धड़कन | भाग 34 | Dhadkan Part 34 | Heart Touching Hindi Love Story
बिल्कुल भी नहीं मैं इसी पर सो रहा हूं। तुम जाओ। श्लोका शिवाय को देखती है। जिसकी आंखों में प्यार ही प्यार था। खुशी उस के चेहरे पर साफ दिख रही थी।
श्लोका शिवाय में खोने लगी। श्लोका के इस तरह देखने पर शिवाय की धड़कन भी तेज़ हो गई। जज़्बात उसके अंदर भी थे। मगर उसे खुद पर कंट्रोल था।
क्या हुआ? मुझे तुम्हारे इरादे नेक नहीं लग रहे। शिवाय मुस्कुरा कर विंक करता है।
श्लोका एक मुक्का उस पर तानती है।
अरे अरे कोई बचाओ मुझे..... शिवाय हंसते हुए कहते हैं। और श्लोका उस पर वार करती जाती है।
मार क्यों रही हो? तुम्हारे दिल की नहीं सुन रहा इस लिए? शिवाय एक झटके से उसके दोनों हाथ पकड़ कर उसको अपनी तरफ खींच लेते हैं। शिवाय के ऐसा करते ही दोनों के चेहरे बहुत ही पास हो जाते हैं।
खामोश माहौल में दो धड़कते दिल एक दूसरे की धड़कन को साफ महसूस कर रहे थे।
शिवाय चाह रहा था यह लम्हे यूं ही ठहर जाएं और वह यूं ही उसे देखता और महसूस करता रहा। श्लोका के दिल की भी कुछ यही ख्वाहिश थी। लेकिन फिर वह हकीकत की दुनिया में आ जाती है। और तुरंत बहुत तेज़ी से उसके पास से हटती है। और अपनी बेतरतीब सांसों को नार्मल करने की कोशिश करती है।
इन लम्हों से भागना नहीं चाहिए। बहुत खूबसूरत होते हैं यह पल। शिवाय उसकी तरफ झुक कर उसके कान के पास धीरे से कहते हैं। शिवाय के कहते ही श्लोका उठ कर दूसरी बेड पर जाकर लेट जाती है। और सिर से पैर तक चादर ओढ़ लेती है।
शिवाय उसकी इस हरकत पर मुस्करा देते हैं।
कोई दिक्कत नहीं है ना तुम्हें इस बेड पर सोने से? शिवाय उसकी बेड के पास जाकर उस के चेहरे से चादर हटा कर पूछते हैं।
नहीं, मैं ठीक हूं। श्लोका उसको देखे बिना कहती है।
ठीक है फिर सो जाओ तुम। मैं आज तुम्हारे बिस्तर पर सोऊंगा। तुम को महसूस करते हुए। शिवाय थोड़ा सा झुक कर तुरंत सीधे हो जाते हैं। मुहब्बत भरा एक लम्स उसके माथे पर देकर।
गुडनाईट बोल कर शिवाय वापस अपने बेड पर लेट जाते हैं।
नींद दोनों की ही आंखों से दूर थी। श्लोका उठ कर लाइट बन्द करके वापस आकर तुरंत लेट जाती है। उसे इस वक्त शिवाय को सोच कर ही घबराहट हो रही थी।
शिवाय भी खामोश रहते हैं। लेकिन शिवाय का दिल इस वक्त बहुत सुकून में था। और फिर बहुत जल्द उसे नींद आ जाती है। श्लोका भी शिवाय के ख्यालों में खोकर सो जाती है।
सुबह श्लोका की नींद खुलती है तो पहली नज़र उस की शिवाय पर पड़ती है जो बेखबर सो रहे थे। श्लोका चुपचाप उसे देखे चली जाती है। इस वक्त सोये हुए शिवाय पर उसे बहुत प्यार आता है। और फिर वह तुरंत उठ जाती है। अपने ख्यालों को पीछे ढकेल कर वरना यह दिल उसे बदनाम ही ना कर दे।
फ्रेश होकर श्लोका अपना काम देखने लगती है। उसका इरादा दोपहर तक निकलने का था। उसी हिसाब से वह काम कर रही थी।
वह दोबारा रूम में आ कर देखती है शिवाय बेखबर सो रहे थे। रात में भी तो इतना लेट सोये थे। यही सोच कर वह वापस चली जाती है। और नाश्ता कर लेती है।
शिवाय नींद खुलते ही घड़ी देखते हैं तो बारह बज रहे थे। इतनी देर तक सोया रह गया। उठने के बाद भी वह वैसे ही लेटे रहे। अभी शिवाय का उठने का बिल्कुल भी मन नहीं हो रहा था।
