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यह कैसी आस्था | Covid | corona | Covid Help | AG | Story

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  यह कैसी आस्था....... कहते हैं ईश्वर अल्लाह में विश्वास मन से होता है। और यह मन ही है जो हमारी आस्था को ईश्वर अल्लाह से जोड़े रहता है। आस्था दिल से होनी चाहिए और दिल में आस्था होनी चाहिए। एक इंसान का अल्लाह ईश्वर पर यह विश्वास होना कि वह मेरे साथ कभी कुछ बुरा नहीं होने देगा। और यह विश्वास बहुत अटूट भी है। क्योंकि ऊपर वाला अपने बंदों के साथ कभी बुरा नहीं कर सकता। कहते हैं जब कभी आप के साथ बुरा होता है तो यह विश्वास भी होता है कि ज़रूर इसके पीछे कुछ ऐसा है जो मेरे लिए बहुत अच्छा है। आज पूरी दुनिया में कोरोनावायरस का कहर है हर किसी को इससे बचने के लिए घर में रहने की सलाह दी जा रही है। बहुत सारे देशों में लॉकडाउन है किसी को घर से नहीं निकलना है। और हम देख-सुन और पढ़ रहे हैं कि बहुत सारे देशों में लॉकडाउन का बहुत सख्ती से पालन हो रहा है। और यह सख्ती वहां का प्राशासन नहीं बल्कि वहां के रहने वाले लोग कर रहे हैं। लेकिन भारत में इस लॉकडाउन का उतनी सख्ती से पालन नहीं हो रहा है जितनी सख्ती से इसका पालन होना चाहिए। लोगों को यह बात नहीं समझ आ रही है कि कोरोनावायरस से बचने का सबसे पहला बड़ा तरी...

Swiggy | Zomato |Rating |Zomato Rating | AG | Swiggy Rating

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  रेटिंग गेम नहीं ज़िन्दगी बात कुछ खाने की हो तो कोई किचन नहीं बल्कि Swiggy और Zomato को याद करता है। क्योंकि आज ज़माना swiggy और Zomato का है। कुछ खाने का मन हुआ नहीं कि तुरंत swiggy और Zomato पर सर्च करना शुरू कि कौन से रेस्टोरेंट्स से खाना मंगवाया जाए, और रेस्टोरेंट्स सर्च करते समय यह ध्यान रखा जाता है कि उसकी रेटिंग क्या है। क्योंकि अगर रेस्टोरेंट्स की रेटिंग अच्छी है तो इसका मतलब है कि वहां का खाना भी अच्छा होगा। कहते हैं जो दिखता है वह बिकता है। लेकिन इसके खिलाफ अगर हम रेटिंग देखे बिना किसी ऐसे रेस्टोरेंट्स का खाना मंगवा लेते हैं जिस की रेटिंग अच्छी नहीं है, और वहां का खाना हमको पसंद भी आ जाता है तो क्या तब हम सही रेटिंग करते हैं? क्योंकि बात जब रेटिंग की आती है तो कहीं न कहीं हम कंजूसी कर जाते हैं और देना होता है five star और हम धीरे से तीन स्टार को पुश कर देते हैं और उस खाने की किसी एक कमी को दिल में याद कर लेते हैं जो हकीकत में होती ही नहीं है। और दिल में यह तसल्ली कर लेते हैं कि इस वजह से three star दिया। लेकिन अगर  कम रेटिंग वाले रेस्टोरेंट का खाना मंगवा लिया और वह ...

