रूबरू | Part 22 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships
कल का दिन तुम्हारी ज़िंदगी का सबसे बुरा दिन होगा मिस मायरा...
अपनी उलझनों को किनारे कर उसका मन एक बार फिर मायरा को सबक सिखाने की ठान चुका था।
...
अगली सुबह ब्लैक हाउस की खिड़कियों से आती धूप मायरा के कमरे में फैल चुकी थी, लेकिन उसकी आंखों में अब भी पिछली शाम का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
वह काफी देर से बैठी उसी एक बात के बारे में सोच रही थी, क्या उसे यहां रूकना चाहिए?
उसका मन बार-बार कह रहा था कि नहीं।
लेकिन ताबिश की कही बात भी उसके कानों में गूंज रही थी।
"अगर तुमने ब्लैक हाउस से बाहर कदम निकाला तो हीरों के चोरी के इल्ज़ाम में सीधे जेल जाओगी।"
मायरा ने आंख बन्द कर लीं।
मैंने कुछ गलत नहीं किया...
फिर मुझे डरने की ज़रूरत क्यों है?
उसने खुद को समझाया और बिस्तर से उठ खड़ी हुई।
तैयार हो कर वह सीधे दादी के कमरे में गई।
दादी भी आज वक्त से पहले तैयार थीं।
दादी मैं ताबिश सर के साथ उनके आफिस जा रही हूं। वह सिर झुकाकर धीरे से बोली।
ठीक है जाओ, दादी ने उसके चेहरे को गौर से देखा। लेकिन वहां पर कोई भाव नहीं थे जिससे वह समझ नहीं सकें कि मायरा ताबिश के फैसले को किस तरह देख रही है।
वहीं दूसरी तरफ मायरा सोच रही थी कि क्या दादी को सब पता है या ताबिश ने दादी को इस बात से दूर रखा है।
एक बार उसके मन में ख्याल आया कि दादी से ताबिश के रवैए के बारे में बात करे। लेकिन दूसरे ही पल उसके दिल ने उसको चुप रहने का संकेत दिया।
चलें दादी नाश्ता कर लें... अपनी हर सोचों से आज़ाद होकर वह उठ खड़ी हुई।
आगे जो होगा देखा जायेगा।
डाइनिंग हॉल में दादी को छोड़कर वह किचन में चली गई।
नाश्ता करके वह सीधे हॉल में चली गई।
दादी और ताबिश वहीं पर बैठे चाय पी रहे थे।
उसकी नज़र दादी से होकर ताबिश पर पड़ी। वह भी उसे ही देख रह था। अपनी नज़र झुकाकर वह चुपचाप एक तरफ खड़ी हो गई।
चाय पीते ही ताबिश उठ खड़ा हुआ। एक नज़र उस पर डाल कर वह बाहर की ओर बढ़ा।
मायरा भी खामोशी से उसके पीछे चल पड़ी।
अपने पीछे मायरा के कदमों की आहट वह साफ महसूस कर रहा था। उसके होंठों पर एक पल के लिए मद्धिम मुस्कान आ गई।
बाहर निकल कर लम्बी लॉबी चलकर ताबिश एकदम से रूक गया।
उसके रूकते ही मायरा भी रूक गई।
ताबिश उसकी तरफ घूमता है। दोनों की नज़रें मिलती हैं। लेकिन दूसरे ही पल दोनों संभल गए।
ताबिश अपनी जेब से रूमाल निकाल कर उसे एक खास अंदाज़ में फोल्ड करके मायरा की तरफ एक कदम बढ़ाता है। लेकिन मायरा भी तुरंत एक कदम पीछे हट जाती है।
यह पट्टी तुम्हारी आंखों पर बांधना है। ताबिश एक बार फिर उसकी ओर कदम बढ़ाता है।
क्यों? ताबिश की बातें मायरा की समझ से बाहर हो रही थीं।
पहले इसे बांध लो फिर बताता हूं। कहते ही ताबिश उसकी आंखों पर पट्टी बांध कर उसका हाथ पकड़ कर आगे बढ़ता है।
एक तरफ जहां मायरा उसके रवैए से हैरान थी वहीं दूसरी तरफ ताबिश उसका हाथ थामे एक अलग ही एहसास से गुज़र रहा था।
उसका हाथ पकड़े वह चलता जा रहा था। आंखों पर पट्टी बांधे मायरा किसी रोबोट की तरह उसके साथ चली जा रही थी।
चलते-चलते ताबिश एक जगह रूककर एक दरवाज़े की हैंडिल घुमाकर दरवाज़ा खोलकर अंदर जाता है। मायरा का हाथ अभी भी उसके हाथ में था।
उसकी आंखों से पट्टी खोल कर वह आगे बढ़ गया।
