डोर धड़कन से बंधी | भाग 92 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 92 | Hindi Romantic Story

यह मेरी तो कुछ नहीं लगती, ना रिश्तेदार ना ही दोस्त… फिर मैं क्यों यहां हूं? ठीक है उसकी मां की तबियत खराब हुई। एडमिट करा दिया, बात खत्म। 

जा रहा हूं मैं…प्रेम एक झटके से उठता है। और कहते ही बाहर निकल जाता है। 

और नताशा हैरान खड़ी रह जाती है। 

मेरे रवैए से आप को तकलीफ हुई। उसके लिए सॉरी…मैं नहीं चाहती कि कोई हमारी ज़िन्दगी में आए। हम मां-बेटी अकेले है, मगर खुश हैं। हम अपनी ज़िन्दगी में किसी ऐसे इंसान को आने की इजाज़त नहीं दे सकते कि जिसके जाने पर हमें दुख हो। नताशा अपनी जगह खड़ी सोचती रह गई।

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अलग-अलग गाड़ियों में सब का सामान रखा जा रहा था। आज सब को जाना था। शिवाय का सामान भी गाड़ी में रखा जा चुका था।

बाहर लॉबी में बैठे शिवाय यूं ही इधर-उधर देख देख रहे थे। तभी उन की नज़र दूर खड़ी मिसेज अग्रवाल पर पड़ती है। जो किसी से बात कर रही थी।

उस रात के बाद मिसेज़ अग्रवाल उन के पास नहीं आईं। लेकिन आते-जाते शिवाय उन को अलग-अलग लोगों के साथ देख चुके थे।

शिवाय उन के बारे में कुछ और सोचते उस से पहले ही मिसेज अग्रवाल उन को देख कर हाथ हिला कर हाय करती हैं। और उनकी तरफ बढ़ जाती है।

अब यह मेरे पास क्यों आ रही हैं? शिवाय को उन के आने का देख ही उलझन होने लगी।

जाने से पहले क्या आप के साथ एक कॉफी पी सकती हूं। करीब आकर पास वाले सोफे पर बैठते हुए पूछती हैं। और शिवाय का जवाब सुनने से पहले वहीं से वेटर को आवाज़ देती हैं। जो कॉफी सर्व कर रहा था।

कॉफी आते ही शिवाय खामोशी से कॉफी पीने लगते हैं।

आप सोच रहे होंगे कि आप से बात करने के बाद भी मैं उसी तरह दूसरे…

आप कौन हैं… जिससे बात करने के बाद आप क्या करती हैं? क्या नहीं?… मैं सोचूं। 

आप जो भी करें मुझे इससे क्यों फर्क पड़ेगा? शिवाय मिसेज अग्रवाल की बात को बीच में ही काट कर अपनी बात कहते है। और उठ खड़े होते हैं।

कॉफी के लिए थैंक्स…कहते ही शिवाय आगे बढ़ते हैं।

लेकिन मुझे फर्क पड़ने लगा मिस्टर ओबेरॉय…आपकी बातों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया। 

और मुझे उम्मीद है जब हम दोबारा मिलेंगे। तो आपके सामने एक ऐसी सोफिया खड़ी होगी जिसे देख आप गलत समझेंगे। लेकिन वह गलत नहीं होगी। शिवाय के साथ ही आगे बढ़ते हुए वह कहती है।

शिवाय जो सामने देखते हुए उसकी बातें सुन रहे थे। उसके खामोश होने पर गर्दन घुमा कर उसकी तरफ देखते हैं। और हल्का सा मुस्कुरा देते हैं।

अब से सोफिया किसी को अपने सही होने का सबूत नहीं देगी। कहते हुए वह हाथ मिलाने के लिए शिवाय की तरफ बढ़ाती हैं।

यह हुई अब लेडी डॉन वाली बात... शिवाय हाथ मिला कर कहते हैं। और दोनों मुस्करा कर अपनी-अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ जाते हैं।

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नताशा की मां को डिस्चार्ज कर दिया गया था। वह सारा सामान रख ही रही थी कि दरवाज़े पर नॉक होता है।

आ जाए…कहते हुए वह अपना सामान रखती रही। 

नमस्ते आंटी…

आवाज़ पर नताशा घूम कर हैरानी से देखती है। उसे लगा हॉस्पिटल का कोई स्टाफ होगा।

कैसी हैं आप? प्रेम नताशा की तरफ देखे बिना आंटी से पूछता है।

ठीक हूं। अब घर जा रही हूं। वह धीमीं आवाज़ में कहती हैं।

ठीक है मैं आता हूं। कहते ही वह बाहर निकल गया। नताशा भी तुरंत बाहर निकल गई।

डिस्चार्ज पेपर आपके नाम से क्यों बना। इसे मेरे नाम से करा दें। मैं आफिस जाकर दे दूंगी। नताशा नाराज़गी से कहती है।

अब बन गया ना मैं दे दूंगा। 

नहीं मेरे नाम से करें। वह मेरी मां हैं।

अच्छा ठीक है मैं देखता हूं। मम्मी को बाहर लेकर आओ। कहते ही प्रेम मेन गेट की तरफ बढ़ जाता है।

नताशा यहां पर कोई तमाशा नहीं करना चाहती थी। इस लिए वह अंदर चली गई कि बाद में प्रेम से बात करेगी।

मां को लेकर वह बाहर गई तो वहीं पर प्रेम खड़ा था। उन को देखते ही गाड़ी में बैठने का इशारा करता है। जो उस ने पहले ही बुक कर दी थी। उन के बैठते ही ड्राइवर से जाने का इशारा करता है।

आप लोग घर जाए। मैं शाम को आता हूं। प्रेम नताशा को देख कर कहता है। और गाड़ी के पास से हट जाता है।

उन की गाड़ी आगे बढ़ते ही वह भी अपनी गाड़ी में बैठ कर आफिस के लिए निकल जाता है।

गाड़ी चलाते हुए उसका मन बिल्कुल शांत था। लेकिन अचानक उसकी आंखों के सामने कई सारे मंज़र आ गए। जिसे वह नज़रंदाज़ करना चाहता था। लेकिन वह लम्हें उस की आंखों में गर्दिश कर रहे थे। अचानक उसकी आंखों में बहुत सारा पानी आ गया। और उसकी आंखें धुंधला गई।

जारी है…

डोर धड़कन से बंधी भाग 91

डोर धड़कन से बंधी भाग 93





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