धड़कन | भाग 39 | Dhadkan Part 39 | Heart Touching Hindi Love Story
तुम को मुझ पर भरोसा नहीं है। क्यों तुम ऐसा करती हो। मैंने हमेशा देखा है तुम मुझ से बहुत कुछ छुपा जाती है। वैसे एक बात बता दूं मुझे तुम्हारी जासूसी करने का कोई शौक नहीं है। मुझे तुम्हारा पासपोर्ट बनवाना था इस लिए पूछा। कहते ही शिवाय गुस्से से बाहर निकल जाते हैं।
श्लोका शिवाय को जाता देखती है। वह खामोश वहीं खड़ी रह जाती है। और फिर तुरंत फैसला कर लेती है और अलमारी से अपना पासपोर्ट निकाल कर सीधे शिवाय के रुम में जाती है। शिवाय वहीं सोफे पर सिर पर हाथ रखे बैठे हुए थे। शिवाय को खुद पर गुस्सा आ रहा था कि उस ने कैसे श्लोका से इस तरह बात की।
श्लोका शिवाय के सामने टेबल पर अपना पासपोर्ट और पेपर रख कर वापस अपने रूम में आ जाती है और रुम लॉक कर लेती है। और बेड पर बैठ जाती है उसकी आंख में आंसू थे। वह समझ नहीं पा रही थी कि इन सब बातों का क्या हल है। वह शिवाय के सामने अपनी सच्चाई क्यों नहीं ला रही। मैं मानती हूं शिवाय की आप मुझ से प्यार करते हैं। लेकिन सिर्फ मानने से नहीं होता है। आप एक बार कह दें कि आप मुझ से प्यार करते हैं फिर मैं सब कुछ आप से बोल दूंगी। कुछ भी नहीं छुपाउंगी।
श्लोका की आंख से आंसू बह रहे थे। और वह खामोश, तन्हा सोचे जा रही थी।
शिवाय पेपर और पासपोर्ट देखते हैं। और तुरंत श्लोका के पास जाते हैं। लेकिन यह क्या रुम तो अंदर से लॉक था। शिवाय नॉक करते हैं लेकिन श्लोका नहीं खोलती है। इस वक्त वह शिवाय से बात करने के मूड में नहीं थी। शिवाय रुम में जाकर उसे फोन करते हैं। फोन श्लोका के सामने बज रहा था। और वह खामोशी से उसे देख रही थी।
शिवाय ने अपना सर पकड़ लिया। श्लोका हमेशा उसके साथ खड़ी रहती है और वह है कि उसे नाराज़ कर गया। मैंने आज बहुत कुछ बोल दिया। उसी वक्त शिवाय को आफिस से कॉल आ गई। और वह आफिस चले गये।
शाम को शिवाय को रवि के यहां जाना था। आफिस से आकर तैयार होते हुए शिवाय ने श्लोका को फोन किया। लेकिन ना ही उसने फोन उठाया और ना ही उसने अपना रुम खोला। शिवाय को भी फोन आ रहा था। इस लिए वह रवि के यहां चला गया।
श्लोका डिनर टाइम नीचे गई। खाना खाते वक्त उसे पता चला कि शिवाय रवि के यहां गये हैं। और देर रात वापस आयेंगे।
खाना खाने के बाद अराध्या उसे लेकर हॉल में में आ गई, और फिल्म लगा कर बैठ गई। श्लोका भी इस वक्त बहुत अपसेट थी इस लिए उसने भी अपना ध्यान फिल्म में लगा दिया।
उसी वक्त अराध्या ने कॉफी का बोल दिया। कमला कॉफी लेकर आ गई। अराध्या सोफे से उतर कर सोफे से टेक लगा कर कालीन पर बैठ गई। और श्लोका उसी के बगल में सोफे पर बैठी रही। दोनों कॉफ़ी पीते हुए फिल्म देखती रही।
