रूबरू | Part 29 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
अंदर जाने का इरादा छोड़ कर वह वापस ताबिश की ओर बढ़ जाती है। तुम यह केयरटेकर की जॉब क्यों कर रही हो? जबकि तुम्हारे पास इससे बेहतर आप्शन हैं। ताबिश सीधा मुद्दे पर आ गया। मैं इस बात का जवाब नहीं दे सकती। लेकिन इतना ज़रूर कह सकती हूं कि सही वक्त आने पर आप को जवाब मिल जायेगा। मायरा आत्म विश्वास से बोली। और यह सही वक्त कब आयेगा? ताबिश की नज़र उसके चेहरे पर टिकी थी। बहुत जल्द...मायरा के होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई। मैं उस वक्त का इंतेज़ार करूंगा। ताबिश भी मुस्कुरा दिया। थोड़ी देर पहले वाली बेसुकूनी से उसे राहत मिल गई थी। एक बात कहना था... मायरा की नज़र एक पल के लिए ताबिश पर उठी। लेकिन दूसरे ही पल वह अपनी नज़रें झुका गई। कहें... ताबिश की नज़र उसी पर जमी थी। मैं यह जॉब छोड़ना चाहती हूं। ताबिश का मूड ठीक देख कर मायरा ने बात छेड़ दी। ठीक है... तुम कम्पनी को मेल कर दो। तुम्हारा मेल मिलने से ठीक एक महीने के बाद तुम जा सकती हो। ताबिश की बात पर मायरा हैरान रह गई। इतनी आसानी से ताबिश ने बात मान ली। उसे इस बात की उम्मीद नहीं थी। अब जाने में तो अभी टाइम है...क्या मैं अगले हफ्ते दो-तीन दिन के लिए घ...