डोर धड़कन से बंधी | भाग 93 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 93 | Hindi Romantic Story

गाड़ी चलाते हुए उसका मन बिल्कुल शांत था। लेकिन अचानक उसकी आंखों के सामने कई सारे मंज़र आ गए। जिसे वह नज़रंदाज़ करना चाहता था। लेकिन वह लम्हें उस की आंखों में गर्दिश कर रहे थे। अचानक उसकी आंखों में बहुत सारा पानी आ गया। और उसकी आंखें धुंधला गई।

वह जल्दी से आंख में आए आंसुओं को साफ करता है। और सामने देखने लगता है। 

काश! तुम मेरी ज़िन्दगी में ना आई होती काजल… तो आज मेरी यह हालत ना होती। तुम ने मुझ से मेरी हर खुशी छीन ली। 

गाड़ी चलाते हुए प्रेम का मन भटका हुआ था। वह चाह रहा था कि वह काजल को भूल जाए मगर ऐसा हो नहीं रहा था। काजल की बेवफाई उसे तोड़ गई थी।

वह सीधा आफिस चला गया। वहां जाकर अपनी जगह पर बैठते हुए वह नताशा के चेयर की ओर देखता है। और आंख बन्द कर लेता है। 

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शाम को श्लोका और काजल गांव से आ गई थीं। और बाहर खड़ी शिवाय का इंतेज़ार कर रही थीं। उसी वक्त प्रेम की गाड़ी रूकती है जो डैड को लेने एयरपोर्ट गया है।

शिवाय गाड़ी से निकल कर सीधे श्लोका की तरफ जाते हैं। श्लोका के गले लगकर मिलने के बाद वह पूजा से मिलते हैं और सब अंदर चले जाते हैं।

थोड़ी देर सब से बात करने के बाद शिवाय रूम में फ्रेश होने चले जाते हैं।

इन दिनों तुम को बहुत मिस किया। शिवाय श्लोका को साथ बैठाते हुए कहते हैं।

मैंने भी आप को मिस किया। श्लोका शिवाय का हाथ थाम कर उनकी हथेली पर किस करके कहती हैं।

अब अभी कुछ दिन कहीं जाना नहीं है। सुकून से घर में रहूंगा तुम सब के साथ। शिवाय उठते हुए कहते हैं।

चलो यह अच्छा रहेगा। क्योंकि इधर बहुत दिनों से हम सब बहुत बिज़ी थे। श्लोका भी उठते हुए कहती है।

मैं बाहर जा रही हूं। आप फ्रेश होकर आ जाएं। कहते हुए श्लोका बाहर निकल जाती है।

सब लोग बातें करते हुए चाय पीते हैं।

आप लोग आराम करें। डिनर पर मिलते हैं। कहते हुए प्रेम उठ खड़ा होता है। क्योंकि उसे नताशा के घर जाना था।

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नताशा के घर पहुंच कर आंटी का हाल चाल पूछने के बाद वह नताशा से बात करने लगता है।

अभी तुम आंटी के पास ही रहना। मैं आफिस में बोल दूंगा। 

मैं कल से आफिस आ रही हूं।

अभी आंटी की तबियत ठीक नहीं है। कुछ दिन रुक जाओ। फिर आ जाना। प्रेम उसे एक बार फिर समझाता है।

नताशा प्रेम के लिए चाय लेकर आओ। 

नहीं आंटी मैं अभी चाय पीकर आ रहा हूं। आप परेशान मत हों। मैं बस आपसे मिलने आ गया था। प्रेम मना कर देता है।

एक बात कहना था? वह झिझकते हुए कहती हैं।

जी आंटी बोलें। 

तुम अब यहां पर मत आना... 

हम जिस समाज में रहते हैं। वहां पर एक ऐसा घर जहां पर सिर्फ मां-बेटी हों, वहां पर किसी मर्द का आना सही नहीं माना जाता।

लेकिन आंटी मैं तो…प्रेम कुछ कहते-कहते रूक जाता है।

मैं जानती हूं, तुम मेरे लिए आओगे। लेकिन फिर भी मैं नहीं चाहती कि हमें अपने बारे में किसी को सफाई देनी पड़े।

तुम्हारी ज़िंदगी में कोई लड़का है? अचानक से प्रेम नताशा से पूछता है। और उसे देखने लगता है।

क्या बतलब है आप का? नताशा हैरान होती है।

जो पूछ रहा हूं वह बताओ। प्रेम सख्ती से पूछता है।

नहीं, मेरी बेटी की ज़िन्दगी में कोई लड़का नहीं है। 

लेकिन मेरी ज़िन्दगी में एक लड़की थी।

आप की ज़िन्दगी में कौन है? कौन नहीं…मुझे इस से क्या?

और मेरी ज़िन्दगी में कौन है? कौन नहीं... यह जानने का आपको कोई हक नहीं है।

नताशा गुस्से से कहती है। उसे समझ नहीं आ रहा था कि प्रेम क्या बातें कर रहे हैं।

मेरी ज़िन्दगी में एक लड़की थी काजल…जिससे मैं बहुत प्यार करता था। लेकिन उस ने मुझे धोखा दिया। और अब मेरी ज़िन्दगी में कोई नहीं…प्रेम रूका।

तो…नताशा हैरान हुई।

तो यह कि आंटी आप नताशा की शादी मुझ से करेंगी। प्रेम बहुत सुकून से कहता है। और नताशा की तरफ देख कर आंटी को देखता है।

तुम्हारे घर वाले इस बात के लिए राज़ी हो जायेंगे।

हां हो जायेंगे।

तो फिर ठीक है अपने घर वालों को लेकर आओ।

पहले आप बताएं आप को यह रिश्ता मंज़ूर है।

अगर कल तुम अपने घर वालों को लेकर आ गए तो मंज़ूर है। वरना फिर इस गली में दोबारा मत आना।

और नताशा…प्रेम ने जानना चाहा।

यह मेरे खिलाफ नहीं जायेगी। वह यकीन से कहती हैं।

ठीक है फिर कल सुबह मिलते हैं। कहते हुए प्रेम उठ खड़ा होता है। और बाहर निकल जाता है।

जाओ उसे दरवाज़े तक छोड़ आओ। 

नताश भी बाहर निकल जाती है।

यह सब क्या है? बाहर जाकर वह प्रेम से पूछती है।

वही जो तुम ने सुना।

हम एक-दूसरे को नहीं जानते। नताशा परेशानी से कहती है।

जानने के लिए सारी ज़िन्दगी पड़ी है। प्रेम सुकून से कहता है।

लेकिन एक बात कहूंगा… मैं तुम से प्यार नहीं करता। 

जारी है...

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