थोड़ी देर बाद श्लोका फिर देखने आती है कि शिवाय उठे की नहीं। और शिवाय को जागता देख कर वह उसके बेड के पास जाती है।
आप तैयार हो जाएं तो नाश्ता कर लें। श्लोका ने जल्दी से कहा। वैसे भी रात वाली बातें अभी भी उसे डिस्टर्ब कर रही थीं।
तुम्हारी बेड पर नींद बहुत अच्छी आई। शिवाय उठ कर बैठ गये।
आप देर में सोये थे इस लिए। श्लोका ने जल्दी से कहा।
अच्छा यह कमाल तुम्हारे बेड का नहीं है। तो फिर यह कमाल तुम्हारा है। तुम्हारे साथ रहने के बाद मुझे इतनी अच्छी नींद आई। शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा। उस ने देख लिया था कि श्लोका उसकी नज़रों से बच रही है। इस लिए वह उसे और भी परेशान कर रहे थे।
मैं जा रही हूं। आप फ्रेश होकर आ जाएं। श्लोका बाहर निकल गई। और शिवाय हंस पड़े।
और उठ कर अपने रूम में चले गये।
तैयार हो कर बाहर आये तो नाश्ता लग चुका था। श्लोका वहां पर नहीं थी।
श्लोका कहां है? शिवाय ने वहां पर काम रही एक लड़की से पूछा।
आ रही हैं। उन्होंने कहा था कि जब आप आ जाएं तो उन को खबर कर दूं। मैंने बोल दिया है उनको।
ठीक है तुम जाओ। शिवाय सेब खाने लगे। उसी वक्त श्लोका आ गई।
थोड़ी देर में निकल चलते हैं।
तुम्हारा काम हो गया?
हां हो गया।
तो फिर ठीक है शाम को निकेलेंगे।
ठीक है फिर मैं कुछ और काम देख लेती हूं।
अभी तुम ने कहा ना कि तुम्हारा काम हो गया?
हां तो जब शाम को जाना है तो कुछ और काम कर लेती हूं।
कोई काम नहीं करोगी अब। मेरे साथ वक्त बिताना है। शिवाय ने कहा और जूस पीने लगे।
लेकिन....
लेकिन वेकिन कुछ नहीं। शिवाय ने गिलास की आड़ से उसे देखा। घबराहट साफ नज़र आ रही थी उसके चेहरे पर। शिवाय मन ही मन मुस्कुरा दिये।
शिवाय के नाश्ता करते ही श्लोका उठ कर अपने रूम में चली गई और सामान समेटने लगी। शिवाय भी वहीं आकर दरवाज़े पर खड़े हो गए। वह चुपचाप अपना काम करती रही।
चलिए आप का भी सामान रख दूं। श्लोका शिवाय के बगल से निकल कर बाहर चली गई। और शिवाय के रूम में चली गई। शिवाय भी रूम में चले गए। श्लोका चुपचाप काम करती रही। और शिवाय वहीं सोफे पर बैठ कर उसे काम करते देखते रहे।
यह आज तुम इतना नज़र क्यों चुरा रही हो?
मैं अपना काम कर रही हूं। आप ना ज़्यादा अपना दिमाग ना लगाएं। श्लोका ने गुस्से से कहा। उसकी बात पर शिवाय हंस पड़े।
वह जो कमरे बन्द थे खुलें हैं आप देख लें। मैं अभी आ रही हूं। कहते ही वह बाहर निकल गई। शिवाय भी उठ कर बाहर चले गये। और उन दोनों कमरे में से एक कमरे में चले गए। जो उस दिन बन्द था।
नार्मल ही कमरा था। वह सब तरफ देख कर दूसरे कमरे में चले गये। वाह... क्या रूम है। शिवाय देखते-ही रह गये। एक तरफ बेड थी। एक तरफ सोफा लगा हुआ था। खिड़की के पास एक सिटिंग बेड लगी हुई थी जहां से बाहर का नज़ारा बहुत अच्छा लग रहा था। और उसी से लगी हुई बुक शेल्फ थी। चारों तरफ देख कर शिवाय उस बुक शेल्फ के पास रूक जाते हैं। और ऐसे ही किताब निकाल कर देखने लगते हैं। एक के बाद कई किताबें देखने के बाद शिवाय एक किताब लेकर वहीं पर बैठ जाते हैं।
किताब तो थी शिवाय के हाथ में, लेकिन उसका दिमाग कहीं और था। यह दो कमरे बंद थे। इन में से एक कमरा श्लोका का है और एक राजवीर का। कौन सा कमरा किसका है यही सवाल शिवाय को परेशान कर रहा था।
जारी है...
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