धड़कन | भाग 52 | Dhadkan Part 52 | Heart Touching Hindi Love Story
धड़कन... अंतिम भाग
दोनों हंसते-हंसते आगे बढ़ गए। यह सफर उनका नहीं, बल्कि उनके रिश्ते का था—हर कदम के साथ मजबूत, हर पल के साथ और गहरा।
चलिए अब अन्दर चलते हैं।
दोनों अंदर आ गये। शिवाय भी श्लोका के रुम में आ गये। लेकिन श्लोका खामोश रही। क्योंकि वह खुद शिवाय से अभी बात करना चाहती थी।
मैं चेंज करके आता हूं। कहते ही शिवाय अपना नाइट सूट अलमारी से निकालने लगते हैं।
यह आप का ड्रेस मेरी अलमारी में? श्लोका को हैरानी होती है।
हां, क्योंकि मेरे उस रुम की बुकिंग आज तक ही थी। अब से दो दिन हम दोनों इसी रुम में रहेंगे। शिवाय ने शरारत से कहा।
शिवाय यह नहीं हो सकता। यह आप ने अच्छा नहीं किया। श्लोका नाराज़गी से कहती है। लेकिन शिवाय श्लोका की बात को अनसुना करते हुए बाथरूम में चले जाते हैं। और श्लोका अलमारी से अपने कपड़े निकालने लगती है।
जैसे ही शिवाय बाथरूम से आते हैं। श्लोका अंदर चली जाती है। और जब बाहर आती है तो देखती है शिवाय आराम से बेड पर लेटे हुए थे।
शिवाय की नज़र श्लोका पर गई। जो ट्रैक सूट पहने हुए थी। और बहुत ही खूबसूरत बहुत ही अलग लग रही थी।
क्या आप सच में इसी रूम में रहेंगे? श्लोका परेशानी से शिवाय को देखती है।
वह नहीं चाहती थी कि शिवाय इस रूम में रहें। उसे ऐसा सोचते ही घबराहट हो रही थी।
इधर आओ। शिवाय उसे हाथ से इशारा करते हैं। श्लोका चुपचाप जाकर बैठ जाती है। श्लोका की घबराहट देख कर शिवाय को अच्छा लग रहा था।
इधर आओ। शिवाय उसे अपनी तरफ करते हैं।
पहले तुम रीलैक्स हो। मेरे यहां होने से इतना घबरा क्यों रही हो? क्या तुम को मुझ पर भरोसा नहीं है? शिवाय मुस्कुरा कर उसे देखते हैं।
शिवाय की बात पर श्लोका झेंप जाती है। और नार्मल हो जाती है।
तुम इंग्लिश बहुत अच्छा बोलती हो। तुम जब रोज़ कहीं जाती थी तो मुझे लगता था कि कहीं कुछ सीखने जा रही हो। लेकिन मैं यह सोच ही नहीं सका कि तुम इतनी टैलेंटेड हो। शिवाय खुशी से कहते हैं। शिवाय श्लोका को नार्मल करना चाहते थे।
श्लोका मुस्कुरा देती है।
अच्छा यह बताओ तुम गाड़ी से क्यों नहीं जाती थी? अचानक से शिवाय को याद आ गया।
अगर गाड़ी से जाती तो आप ड्राइवर से सब पता ना कर लेते। श्लोका ने हंसते हुए कहा।
ओह, अब समझ आया। लेकिन एक बात तो है। तुम ने मेरा जितना इम्तिहान लिया। मैं सब में पास हो गया। शिवाय खुश होकर कहते हैं।
हूं, आप सब में पास हो गये। और मेरे दिल में छा गये। श्लोका खुशी से कहती है। और कोहनी के बल होकर शिवाय के बालों में यूं ही उंगली फेरने लगती है।
किसी के साथ होने से इतना सुकून भी मिलता है। यह बात तुम से मिल कर मैंने जाना। शिवाय मुहब्बत से कहते हैं।
आप सच कह रहे हैं। श्लोका भी खुशी से कहती है।
शिवाय धीरे से श्लोका को लिटा देते हैं। श्लोका शिवाय को देखती है।
तुम्हारे पास आना मेरे लिए कोई मुश्किल नहीं था। तुम्हारा रूम मेरे रूम के पास था। मैं जब चाहे आ सकता था। लेकिन मेरी मुहब्बत ऐसी नहीं है। आज भी मैं तुम्हारे पास ज़रूर हूं। लेकिन तुम बेफिक्र हो कर सो जाओ। मैं सिर्फ तुम्हारा साथ चाहता हूं। मैं तुम से बहुत सारी बातें करना चाहता हूं। मैं तुम को बताना चाहता हूं कि मैं तुम से कितना प्यार करता हूं। मैं तुम्हें बताना चाहता हूं कि तुम से मिलने के बाद मैं कैसे तुम को देखने के बहाने ढूंढता था। मैं चाहता था जब मेरी आंख खुली तो तुम मेरे सामने हो। और मेरे सोने तक तुम मेरी नज़रों में रही। मैं हर पल तुम को महसूस करता था। मैं तुम्हारे नाम के साथ सोता और तुम्हारे नाम के साथ जागता था।
