इश्क जान | भाग 12 | Ishq Jaan Part 12 | Heartfelt Romance & Wedding Story
शजल की नज़र भी परमजीत की ओर उठ जाती है। लेकिन उसकी मुस्कान गायब हो चुकी थी।
परमजीत ने भी उसे देखा।
दोनों की आंखें मिली।
एक पल...
सिर्फ एक पल के लिए...
लेकिन उस एक पल में जैसे पिछले सारे साल लौट आए।
वो मुहब्बत...
वो इन्तेज़ार...
वो जुदाई...
और वह अधूरी कहानी...
शजल ने जल्दी से अपनी नज़रें फेर लीं।
लेकिन उसके दिल में एक सवाल जन्म ले चुका था।
क्या "शानवी" सिर्फ एक नाम था?
या...
परमजीत ने आज भी अपने दिल में "शजल" को कहीं ज़िदा रखा था?
दोनों की निगाहें मिलते ही दोनों के दिल में एक तरंग बज जाती है। उनके दिल की वह तरंग जिसे वह दोनों कोई नाम नहीं देना चाहते थे। वह बेनकम सी तरंग उनके दिल की वह आवाज़ थी। जिसे वह अब सुनना नहीं चाहते थे। मगर वह तरंग उन्हें बहुत कुछ याद दिला रही थी।
परमजीत आप इसे लें। मैं इसका दूसरा ड्रेस लेकर आती हूं। लगता है इसे इस कपड़े से परेशानी है।
अमृत शानवी को रोता देख उसे परमजीत को देकर चली जाती है।
अपनी ज़िंदगी से खुश हो? अमृत के जाते ही परमजीत शजल से पूछता है।
हां। बहुत खुश हूं। लेकिन तुमने यह क्यों पूछा। शजल को उसका सवाल थोड़ा अजीब लगा।
तुम्हारी यह झूठी मुस्कान देखने के लिए...
परमजीत की बात पर एक दम से शजल की हंसी गायब हो गई।
शजल के चेहरे का बदलता रंग परमजीत से अनदेखा नहीं था।
क्या नाम है तुम्हारा? परमजीत शजल के बेटे की ओर झुक जाता है।
बच्चा मां की ओर देखता है।
अभिमन्यु...
बच्चे के बजाए शजल जवाब देती है।
तुम्हारे नाम की तरह तुम्हारी मां भी बहुत प्यारी है इनको परेशान मत करना। परमजीत बच्चे का गाल छूकर कहते ही सीधा खड़े होकर उसकी तरफ देखे बिना आगे बढ़ जाता है।
शजल के कदम जहां थे वहीं जम गए। परमजीत के इस तरह कहने की उसे उम्मीद नहीं थी।
जारी है...
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