हॉल में अंधेरा था। दोनों फिल्म देख रही थी। उसी वक्त शिवाय आ जाते हैं। वह ऊपर जाने का सोच रहे थे। वैसे भी श्लोका की नाराज़गी की वजह से वह परेशान थे। इस लिए जल्दी आ गये थे कि शायद श्लोका से बात हो जाए। क्योंकि शिवाय को आज उम्मीद नहीं लग रही थी कि उससे श्लोका बात करेगी। लेकिन श्लोका को वहां देख कर शिवाय के अंदर नई जान आ गई। शिवाय खामोशी से आकर श्लोका के बिल्कुल पास में बैठ गये।
श्लोका शिवाय को इस तरह बैठते देख कर उठने लगी। लेकिन शिवाय ने उसे उठने नहीं दिया। अराध्या शिवाय को आता देखती है। लेकिन उसका पूरा ध्यान फिल्म पर था।
श्लोका एक बार फिर उठने की कोशिश करती है। लेकिन शिवाय उस के कंधे पर हाथ रख लेते हैं। श्लोका शिवाय की ओर गुस्से से देखती है। दोनों खामोश रहते हैं। शायद वह दोनों ही अराध्या की वजह से खामोश थे। शिवाय का एक हाथ श्लोका के कंधे पर था और दूसरे हाथ से वह श्लोका का हाथ थाम लेते हैं।
श्लोका एक बार फिर खुद को शिवाय से आज़ाद करने की कोशिश करती है मगर वह नाकाम रहती है। शिवाय की नज़र श्लोका पर थी और श्लोका की नज़र सामने स्क्रीन पर। उसे लगा कि अभी शिवाय चले जायेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिवाय वैसे ही बैठे रहे।
शिवाय ने जब देखा कि श्लोका उसे इग्नोर कर रही है तो शिवाय उसके हाथ को अपने होंठ से टच करते हैं। शिवाय के ऐसा करते ही श्लोका हड़बड़ा कर शिवाय को देखती है। लेकिन शिवाय अंजान बने रह गये। उसी वक्त अराध्या ज़मीन पर से उठ कर सोफे पर बैठ जाती है। और शिवाय तुरंत सीधे बैठ जाते हैं। जैसे ही शिवाय सीधे होते हैं। श्लोका उठ खड़ी होती है।
अराध्या मुझे नींद आ रही है मैं सोने जा रही हूं।
पूरी फिल्म तो देख लो।
नहीं, फिर कभी। कहते ही श्लोका ऊपर चली गई। और शिवाय उसे जाता देखता रह गया। श्लोका के जाते ही तुरंत उसे उठना सही नहीं लगा। इस लिए वह बैठे रहे। मुझे पता है श्लोका अब आज तुम से बात नहीं हो पायेगी। तुम बहुत नाराज़ हो मुझसे। शिवाय बैठे सोचते रहे।
कल रवि की शादी है उसे जल्दी जाना भी था। कल बात करता हूं तुम से श्लोका। शिवाय सोचते हुए उठ गये। और रुम में जाकर चेंज कर के बाहर आकर श्लोका का रुम खोलते हैं लेकिन वह अंदर से लॉक था। तुम ने आज से पहले कभी रुम लॉक नहीं किया था। इस का मतलब है कि तुम बहुत ज़्यादा नाराज़ हो। शिवाय वापस अपने रुम में चले जाते हैं।
मुझे पता है कि तुम जाग रही हो। प्लीज़ मुझ से बात करो। शिवाय ने मैसेज सेंड किया। लेकिन श्लोका का नेट भी बंद था। शिवाय फोन रख कर सो जाते हैं। वैसे भी वह बहुत थक गये थे। और शायद श्लोका की नाराज़गी ने और थका दिया था।
नाश्ते के टाइम श्लोका नहीं थी। शिवाय नाश्ता करके आफिस चले गये। आफिस में बैठते ही शिवाय ने कई मैसेज श्लोका को कर डाले। और फिर अपना काम करने लगे। श्लोका को मैसेज पहुंच चुका था लेकिन उस ने रीड नहीं किया।