शिवाय श्लोका के बहुत पास होकर उस के कानों में हल्की आवाज़ में अपनी मुहब्बत बिखेर रहा था। जिसे सुनकर श्लोका मगरूर हुई जा रही थी। शिवाय की बात खत्म नहीं हो रही थी। वह चाहता था यह रात यूं ही आगे बढ़ती रहे। यह पल कभी खत्म न हो। वह यूं ही श्लोका के साथ ख्वाबों की दुनिया में खोया रहे। दोनों ही बातें करते हुए दूर बहुत दूर निकल गये थे।
तभी अचानक होटल का सायरन बजने लगता है।
सायरन सुनते ही शिवाय हड़बड़ा कर उठ खड़े होते हैं उसी के साथ श्लोका भी उठ जाती है। शिवाय तुरंत इंटरकॉम पर पता करने की कोशिश करते हैं। लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं मिलता है।
शिवाय दोबारा ट्राई करते हैं। तो पता चलना है होटल में शार्ट सर्किट से आग लग गई है। सब लोग जल्द से जल्द होटल से बाहर निकले।
शिवाय जल्दी से वहां पर रखा अपना कोट उसी नाईट ड्रेस पर पहन लेते हैं। अपना और श्लोका का फोन उठाते हैं। अपने फोन से कुछ टाइप करते हैं। और फिर दोनों फोन अपनी पाकेट में रख लेते हैं। और श्लोका का हाथ पकड़ कर बाहर निकल जाते हैं।
लम्बी लॉबी पार करके जैसे ही शिवाय सीढ़ी के पास जाते हैं तो हैरान रह जाते हैं। क्योंकि सीढ़ी पर बहुत भीड़ थी। हर कोई भाग रहा था। हर किसी को जल्दी थी। लिफ्ट बन्द थी। हर किसी को सीढ़ी से जाना था।
श्लोका किसी भी सूरत में मेरा हाथ मत छोड़ना। भीड़ बहुत ज़्यादा है। शिवाय घबरा रहे थे। घबराहट उनके चेहरे पर साफ नज़र आ रही थी। इतनी भीड़ देख कर श्लोका भी घबरा रही थी।
तीस मंज़िल की बिल्डिंग थी। लिफ्ट बन्द थी। और हर किसी को सीढ़ियों से उतरना था।
श्लोका मेरे साथ रहना। और मेरा हाथ बिल्कुल मत छोड़ना। शिवाय बोले जा रहा था। उस को बहुत डर लग रहा था।
उन को ऐसा लग रहा था वह सीढ़ी खुद नहीं उतर रहे। बल्कि भीड़ के साथ अपने आप ही नीचे जा रहे हैं। तभी अचानक जल्दी उतरते के चक्कर में वहां पर भगदड़ हो गई।
श्लोका हाथ मत छोड़ना। शिवाय की तेज़ आवाज़ श्लोका के कानों तक गई। लेकिन फिर उसके बाद शिवाय की आवाज़ श्लोका तक नहीं पहुंची।
उन का हाथ छूट गया था। शिवाय चिल्ला रहा था। वह वापस ऊपर की तरफ घूमता है। लेकिन वह भीड़ के साथ नीचे की तरफ जाता रहा। शोर-शराबे के साथ श्लोका और शिवाय की गूंज भी वहां थी। मगर श्लोका और शिवाय तक शायद एक दूसरे की आवाज़ नहीं पहुंच पा रही थी।
हर तरफ शोर था। और फिर एक वक्त के बाद हर तरफ सन्नाटा छा गया। एक ऐसा सन्नाटा जैसे वहां पर कभी शोर था ही नहीं। The End...
डोर धड़कन से बंधी.... धड़कन का सीज़न 2 पढ़ें और महसूस करें।
क्या शिवाय और श्लोका की मुहब्बत जुदा हो गई। श्लोका के बाद क्या होगा शिवाय का।
क्या श्लोका और शिवाय दोबारा मिलेंगे?
डोर धड़कन से बंधी फुल सीरीज़...
क्या श्लोका के बाद कोई लड़की शिवाय के दिल को धड़का पायेगी। या फिर शिवाय अपनी धड़कन को श्लोका के नाम कर के तन्हा ज़िंदगी में आगे बढ़ जायेंगे।
श्लोका कहां है किस हाल में है? क्या शिवाय उसे मिल पायेंगे?
क्या श्लोका और शिवाय का प्यार यहीं तक था?
ऐसे ही बहुत सारे सवालों के जवाब जानने के लिए पढ़े। डोर धड़कन से बंधी...
Comments
Post a Comment