर बैठ गई। शिवाय भी उसी के बगल में बैठ गए।
मुझे राजवीर के बारे में बताओ।
क्या बताऊं? वह हमारे साथ नहीं रहता। श्लोका ने उदासी से कहा।
मुझे सब कुछ बताओ। मतलब सब कुछ। शिवाय ने सख्ती से कहा। श्लोका ने नज़र उठा कर उसे देखा। जिसकी सख्ती में भी एक अपनापन था।
जब तक राजवीर गांव में रहा तो ठीक रहा। लेकिन जब राजवीर शहर पढ़ने गया तो धीरे-धीरे कुछ गलत लड़कों से उसकी दोस्ती हो गई। फिर यह गांव हमारी बातें सब उसे बुरी लगने लगी।
पढ़ाई पर ध्यान ना देकर वह इधर-उधर घूमने लगा। और जब हम लोगों को यह सब पता तो बाबा ने उसे गांव बुलाया। उसे डांटा भी और समझाया भी। मगर उसे बाबा की बात बहुत बुरी लगी। और वह शहर चला गया। अम्मा उसी के गम में बीमार हो गईं। और फिर वह बहुत जल्द हम सब को छोड़ कर चली गईं। राजवीर का दुख उनसे बर्दाश्त नहीं हुआ।
अम्मा के मरने पर वह आया तो लेकिन उस का कहना था कि उसका जो भी हिस्सा है उसे दे दिया जाए। लेकिन बाबा ने एक वसीयत बनवा ली थी। जिसके अनुसार जब वह गांव में तीन साल तक रह लेगा तभी उस को जायदाद से हिस्सा मिलेगा वरना नहीं।
यह सुनकर राजवीर बहुत गुस्सा हुआ। लेकिन बाबा ने अपनी वसीयत नहीं बदली। बाबा नहीं चाहते थे कि वह अपनी सारी दौलत जायदाद अय्याशी में उड़ा दे। इस लिए बाबा ने यह शर्त रखी।
श्लोका शांत हो गई उसकी आंख में आंसू थे। शिवाय धीरे से उसके कंधे पर हाथ रख के उसे साइड हग करते हैं।
आप ही बताओ शिवाय बाबा उस का गलत सोचेंगे। लेकिन उसे लगा कि बाबा गलत कर रहे हैं। वह हम से नाराज़ होकर चला गया। हालांकि बाबा हर महीने जैसे उसके एकाउंट में पैसा भेजते थे। वैसे ही भेजते रहे। और आज भी मैं हर महीना वक्त से उसके एकाउंट में पैसा भेज देती हूं। गांव का इतना बड़ा काम है इतनी दौलत जायदाद है सब का हिसाब रखना होता है। वह होता तो कम से कम मुझे सहारा तो रहता। और इस तरह मुझे किसी के घर में तो नहीं रहना पड़ता। वह रो रही थी अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था।
श्लोका तुम किसी के घर में नहीं रहती हो। वह भी अब तुम्हारा घर है। डैड तुम को इतना चाहते हैं। बल्कि मुझे तो लगता है कि वह अराध्या से ज़्यादा तुम से खुश रहते हैं। और तुम ने तो हम सब को एक कर दिया है। शिवाय अभी भी उसे थामे हुए थे।
लेकिन फिर भी शिवाय अगर राजवीर हमारे साथ होता। भले जहां भी रहता लेकिन मिलता तो रहता। लेकिन वह तो हम से बेगाना हो गया।
बाबा की बीमारी का सुनकर आया कि नहीं?
नहीं।
तुम ने खबर दी थी?
उसने अपना फोन नंबर बदल दिया था। हम ने पैसा नहीं भेजा था उसके लिए अपने दोस्त के फोन से फोन किया। अपने नम्बर से नहीं। उसका कहना था कि फिर हम लोग फोन करके उसे परेशान करते हैं। उसी नंबर पर फोन कर के बता दिया था। और बाबा के मरने की खबर भी उसी नंबर पर फोन करके हम ने दे दी थी। लेकिन वह नहीं आया। श्लोका ने दुख से कहा।
डैड को यह सब बातें पता हैं?