Corona | Corona posts | Waqt |Hindi Poetry | AG | poetry

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  यह वक्त भी गुज़र जाएगा..... एक कहानी कभी पढ़ी थी। शायद आपने भी पढ़ी हो। एक राजा और उसके वज़ीर की कहानी है। वह वज़ीर जो बहुत अक्लमंद और होशियार था। एक बार राजा ने वज़ीर से कहा किt कुछ ऐसा बताओ कि जिससे मैं दुःख में भी खुश हो जाऊं। वज़ीर ने राजा को एक का काग़ज़ पर कुछ लिख कर दिया और कहा कि जब आप बहुत मुश्किल में हों तभी उसको पढ़ना। एक बार की बात है राजा कहीं जंगल में अपने सिपाहियों के साथ जा रहे थे। रास्ते में किसी तरह वह अपने सिपाहियों से अलग हो गये। शाम का समय था राजा अब यही सोच रहे थे कि अब वह महल तक वापस कैसे जाएंगे। राजा बहुत परेशान हो गए उनको कुछ समझ नहीं आ रहा था। वह वहीं पर एक पत्थर पर बैठ गए। रात का अंधेरा बढ़ता जा रहा था राजा को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था। और फिर उनको अपना वज़ीर याद आ गया कि वह अगर आज उनके साथ होते तो वह इस तरह अकेले जंगल में ना बैठे होते। और फिर वज़ीर का सोचते-सोचते राजा को वज़ीर का वह लिखा हुआ काग़ज़ याद आया जो वज़ीर ने उन्हें देते समय कहा था कि जब आप मुश्किल में हों तभी इसे पढ़ना। राजा जो इस वक्त जंगल में  मुश्किल में थे उन्होंने अपनी जेब से वह काग़...

Mirror | poetry | Hindi blogs | AG | Hindi Poetry

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 शकल सूरत की तरह  काजल बिंदी की तरह  दिख जो जाए वह हमें सब के दिल की वह छवि  कौन अच्छा है यहां  और बुरा कौन है  दिल के सब राज़ अब आईना तू बता दे हमें..... मिरर (वह अपनी सी छवि) आईना बन के खड़ा था तो निहारते थे सभी देख के मुझे मुस्कुराता था कोई तो कोई देख के उदास बहुत सुलझ गयी ना जाने उलझी लटे कितनी संवर गयी ना जाने दुल्हनें कितनी मैं आईना ना जाने कितनें का थी छवि मेरे अंदर ना जाने कितनों की कभी टूटा जो दिल किसी का भी वह आ के जुड़ता हमीं से था कोई आंखों को तेरता था मुझे कोई भवों को सिकोड़ता था बहुत हर किसी के आंखों का काजल सवांरते थे हमीं वह उन के होंठों की लाली हमें से थी वह अश्क आ जो गया आंखों में कभी नज़र बचा के सभी से नज़र मिलाते वह हमीं से थे वह सुर्खियां तेरे हसीन गालों की मुझे घंटों निहारने से हैं बहुत चाहते थे हमें वह बहुत निहारते थे हमें वह मैं था भी तो उनका यह हक था ही उन्हें मगर वह टूटा जो एक दिन दिल उनका हुए गुस्से में वह बहुत अपसेट वह उन के दर्द में नहीं वहां कोई अपना वह बहुत अकेली और आईना अकेला मैं वह तैश में थी बहुत और बहुत गमगीन और मैं खामोश ...

Sonu Sood | Actor | Bollywood | AG | Hero

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                                     सोनू सूद सोनू ओ सब के सोनू कैसे वह सूद तेरा हम सब अदा करेंगे तूने किया जो सब का बेलौस बेगरज़ से                                 कोई इसे है समझे  मशहूरियत का तड़का लेकिन वह काम तेरा और वह लगन तुम्हारी समझे वही है इसको आंखों से जिसने देखा कामों को तेरे देखा कोशिश को तेरे माना दुनिया ने जिसको देखा तेरी वह टीम सोनू लगती थी हमको ऐसी जैसे कोई लड़ाई लड़ने वह जा रहे हैं करने फतह वह जैसे कोई किला बड़ा सा और फिर फतह किया भी हर एक दिलों को तूने सब के दिलों पे तूने नेकी और प्यार के झंडे लगा दिये हैं हर कोई तकता ऐसे जैसे कोई फरिश्ता धरती पे आ गया हो दिल को ना जाने कितने उम्मीद को जगाया उम्मीद भी वह ऐसी  जिसको किया मुकम्मल आंखें जो थक गयी थी राहों को तकते-तकते अपनों के इंतेज़ार में और घर के दीदार में तूने जो राह बनाई राहें संवर गई है हंसते हैं हर वह चेहरे घर को जो जा रहे हैं रस...

