धड़कन | भाग 40 | Dhadkan Part 40 | Heart Touching Hindi Love Story

कार का माहौल बहुत ही खूबसूरत हो गया था। दो प्यार करने वाले खामोश खोये हुए थे। शिवाय की नज़र बार-बार मिरर में श्लोका पर उठ रही थी।

घर पर गाड़ी रोकते ही शिवाय गाड़ी से निकल कर सीधे ऊपर चले जाते हैं।

बहुत जल्दी में हैं। श्लोका सोचती है। और अराध्या से बात करते हुए अंदर जाती है और ऊपर चली जाती है। रुम में जाकर पहले रुम लॉक करती है। और लाइट जला कर जैसे ही घूमती है तो हैरान रह जाती है। क्योंकि उस की बेड पर शिवाय लेटे हुए थे।

आप यहां? श्लोका ने नाराज़गी से पूछा।

दरवाज़ा लॉक कर दिया ना? शिवाय ने जवाब देने के बजाय सवाल किया।

क्यों? श्लोका हैरान हुई।

यही तो तुम कल से कर रही हो। शिवाय ने शिकवा किया।

तो इसी लिए आप इतना जल्दी में ऊपर आये थे? श्लोका को अब समझ आया।

समझदार हो। शिवाय मुस्कुराए।

अब आप जा सकते हैं। श्लोका ने नाराज़गी से कहा।

शिवाय उठ कर उस के पास जाकर खड़े हो गए। और दोनों हाथों को उसके दोनों कंधों पर रख देते हैं। और उसे देखने लगते हैं।

प्लीज़ माफ कर दो। मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था। शिवाय के लफ्ज़ो में एक दर्द था। जिसे श्लोका ने अपने दिल में महसूस किया।

मैं क्या करता? मैं वैसे ही टेंशन में था। और फिर सारा गुस्सा तुम पर निकल गया। कल से मैं परेशान हूं तुमसे बात करने के लिए। लेकिन तुम ने मुझे बहुत बड़ी सज़ा दे दी खुद से दूर करके। इस लिए अब मुझे माफ कर दो।

श्लोका जवाब देने के बजाय सिर्फ उसे देखती रही। कल से अगर तुम तकलीफ में थे तो मैं कौन सा सुकून में थी। मैंने भी तो तुम से दूर रह कर जाना कि तुम से दूर रहना कितना मुश्किल है। श्लोका सोचे जा रही थी। और नज़र शिवाय पर टिकी थी। शिवाय की नज़र भी उसी पर टिकी थी। और फिर शिवाय ने उसे गले लगा लिया। 

कितने ही पल बीत गये। दोनों ही खामोश थे। मगर धड़कन तेज़ हो रही थी। मुहब्बत लफ्ज़ो की मोहताज कहां होती है वह तो खामोशी में ही खुद को मनवा लेती है। बिना कुछ कहे बिना कुछ सुने नाराज़गी मिट रही थी। श्लोका जैसे ही पीछे हटती है शिवाय उसका हाथ पकड़ कर सोफे की तरफ बढ़ते हैं और उसको साथ लेकर बैठ जाते हैं।

कल से तुम ने मुझे बहुत परेशान किया है और उसकी सज़ा यह है कि तुम सिंगापुर मेरे साथ चलोगी।

श्लोका के पास होने से ही शिवाय के अंदर एक ताज़गी आ गई थी। वरना कल से वह परेशान थे।

मैं नहीं जाऊंगी। श्लोका ने नाराज़गी से कहा।

नहीं जाओगी तो उठा कर ले जाऊंगा। जो भी काम है कर लेना। 

मैं वहां जाकर क्या करूंगी। 

वही जो मैं कहूंगा।

मैं आप की कोई बात नहीं मानूंगी।

मैंने गलती कर दी थी। कोशिश करूंगा कि दोबारा ना हो।

लेकिन एक बात कहूं। अगर मैं कोई गलती करूं या कभी भी मुझ से नाराज़ होना तो प्लीज़ मुझ से दूर मत जाना। मुझ से लड़ना या खामोश रहना। जो भी हो मगर मुझ से दूर मत जाना। शिवाय ने मासूमियत से कहा।

मैं तो सोच रही थी कि अगर आप ने अब कुछ गलत किया तो मैं कहीं दूर चली जाऊंगी। श्लोका ने शरारत से कहा।

खबरदार जो ऐसा किया। मैं जी नहीं पाऊंगा। शिवाय तड़ट उठे। और श्लोका सिर्फ शिवाय को देख कर रह गई।

शिवाय उसके कंधे पर हाथ रख कर उसे खुद से करीब कर लेते हैं।

अब आप जाएं। मुझे सोना है। श्लोका की सांसें तेज़ हो गई।

ठीक है मैं जा रहा हूं तुम आराम करो। शिवाय उठ खड़े हुए। और एक नज़र श्लोका को देख कर बाहर चले गये।

शिवाय के जाते ही श्लोका ने सिर पीछे टिका लिया। उस के चेहरे पर खुशी साफ दिख रही थी। शिवाय दरवाज़ा खोल कर अंदर श्लोका की तरफ देखते हैं। और अपने रूम में चले जाते हैं। अब शिवाय सुकून में थे। क्योंकि उन्होंने श्लोका के चेहरे पर भी सुकून देख लिया था। चेंज करके वह सो गये। और सुबह देर तक सोते रहे। और फिर तैयार हो कर आफिस चले गये।