मायरा उस जगह को देखती है। वह एक बड़ा हाल था जहां पर बहुत सारी मशीनें रखी हुई थीं।
उसे लगा था कि वह बाहर कहीं और ब्लैक स्टोन के आफिस जा रही है। लेकिन आफिस तो घर ही में था।
ताबिश हॉल में एक और दरवाज़ा खोलकर अंदर की तरफ बढ़ता है। और उसे भी आने का इशारा करता है। वह चुपचाप कदम बढ़ाती है।
अंदर जाकर उसकी आंखें चमक जाती हैं। तेज़ रौशनी में हर तरफ हीरों की चमक थी। इतने सारे हीरे उसने कभी नहीं देखे थी।
काम शुरू कर दो... वह उसकी तरफ बहुत सारी फाइल बढ़ाता है। जिसे वह थाम तो लेती है लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसे करना क्या है।
वह फोन करके किसी को बुलाता है।
एक मिनट के अंदर एक शख्स एक तरफ से दरवाज़ा खोलकर आता है। इनको काम समझा दें। कहते ही ताबिश उसे दरवाज़ा से अंदर चला गया जिससे अभी वह शख्स आया था।
मायरा हैरान खड़ी बस देख सुन रही थी। उसे लग रहा था कि वह किसी और ही दुनिया में आ गई है।
वह उसे काम बताते गए। वह खामोशी से सुनती रही।
कुछ समझ न आए तो 101 डायल करके मुझसे बात कर लेना। मैं अंदर ही हूं। उन्होंने पास रखे फोन की तरफ इशारा किया।
ठीक है। मायरा सिर हिलाती है।
वह वापस अंदर चले जाते हैं।
मायरा फाइल टेबल पर रखकर वहीं रखी कुर्सी पर बैठ जाती है।
ताबिश ने क्यों उसे यह काम सौंपा?
ब्लैक स्टोन का इतना बड़ा कारोबार है। हज़ारों उनके वर्कर होंगे। उसके बावजूद ताबिश यह काम उससे करा रहे हैं।
दानिश सर हैं कहां?
उसे अब यह पता करना था। क्या दानिश सर ही ब्लैक स्टोन देखते थे।
ताबिश सर को हीरों की जानकारी नहीं है। वरना हीरों की इतनी बड़ी डील वह यूं अनाड़ी की तरह न करते।
यही सब सोचते हुए वह एक फाइल खोलकर उसे पढ़ने लगती है। अंदर बैठे ताबिश की नज़र कैमरे में उसी पर जमी हुई थी।
मायरा अकेली बैठी बहुत ध्यान से अपना काम कर रही थी। वैसे भी यह उसका पसंदीदा काम था। इस लिए उसे कोई परेशानी नहीं हुई काम करते हुए।
आज का काम हो गया। बाकी काम कल।
अंदर से ताबिश आकर उससे कहता है।
ठीक है यह पूरा करके चलती हूं। वह फाइल की तरफ इशारा करके दोबारा काम करने लगती है।
ताबिश खामोश खड़ा उसे काम करते देखता है।
ताबिश के इस तरह खड़े होने से उसे डिस्टर्ब हो रहा था। वह जल्दी-जल्दी काम समेट कर उठ खड़ी हुई।
यह फाइल?
वह फाइलों की ओर इशारा करती है कि उसे कहां रखना है।
यहीं रहने दें।
ताबिश उससे बोल कर अपनी जेब से रूमाल निकालकर उसकी ओर देखता है।
मायरा चुपचाप पीछे घूम कर खड़ी हो जाती है।
उसकी आंखों पर पट्टी बांध कर ताबिश उसका हाथ पकड़ कर बाहर की ओर बढ़ता है।
मायरा उसके साथ चलती रही।
मेरा हाथ छोड़ दें... चलते-चलते मायरा रूककर ताबिश से कहती है।
क्यों? ताबिश भी रूक गया।
क्योंकि मेरी मंज़िल आ गई है। मायरा दूसरे हाथ से आंख की पट्टी उतारती है।
ताबिश उसका हाथ छोड़कर हैरानी से उसे देखता है।
क्योंकि सुबह जहां पर उसने मायरा की आंख पर पट्टी बांधी थी। वह उसी जगह पर खड़े थे।
लड़कियां मेरा हाथ पकड़ने के लिए बेताब रहती हैं। और तुम...
मैं पागल नहीं हूं। ताबिश की बात अधूरी रह गई। मायरा आगे बढ़ गई।
सुनो...
वह ठहर गई।
तुमको कैसे पता की हम यहां पर पहुंच गए हैं? ताबिश को उत्सुकता हुई जानने की।
यह तो बहुत आसान था।
जारी है...
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