डोर धड़कन से बंधी | भाग 94 | Dhadkan Season 2 – Door Dhadkan Se Bandhi Part 94 | Hindi Romantic Story
हम एक-दूसरे को नहीं जानते। नताशा परेशानी से कहती है।
जानने के लिए सारी ज़िन्दगी पड़ी है। प्रेम सुकून से कहता है।
लेकिन एक बात कहूंगा… मैं तुम से प्यार नहीं करता। प्रेम अपनी बात कह कर उसे देखता है।
और वह हैरानी से उसे देखती रह जाती है।
कल घर वालों को लेकर आऊं ना? उसे हैरानी से देखते देख वह पूछता है।
आप की मर्ज़ी…
और तुम्हारी?…
मैं भी आप से प्यार नहीं करती…
अच्छा…प्रेम हंसा।
अब आप जा सकते हैं। नताशा दरवाज़े की तरफ इशारा करता है।
कल सुबह आऊंगा। इन्तेज़ार करना। कहते हुए प्रेम बाहर निकल गया। और वह दरवाज़े को थामे खड़ी रह गई।
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आरव नहीं आया वह भी आ जाता तो अच्छा लगता। डिनर करते हुए शिवाय कहते हैं।
आरव को किसी से मिलने जाना था। इस लिए नहीं आए। फ्री होते ही आजाएंगे। पूजा खाते हुए कहती है।
आज बहुत दिन बाद हम सब साथ में डिनर कर रहे हैं। श्लोका सब को देख कर खुशी से कहती है।
हां मौम, आज हम सब साथ में हैं बहुत अच्छा लग रहा है। पूजा खुशी से कहती है।
इसी खुशी में एक खुशी और जोड़ देते हैं। प्रेम सब को देखकर कहता है।
सब हैरानी से उसे देखने लगते हैं।
जल्दी बताओ फिर…पूजा उत्सुकता से कहती है।
सोच रहा हूं शादी कर लूं।
अरे वाह किससे? कौन है वह खुशनसीब?…पूजा खुशी से कहती है।
शिवाय और श्लोका भी हैरानी से उसे देखने लगने हैं।
डैड ने ही तो उसे पसंद किया है। प्रेम सुकून से कहता है।
कौन? शिवाय हैरान हुए।
नताशा…
ओह…
क्या मतलब डैड ने?…कौन नताशा?…मैं कैसे नहीं जानती?…पूजा का सवाल खत्म ही नहीं हो रहा था।
चार दिन की मुलाकात में इतना बड़ा फैसला?…
शिवाय हैरान हुए।
आप का फैसला गलत नहीं हो सकता। प्रेम गर्व से कहता है।
लेकिन फिर भी…शिवाय चाहते थे वह दोनों और साथ रहें। ताकि एक दूसरे को समझ सकें।
मुझे भी बताओ कोई…पूजा परेशानी से कहती है।
नताशा हमारे आफिस जॉब के लिए आई थी। मुझे प्रेम के लिए अच्छी लगी। इस लिए मैंने उसे प्रेम की केबिन में जगह दे दी। शिवाय मुस्कुरा कर कहते हैं।
मैं तो उसे अपने आफिल में देख कर हैरान रह गया था। लेकिन जब मैनेजर ने बताया कि आपका हुक्म है तो मैं खामोश हो गया।
लेकिन वह मुझे भी अपने जैसा ही समझती है। वैसे भी बॉस के केबिन में कौन बैठता है… प्रेम हंसा।
ओह? शिवाय हैरान हुए। तो तुम ने बताया?
नहीं,
क्यों?