Amithabh Bachchan |corona | AG | covid 19

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अमिताभ बच्चन हुए कोरोना पाज़िटिव रेखा का बंगला हुआ सील, कल रात की यह बात सुन पढ़ कर हर किसी की जिज्ञासा का यह आलम था कि जैसे कोई नयी फिल्म रिलीज़ हो गई है और हर किसी को इस फिल्म की कहानी जानने की जल्दी थी। कि यह किस्सा क्या है। और फिर हकीकत का पता लगते-लगते भी फसाना मशहूर हो चुका था। कि अमिताभ बच्चन कोरोना पाज़िटिव और रेखा का बंगला सील कर दिया गया है। जब कि हकीकत कुछ और ही थी और वह हकीकत यह थी कि जिस दिन अमिताभ की रीपोर्ट पाज़िटिव आई उसी दिन रेखा के गार्ड की भी रीपोर्ट पाज़िटिव आई। और दोनों बातें इस तरह से शोशल मीडिया पर चलने लगीं जैसे कोई बहुत बड़े खज़ाने का राज़ पता चल गया हो। और राज़ भी ऐसा कि हर कोई इस राज़ को हर किसी को जल्द से जल्द बताना चाहता हो। लेकिन यह बात बहुत ही अफसोस और गलत है कि किस तरह बड़ी ही आसानी से एक बात को किस्सा बना देते हैं यह जाने बिना कि हकीकत क्या है। अमिताभ और रेखा की बातें किसी ज़माने में किसी फिल्म की कहानी से ज़्यादा चर्चा में रहती थी। यहां तक कि यह किस्सा भी मशहूर है कि रेखा अपनी मांग में अमिताभ बच्चन के नाम का ही सिंदूर लगाती हैं। लेकिन कल की बात और आज क...

रेटिंग गेम नहीं ज़िन्दगी | रेटिंग | Rating | Ola| Zomato | Swiggy

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  रेटिंग गेम नहीं ज़िन्दगी रेटिंग आज कल बहुत चलन में है । रेटिंग क्या है? जब हमारा व्यवहार किसी से होता है हम किसी से मिलते हैं, या कोई हमारे घर आता है और हम उसके जाने के तुरंत बाद उस इंसान का व्यवहार उसकी बातचीत के बिना पर उसको रेटिंग देने में ज़रा भी देर नहीं लगाते कि वह बोलते कैसे थे और खाते कैसे थे। अक्सर घरों में तो मेहमान जाते भी नहीं हैं और लोग किचन में या दूसरे कमरे में ही रेटिंग देना शुरू कर देते हैं कि वह चाय कैसे पी रहे हैं और उनको बात करने की तमीज़ भी नहीं है और इस तरह की ना जाने कितनी ही बातों से सामने वाले को रेटिंग दे देते हैं। ऐसा नहीं है कि सामने वाले को सिर्फ खराब रेटिंग ही मिले। बहुत सारे लोगों को बहुत अच्छी भी रेटिंग मिल जाती है। यह बात तो हो गयी उस रेटिंग की जो हम यों ही देते रहते हैं। लेकिन अब तो रेटिंग ज़रूरत बन गयी है। आप कहीं ola से गये हैं तो payment के साथ आप को rating भी करनी होती है कि driver का व्यवहार कैसा है उसने समय से पहुंचाया या नहीं आदि।  इस तरह की बातों के लिए driver को रेटिंग करना ज़रूरी है क्योंकि driver की यही rating देख कर तो हम ola से ...

आजकल | Little_Star | Story | AG | Lockdown Story | Little Star | Friends | poetry

