धड़कन | भाग 38 | Dhadkan Part 38 | Heart Touching Hindi Love Story
खामोश फिज़ा में लता जी की आवाज़ गूंज रही थी। शिवाय ने बहुत प्यार से श्लोका को देखा। श्लोका शिवाय की नज़रों की तपिश से पिघलने लगी। और वह पीछे सिर टिका कर आंख बंद कर लेती है। शिवाय उसे देख कर मुस्कुरा देते हैं।
इसको मेरे रूम में ले जाओ। घर पहुंचते ही शिवाय पैकेट सर्वेंट को देते हैं और खुद भी अंदर चले जाते हैं। साथ में श्लोका भी अंदर चली जाती है। और सीधे अपने रूम में चली जाती है। शिवाय भी अपने रूम में चले जाते हैं।
श्लोका तुरंत चेंज करने चली जाती है। वापस आती है तो देखती है शिवाय उसके फ्रीज़र में आइसक्रीम और चॉकलेट रख रहे थे।
खाओगी निकाल दूं?
नहीं अभी नहीं अब सोने जा रही हूं। कल खाऊंगी।
ठीक है तुम सो जाओ गुड नाइट कहते ही शिवाय बाहर निकल गये। श्लोका भी लेट गई। वैसे भी वह थक गई थी।
सुबह नाश्ता करते ही श्लोका कालेज के लिए निकल गई।अंकल का फोन.... दोपहर में फोन पर अंकल का फोन आता देख कर वह सोचने लगी कि क्या काम हो सकता है। क्योंकि कालेज टाइम अंकल फोन नहीं करते। यही सब सोचते हुए वह फोन उठा लेती है।
श्लोका आज तुम शिवाय के साथ रवि के संगीत में चली जाना।
नहीं अंकल मुझे रहने दें प्लीज़। उसने रिक्वेस्ट की।
कोई नहीं जा रहा इस लिए तुम से कह रहा हूं। हम लोगों को एक जगह और जाना है। इस लिए तुम से कह रहा हूं। कोई नहीं जायेगा तो अच्छा नहीं लगेगा।
आठ बजे तैयार रहना। शिवाय के साथ चली जाना।
श्लोका अंकल की बात नहीं काट सकी। और खामोश रह गई। मैं क्या करूंगी जाकर किसी को जानती भी नहीं। शिवाय भी अपने दोस्तों में लगे रहेंगे। श्लोका को टेंशन हो रही थी।
और उधर आफिस में जब सुधीर जी ने शिवाय से कहा कि श्लोका उसके साथ जायेगी। तो शिवाय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वैसे तो वह नार्मल बना रहा। लेकिन सुधीर जी से उसकी खुशी छुपी ना रह सकी। और वह मुस्कुरा कर रह गये।
मैं गाड़ी में तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूं। रेडी हो तो आ जाओ।
सवा आठ तक श्लोका तैयार हो गई थी। उसी वक्त शिवाय का फोन आया।
ठीक है आ रही हूं।
श्लोका जैसे ही गाड़ी में बैठी शिवाय ने एक नज़र उसे देखा। और गाड़ी स्टार्ट कर दी।
रास्ते में शिवाय श्लोका को रवि की फैमली के बारे में बताते रहे।
वहां पहुंच कर रवि और उसकी फैमली से मिल कर वह दोनों एक तरफ बैठ गये।
आप जाएं। मैं यहीं हूं। आप दोस्त की शादी इंज्वॉय करें। श्लोका ने मुस्कुराते हुए कहा।
पक्का जाऊं? बोर नहीं ना होगी? शिवाय ने पूछा।
नहीं, मैं अकेली बोर नहीं होती। आप जाएं। शिवाय उठ कर चले गये। और श्लोका सामने देखने लगी। स्टेज पर परफॉर्म चल रहा था। लड़कियां डांस कर रही थीं।
बहुत अच्छी च्वाइस है तुम्हारी। मान गये तुम्हारी धड़कन को। हेमंत ने श्लोका की तरफ देखते हुए कहा। जो दूर बैठी थी।
शिवाय ने भी श्लोका की तरफ देखा। ब्लू ब्लैक लहंगे में लाइट मेकअप और लाइट ज्वेलरी के साथ बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। शिवाय उसे देखता रह गया।
श्लोका के साथ डांस कर लो। रवि के कहा।