हां, मैने अंकल को सब बता दिया था। श्लोका सीधी होने की कोशिश करती है मगर शिवाय उसे वैसे ही कंधे से थामे रहते हैं।
तुम अगर उसको पैसे ना भेजो तो शायद वह लौट आये। शिवाय ने सोचते हुए कहा।
हम लोग उतने ही पैसे भेजते हैं जितनी एक आम इंसान की ज़रूरत हो। और यह पैसे हम वैसे ही भेजेंगे। इतनी दौलत रख कर अपना भाई परेशानी में रहे यह मुझे मंज़ूर नहीं। वह एक दिन ज़रूर लौटेगा इस का मुझे यकीन है। और मैं चाहती हूं कि वह जब लौटे तो मैं शर्मिन्दा हूं उसके सामने। अगर वह गलत है तो ज़रुरी नहीं कि मैं भी गलत हो जाऊं। इसी पैसे के बहाने ही सही कम से कम वह कभी-कभी बात तो कर लेता है। श्लोका ने उदासी से कहा।
तुम ने इतना कुछ सह लिया और आज तक मुझे बताया नहीं। शिवाय ने शिकवा किया।
क्या बताती आप को? श्लोका ज़ख्मी नज़रों से उसे देखती है।
मैं तुम्हारा दुख खत्म तो नहीं कर सकता लेकिन हल्का तो ज़रूर हो जाता कह देने से। राजवीर एक दिन ज़रूर लौटेगा। तुम फिक्र मत करो। तुम्हारे यकीन पर मुझे यकीन है। शिवाय ने प्यार से कहा।
चाय पियोगी? शिवाय ने बात बदल दी। क्योंकि श्लोका बहुत ज़्यादा दुखी हो गई थी।
आप को पीना है?
मन तो कर रहा है।
ठीक है बना देती हूं। श्लोका उठने लगी।
चलो मैं भी चलता हूं। शिवाय भी उठ गये।
आप रूकें ना मैं ला रही हूं।
मगर शिवाय भी उठ गये और साथ चलते रहे। किचन में जाकर श्लोका चाय बनाने लगती है। शिवाय बिल्कुल उसके साथ ही रहते हैं। और फिर उसके बाल से क्लौचर निकाल कर उससे खेलने लगते हैं। श्लोका शिवाय को देखती है।
यह बाल बहुत खूबसूरत हैं। शिवाय उसके बाल बिखेर देते हैं। जिसे श्लोका एक झटके से पीछे कर लेती है। और अपना काम करती रहती है। उसे पता ही नहीं था कि शिवाय उसको देख कर बेखुद हुए जा रहे हैं।
ओह माई गॉड शिवाय दिल पर हाथ रख लेते हैं। उस का अंदाज़ देखकर।
क्या हुआ?
कुछ नहीं। तुम चाय बनाओ। शिवाय मुस्कुरा दिये।
श्लोका के चाय निकालते ही शिवाय दोनों मग उठा लेते हैं।
लीजिए। श्लोका जैसे ही बेड पर बैठती है शिवाय चाय उसको देते हैं।
शुक्रिया श्लोका शिवाय के अंदाज़ पर मुस्कुरा देती है।
पी कर बताओ कैसी बनी है। शिवाय ने बैठते हुए कहा।
हूं अच्छी है। श्लोका एक चुस्की लेकर कहती है।
सिर्फ अच्छी? शिवाय ने दुख जताया।
नहीं बहुत अच्छी है। आखिर बनाया किस ने है। श्लोका मुस्कुरा कर कहती है
यह हुई बात। शिवाय भी मुस्कुरा दिये।
एक बात कहूं।
हूं।
तुम बहुत समझदार हो।
वक्त इंसान को बहुत कुछ सिखा देता है। श्लोका ने उदासी से कहा।
लेकिन मैं तो नहीं सीख पाया। शिवाय ने कहा।
ऐसा कैसे कह सकते हैं। आप एक समझदार और अच्छे इंसान हैं। श्लोका ने शिवाय को देख कर कहा।
अच्छा। लेकिन मुझे यह बात नहीं पता थी। शिवाय को खुशी हुई श्लोका की बात सुनकर।
आप उस बेड पर सो जाएं। चाय पीते ही श्लोका ने कहा।
क्यों इस बेड पर क्यों नहीं।
क्योंकि इस बेड पर मैं सोऊंगी। यह मेरी बेड है।
अच्छा तब तो इस बेड पर मुझे सोना है। शिवाय तुरंत लेट गये।
शिवाय परेशान मत करें। आप दूसरी बेड पर जाये।
बिल्कुल भी नहीं मैं इसी पर सो रहा हूं। तुम जाओ। श्लोका शिवाय को देखती है। जिसकी आंखों में प्यार ही प्यार था। खुशी उस के चेहरे पर साफ दिख रही थी। श्लोका शिवाय में खोने लगी। श्लोका के इस तरह देखने पर शिवाय की धड़कन भी तेज़ हो गई। जज़्बात उसके अंदर भी थे। मगर उसे खुद पर कंट्रोल था।
जारी है...
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