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  #coronavirus आजकल बड़ी ही सादा ज़िन्दगी है आज-कल सब मिलजुल कर पकाते हैं और मिलजुल कर ही खाते हैं सब साथ में हैं रहते किसी को कहीं जाने की जल्दी नहीं किसी को किसी से कोई काम नहीं सब अपना काम खुद ही करते साथ-ही-साथ सब का काम भी करते न किसी को नये कपड़े की फ़िक्र ना किसी को मॉल जाने की इच्छा सब लोग हैं घर में और कर रहे वह काम जो करने की इच्छा थी बरसों से मन में मगर वक्त नहीं था किसी के पास सुबह का नाश्ता साथ में हो रहा है दोपहर का खाना जो खाते नहीं साथ आज हर काम हो रहा है साथ अब शाम की चाय भी एक बार ही बन रही वरना कौन कब आये ये सोच के एक-एक कप ना जाने कितनी बार बनती। बाप बेटा कैरम भी खेल रहे हैं क्या सास और क्या बहू ताश की बाज़ी लगी है सबकी। घर का काम हो रहा जल्दी, क्योंकि सब मिलजुल हैं कर रहे कभी कोई पकैड़े तल कर वाह वाही ले रहा कभी कोई सब्ज़ी काट कर ही कॉलर को अकड़ा रहा जिस को नहीं आ रहा कुछ भी वह भी नहीं है आज पीछे नहीं आता तो क्या हुआ सीख लेंगे आज हम भी कोई रोटी को इंडिया गेट बना कर ही खुश है तो कोई चावल की खिचड़ी पका के है हंस रहा यह वक्त है मुश्किल लेकिन फिर भी सब खुश हैं और स...

Khadai Paneer | AG | Cost of 1 Plate 2 servings of Kadai Paneer | AG | Love

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 Cost of 1 Plate 2 servings of Kadai Paneer  कड़ाही पनीर कड़ाही पनीर एक बहुत ज़्यादा पसंद की जाने वाली डिश है। कड़ाही पनीर बनाने में आसान और खाने में स्वादिष्ट भी है। कड़ाही पनीर को लंच,डिनर और ब्रेकफास्ट तीनों में खाया जा सकता है। कड़ाही पनीर को रोटी, पराठा और नान के साथ खा सकते हैं। कड़ाही पनीर बनाने के लिए जिन चीजों की ज़रूरत पड़ती है उसके नाम और दाम की लिस्ट यहां दे रहे हैं जिस से कोई भी आसानी से कड़ाही पनीर बना सकता है। हर जगह सामान सब्ज़ी हर चीज़ का अलग दाम होति है। मान लीजिए कोई टमाटर होलसेल में लेता है तो उसको सस्ता है लेकिन अलग कोई टमाटर रिटेल मंडी से लेता है तो वही टमाटर अक्सर डबल दाम में मिलता है। आप यह मान कर चलें कि दो लोग के लिए कड़ाही पनीर बनाने के लिए ₹100 से ₹150 तक में बन जायेगी। दो लोगों के लिए कड़ाही पनीर बनाने के लिए सामग्री लिस्ट...... सामग्री:- पनीर   300 ग्राम प्याज़  3 मीडियम साइज़ टमाटर 3 मीडियम साइज़ अदरक पेस्ट  2 चम्मच लहसुन   2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर 1 चम्मच धनिया पाउडर  आधा चम्मच हल्दी पाउडर  1/4 चम्मच नमक...

Judayi | जुदाई | Little_Star | sad Poetry |AG | Judayi Poetry

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  जुदाई...... एक खत जो लिखा उसको खुशियों के झरोखों से लफ्ज़ो के नगीनों से हर लफ्ज़ महकते थे हर शब्द खनकते थे बातें जो बहुत सी थी लिख सब भी रही थे वह फूलों की नगरया से खुशबू की सियाही से रंगों के धनक भी थे चुनरी की लगन भी थी ज़ेवर की चमक थी ही चूड़ी की खनक भी थी हर बात मुकम्मल थी और खत भी मुकम्मल था जो नाम लिखा उसका और खत को जो मोड़ा था वह दर्द जो दिल में था आंखों में समाया था लफ़्ज़ों से बचाया था पलकों से छिपाया था  आंखों का जो तारा था  आंखों से छिपाया था  एक अश्क जो छलका था आंखों के किनारे से एक बूंद ही काफी था जो आंख से टपका था और खत पे जो फैला था एक बूंद ही भारी था एक पन्ने के लेटर पे एक बूंद ही भारी था। #Little_Star कभी जो अश्क आ जाये तेरी आंखों में गलती से..…  लॉकडाउन कविता....  सबसे अलग..... इमोजीज़ लाइफ...... यह दौर नहीं है खत का शायद Massage का ज़माना है Fb और insta की कहानी है मैसेज लिखते हैं मुहब्बत का वह और कर देते हैं delete all  भी आज वह कहां और तुम कहां हर तन्हाई का साथी है यहां याद उनकी जो आ जाए कभी Watsapp और massenger है ना बातें वह जो...