नहीं रहने दो। अगर वह नाराज़ हो गई तो। शिवाय ने जल्दी से कहा।
देख रहे हो कितनी फिक्र है उसकी नाराज़गी की। अशोक ने मुस्कुरा कर रवि से कहा।
तुम स्टेज पर पहुंचो मैं श्लोका को भेजता हूं। हेमंत ने कहा।
नहीं यार तुम समझ नहीं रहे। शिवाय को श्लोका की फिक्र हो रही थी।
जनाब की हालत देख रहे हो। एक बार फिर अशोक ने कहा।
तुम बैठो मैं कुछ करता हूं। कहते ही हेमंत उठ गये और अपनी वाइफ के पास चले गये और उन से बात करके वापस आ गये। थोड़ी देर बाद हेमंत की वाइफ रजनी श्लोका के पास थी और फिर थोड़ी देर बाद दोनों स्टेज पर थी।
शिवाय श्लोका को स्टेज पर देख कर हैरान रह गये।
स्टेज पर हल्की रोशनी, धीमा संगीत और श्लोका के चेहरे की मासूम मुस्कान.... शिवाय जैसे खो से गये। वह महसूस कर रहे थे कि उनकी दुनिया इस सादगी और खूबसूरती के बिना अधूरी है।
देख क्या रहे हो? अब चलो स्टेज पर। हेमंत शिवाय का हाथ पकड़ कर स्टेज पर पहुंच गये। और शिवाय को इशारा करके रजनी के साथ डांस करने लगते हैं। और शिवाय श्लोका के साथ डांस करने लगते हैं।
दूर खड़े कैमरामैन को रवि ने बोल दिया कि शिवाय और श्लोका की अच्छी तस्वीर लें। और कैमरामैन ने उन पर फोकस कर दिया।
बहुत खूबसूरत लग रही हो। डांस करते हुए शिवाय श्लोका के चेहरे को देखते हुए कहते हैं।
शिवाय की तारीफ सुनकर श्लोका के गाल हल्के गुलाबी हो गये। वह जानती थी कि शिवाय उसे देख रहे हैं। पर उसने नज़रें नीची ही रखी। उस का दिल जैसे तेज़ी से धड़क रहा था। मानो हर धड़कन शिवाय का नाम ले रही हो।
अब चलें? श्लोका की धड़कन वैसे से तेज़ हो चुकी थी। उस पर से शिवाय की नज़र। जो उसी पर जमी हुई थी।
अभी रजनी के साथ तो बहुत अच्छे से डांस कर रही थी और मेरे आते ही जाने की बात। शिवाय ने शिकवा किया।
श्लोका ने कोई जवाब नहीं दिया। लेकिन उस के कदम शिवाय के साथ ताल मिलाते रहे। दोनों की खामोशी में भी एक संगीत था जो शब्दों से परे था।
जैसे ही शिवाय ने श्लोका को गोल घुमाया श्लोका के सारे बाल आगे की तरफ आ गये। और श्लोका की पीठ शिवाय की तरफ थी। बैक डीप होने की वजह से श्लोका का बड़ा सा काला तिल शिवाय को दिख गया।
इतना बड़ा तिल? शिवाय ने देखा तो हैरानी से पूछ लिया।
हूं, ऐसा ही तिल मेरे दोनों घुटनों पर भी है। श्लोका शिवाय की ओर घूम कर कहती हैं। मां कहती थी जिस को यह तिल होता है वह बहुत खुशनसीब होता है। लेकिन मैं इन बातों को नहीं मानती। श्लोका ने मुस्कुरा कर कहा।
खुशनसीब तो हो तुम। शिवाय कहीं खो गये। और फिर दोनों दोबारा डांस करने लगे।
थोड़ी देर बाद दोनों स्टेज से उतर गये। खाना खाकर श्लोका रजनी और हेमा से बातें करती रही। शिवाय को भी इत्मीनान हो गया कि श्लोका बोर नहीं हो रही है।
और फिर देर रात दोनों घर के लिए निकल गये।
गाड़ी में बैठते ही शिवाय ने धीमी आवाज़ में एक रोमांटिक सॉग लगा दिया। म्यूजिक की धुनें दोनों के बीच की खामोशी को भर रही थी।
आज का दिन यादगार रहा। शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा। श्लोका ने सिर्फ शिवाय को देखा। मगर खामोश रही।
क्या हुआ बोर हो गई थी क्या?
