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बूढ़ा बचपन | Part 10 |

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  बूढ़ा बचपन ..... मुहब्बत भी क्या चीज़ है। यह कभी अपनों को गैर बना देती है। तो कभी गैरों को अपना बना देती है। जन्म देने वाली मां बुरी हो जाती है। ब्याह कर लाई हुई बीवी अच्छी हो जाती है।  रिश्तों को निभाना हर एक को ज़रूरी होता है। घर परिवार एक स्टेज शो की तरह होता है। जहां हर किसी को अपना किरदार निभाना होता है। अगर हर कलाकार अपना किरदार अच्छे से निभा ले तो शो हिट हो जाता है।  ज़िन्दगी के बेहतरीन दिनों को जीते हुए वह परिवार बहुत खुश था। शायद वहां कोई गम नहीं था। या फिर उस परिवार के लोगों को ज़िन्दगी जीने का सलीका पता था।  कभी-कभी इंसान की समझ काम नहीं आती या फिर यूं कह लें कि किस्मत साथ नहीं देती।  कहानी याद आती है...... खुशियों से भरे पूरे घर में उस वक्त अफसोस के नोहे गाये जाने लगे। जब घर में नई बहू के आते ही घर का माहौल बदलने लगा। आप लोग दिन में दाल खाते हैं? हमारे घर में तो रात को दाल बनती है।  आप लोग कितना मीठा खाते हैं। हमारे यहां कोई मीठा आ जाए तो पड़ा-पड़ा खराब हो जाता है। कोई खाता ही नहीं है।  मुझे नाश्ते में अंडे खाना पसंद है। और आप के यहां तो ...

छोटी-छोटी बातें, बड़े एहसास – रिश्तों की अनमोल कहानियां | 100 word's | Small Moments, Big Emotions – Stories of Relationships

  आनलाइन मैकज़ीन के लिए लिखा गया यह लेख। जो 100 शब्दों में लिखना था। टाईटल उनका था। लेख प्रकाशित हुआ।  -Little _Star 🖊️ प्लीज़ आप या तो टीवी बंद कर दीजिए या फिर यह न्यूज़ चैनल बदल दीजिए। सुनिधि ने बहुत ही उलझे मन से अपने पति परेश से कहा।  क्यो यह अचानक से तुम्हें क्या हो गया? मैं तो रोज़ ही न्यूज़ देखता हूं।  परेश ने सवालिया निगाहों से सुनिधि की तरफ देखा।  रोज़-रोज़ आप यह न्यूज़ चैनल देखते हैं। और हर न्यूज़ चैनल पर  हत्या, बलात्कार, लूटमार और अश्लील फिल्मों की बातों के सिवा कुछ सुनाई या दिखाई ही नहीं देता। इसलिए  रोज़ रोज़ ये सुनकर मैं परेशान हो जाती हूं।  टीवी बंद हो चुकी थी। क्योंकि बात बिल्कुल सही थी।  🖊️ रोज़-रोज़ ये सुनकर मैं होती उदास बहुत मैं हूं बेटी हो तुम इस घर की बेटा बनो ना हम दम तुम रोज़ रोज़ ये सुनकर मैं सोचती मैं यह हर दम हूं  बेटी हूं मैं बेटा नहीं क्यूं सोच यह मुझको आती है। 🖊️ फुहार मुहब्बत भरी..... ठक ठक... क्या हुआ भाभी जी? रेवती ने आंख मलते हुए दरवाज़ा खोला और सामने खड़ी जेठानी से सवाल किया।  उठे देवरानी जी, स...

