धड़कन | भाग 37 | Dhadkan Part 37 | Heart Touching Hindi Love Story
जी सर हो गया आप लोग जा सकते हैं। स्नेहा ने मुस्कुरा कर कहा। शिवाय तुरंत बाहर निकल गये। श्लोका भी निकल गई। कब वापस आओगी। जैसे ही अनु के घर के पास गाड़ी रुकती है शिवाय पूछते हैं। कुछ कह नहीं सकती। जब आना होगा मैं आ जाऊंगी। या हो सकता है रूक भी जाऊं। श्लोका ने सोचते हुए कहा। और सामान निकालने लगी। वैसे भी बहुत दिनों से वह उसके पास रूकी नहीं थी। जब आना होगा फोन कर देना और रूकने की ज़रूरत नहीं है भले ही कल फिर आ जाओ। शिवाय ने हुक्म दिया। क्यों? श्लोका को उसका अंदाज़ पसंद नहीं आया। पतियों की तरह बात कर रहे हैं। जैसे वह उसकी बीवी हो। कैसे कह रहा हूं यह मत सोचो। क्या कह रहा हूं वह सुनो। फोन का इन्तेज़ार करूंगा। कहते ही गाड़ी स्टार्ट कर दी। इसने कैसे जाना कि मैं क्या सोच रही हूं। श्लोका को हैरत हुई। और सोचते हुए अंदर चली गई। क्या हुआ किस सोच में गुम हो? अनु दरवाज़ा खोलते ही कहती है। अंदर आने दो फिर बताती हूं। सामान वहीं पर रख कर वह आराम से बैठ जाती है। यार यह बंदा तो गज़ब का है। यह मेरे मन की बात भी सुन लेता है। अब इसके सामने सोच कर सोचना पड़ेगा। श्लोका अभी तक शॉक्ड थी। क्या पढ़ लिया तुम्हारे शि...