Yad | Little_Star | Poetry | AG | Best Poetry | Ghat | Banaras Ghat

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ज़िन्दगी के फसाने बहुत हैं यहां हर फसानों के किरदार यहीं हैं सभी  ऐ! दोस्त तेरे दर्द को कम ना कर सके लफ़्ज़ों में तेरे किरदार को समा ना सके..... यादों की याद......  गुज़र रही है ज़िन्दगी ऐसी,   जैसी सोचा नहीं था हमने कभी कर रहे काम हम वह सब ही,  करना चाहा नहीं था जिसको कभी  ज़िन्दगी है तो गुज़र ही रही,  ज़िन्दगी जीने की चाहत मगर थी कभी थे ना अरमां बहुत से दिल में हमें, हां मगर ख्वाब आंखों में कुछ थे कभी ज़िन्दगी आज अपनी कहानी हुई, सुनते पढ़ते कहानी जो हम थे कभी  ज़िन्दगी है तो गुज़रे है दिन और रात, वरना लम्हों को मुठ्ठी में रखते थे कभी मौत आये तो मरने की ख्वाहिश हमें,  वरना जीने की चाहत हमें थी कभी  कोई सपना ना ख्वाहिश अभी है मुझे,  वरना ख्वाबों में उड़ते थे हम भी कभी  आज तन्हा मैं तन्हा बहुत हूं मगर, एक साथी की चाहत हमें थी कभी  एक आदमी है साथी तो मेरा मगर, एक इंसां की चाहत मुझे थी कभी  है मुहब्बत जो मेरी मुहब्बत भरी,  वैसी उल्फत की चाहत मुझे थी कभी  कोई जीता यहां पे हमारे लिए, ऐसी सोचों की माला पिरोयी थी क...

Housewife | Little_Star | wife | AG | LifeLine |

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  हाउस वाइफ...... इस लॉकडाउन यह जाना सब ने....... वह हाउस वाइफ जो  करती है काम बहुत कुछ न देखा कभी उसे था न समझा कभी उसे था वरना मशहूर तो यही था तुम करती भी क्या हो आखिर जो देखा तो यह ही सोचा  करती कमाल तुम हो बंदी हो बेमिसाल तुम। -Little-Star

Republic Day | 26 January | 2021 |

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  इस गणतंत्र दिवस हम कुछ नियम बनाए ज़्यादा नहीं दो-चार सही कुछ अच्छे काम कुछ अच्छी बात किसी की इज़्ज़त अपनी इज़्ज़त किसी को गम हो आंख अपनी नम हो किसी को नहीं बतलाना यह खुद को करने की आदत यह अपना लें हम आदत यह अपना लें हम। #happyrepublicday #Little_Star اس یوم جمہوریہ ہم کچھ قانون بنائیں زیادہ نہیں دوچار سہی کچھ اچھے کام کچھ اچھی بات کسی کی عزت اپنی عزت کسی کوغم ہو آنکھ اپنی نم ہو کسی کو نہیں بتلانا یہ خود کو کرنے کی عادت یہ اپنا لیں ہم عادت یہ اپنا لیں ہم۔ #Little_Star