श्लोका को कहीं जाना नहीं था। वह भी आराम से सो कर उठी। और अपना काम करने लगी। उसका प्रोजेक्ट अभी बाकी था।

श्लोका लंच करने गई तो हैरान रह गई। क्योंकि सारे लोग वहां पर थे।

सुबह जल्दी चलना है। सुधीर जी ने कहा।

वाह मज़ा आयेगा। अराध्या ने खुशी से कहा। 

श्लोका को कुछ समझ नहीं आया कि कहां जाने की बात हो रही है। वह लोग पहले से बात कर रहे थे।

सुमन सुबह छः बजे तैयार रहना। फार्म हाउस चलना है मेरे दोस्तों की फैमिली जा रही है। अब मना मत करना। सुधीर जी ने अपनी बात कह कर कहा।

लेकिन.....

 कुछ नहीं तुम को चलना है।

ठीक है। श्लोका के पास कोई रास्ता नहीं बचा था।

शिवाय मुझे तुम्हारा जवाब जल्द चाहिए। मेरे पास टाइम नहीं है और मुझे तुम्हारा जवाब हां में चाहिए। तुम को हर हाल में अनन्या से शादी करनी है। तभी मैं यूनिवर्सल कलब की प्रेसीडेंट बन पाउंगी। और यह मेरा ड्रीम है कि मैं यूनिवर्सल कलब की प्रेसिडेंट बनूं। ममता जी ज़ोश में बोले जा रही थी। और शिवाय चुपचाप खाना खा रहे थे। और खाते ही उठ गये।

जब तुम को पता है कि वह यह शादी नहीं करेगा तो क्यों फोर्स कर रही हैं? सुधीर जी ने गुस्से से कहा।

कभी ना कभी तो शादी करेगा ना? तो अभी कर ले। मेरा भी काम हो जायेगा। ममता जी ने भी गुस्से से कहा।

तुम को लगता है वह मान जायेगा? सुधीर जी हैरान हुए।

हां, इस बार उसे मानना ही पड़ेगा। ममता जी भी अटल रही।

सुधीर जी भी उठ गये। श्लोका खामोशी से खाती रही। उसे सब समझ आ गया था। लेकिन शिवाय क्यों मना कर रहे हैं। यह उसे जानना था।

यह शिवाय आंटी की बात क्यों नहीं मान रहे? जब सब लोग चले गये तो श्लोका ने अराध्या से पूछ लिया।

शादी के लिए भाई की अपनी कुछ शर्त है जिस के बाद ही भाई शादी करेंगे। अराध्या ने सेब खाते हुए कहा।

और वह शर्त क्या है? श्लोका ने जानना चाहा।

पता नहीं, वह शर्त उन्होंने अपने तक रखी है। अराध्या उठ गई। और श्लोका को सोचों में उलझा गई। ऐसी क्या शर्त है जो शिवाय खुद तक ही रखें हैं।

रूम में जाकर वह पैकिंग करने लगती है। उसे शिवाय के साथ सिंगापुर जाने की खुशी थी। क्योंकि उसे वह शर्त जानना था जो शिवाय ने शादी के लिए रखी थी।

अगले दिन पिकनिक की भी वह ड्रेस निकाल लेती है। 

अगली सुबह वह सब एक साथ एक गाड़ी से निकल जाते हैं। शिवाय और अमोल अपनी-अपनी गाड़ी में थे। 

काफी बड़ा फार्म हाउस था। हर तरफ खूबसूरत पेड़ लगे हुए थे। लॉन में झूला भी लगा हुआ था। एक तरफ स्विमिंग पूल था। तो दूसरी तरफ बैठने के लिए चेयर लगी हुई थी।

लगातार गाड़ियां आ रही थी। एक से एक माडल लड़के-लड़कियां थी। श्लोका तो सब को देख कर हैरान हो रही थी। 

शिवाय भी आ चुके थे। नाश्ता सब लोग साथ लेकर आये थे। वहां पर स्टाफ सब अरेंज कर रहे थे। शिवाय दूर अकेले बैठे हुए थे। शिवाय की नज़र श्लोका पर थी। लॉग स्कर्ट टॉप पहने कंधे पर स्टोल रखे वह बहुत प्यारी लगी शिवाय को। शिवाय की लाई हुई घड़ी उस के हाथ की खूबसूरती को बढ़ा रही थी। बालों में पिन लगा कर पीछे से क्लौचर लगा रखा था। वहां पर खड़ी सारी लड़कियों में उसे श्लोका सबसे अच्छी लगी।

हर कोई बातें कर रहा था। श्लोका भी सब के साथ थी। सारे लड़के-लड़कियां साथ थी शिवाय भी वहीं था। अचानक बाहर से तेज़-तेज़ बोलने की आवाज़े आने लगी। वह लोग भी बाहर चले गये।

बाहर का मामला सुनकर सब परेशान हो गये। कैटरिंग वाले सारा सामान लेकर आ गये थे। लेकिन कुक नहीं आये थे। उन का आते टाइम एक्सीडेंट हो गया। अब वह नहीं आ सकते थे।

जारी है...

धड़कन भाग 39

धड़कन भाग 41









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