नहीं।
तो फिर खामोश क्यों हो।
बस यूं ही। श्लोका ने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा।
शिवाय ने उसकी तरफ देखा। तुम्हारी यह खामोशी भी बहुत कुछ कहती है।
तुम्हारे तैयार होने का अंदाज़ बिल्कुल अलग है। तुम लाइट मेकअप और ज्वेलरी में बहुत क्यूट लगती हो। शिवाय ने एक बार फिर उसकी तारीफ की।
सादगी हर किसी को पसंद नहीं आती। श्लोका ने धीमी आवाज़ में कहा।
लेकिन मुझे यही सादगी पसंद है। शिवाय ने उसके गाल को हल्के से पिंच करते हुए कहा। श्लोका बाहर देखने लगी। शिवाय भी सामने देखने लगे। क्योंकि शिवाय ने देख लिया था कि श्लोका उसकी बातों से घबरा रही है।
घर पहुंचते ही दोनों ऊपर चले गये।
श्लोका के साथ शिवाय भी रुम में चले गये।
कोई काम? श्लोका ने हैरानी से पूछा क्योंकि वैसे ही बहुत रात हो गई थी। और पूरे टायम वह साथ ही थे।
हां, एक रिक्वेस्ट है प्लीज़ मना मत करना। एक बार अपने घुटनों का तिल दिखा दो। प्लीज़ ना जाने क्यों जब से तुम ने बताया है और तुम्हारे पीठ का तिल देखा है तब से अंदर एक बैचैनी सी है। मैं समझ नहीं पा रहा कि ऐसा क्यों हो रहा है। शिवाय कहते जा रहे थे। और श्लोका शिवाय को देख रही थी जिस के चेहरे पर एक उलझन थी। कोई भी गलत सोच नहीं दिख रही थी।
लेकिन.... श्लोका सोच में पड़ गई।
तुम यहां बैठो। शिवाय श्लोका का हाथ थाम कर सोफे पर बैठा देते हैं। और खुद वहीं जमीन पर बैठ जाते हैं। मैं आंख बन्द कर रहा हूं। तुम अपना लहंगा ऊपर कर लो। मैं सिर्फ एक नज़र देखना चाहता हूं। कहते ही शिवाय ने आंख बन्द कर ली।
श्लोका ने एक नज़र शिवाय को देखा। और लहंगे को ऊपर घुटनों तक कर लेती है। और शिवाय के कंधे पर हाथ रखती है।
शिवाय आंख खोल देते हैं। पहले शिवाय की नज़र श्लोका के चेहरे पर जाती है और फिर उसके घुटनों पर। दोनों घुटनों पर काला बड़ा सा तिल चमक रहा था।
शिवाय सिर्फ एक नज़र देख कर उसके लहंगे को नीचे कर देते हैं। प्लीज़ मुझे गलत मत समझना ना जाने क्यों मैं यह देखना चाहता था।
क्यों?