कालेज से श्लोका अनु के यहां चली गई। आफिस से आकर एक बार फिर शिवाय को निराशा हाथ लगी। श्लोका का रुम खुला था लेकिन वह नहीं थी। शिवाय थोड़ा आराम करके तैयार हो कर रवि की बारात में चले गये। श्लोका वहां आयेगी या नहीं उसे कुछ पता नहीं था। संगीत वाले फंक्शन को याद करके शिवाय मुस्कुरा दिये। उस दिन और आज के दिन में कितना फर्क था। उस दिन वह कितना खुश था। श्लोका उस के साथ थी।
श्लोका अनु के यहां से आकर तैयार हो गई थी। और सब के साथ वह होटल के लिए निकल गई। जहां पर फंक्शन था।
शिवाय ने दूर से ही श्लोका को आता देख लिया था। श्लोका को देख कर शिवाय के अंदर जैसे जान पड़ गई थी। वाइट कलर के लहंगे में लाइट मेकअप और ज्वेलरी के साथ वह हमेशा की तरह बहुत खूबसूरत लग रही थी।
शिवाय उन के पास आ गये। श्लोका पर एक नज़र डाली। नाराज़गी श्लोका के चेहरे पर दिख गई। सब लोग आगे बढ़ गये। शिवाय श्लोका के साथ हो गये।
माफी मिल सकती है। शिवाय ने बहुत धीरे से पूछा। श्लोका ने गुस्से से शिवाय को देखा। और फिर सामने देखने लगी।
शिवाय का माफी मांगना उसे भीतर तक हिला गया। उस ने गुस्से में उसे नज़रंदाज़ कर दिया, लेकिन दिल के किसी कोने से उसकी बात सुनने की इच्छा जाग रही थी। वह चाहती थी कि शिवाय उससे बात करें, लेकिन उस का गुस्सा उसके जज़्बातों पर भारी पढ़ रहा था।
शिवाय का दिल जैसे टूट सा गया। वह वापस अपने दोस्तों के पास चले गये। क्योंकि यहां पर वह बात नहीं करना चाहते थे। श्लोका भी सब से बात करने लगी।
अंकल नहीं दिख रहे। तुम ने देखा है?
खाना खाकर जब वह वापस आई तो अराध्या से पूछती है।
मौम डैड चले गये हम दोनों को भाई के साथ जाना है। अराध्या ने आइसक्रीम खाते हुए कहा।
मुझे बोल देते मैं उन के साथ चली जाती। श्लोका परेशान हो गई।
कोई बात नहीं इंज्वॉय करें। अराध्या ने लापरवाही से कहा और टहलते हुए दूसरी तरफ चली गई। उसी वक्त शिवाय आइसक्रीम कप लेकर उस के पास आकर बैठ गये। और कप श्लोका की तरफ बढ़ा दिया। जिसे श्लोका ने खामोशी से थाम लिया। वह कुछ ज़ाहिर नहीं करना चाहती थी। वह महफिल में थी। कोई कुछ भी समझ सकता था। उसी वक्त वेटर कॉफी लेकर आता है। शिवाय कॉफी लेकर पीने लगते हैं।
थोड़ी देर में मैं चल रहा हूं। मुझे पता है तुम बोर हो रही हो। शिवाय की नज़र उसके चेहरे पर टिक गई।
आप को जब चलना हों तब चलें। हमारी वजह से जल्दी जाने की ज़रूरत नहीं है। श्लोका नहीं चाहती थी कि उसकी वजह से शिवाय जल्दी घर जाएं। आखिर उनके दोस्त की शादी थी।
जैसे ही विदाई हुई उसी के साथ शिवाय भी रवि से मिल कर निकल गये। श्लोका गाड़ी में पीछे बैठ गई। शिवाय उसकी हरकत पर मुस्कुरा दिये। और ड्राइविंग सीट पर बैठ गये। अराध्या शिवाय के बगल में बैठ गई। बैठते ही अराध्या ने सॉंग लगा दिया। खामोश फिज़ा में मुहब्बत भरे गीत गुनगुना उठे।
कार का माहौल बहुत ही खूबसूरत हो गया था। दो प्यार करने वाले खामोश खोये हुए थे। शिवाय की नज़र बार-बार मिरर में श्लोका पर उठ रही थी।
जारी है...
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