धड़कन | भाग 43 | Dhadkan Part 43 | Heart Touching Hindi Love Story
क्या मां ऐसी होती है? वह मां नहीं हैं श्लोका। शिवाय के दर्द खुल गये। उस की आंख आंसूओं से तर थी। आवाज़ में दुख साफ तौर से झलक रहा था।
नहीं शिवाय ऐसा नहीं कहते।
वह सच में मेरी मां नहीं है। मेरी मां तो बचपन में ही मुझे छोड़ कर चली गई थी। क्योंकि मेरे डैड ने उन को आज़ादी नहीं दी थी। और यह मां मेरे करीब नहीं आ सकीं। क्योंकि इनको मेरे डैड ने आज़ादी दे दी थी। शिवाय ने घमाका किया।
क्या बतलब? श्लोका हैरान रह गई। क्योंकि यह बात उस के लिए नई थी। शिवाय की आंख में आंसू थे।
जब मैं पांच साल का था। तब मेरी मां मुझे छोड़ कर चली गई। मुझे थोड़ा-थोड़ा याद है मैम और डैड में उस दिन बहुत लड़ाई हुई थी। मैम कह रही थी कि वह घर पर रह कर सिर्फ बच्चे की देखभाल और घरदारी नहीं करेंगी। बल्कि बाहर जाकर अपनी ज़िंदगी जीना चाहती हैं।
डैड ने कहा कि उन को जो करना है करें। वह उनको नहीं रोकेंगे। लेकिन फिर एक दिन मौम कहीं चली गई। उन्होंने एक लेटर छोड़ा था। जिस पर लिखा था कि वह अब डैड के साथ नहीं रह सकती। उन को अपनी मिज़ाज का एक हमसफर मिल गया। जिस के साथ वह स्वीटजरलैंड जा रही हैं।
वह मुझे छोड़ कर चली गईं। मेरा चेहरा भी उन को नहीं रोक सका। सुनते हैं मां अपने बच्चे के लिए कुछ भी कर सकती है लेकिन फिर मेरी मां मुझे कैसे छोड़ कर चली गई?
शिवाय रोते हुए बता रहे थे। और श्लोका हैरानी से सब सुन रही थी।
फिर मेरे डैड ने इन से शादी की। यह एक गरीब परिवार से थी। डैड को मेरी फिक्र थी इस लिए उन्होंने ममता से शादी की ताकि वह मुझे और घर को अच्छे से संभाल सकें।
लेकिन इन से शादी के कुछ दिन बाद ही ममता मां हवाओं में उड़ने लगीं। पैसा, घर, ऐश व आराम, नाम , रूतबा इन सब को देख कर वह सातवें आसमान पर पहुंच गई। और फिर बहुत जल्द यह हाई सोसायटी के हर बुरे काम को करने लगी जिसको कर के हाई सोसायटी की औरतें फख्र महसूस करती हैं। मेरी यह दूसरी मां भी उसी रंग में पूरी तरह रंग गई।
डैड खामोश होते गए। उन्होंने किसी भी बात में बोलना बिल्कुल छोड़ दिया। जिस आज़ादी के लिए मेरी मां उन्हें छोड़ कर चली गई थी। डैड नहीं चाहते थे कि अब यह आज़ादी के नाम पर उनको छोड़ कर जाएं। डैड ने ज़िंदगी से समझौता कर लिया। और मैं अम्मा के हाथों परवरिश पाते हुए बड़ा हो गया।
डैड मेरा हर तरह से ख्याल रखते। आफिस से आकर वह पूरे टाइम मेरे साथ ही रहते।
शिवाय आपने इतना कुछ सहा है। इसी लिए अक्सर मुझे आपकी आंखों में दर्द दिखता था। लेकिन मैं समझ नहीं पाती थी। श्लोका ने दुख से कहा।
मुझे मां का प्यार नहीं मिला। मैं हमेशा मां के प्यार को तरसा हूं । शिवाय ने दुख से कहा। आंसू अब भी उसकी आंखों में था।
मैं जब बड़ा हुआ तो डैड ने मुझे सारी बातें बता दीं। जो मेरे बचपन से लेकर अब तक हमारे साथ गुज़री थी। ताकि मैं उन बातों से अंजान ना रहूं। शिवाय ने श्लोका का हाथ थाम लिया।
अराध्या और अमोल को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता है। वह दोनों भी अपनी मां की तरह ज़िंदगी गुज़ारते हैं। लेकिन ना जाने क्यों मैं उस माहौल में नहीं ढल सका। शायद मेरे साथ मेरे डैड की बेहतरीन बातें थी जो मुझे एक बेहतर इंसान बना गई। वरना मैं भी यूं ही हाई सोसायटी के नाम पर गलत आदतों में लग जाता।
जिस मां ने मुझे कभी बेटा कह कर गले नहीं लगाया। कभी मुझे अपने हाथ से खाना नहीं खिलाया। जिन्होंने कभी मुझे लोरी गाकर अपनी साथ ना सुलाया हो। जो कभी मेरे बीमार होने पर रातों को नहीं जागी। वह मां आज मुझ पर अपने बेटे होने का हक जता रही हैं। और चाहती हैं कि एक फरमां बरदार बेटे की तरह मैं उनका हुक्म मान लूं।
ऐसा कहीं होता है श्लोका तुम ही बताओ मैंने गलत किया? तुम तो बहुत समझदार हो, प्लीज़ मुझे बताओ मैंने गलत किया? शिवाय उठ कर बैठ गये और श्लोका को देखने लगे। श्लोका का हाथ अभी भी शिवाय के हाथ में था।
श्लोका खामोश बैठी सोच रही थी कि वह क्या जवाब दें। ममता आंटी ने जो किया वह गलत किया। लेकिन वह शिवाय को क्या जवाब दे। इस लिए वह खामोश ही रही।
बोलो श्लोका खामोश क्यों हो? शिवाय उसका जवाब जानना चाहता था।
शिवाय आप कुछ मत सोचें। अभी आप आराम करें। कल हम को सिंगापुर के लिए भी निकलना है। श्लोका उठने लगी।
तुम जवाब नहीं दे रही इस का मतलब मैं गलत हूं। शिवाय ने उदासी से कहा।
श्लोका उठते-उठते दोबारा बैठ गई। और खामोशी से शिवाय को लिटा देती है। और अपने हाथ से उनकी आंख बन्द कर देती है। और शिवाय को थपकी देने लगती है।
श्लोका के ऐसा करते ही शिवाय बेसाख्ता रोने लगते हैं। लेकिन श्लोका खामोश रहती है। वह चाहती थी आज शिवाय के दुख दूर हो जायें। बरसों से उस के दिल में जो दर्द हैं वह आंसूओं के रूप में बाहर आ जायें।
शिवाय अपना सिर श्लोका के गोद में रख लेते हैं। श्लोका फिर भी खामोश रहती है।
जारी है...
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