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Showing posts from October, 2026

धड़कन | भाग 38 | Dhadkan Part 38 | Heart Touching Hindi Love Story

खामोश फिज़ा में लता जी की आवाज़ गूंज रही थी। शिवाय ने बहुत प्यार से श्लोका को देखा। श्लोका शिवाय की नज़रों की तपिश से पिघलने लगी। और वह पीछे सिर टिका कर आंख बंद कर लेती है। शिवाय उसे देख कर मुस्कुरा देते हैं। इसको मेरे रूम में ले जाओ। घर पहुंचते ही शिवाय पैकेट सर्वेंट को देते हैं और खुद भी अंदर चले जाते हैं। साथ में श्लोका भी अंदर चली जाती है। और सीधे अपने रूम में चली जाती है। शिवाय भी अपने रूम में चले जाते हैं। श्लोका तुरंत चेंज करने चली जाती है। वापस आती है तो देखती है शिवाय उसके फ्रीज़र में आइसक्रीम और चॉकलेट रख रहे थे। खाओगी निकाल दूं?  नहीं अभी नहीं अब सोने जा रही हूं। कल खाऊंगी। ठीक है तुम सो जाओ गुड नाइट कहते ही शिवाय बाहर निकल गये। श्लोका भी लेट गई। वैसे भी वह थक गई थी। सुबह नाश्ता करते ही श्लोका कालेज के लिए निकल गई।अंकल का फोन.... दोपहर में फोन पर अंकल का फोन आता देख कर वह सोचने लगी कि क्या काम हो सकता है। क्योंकि कालेज टाइम अंकल फोन नहीं करते। यही सब सोचते हुए वह फोन उठा लेती है। श्लोका आज तुम शिवाय के साथ रवि के संगीत में चली जाना। नहीं अंकल मुझे रहने दें प्लीज़। उसने र...

इश्क जान | भाग 12 | Ishq Jaan Part 12 | Heartfelt Romance & Wedding Story

शजल की नज़र भी परमजीत की ओर उठ जाती है। लेकिन उसकी मुस्कान गायब हो चुकी थी। परमजीत ने भी उसे देखा। दोनों की आंखें मिली। एक पल... सिर्फ एक पल के लिए... लेकिन उस एक पल में जैसे पिछले सारे साल लौट आए। वो मुहब्बत... वो इन्तेज़ार... वो जुदाई... और वह अधूरी कहानी... शजल ने जल्दी से अपनी नज़रें फेर लीं। लेकिन उसके दिल में एक सवाल जन्म ले चुका था। क्या "शानवी" सिर्फ एक नाम था? या... परमजीत ने आज भी अपने दिल में "शजल" को कहीं ज़िदा रखा था? दोनों की निगाहें मिलते ही दोनों के दिल में एक तरंग बज जाती है। उनके दिल की वह तरंग जिसे वह दोनों कोई नाम नहीं देना चाहते थे। वह बेनकम सी तरंग उनके दिल की वह आवाज़ थी। जिसे वह अब सुनना नहीं चाहते थे। मगर वह तरंग उन्हें बहुत कुछ याद दिला रही थी। परमजीत आप इसे लें। मैं इसका दूसरा ड्रेस लेकर आती हूं। लगता है इसे इस कपड़े से परेशानी है। अमृत शानवी को रोता देख उसे परमजीत को देकर चली जाती है। अपनी ज़िंदगी से खुश हो? अमृत के जाते ही परमजीत शजल से पूछता है। हां। बहुत खुश हूं। लेकिन तुमने यह क्यों पूछा। शजल को उसका सवाल थोड़ा अजीब लगा। तुम्हारी यह झ...