ऐसे ही…
अब बता देना।
नहीं, शादी बाद…
यह सही नहीं है। श्लोका परेशान हुई।
अभी जो हो रहा है होंने दे। प्रेम ने बात खत्म कर दी।
लेकिन इतना जल्दी शादी का फैसला? श्लोका नहीं चाहती थी कि प्रेम को कोई और दुख मिले।
जब शिवाय ने उसे बताया कि नताश उन को प्रेम के लिए पसंद आई तो उसे खुशी हुई थी। लेकिन इतना जल्दी शादी… यह बात उसे परेशान कर रही थी।
कल हम सब उसके घर जा रहे हैं।
लेकिन कल तो शिवाय…श्लोका कहते-कहते रूक गई।
कल कुछ ज़रूरी काम है। कल रहने दो। फिर जिस दिन कहो। शिवाय श्लोका को देख कर कहते हैं।
कल नहीं गए तो फिर कभी नहीं…प्रेम को कुछ याद आया।
क्यों? श्लोका हैरानी से पूछती है।
उस की मां ने कहा है कि कल परिवार वाले को लेकर आना। वरना फिर कभी इस गली में ना आना।
ओह…ऐसी बात है। तो फिर ठीक है शिवाय आप अपना काम करें कल। मैं, पूजा और अराध्या चली जाऊंगी। मौम को भी साथ ले लूंगी। श्लोका ने तुरंत रास्ता निकाला।
हां यह सही रहेगा। क्यों प्रेम क्या कहते हो? शिवाय प्रेम की ओर देखते हैं।
जैसा आप लोग ठीक समझें।
तो फिर फाइनल हुआ। कल सुबह ग्यारह बजे सब तैयार रहना।
श्लोका खुशी से कहती है।
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नताशा सुबह उठकर खामोशी से सब काम कर रही थी। मां ने उसे जो खाने का बताया वह बनाने लगी।
सारी रात वह सो नहीं सकी थी। उस के मन में प्रेम की बातें और उसका रवैया चल रहा था।
प्रेम का अचानक शादी का फौसला, और मां को उसकी बात मान लेना। ऐसी बहुत सारी बातें थीं जो उसे परेशान कर रही थी।
सब तैयार करके वह खुद तैयार होने चली गई। क्योंकि मां ने उसे तैयार होने के लिए कहा था।
दरवाज़े पर दस्तक होती है। वह जाकर दरवाज़ा खोलती है। सामने ओबेरॉय परिवार अपनी शान के साथ खड़ा था। हालांकि वह सब बहुत सादगी से थे। नताशा एक पल के लिए हैरान रह गई। लेकिन फिर वह संभल गई।
उन सब की नज़र भी नताशा पर ठहर गई। उसने हल्के पीच कलर का कॉटन सूट पहना हुआ था मैचिंग चूड़ीदार के साथ, साथ में मैचिंग दुपट्टा कंधे पर रखा हुआ था। बाल काले, घने और चमकदार- जिसे उसने ढ़ीली चोटी बांध रखी थी। कुछ बाल अंजाने में माथे पर आकर पर गिर रहे थे। चेहरा ताज़ा धुले हुए जैसा, सिर्फ आंखों में काजल था- वह भी इतना कि आंखें थोड़ी गहरी लगें। होंठों पर कोई लिपस्टिक नहीं, बस उनकी नेचुरल हल्दी गुलाबी चमक। कानों में छोटा सा टॉप्स, और हाथों में दो-तीन पतली चूड़ियां-बस इतनी कि आवाज़ कर सकें।
पूरा लुक ऐसा था कि जैसे वह अभी-अभी घर के काम से निकली हो। बिना किसी दिखावे के, बिना किसी को इंप्रेस की कोशिश के।
फिर भी ओबेरॉय परिवार की नज़रें उस पर टिकी रह गईं।
अंदर आ सकते हैं? प्रेम मुस्कुरा कर पूछता है।
जी, वह सामने से हट गई। हर कोई अंदर चला गया।
आइये बैठिए…नताशा की मां नमस्ते करके कुर्सी की तरफ इशारा करती हैं।
हर कोई वहां पर रखी कुर्सियों पर बैठ जाता है।
ड्राइवर फल, मीठा, नमकीन लाकर वहीं पर रखें छोटे से टेबल पर रख देता है।
इन सब की ज़रूरत नहीं थी।
कोई बात नहीं, पहली बार आ रहे थे। ममता जी ने बात बनाई।
आओ नताशा बैठो…श्लोका नताशा को इशारा करती है। जो दरवाज़े पर चुपचाप खड़ी थी।
जी, वह आकर मां की बेड पर उनके पास बैड जाती है।
अमीरी-गरीबी की बहुत बड़ी दीवार उन के बीच खड़ी थी। जिस को चाह कर भी कोई नहीं हटा सकता है। इस बात को हर किसी ने महसूस किया।
जारी है…
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