Waqt | वक्त | Little Star | Time | Covid | corona Time Poetry | poetry |

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  वक्त..... यह वक्त भी क्या वक्त है....... अदाकार भी हम हैं दर्शक भी हम ही हैं परेशान भी हम हैं खुश भी तो हम ही हैं मरीज़ भी हम हैं मसीहा भी हम ही हैं साहिल भी हम हैं तूफानं भी हम ही हैं यह वक्त भी क्या वक्त है......... दोस्त भी हम हैं दुश्मन भी हम ही हैं मझदार भी हम हैं किनारा भी हम ही हैं पराए तो पराए हैं पराए भी हम ही हैं डरते तो हैं लेकिन बेखौफ भी हम ही हैं यह वक्त भी क्या वक्त है........ मरहम भी हैं लेकिन ज़ख्म भी हम ही हैं हम साथ भी हैं लेकिन दूर भी हम ही हैं नेकी भी है लेकिन गुनहगार हम ही हैं सिलते भी हमीं हैं उधड़ेरते भी हम ही हैं यह वक्त भी क्या वक्त है....... ईजाद भी हम से हैं और साइंस भी हम ही हैं जमीं पर हम हैं चांद पर भी हम ही हैं चलते वह जो हम हैं चलाते भी हम ही हैं  ऐहसान है उसका मगर मगरूर भी हम ही हैं यह वक्त भी क्या वक्त है...... कुदरत तो वह है और बंदे ही हम हैं यह बात भी कुदरत ने क्या खूब बता दी कुदरत वह जो उसकी है सब से बड़ी है समझे वह जो हम हैं अंजान भी हम ही हैं यह वक्त भी क्या वक्त है। Little_Star

गुलाब जामुन बनाते समय इस बात को ज़रूर ध्यान में रखें | What to do if the sugar syrup for gulab jamun has become more sweet n thick? | AG | Gulab jamun| गुलाब जामुन

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  What to do if the sugar syrup for gulab jamun has become more sweet n thick? गुलाब जामुन एक ऐसी डिश है जिसे हर उम्र के लोग पसन्द करते हैं। गुलाब जामुन को देखते ही मुंह में पानी आ जाता है। और फिर गुलाब जामुन खाए बिना रहा नहीं जाता है। गुलाब जामुन बाज़ार में तो मिलती ही है। जिसे हम खरीद कर कभी भी और कहीं भी खा सकते हैं।  गुलाब जामुन मिठाई की दुकान पर मिलती है। यूं तो गुलाब जामुन हलवाई के हाथों की बहुत अच्छी होती है। लेकिन फिर भी हर किसी की ख्वाहिश होती है कि गुलाब जामुन घर पर बनाएं। और अपने हाथों की बनी हुई गुलाब जामुन खाएं और दूसरों को भी खिलाएं। गुलाब जामुन बनाते समय अगर हम छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रख लें। तो हम घर पर ही बहुत अच्छी गुलाब जामुन बना सकते हैं। गुलाब जामुन रेसिपी.... अक्सर गुलाब जामुन का शीरा बनाते वक्त उसकी चाशनी बहुत थिक(thick) हो जाती है। और ऐसा हो जाने पर हमारी गुलाब जामुन मुलायम (Soft) नहीं बनती है। क्योंकि गुलाब जामुन का शीरा गाढ़ा होने की वजह से गुलाब जामुन के अन्दर तक नहीं पहुंच पाता है। और इस वजह से गुलाब जामुन मुलायम और टेस्टी नहीं बन पाती है। और ब...

दस्तक | Welcome 2021| Little_Star | New Year | AG | 2021| New Year Story |Story

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  दस्तक...... ज़िन्दगी गुज़र रही थी ऐसी कि जैसी हम चाहते ना थे। हंस-बोल रहे थे हम, खा-पी भी रहे थे हम। मगर कुछ अंदर का डर जो बाहर भी दिख रहा था। और फिर हम इंतेज़ार करने लगे किसी ऐसे का जो हमारी मुश्किल को दूर कर दे। और फिर तुम्हारे आने की आहट सुनाई दी। और हम इन्तेज़ार करने लगे तुम्हारी दस्तक का। क्योंकि तुम्हारी आहट हमको मिल गयी थी की तुम आने वाले हो। पता नहीं क्यों तुम्हारा ख्याल आते ही खुशी की एक उम्मीद मन में जाग जाती थी।  ज़िन्दगी में बहुत सारी परेशानी थी मगर कुछ आसानी भी थी। ज़िन्दगी बहुत अच्छी तो नहीं मगर बुरी भी नहीं गुज़र रही थी। हम सब साथ रह रहे थे। मगर एक खालीपन था।  और फिर तुम्हारी वह आहट। हम तुम्हें अपने पास बुलाना चाहते थे। हम तुम्हारे साथ रहना चाहते थे। हम जीना चाहते थे तुम्हारे साथ। मगर हम को इंतेज़ार करना था तुम्हारा। क्योंकि तुम को आने में कुछ वक्त था। और हमको उस वक्त का इंतेज़ार था जब तुम आओगे।  हम तुम्हारा स्वागत बहुत धूमधाम और हर्सोल्लास के साथ करना चाहते थे। मगर हम डर रहे थे। उस अनहोनी से जो पीछे हमारे साथ हो चुकी थी। हमको वह वक्त अभी भी याद है ज...