रूबरू | Part 13 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

आकिल की मौत के बाद आप एक बार भी उसके घर क्यों नहीं गए? उसकी हर सोच में उनके लिए नफरत थी। मेरा सवाल बहुत जल्द आपके सामने होगा। जवाब देने के लिए तैयार हो जाएं मिस्टर बॉस। दरवाज़ा खुलने की आवाज़ पर उसका सोचों का सिलसिला टूट जाता है।  नज़र घुमा कर देखती है। सामने ताबिश खड़ा था। बिना नॉक के वह अंदर आ गया था। लेकिन वह खामोश रही। क्योंकि यह घर उसका है यह बात हो चुकी थी पहले। वह सवालया नज़रों से उसे देखती है। जैसे पूछ रही हो कोई काम। मेरे लिए कॉफी बना दो। उसकी नज़रों का सवाल समझ कर वह बोला। मैं? हां तुम... मैं कोई कुक या शेफ नहीं जो आप के लिए कॉफी बनाऊं। मैं दादी की केयरटेकर हूं। मैं सिर्फ उनके लिए ही काम करूंगी।  वह अपनी जगह से उठकर बोली। आवाज़ में ठहराव था। तो फिर एग्रीमेंट में तुम ने अपनी सहमति क्यों दी? उसका अंदाज़ बहुत जानलेवा था। जिसे सुनकर सचमुच मायरा की जान निकल गई। कोई बहस करने के बजाए वह बाहर निकल गई। क्योंकि बहस करने का मतलब था अपनी हार... और वह हारना नहीं चाहती थी। फिर चाहे उसे जो भी करना पड़े। ताबिश भी उसके पीछे निकला। किचन में जाते ही वह भगोना लेकर उसको गैस पर रखती है। य...

रूबरू | Part 12 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

मिस मायरा, तुम्हारे यहां आने का मकसद हमें बहुत जल्द पता चल जायेगा। तुम चालाकी से ब्लैक हाउस आ तो गईं, लेकिन एग्रीमेंट पेपर को बिना पढ़े साइन करके तुमने गलती कर दी। अब यही गलती तुम्हें बहुत भारी पड़ने वाली है। ... अशमारा से आज बात हुई ? ठीक है ना वह? हमीद ने फिक्रमंद हेते हुए पूछा। हां, हुई थी... ठीक है वह। आपकी खैरियत पूछ रही थी।  मेरी बच्ची की ज़िन्दगी में खुशियां आने से पहले ही चली गईं। रूकय्या उदास हुई। परेशान मत हों। हर बात में खुदा की मसलहत होती है। वह जो करता है बेहतर करता है। हमीद बीवी को तसल्ली दी। उसने आफिस का नाम बताया? नहीं। अशमारा का हॉस्टल में रहकर काम करना मुझे परेशान कर रहा है। अगर वह इसी शहर में है तो आफिस के बाद घर भी तो आ सकती है। रूकय्या परेशानी भरे स्वर में कहा। कोई वजह होगी ,आप परेशान मत हों। मुझे अपनी बेटी पर भरोसा है। उसने यह क्यों कहा कि रिश्तेदारों को मत बताना की मैं इसी शहर में काम करती हूं... बल्कि दूसरे शहर बताना। रूकय्या को किसी तरह तसल्ली ही नहीं हो रही थी। रिश्तेदारों का क्या है ज़रा सा बिंदु मिल जाए पहाड़ बना देंगे बात को। अपने शहर में रहकर घर ना आना...

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 ऐ जाते हुए साल  दो पैसे के लिए  खामोश Love  इश्क With Love  मुहब्बत (एक इबादत ऐसी भी)  खामोशियों का शोर  ऐ दोस्त  वे इक्कीस दिन  आग  एक ख्याल (सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर)  मिरर  सोनू सूद  आजकल  जुदाई   हाउस वाइफ  याद  वक्त  मैं और वह  इमोजी लाइफ  बेताब लम्हे  दर्द  जलता दिया  सैनिक  ख्वाहिश  कहानी याद आती है  दोष  अंजानी ख्वाहिश सितारा  4 line poetry page 1 4 Line poetry Page 2  4 Line Poetry Page 3  हया 6 line poetry  Page 1  6Line Poetry Page 2