ऐ जाते हुए साल | Aey Jaate Hue Saal | New Year | Happy New Year | Little_Star

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ऐ साल.....  तेरा आना मुबारक था, तेरा जाना है दुखदाई  मिले हम थे हो जैसे कल, मगर था वह एक साल    ऐ साल! हर साल की तरह तुम भी जा रहे हो। हर साल के आते ही मन में एक उमंग और उत्साह आ जाता था कि इस साल हम कुछ नया करेंगे। या फिर हम यह सोचते कि हम यह करेंगे हम वह करेंगे। मगर....  ऐ साल! तेरे आने के बाद धीरे-धीरे हम वापस अपनी पुरानी ज़िन्दगी में लौट जाते हैं। हमारा जोश और जुनून धीरे धीरे कम होता जाता है। और हम भूल जाते हैं कि हमने किसी से कोई वादा किया था।  ऐ साल! हम तुझ से क्या हुआ वादा भूल जाते हैं।   ऐ साल! आज तू हमें छोड़ कर जा रहा है तो हमें अफसोस हो रहा है। हम सोच रहे हैं कि काश हमने तेरी कद्र की होती। तेरे साथ अच्छा वक्त गुज़ारा होता।   ऐ साल! तेरे साथ रहकर हम बहुत कुछ अच्छा कर सकते थे। मगर हम नादान थे। आज हमें अपनी ग़लती का एहसास हो रहा है। मगर....  ऐ साल! हम चाह कर भी कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि....  ऐ साल! तू अब हमसे बिछड़ रहा है। तेरे जाने का वक्त आ गया है।  ऐ साल! हम इस उम्मीद के साथ तुझ से बिछड़ रहे हैं कि हर आने व...

जोड़ो के दर्द का चमत्कारी नुस्खा | घरेलू उपाय | AG |

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चमत्कारी नुस्खा..... वैसे तो आज के ज़माने में हमारे पास हर तरह की सुख सुविधा और आसानियां है। साइंस और तकनीक ने हर तरफ झंडे गाड़ दिए हैं। हर तरह की सुख सुविधा के साथ हर तरह का इलाज आज सम्भव है। आज जितना इलाज के तरीकों में वृद्धि हुई है। उससे कहीं ज़्यादा आज बीमारियों ने भी अपने पैर पसार लिये हैं।  आज बहुत सारे इलाज के बावजूद लोगों को उस बीमारी से शिफा नहीं मिल रहा है जिससे कि वह ग्रस्त है। और बीमारी से शिफा ना मिलने की सूरत में हर कोई परेशान और दुखी है। और हर कोई चाहता है कि कुछ भी कर लें। कोई भी दवा खा लें। जिससे कि बीमारी से आराम मिल जाए।  आज कल हर दूसरा व्यक्ति जोड़ो के दर्द, सुगर, हाई ब्लडप्रेशर और अनेकों बीमारियों में मुब्तिला है। और चाहता है कि किसी तरह दर्द और तकलीफ़ से निजात मिल जाए।  एक वक्त तक अंग्रेज़ी दवा खाने के बाद लगता है कि इस दवा से शिफा नहीं हो रहा है। सिर्फ तभी तक आराम रहता है जब तक की दवा खा रहे हैं। और दवा को छोड़ते ही बीमारी फिर वापस अपना स्थान ग्रहण कर लेती है।  इन्हीं सब कारणों से आज भी हर दवा खाने के बाद लोग घरेलू नुस्खे और उपाय की तरफ रुख करत...

गुड़ की पिड़या बनाने का आसान तरीका | Gud Ki Pidiya Recipe | पारंपरिक देसी रेसिपी | Step-by-Step Recipe

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गुड़ की पिड़या...  परंपरा, स्वाद और सेहत से भरपूर  जब सर्दियों की दस्तक होती है, तो भारतीय रसोई में गुड़, घी और मेवों की खुशबू पूरे घर को महका देती है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है गुड़ की पिड़या। यह सिर्फ़ एक मिठाई नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, पारिवारिक परंपराओं और घर के बने शुद्ध स्वाद की पहचान है। गुड़, भुना हुआ आटा, लावा, गोंद, देसी घी और भरपूर मेवों से तैयार की जाने वाली गुड़ की पिड़या स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर होती है। सर्दियों में इसे खाने से शरीर को ऊर्जा और गर्माहट मिलती है। पहले के समय में यह मिठाई घर-घर बनती थी और परिवार के सभी सदस्य मिलकर इसे तैयार करते थे। आज भी इसका वही देसी स्वाद और अपनापन लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। गुड़ की पिड़या वैसे से सर्दियों में बनने वाले खास पकवानों में से एक है। इसी के साथ गुड़ की पिड़या बनारस के मदनपुरा में इसकी एक अलग ही पहचान है।  मदनपुरा में जब किसी घर में बच्चे का जन्म होता है तो मां को यही गुड़ की पिड़या खाने के लिए दिया जाता है। वहां के लोगों का मानना है कि गुड़ की पिड़या खाने से पेट साफ होता है। साथ ही...