मैं और वह | Main Or Woh | Little _Star | Story | AG | poetry | Sad Poetry | मैं और वह | Ghat | Banaras Ghat

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ना जानें क्यों समझते हैं वह बहुत देर से  और पछताते हैं फिर बहुत देर तक मुहब्बतों को निभाने का हुनर जो रखते हैं  शादमां दिल और सुकून वह रखते हैं..... मैं और वह कभी खामोश रहती थी कभी वह रूठ जाती थी मेरी बातों से ‌वह अक्सर बहुत ही टूट जाती थी कभी मैं सोचता ही रह जाता और वह कर गुज़रती थी मेरी आदत पे वह अक्सर बहुत अफसोस करती थी कभी आती जो मुश्किल तो वह मज़बूत हो जाती  मेरी कमज़ोरियों पे अक्सर वह बहुत गमगीन हो जाती कभी करते मुहब्बत हम यह बातें वह ही कहती थी मेरे अब के रवैए पर वह अक्सर रो भी देती थी कभी जिससे हमारे हर तरफ खुशियां ही रहती थी हज़ारों गम उसे देकर भी मैं अक्सर शाद रहता था कभी करते बहुत परवाह ऐसा वह ही कहती थी मेरी बेपरवाहियों से अक्सर वह बहुत मायूस हो जाती कभी पीसी कभी टीवी कभी फोन पर ही मैं लगा रहता मज़े लेता और खुश हो रहा होता कभी कहता था उसको जान मगर फिर भी मैं उन्हीं बेजान चीजों में मैं अपना वक्त गंवाता था कभी खाना वह खाती थी मेरे रहते भी तन्हा वह मैं अब तन्हा बहुत उसकी तन्हाई याद करता हूं कभी बाहों के तकिए को तरसती वह बहुत रहती मेरी आगोश अब अक्सर उन्हें फिर याद...

Waqt | वक्त | Lockdown | Little_Star | Lockdown Story | AG | Lockdown Life

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एक यह सदी एक वह सदी........ 👁️  कहते हैं हर ज़माना लौट के आता है। मगर ज़रा बदलाव के साथ।  🎲  फिर चाहे वह कपड़ों का हो, खाने का हो या फिर आप के किये कर्म का हो। हर वक्त लौट के आता है। यह याद दिलाने के लिए की यह काम पहले भी हो चुका है। 🗝️ अब हम जो बात कह रहे हैं वह ज़्यादा दूर की नहीं बल्कि हमारे आस-पास हो रहे कामों को देख कर कह रहे हैं। 🔐 लॉकडाउन की वजह से जब लोगों का काम धंधा लगभग बंद हो गया। अगर कुछ चल रहा था। तो वह थी खाने-पीने की दुकान जैसे-अनाज, फल, दूध, सब्ज़ी आदि। 💀 तब फिर एक दौर शुरू हुआ। इन्हीं सब चीजों की दुकान खुलने का। और फिर देखते-ही-देखते हर रोज़ हर गली मुहल्ले या यूं कह लें कि हर घर में एक दुकान खुलने लगी। और हर दूसरा आदमी फल सब्ज़ी और किराना की दुकान खोलने लगा। बात यहीं पर खत्म नहीं हुई। क्योंकि इसी के साथ-साथ हर घर में पके हुए खाने, फास्ट-फूड, बिरयानी पराठों से लेकर अचार पापड़ तक का मीनू Social Networking के जरिए से सामने आने लगा। जो कि बहुत ही मुनासिब दाम में और साथ ही साथ होम डिलीवरी की सुविधा के साथ। 📈 जिन कामों को कभी हम ऐब समझते थे वह आज हुनर हो...