यह मैं नहीं समझ पा रहा। प्लीज़ मुझे माफ कर देना।
शिवाय अपनी बात से शर्मिन्दा भी थे। और उलझे हुए लगे। कहते ही शिवाय उठ खड़े हुए। श्लोका भी साथ में खड़ी हो गई।
कोई बात नहीं आप जाएं। श्लोका नार्मल होते हुए कहती है। क्योंकि शिवाय ने जब कहा तो उसे घबराहट हो रही थी। लेकिन शिवाय की नज़र और बात से उसे कुछ गलत नहीं लगा। बल्कि उसे शिवाय बहुत उलझे हुए लगे। यूं जैसे शिवाय को खुद ही नहीं पता कि वह क्यों उसका तिल देखना चाह रहे हैं।
गुड नाइट बोल कर शिवाय बाहर चले गए।
शिवाय के जाते ही श्लोका चेंज करने लगी।
शिवाय अपने रूम में जाकर सोफे पर बैठ गये। मैं क्यों उस का तिल देखना चाहता था। मेरे मन में ऐसा ख्याल क्यों आया। शिवाय यही सोच कर परेशान थे। श्लोका क्या सोचती होगी मेरे बारे। वह मुझे गलत समझ सकती है। लेकिन मेरा ऐसा कोई गलत इरादा नहीं था।
शिवाय अपनी ही सोचों में उलझे हुए थे। और जब कुछ समझ नहीं आया तो उठ कर चेंज करके सो गए।
सुबह नाश्ता करते ही शिवाय आफिस चले गये।
स्नेहा आप अपना पासपोर्ट मुझे दे दें। आप मेरे साथ फैशन शो में चल रही हैं। शिवाय ने स्नेहा से कहा।
लेकिन सर मैं क्यों? और मेरा पासपोर्ट भी नहीं बना है। स्नेहा ने जल्दी से कहा।
हमारी टीम के साथ एक डिज़ाइनर का होना भी ज़रूरी है। और आप का पासपोर्ट क्यों नहीं बना है? अब पहले आप पासपोर्ट बनवायें। कभी भी ज़रूरत पड़ सकती है। ठीक है आप जायें। मैं देखता हूं। शिवाय ने परेशानी से कहा।
एक बात कहूं सर?
बोलें।
आप श्लोका मैम को ले जाएं।
क्या?
जी सर उन्होंने भी इस पर काम किया है। और उनसे अच्छा आप्शन कोई नहीं हो सकता। और वैसे भी आप की टीम तो आप के साथ है ही। स्नेहा ने रास्ता बताया।
ठीक है मैं देखता हूं। स्नेहा तो चली गई। मगर उसके लिए सोचो का समंदर छोड़ गई। पता नहीं श्लोका का पासपोर्ट है भी या नहीं मुझे नहीं लगता कि उसका पासपोर्ट होगा। यही सब सोचते हुए शिवाय घर लंच करने चले गये ताकि श्लोका से बात कर लें। उस के बाद आगे का सोचा जाए।
स्नेहा तो आइडिया दे गई। लेकिन शिवाय को टेंशन दे गई।
क्योंकि श्लोका की ज़िंदगी के कुछ पन्ने ऐसे थे जिस से वह अंजान था। और वह जानना भी नहीं चाहता था जब तक कि खुद श्लोका ना बताए।
लंच करते ही शिवाय श्लोका के रुम में चले गये।
तुम्हारा कोई आईडी प्रूफ या कुछ हो तो मुझे दो। शिवाय आराम से सोफे पर बैठते हुए कहते हैं।
क्यों क्या काम है। श्लोका जो अपनी अलमारी ठीक कर रही थी। हैरानी से सिर घुमा कर पूछती है।
कुछ काम है तभी तो मांग रहा हूं।
क्या काम है वह बताएं।
क्यों ऐसे बिना काम के नहीं दे सकती?
दे सकती हूं लेकिन वजह जानना ज़रूरी है।
अभी दे दो वजह बाद में बता दूंगा।
आप वजह बता दें तो बेहतर होगा। श्लोका को टेंशन हो रही थी कि इस तरह शिवाय को उस के बारे में पता चल जायेगा। जो कि वह अभी नहीं चाहती थी।
श्लोका जानती थी कि वह भीड़ में अकेली है। लेकिन उसे इसकी परवाह नहीं थी। उस ने हमेशा खुद को सम्हालना सीखा था। वह समझ रही थी कि उस की बात शिवाय को बुरी लग सकती है। लेकिन वह भी मजबूर थी।
तुम को मुझ पर भरोसा नहीं है। क्यों तुम ऐसा करती हो। मैंने हमेशा देखा है तुम मुझ से बहुत कुछ छुपा जाती है। क्या तुम को मुझ पर भरोसा नहीं है।
वैसे एक बात बता दूं मुझे तुम्हारी जासूसी करने का कोई शौक नहीं है। मुझे तुम्हारा पासपोर्ट बनवाना था। इस लिए पूछा। कहते ही शिवाय गुस्से से बाहर निकल जाते हैं।
जारी है...
धड़कन भाग 39
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