धड़कन | भाग 51| Dhadkan Part 51 | Heart Touching Hindi Love Story

श्लोका ने सिर हिला दिया। वह जानती थी कि शिवाय का प्यार उसकी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत सच था।

शिवाय और श्लोका की बातें चलते-चलते गहरी हो रही थीं। दोनों के बीच प्यार का एक ऐसा अटूट बंधन महसूस हो रहा था, जिसे शब्दों से नहीं, सिर्फ एहसासों से समझा जा सकता था।

जैसे ही वह हॉल में पहुंचे, वहां पर बहुत सारे लोग पहले से ही थे। 

शिवाय ने श्लोका के लिए कुर्सी खींची। मुझे खास एहसास दिलाना बंद करो, शिवाय, श्लोका ने हल्की शरारत भरे अंदाज़ में कहा।

तुम्हें खास महसूस कराना मेरा फर्ज़ है, और मैं इसे कभी नहीं छोड़ूंगा। शिवाय ने उसे देख कर मुस्कुराते हुए जवाब दिया।

श्लोका ने हंसते हुए सिर झुका लिया। उसकी आंखें चमक रही थीं, जैसे दुनिया की सारी खुशियां उसकी झोली में आ गई हों।

शिवाय ने श्लोका का हाथ पकड़ लिया। श्लोका, मुझे पता है कि हमने कभी वादे नहीं किए, लेकिन मैं आज तुम्हारे सामने एक वादा करना चाहता हूं।

श्लोका ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में एक अजीब-सी चमक थी। क्या कैसा वादा, शिवाय?

मैं तुम्हारे हर सुख-दुख में तुम्हारा साथ दूंगा। चाहे कुछ भी हो जाए, मैं तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ूंगा। तुम मेरी ज़िंदगी हो, श्लोका। और मैं तुम्हारी मुस्कान की हिफाज़त के लिए हर हद तक जाऊंगा।

श्लोका की आंखों में आंसू आ गए। उसने अपने हाथ से उन्हें पोंछते हुए कहा, शिवाय, मुझे किसी और चीज़ की ज़रूरत नहीं। तुम्हारा साथ ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।

शिवाय ने हल्के से श्लोका का हाथ चूमा। बस, यही सुनना था। और दोनों मुस्करा दिये।

दोनों उठ कर खाने के काउंटर पर चले गये।

खाना खत्म करके दोनों बाहर निकले। ठंडी हवा में एक अलग ही सुकून था। श्लोका ने आसमान की तरफ देखते हुए कहा, शिवाय, मुझे लगता है कि यह हमारे प्यार का आशीर्वाद है। हमारे बड़े हमेशा कहते थे कि जब इरादे साफ होते हैं, तो किस्मत खुद आपका साथ देती है।

शिवाय ने उसकी तरफ देखते हुए कहा, और जब तुम मेरे साथ हो, तो मुझे लगता है कि मेरी किस्मत ने मुझे दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ दे दी है।

श्लोका ने उसकी तरफ प्यार से देखा और धीरे-से उसके कंधे पर अपना सिर रख दिया। दोनों चुपचाप चलते रहे, जैसे शब्दों की अब कोई ज़रूरत नहीं बची थी।

शिवाय और श्लोका हाथों में हाथ डाले चलते रहे। उनके कदमों के साथ उनकी धड़कनें भी एक ताल में चल रही थीं।

शिवाय, श्लोका ने उसके कंधे से सिर उठाते हुए कहा, तुम्हें कभी डर नहीं लगता? अगर हमारी ज़िंदगी में कुछ ऐसा हो जाए, जो हमारे इस सुकून को तोड़ दे?

शिवाय ने रुककर उसे देखा। उसकी आंखों में भरोसे की रोशनी चमक रही थी। श्लोका, डरता तो हर इंसान है। लेकिन मैंने हमेशा एक बात सीखी है—डर से भागने के बजाय उसका सामना करना चाहिए। और जब तुम मेरे साथ हो, तो मुझे किसी डर की कोई परवाह नहीं।

श्लोका ने उसकी बातों को महसूस किया। वह जानती थी कि शिवाय के साथ उसे कभी अकेला नहीं महसूस होगा।

शिवाय ने हंसते हुए कहा, वैसे, तुम ये सवाल क्यों पूछ रही हो? कहीं तुम मुझे छोड़ने का प्लान तो नहीं बना रही?

श्लोका ने उसके बाजू पर हल्का सा मुक्का मारा। "तुम्हें लगता है, मैं ऐसा कर सकती हूं?

शिवाय ने मुस्कुराते हुए कहा, नहीं, क्योंकि मैं जानता हूं, तुम मुझसे ज्यादा मुझसे प्यार करती हो।

श्लोका ने उसे चिढ़ाते हुए कहा, ओह, इतना कॉन्फिडेंस? ठीक है, फिर एक बात बताएं।

बोलो, शिवाय ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा।

अगर मैं आप को छोड़ कर चली गई तो आप क्या करेंगे? श्लोका ने भी मज़ाक किया।

शिवाय ने थोड़ा सोचने का नाटक किया और फिर गंभीरता से बोला, मैं तुम को वापस ले आऊंगा। फिर चाहे तुम जहां भी हो। शिवाय ने यकीन से कहा।

श्लोका उसकी इस बात पर जोर से हंस पड़ी। "तुम्हारे जैसा इंसान मैंने आज तक नहीं देखा।"

और तुम्हारे जैसा प्यार भी किसी ने नहीं देखा, शिवाय ने शरारती मुस्कान के साथ जवाब दिया।

दोनों हंसते-हंसते आगे बढ़ गए। यह सफर उनका नहीं, बल्कि उनके रिश्ते का था—हर कदम के साथ मजबूत, हर पल के साथ और गहरा।

जारी है...





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